Thursday, April 25, 2019

"एक दिमाग करोड़ों लगाम" (चर्चा अंक-3316)

मित्रों!
गुरुवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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क्या मानव की साख 

आँखों में अंगार है, सीने में भी दर्द  
कुंठित मन के रोग हैं, आतंकी नामर्द... 
shashi purwa 
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मैं चंदा तू मेरी चकोरी  

( राधा तिवारी "राधेगोपाल " ) 

राधे की बिंदी और पायल।
 कान्हा को करती है घायल।।
 क्यों इनको तुम झनकाती हो।
 मंद मंद क्यों मुस्कुराती हो।।
 तेरी मेरी प्रीत पुरानी ।
कभी ना कहना इसे कहानी...
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लोहे का घर-51 

बेचैन आत्मा पर देवेन्द्र पाण्डेय  

5 comments:

  1. बहुत सुंदर चर्चा। मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद।

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  2. बेहतरीन चर्चा प्रस्तुति 👌
    सादर

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  3. सुंदर प्रस्तुति

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  4. सुंदर प्रस्तुति शानदार रचनाएं

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  5. सुन्दर चर्चा। आभार आदरणीय 'उलूक' की बकबक को जगह देने के लिये।

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