Tuesday, February 12, 2019

"फीका पड़ा बसन्त" (चर्चा अंक-3245)

मित्रों
मंगलवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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सरस्वती वंदना 

Anchal Pandey 

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मेरी आवाज़ को, दर्द के साज़ को... 

मैं तो कहूँगा कि अपने दर्द को लेखनी बना लो, यह तुम्हारा सच्चा साथी है । जब भी मन में भावनाओं का उफान हो, हृदय की वेदना किसी को पुकार रही हो, उसे शब्द देना सीखो । तुम जितना ही उसमें डूबोगे, उतना ही उसका स्नेह तुम्हारे प्रति बढ़ता जाएगा... 
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बसंत पंचमीं 

Akanksha पर Asha Saxena  
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दिल है पुष्प गुलाब..... 

डॉ. यासमीन ख़ान 

मेरी धरोहर पर yashoda Agrawal  
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बालकहानी 

बालकुंज पर सुधाकल्प  
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'विचित्र संयोग..'

Priyanka Jain 
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ऐसा वर दो माँ 

noopuram  
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धुन 

वो मौसम सा नहीं ,ऐक सवेरा है  
शाम ढलने तलक ही हो , वो मेरा है  
धुन मुझे मेरा ही ले जाए दूर कहीं ,  
मन को रोके हुए वो ऐक सपेरा है... 
नीलांश  
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वसंत 

noopuram  
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ममता के पराभव का दौर 

pramod joshi 
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सच पे लटका हुआ खंज़र है कई सदियों से 

कैसे ज़िन्दा ये सुख़नवर है कई सदियों से ।।  
लूट जाते हैं यहाँ देश को कुर्सी वाले ।  
देश का ये ही मुक़द्दर है कई सदियों से... \
Naveen Mani Tripathi 
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9 comments:

  1. बदल रहा है आदमी, ज्यों-ज्यों अपने रंग।
    मौसम भी है बदलता, त्यों-त्यों अपने ढंग।।
    जी बिल्कुल प्रकृति का भी रंग बदल रहा है, हम इंसानों की अति महत्वाकांक्षा के कारण।
    मंच पर स्थान देने के लिये आभार शास्त्री सर जी।
    सभी को सुबह का प्रणाम।

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  2. सुप्रभात |मेरी रचना शामिल करने के लिए आभार सहित धन्यवाद सर |

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  3. सुन्दर चर्चा प्रस्तुति |
    सादर

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  4. बहुत सुंदर चर्चा। मेरे ब्लॉग पर आप सभी का स्वागत है।
    iwillrocknow.com

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  5. बहुत अच्छी चर्चा प्रस्तुति

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  6. बहुत बढ़िया रचनाओं का संकलन। बधाई और आभार।

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  7. धन्यवाद शास्त्रीजी.
    सभी रचनाकारों को बधाई !

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  8. जब तक मन रंगरेज़ है,
    क्यूँ फीका पड़े बसंत ?

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