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Friday, November 23, 2018

"कार्तिकपूर्णिमा-गुरू नानकदेव जयन्ती" (चर्चा अंक-3164)

मित्रों! 
शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है।   
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।  
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दोहे कार्तिकपूर्णिमा  

"मेला आज उदास"  

नदी शारदा बह रही, मेरे घर के पास।
होता बहते नीर से, तन-मन में उल्लास।।
सब्जी बिकती धान से, दाम नहीं है पास।
बिन पैसे के हो रहा, मेला आज उदास।।
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एक डाल के दो पँछी.... 


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ग़ज़ल 

अॉफिस समय से आ गया, आखिर खुशी का मामला।  
दिनभर लतीफे, मौज-मस्ती, चाय-पानी भी चला... 

रविकर 

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तुम्हे छोड़ कर जाऊं कैसे ? 

 बंधन यदि यम का यह होता  
तो भी उसे तोड़ मैं देता,  
अनुबंधन वचनों के होते  
पल भर नही निर्वहन करता ।  
किन्तु नेह के कच्चे धागे  
उसे तोड़ कर जाऊं कैसे,.. 

PAWAN VIJAY  

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शोर चुनाव का 

शोर चुनाव का -
चारों ओर शोर शरावा
परदे फट जाते कानों के
किसी की है क्या समस्या
कोई नहीं जान पाता
प्रचार प्रसार में व्यस्त.. 

Akanksha पर 
Asha Saxena  

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दुष्यन्त कुमार के  

‘मुनासिब लोग’ 

हम पति-पत्नी के दो बैंकों में खाते हैं। पहला बैंक ऑफ बड़ौदा की स्टेशन रोड़ शाखा में और दूसरा भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की कलेक्टोरेट एरिया शाखा में। बड़ौदा बैंक में हमारा खाता बरसों से चल रहा है। किन्तु, श्रीमतीजी सरकारी नौकरी में थी। उनकी पेंशन एसबीआई की इसी शाखा से मिलनी थी। इसलिए यहीं खाता खुलवाने बाध्यता थी। एसबीआई में हमेशा इतनी भीड़ रहती है कि घुसने की ही हिम्मत नहीं होती। तीन दिन चक्कर काटे लेकिन खाता नहीं खुला। अचानक ही मालूम हुआ कि शाखा प्रबन्धक, एलआईसी की हमारी शाखा मे पदस्थ विकास अधिकारी श्री संजय गुणावत के बड़े भाई हैं। उन्होंने मदद की। खाता फौरन ही खुल गया... 

एकोऽहम् पर विष्णु बैरागी 

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दिल की ज़मीं होती कभी बंजर नहीं 

मुहब्बत की राह चलें वो, जिन्हें कोई डर नहीं इसमें दुश्वारियाँ हैं बहुत, आसां ये सफ़र नहीं। 
ख़ुदा की हर नियामत मौजूद है यहाँ, मगर जन्नत लगे दुनिया, दिखते ऐसे मंज़र नहीं।
ख़ुद पर करो यक़ीं, यहाँ रहबर हैं वही लोग जो राह में हैं, मंज़िल की जिन्हें ख़बर नहीं। 
प्यार के बादल से वफ़ा का पानी तो बरसाओ देखना, दिल की ज़मीं होती कभी बंजर नहीं। 
उन्हें क्यों होगा दर्द किसी के उजड़ने का दहशतगर्दों का कोई मुल्क नहीं, घर नहीं। 
दौलत, शौहरत, ख़ुदग़र्ज़ी के पर्दे हटाओ दिल को दिल ही पाओगे, ‘विर्क’ पत्थर नहीं।

Sahitya Surbhi पर 
Dilbag Virk 
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कुछ_ख्याल_कुछ_ख्वाब 

 मेरे इर्द गिर्द टहलता है  
कोई नगमे सा  
मैं गुनगुनाऊं तो कहता है  
रुक जरा  
इस कमसिनी पर  
कुर्बान हो तो जाऊँ  
जो वो एक बार मिले तो सही  
खुदा की नेमत सा... 
vandana gupta  
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हिंदुत्व के भाजपाई जाल में  

कांग्रेस अनायास फंस गई है 

यह जाल भाजपा का है। वरना भाजपा के इस जाल में फंसी कांग्रेस की आत्मा आज भी मुस्लिम वोट बैंक के लिए तड़पती है। बहुत दिन नहीं हुए जब तत्कालीन प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि देश के सभी संसाधनों पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। दरअसल अभी तक कांग्रेस मुस्लिम तुष्टीकरण की खतरनाक तलवार पर चल रही थी लेकिन मुस्लिम तुष्टीकरण जब उस के लिए भस्मासुर... 
Dayanand Pandey 

6 comments:

  1. शुभ प्रभात..
    आभार...
    सादर..

    ReplyDelete
  2. शुभ प्रभात आदरणीय
    बेहतरीन चर्चा मंच की प्रस्तुति👌
    मेरी रचना को स्थान दिया,सह्रदय आभार आदरणीय
    सादर

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  3. सुन्दर शुक्रवारीय चर्चा।

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  4. गुरुनानक जयंती पर सभी को शुभ कामनाएं |मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद |

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  5. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

    ReplyDelete
  6. सुन्दर चर्चा

    ReplyDelete

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"ज्ञान न कोई दान" (चर्चा अंक-3190)

मित्रों!  बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है।   देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।   (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') -- दोहे   &q...