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Friday, September 20, 2019

"हिन्दी को बिसराया है" (चर्चा अंक- 3464)

मित्रों!
शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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भावुक था मैं? 

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा  

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इरादे 

अपने इरादों को
तुमने ही दो भागों में बांटा था
अपने हिस्से के इरादे को
तुम अपने दुपट्टे में बांधकर
ले गयीं थी
यह कहकर
मैं अपने इरादे पर कायम रहूंगी
इसे पूरा करुँगी --- 
Jyoti khare  

क्या जाने कितने दिन बाकी -  

अरुण कुमार निगम 

क्या जाने कितने दिन बाकी
छक कर आज पिला दे साकी।।

आगे पीछे चले गए सब, मधुशाला में आने वाले
धीरे-धीरे मौन हो गए, झूम-झूम के गाने वाले।
अपनी बारी की चाहत में, बैठा हूँ मैं भी एकाकी।।
क्या जाने कितने दिन बाकी
छक कर आज पिला दे साकी...
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श्रीकांत वर्मा की जन्मतिथि पर …. 

कवि, कथाकार, समालोचक एवं संसद सदस्य श्रीकांत वर्मा का जन्म छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में 18 सितम्बर 1931 को हुआ था। प्रारम्भिक शिक्षा के लिए उनका दाखिला बिलासपुर के एक अंग्रेज़ी स्कूल में हुआ था लेकिन वहां का वातावरण उन्हें रास नहीं आया। उन्होंने उस स्कूल को छोड़ दिया और नगर पालिका के स्कूल से शिक्षा ग्रहण की। मैट्रिक पास कर लेने के बाद आगे की शिक्षा के लिए वे इलाहाबाद गए। वहां उन्होंने क्रिश्चियन कॉलेज में दाखिला लिया... 
मनोजपरमनोज कुमार  
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नानी का प्यारा घर 

किच्छा की गलियों से
नानी के आँगन से
दरियों की पँगत से
बाल्टी भर आमों से
कजन्स की सँगत से
मासियों मामों से
रिश्ता जो अपना है... 
गीत-ग़ज़ल पर शारदा अरोरा 
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कविता -  

रोटी 

काथम पर प्रेम गुप्ता `मानी'  
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अभावों का भाव 

रिश्तों की डोर वो क्या जाने  
जिसने बिखरे रिश्तों को नही देखा  
यारों का शोर वो क्या जाने  
जिसने सूनी शामों को नही देखा... 
Anchal Pandey 
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दूसरा प्यार  

जब आप किसी का दूसरा प्यार होते हैं तब आपसे उम्मीदें कम होती हैं और आपका काम ज्यादा।
आपके हिस्से नही आता वो बेइंतहा प्यार जिसकी आप अपने प्रेमी/प्रेमिका से उम्मीद करते हैं। आपकी किसी कोशिश को वो सराहना नही मिल पाती जिसकी वो हकदार थी। आपके हिस्से आती है बस एक मुस्कान जो शायद आपका दिल रखने के लिए होती है, सिर्फ आपका दिल रखने के लिए। क्योंकि जिसका दिल जीतने की आप कोशिश करते हैं उसका दिल कहीं और होता है... 
Amit Mishra 'मौन'  
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8 comments:

  1. उम्दा सजा चर्चामंच
    मेरी रचना शामिल करने के लिए धन्यवाद सर |

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  2. सुप्रभात ! हिंदी की पीर बयान करती सुंदर रचना के साथ पठनीय सूत्रों का संयोजन, आभार !

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  3. जाल बिछाया अपना छीनी है, हिन्दी की बिन्दी भी
    अपने घर में हुई परायी, अपनी भाषा हिन्दी भी
    खोटे सिक्के से लोगों के मन को बहलाया है

    हिन्दी की बिन्दी छीनकर , हम उर्दू का नुक्ता बड़े प्रेम से लगा रहे हैं..।

    सादर प्रणाम।

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  4. बहुत खास प्रस्तुति।सभी लिंक शानदार।

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  5. वाह बहुत सुंदर प्रस्तुति
    सभी रचनाएँ उम्दा हैं सभी को हार्दिक बधाई
    सादर नमन

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  6. मेरी रचना को स्थान देने हेतु हार्दिक आभार

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  7. बहुत सुंदर संयोजन सभी रचनाकारों को बधाई
    मुझे सम्मिलित करने का आभार

    सादर

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  8. बहुत सुन्दर चर्चा प्रस्तुति
    मुझे स्थान देने के लिए बहुत बहुत आभार आदरणीय
    सादर

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