Saturday, March 16, 2019

"रिश्वत के दूत" (चर्चा अंक-3276)

मित्रों!
शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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अकविता   

"विकास के पूत"  

पढ़े-लिखों के आका
रिश्वत के दूत
विकास के पूत... 
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लोकतंत्र नहीं, लहर तंत्र है.. 

 चुनाव में मात्र 25 दिन बचे हैं। जो नेता जी आएंगे वे कौन-कौन से गांव जा पाएंगे? सोच कर देखिए! गांव अगर जाएंगे भी तो क्या वे किसानों का दर्द सुन सकेंगे... 
चौथाखंभा पर Arun Sathi  
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साबुत लाल मिर्च की सूखी चटनी  

जो दो महिने तक भी  

ख़राब नहीं होती! 

5 comments:

  1. उम्दा चर्चा। मेरी रचना को चर्चा मंच में शामिल करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, आदरणीय शास्त्री जी।

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  2. सुप्रभात
    मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद सर |

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  3. नमस्कार, उम्दा प्रस्तुति

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति
    सादर

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