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Wednesday, November 21, 2018

"ईमान बदलते देखे हैं" (चर्चा अंक-3162)

मित्रों! 
बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है।   
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।  
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')  
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नादानी 


Akanksha पर 
Asha Saxena  
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रंग 


noopuram 
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रूमानी 

यूँ तो हैं
साधारण नयन नक्श
पर दिल है बहुत रूमानी
यह  बात कम ही जानते हैं
जो जान जाते हैं
हो जाते हैं कायल उसके... 
Akanksha पर 
Asha Saxena  
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चोर ही चौकीदार है 

राफेल घोटाला, नोटबन्दी घोटाला, जी0एस0टी0 घोटाला और अब सी0बी0आई0 जैसी संस्था को नष्ट कर मोदी देश को दिवालिया बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ‘चोर ही चैकीदार’ है, ‘नारे के साथ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी नेे जुलूस निकाला जुलूस में शामिल लोगों को सम्बोधित करते हुए पार्टी के राज्य परिषद सदस्य रणधीर सिंह ‘सुमन’ ने यह उद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि रिजर्व बैंक आफ इण्डिया को डरा धमकाकर 3.6 लाख करोड़ रूपये लेकर अपनी विदेेश यात्राओं के मद में खर्च कराना चाह रहे हैं... 
Randhir Singh Suman  
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Tuesday, November 20, 2018

."एक फुट के मजनूमियाँ” (चर्चा अंक-3161)

मित्रों! 
मंगलवार की चर्चा में आपका स्वागत है।   
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।  
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')  --
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मन न भए दस बीस 


रश्मि प्रभा... 
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सुरभि 


purushottam kumar sinha  
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परची 

सलिल और अनीता की शादी को करीब आठ साल हो चुके थे किन्तु आंगन आज तक सूना था, कोई ऐसा डॉक्टर नही बचा था जिन्हे दिखाया न गया हो, कोई ऐसा मन्दिर नही था जहाँ मन्नत न मांगी गयी हो। जब सभी आशाओं ने दम तोड दिया तब दम्पति ने एक बच्चा गोद देने का निश्चय किया। आज इसी उद्देश्य से दोनो "अपना घर" अनाथाश्रम में आये थे... 
डॉ. अपर्णा त्रिपाठी  
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टहकार! 

भींगी रात यादों की। 
सूखा रही अब धूप, विरह की ।  
निगोड़ी रात अलमस्त! 
सुखी! न सूखी।  
उल्टे, भींगती रही धूप। 
खुद ! रात भर। 
ढूंढता रहा आशियाना सूरज।
 धुंध में चांदनी की । 
और अकड़ गया है चांद, एहसासों का। 
आसमान मे, होकर और टहकार । 
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किताबों की दुनिया -  

204 


नीरज पर 
नीरज गोस्वामी 
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पागल दिल रुक जाओ, धक धक बंद करो ... 

धूप न आए जेब में तब तक बंद करो  
शाम को रोको दिन का फाटक बंद करो  
बरसेंगे काले बादल जो ठहर गए   
हवा से कह दो अपने नाटक बंद करो... 
Digamber Naswa  

Monday, November 19, 2018

"महकता चमन है" (चर्चा अंक-3160)

सुधि पाठकों!
 सोमवार की चर्चा में 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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गम और हम 

Akanksha पर 
Asha Saxena  
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काठ की हांडी बार बार नहीं चढ़ती 

कल शाम दफ्तर से लौट कर हेयर कटिंग करवाने चला गया. पहले से फोन पर एप से रिजर्वेशन करा लिया था तो तुरंत ही नम्बर आ गया. दिन भर दफ्तर की थकान, फिर लौटते वक्त ट्रेन में भी कुछ ज्यादा भीड़ और उस पर से बरफ भी गिर रही थी तो मोटा भारी जैकेट. जैकेट उतार कर जरा आराम मिला नाई की कुर्सी पर बैठते ही और नींद के झौके ने आ दबोचा. इस बीच कब वो बाल काटने आई, उसने रिकार्ड से पिछली बार के कटिंग की पर्ची निकाल कर कब पढ़ा कि.... 
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वो एक रात के अतिथि --  

संस्मरण - 

 जनवरी 1996 की बात है |कडकडाती ठंड में उस दिन बहुत जल्दी धुंध बरसने लगी थी और चारों तरफ वातावरण धुंधला जाने से थोड़ी सी दूर के बाद कुछ भी साफ दिखाई नहीं देता था | इसी बीच हमारे दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी तो देखा एकअत्यंत बूढ़े बाबा खड़े थे जिनकी पीठ पर एक गट्ठर लदा था | बाबा ठंड से ठिठुरते हुए मानों पीले पड़ चुके थे और उनके मुंह से कोई बात नहीं निकल पा रही थी... 
मीमांसा -- पर Renu  
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हम नहीं थे इनके 

हम नहीं थे इनके नहीं थे उनके,
सबके ही हम खास रहे।
नहीं  किसी से दूर रहे,
सबके ही हम पास  रहे।
जो मिला उसे अपना समझा,
जो नहीं मिला उसे सपना समझा।
रूठे अपने टूटे सपने,
नहीं रोये नहीं उदास रहे... 
Jayanti Prasad Sharma 
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आये अतिथि आंगन मेरे--  

कविता - 

आये अतिथि आंगन मेरे ,  
महक उठे घर - उपवन मेरे... 
क्षितिज पर Renu  
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ईश्वर को पत्र 

वर्तमान परिस्थिति पर शिकायत किस् से करें ? सो ईश्वर को पत्र लिख दिया | ईश्वर को पत्र हे ईश्वर ! संसार से जो निराश होते हैं वह तेरे द्वार आते हैं | हम भी निराश हैं, जनता से, सरकार से | तू निर्विकार है, निराकार है, अदृश्य अमूर्त है| फिर भी भ्रमित लोग अपनी इच्छा अनुसार कल्पना से तेरी मूर्ति बनाकर, आस्था की दुहाई देकर आम जनता, सरकार, यहां तक की अदालत को भी मजबूर कर देते हैं..  
कालीपद "प्रसाद" 

"ईमान बदलते देखे हैं" (चर्चा अंक-3162)

मित्रों!  बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है।    देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।   (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')    -- गीत...