Saturday, August 17, 2019

" समाई हुई हैं इसी जिन्दगी में " (चर्चा अंक- 3430)

स्नेहिल अभिवादन   
शनिवार की चर्चा में आप का हार्दिक स्वागत है|  
देखिये मेरी पसन्द की कुछ रचनाओं के लिंक |  
 - अनीता सैनी

यार ! ...  

गैस सिलेंडर यार !!

यार! गैस सिलेंडर यार !!
तू इंसान तो नहीं पर
देता है सबक़ इंसानों से
बेहतर और बेशुमार ....

सबक़ पहली -
आग भी जलाते हो तुम
घर-घर के चूल्हे की तो ...
कई पेटों की आग बुझाने के लिए
काश! लगा पाता मैं भी
तुम्हारी तरह आग हर मन में
चहुँओर फैली भ्रष्टाचार को
जड़ से मिटाने के लिए...
 

6 comments:

  1. बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति।
    धन्यवाद अनीता सैनी जी।

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति। आभार अनीता जी।

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  3. सुन्दर चर्चा. आभार

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  4. कई रंगों का मेल और साथ में मेरी रचना। आभार आपका अनीता जी!

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  5. वाह!सुन्दर प्रस्तुति. सृजन के विभिन्न आयाम सहेजे मोहक प्रस्तुति.
    मेरी रचना को चर्चा मंच जैसे प्रतिष्ठित पटल पर प्रदर्शित करने के लिये बहुत-बहुत शुक्रिया अनीता जी.

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