Wednesday, June 26, 2019

"करो पश्चिमी पथ का त्याग" (चर्चा अंक- 3378)

मित्रों!
बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
--
--
--
मायके आयी रमा, माँ को हैरानी से देख रही थी। माँ बड़े ध्यान से 
आज के अखबार के मुख पृष्ठ के पास दिन का खाना सजा रही थी। दाल, रोटी, सब्जी और रायता। फिर झट से फोटो खींच व्हाट्सप्प 

करने लगीं.... 
धरोहर पर 
yashoda Agrawal 
--

परहित सरिस धर्म नहीं भाई 

*परोपकार* का अर्थ है, दूसरों के जीवन को आसान बनाना. जरूरत पड़ने पर किसी का हाथ बंटा देना. यदि खुद में सामर्थ्य है तो किसी की मदद करने का अवसर आने पर पीछे न हटना. यह सब करते हुए यदि भीतर यह भाव जगाया कि हम.... 
--
--
--
--

काला रंग 

तवे का रंग 
काला है 
रोटी सेंकता है 

रंग तो काला है 
दिए में जलने वाली बाती का
रौशनी तो होती है 
चमकदार... 
सरोकार पर अरुण चन्द्र रॉय  
--
--

आईये मेहरबान ... 

हुत दिनों से ब्लॉग पर कुछ नहीं लिखा....  
ऐसा नहीं है कि लिखने को कुछ नहीं  
बल्कि लिखने को बहुत कुछ ऐसा है कि  
हाथ कलम तो उठाते हैं  
पर मन का नरम कोना  
जाने दो यार कहके रोक देता है .... 
कुछ कड़वी बातें बाहर न आये  
और लेखनी अपने सरल रास्ते से न भटके  
इसलिए ठहराव जरूरी लगता है... 
Archana Chaoji  
--
--

साक्षी 

तारों भरे आसमान में
एक तारे पर नजर टिकाये गुजरी रात
रिश्तों का
अलौकिक ताना-बाना
बुनती है... 

अनुशील पर अनुपमा पाठक 
--
--
--
--

13 comments:

  1. विविध लिंक्स से सजी सुंदर चर्चा!
    सादर आभार !!

    ReplyDelete
  2. सुप्रभात सर 🙏)
    बहुत ही सुन्दर चर्चा मंच की प्रस्तुति 👌
    शानदार रचनाएँ ,सभी रचनाकारों को हार्दिक शुभकामनायें
    मेरी रचना को स्थान देने के लिए सहृदय आभार |
    प्रणाम
    सादर

    ReplyDelete
  3. सुप्रभात ! विविधरंगी रचनाओं के लिंक्स देता चर्चा मंच..आभार मुझे भी इसमें शामिल करने के लिए.

    ReplyDelete
  4. चर्चा में स्थान देने के लिए सादर धन्यवाद सर।

    ReplyDelete
  5. वाह!!शानदार प्रस्तुति.

    ReplyDelete
  6. बेहतरीन प्रस्तुति ,सादर

    ReplyDelete
  7. अति उत्तम प्रस्तुति

    ReplyDelete
  8. This comment has been removed by the author.

    ReplyDelete
  9. बहुत सुन्दर चर्चा आज की ! मेरी रचना को शामिल करने के लिए आपका हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार शास्त्री जी ! सादर वन्दे !

    ReplyDelete
  10. बहुत बढ़िया चर्चा | मेरी रचना को स्थान देने का शुक्रिया

    ReplyDelete
  11. "धरोहर" ब्लॉग में यशोदा जी द्वारा प्रस्तुत की गयी लघुकथा "बड़प्पन " हमने लिखी है। अतएव कृपया उनके ब्लॉग की प्रविष्टि यहाँ से हटा कर हमारे ब्लॉग की प्रविष्टि डालें।
    धन्यवाद

    ReplyDelete

"चर्चामंच - हिंदी चिट्ठों का सूत्रधार" पर

केवल संयत और शालीन टिप्पणी ही प्रकाशित की जा सकेंगी! यदि आपकी टिप्पणी प्रकाशित न हो तो निराश न हों। कुछ टिप्पणियाँ स्पैम भी हो जाती है, जिन्हें यथा सम्भव प्रकाशित कर दिया जाता है।