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Tuesday, December 04, 2018

"गिरोहबाज गिरोहबाजी" (चर्चा अंक-3175)

मित्रों! 
मंगलवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।  
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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गिरोहबाज गिरोहबाजी  

सब बहुत अच्छे हैं  

हाँ कहीं भी नहीं होना  

कुछ अलग बात है 

सुशील कुमार जोशी 
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पीले फूल 

noopuram 
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गृह लक्ष्मी.... 

पूजा प्रियंवदा 

yashoda Agrawal 
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परिंदे अब भी पर तौले हुए हैं , 

Virendra Kumar Sharma  
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किसानों के दर्द की सियासत 

pramod joshi 
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कीमतें 

Akanksha पर 
Asha Saxena  
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धरा की उलझन 

Anita Saini  
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कॅरिअर और परिवार के सन्तुलन का  

विकट संघर्ष 

जीवन अपनी गति से चलता रहता है लेकिन कुछ क्षण ठहरे हुए रह जाते हैं। एक नवम्बर की उस शाम के कुछ मिनिट अब तक ठहरे हुए हैं। आध्या का कुम्हलाया चेहरा आँखों के सामने बना हुआ है और रुचि की भीगी आवाज सुनाई दे रही है। रुचि और अर्पित के बारे में मैं यहाँ लिख चुका हूँ। वह, मेरे दाँतों के ईलाज का अन्तिम सोपान था... 
एकोऽहम् पर विष्णु बैरागी 
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गंगा की सफाई 

थेम्स नदी का जल  
गंगा जल से शुद्ध और निर्मल | 
क्या है कारण ?  
ब्रितानी शुद्ध विचार दृढ़ संकल्प और लगन |  
करीब पचास, पचपन साल पहले  
यह नदी कचरों से दबकर मर गई थी |  
किंतु आज एक सजीव विश्व में सबसे स्वच्छ नदी है... 
कालीपद "प्रसाद" 
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ज़िस्म तक ही अगर रहे महदूद 

नीरज पर 
नीरज गोस्वामी  
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आत्मा के स्वरूप 

साध्वी अरूणादेवी आश्रम  
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क्यों है ये संसार अपने दरम्याँ ... 

क्यों जुड़े थे तार अपने दरम्याँ
था नहीं जब प्यार अपने दरम्याँ

रात बोझिलसलवटेंखामोश दिन
बोझ सा इतवार अपने दरम्याँ... 
Digamber Naswa  

एचआयवी एड्स इस विषय को लेकर  

जागरूकता हेतु  

एक साईकिल यात्रा के अनुभव: २.  

केडगांव से इन्दापूर (८५ किमी)

Niranjan Welankar 
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राजनैतिक पार्टियों को दोष मत दो  

खुद को बदली | 

8 comments:

  1. शुभ प्रभात आदरणीय
    बहुत ही सुन्दर चर्चा प्रस्तुति 👌बेहतरीन रचनाएँ ,
    सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनायें,
    मेरी रचना को स्थान देने के लिए सह्रदय आभार आदरणीय
    सादर

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  2. सुन्दर मंगलवारीय चर्चा। आभार आदरणीय 'उलूक' गिरोहबाज को जगह देने के लिये।

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  3. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  4. बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति।

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  5. उम्दा चर्चा। मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए धन्यवाद,आदरणीय शास्त्री जी।

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  6. उम्दा चर्चा |मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद |
    |

    ReplyDelete

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"ज्ञान न कोई दान" (चर्चा अंक-3190)

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