आज की मंगलवारीय चर्चा में आप सब का स्वागत है राजेश कुमारी की आप सब को नमस्ते आप सब का दिन मंगल मय हो अब चलते हैं आपके प्यारे ब्लोग्स
प्यासी नज़र 3---देखिये फिर कितना इन्तजार लिखा है उसकी किस्मत में
Rohitas
ghorela at Rohitas Ghorela
बहुत कुछ सोचने पर विवश करता आलेख क्या हर कोई सिर्फ अपनी ही जगह बनाने की सोचता है दूसरों की भावनाओं की कोई कद्र नहीं ??
आजकल सुन के अनसुनी कर देता है वो
अब उससे क्या मैं कहूँ
उम्र सारी,वो कहता रहा ,मैं सुनता रहा अब
इससे ज्यादा क्या सहूँ
वजूद........ - तेरे होने के तेरे होने के एहसास को इस तरह जिया है ---- बताइये इस प्यार को क्या नाम दें !!!
ShSsssss ... महफ़िल बहस में है - ---- क्या आप इस बहस में हिस्सा लेंगें ??
अच्छी बात है बहस से ही कुछ निष्कर्ष निकलते हैं
साये में धूप - *साये में धूप * धूप से साया इस तरह मिला की अपना वजूद ही भुला बैठा ,
पर उसके वजूद को धूप कहाँ भुला पाई आज तक ,
खता मेरी ही थी, जो मैं तुमसे दिल लगा बैठा।
पी.सी.गोदियाल
"परचेत" at अंधड़ ! ----------- मैं कविताओं में ढूंढता रहा वो किसी और की ग़ज़ल बन गई !!!
झोलाछाप
डिग्री छाप इतना पैसा मांगते हैं तो गरीब कहाँ जाए उसे तो झोलाछाप पर ही यकीन हो जाता है
कभी तुमसे -- सदा जी
एक रचना जो संजय भास्कर सदा जी के साथ साझा कर रहे हैं , चलिए हम भी पढ़ते हैं |
जैसलमेर- बाबा रामदेव/रामदेवरा Baba Ramadevra (Pokhran)
देखिये इतने ग्रेट होते हैं जाट आप सब को फ्री में कितना दूर दूर घुमाते हैं चलिए जैसलमेर घूम के आते हैं संदीप भाई के साथ
बोलते स्वर !
निवेदिता श्रीवास्तव at झरोख़ा - ---- शब्दों का मुखरित हो जाना ही बेहतर है वर्ना दिल में ये ज्वालामुखी बनाते हैं
श्वेता के साथ -सच का 'हाथ'
डॉ शिखा कौशिक ''नूतन '' at All India Bloggers'
Associationऑल इंडिया ब्लॉगर्स एसोसियेशन-----
एक ऐसा ब्लॉग जहां हर बार आप एक नई सच्चाई से रूबरू होंगे
कविता
सुरेश यादव at सुरेश यादव सृजन --- सुरेश जी अपने काव्य पिटारे में आज आपके लिए तीन बेहतरीन कवितायें लाये हैं , फिर देर किस बात की |
भीमताल के कुछ और नजारे और नौकुचियाताल का रास्ता
MANU PRAKASH TYAGI at yatra (यात्रा ) मुसाफिर हूं ..
मनु प्रकाश जी भी तैयार हैं आप सब को घुमाने के लिए देखिये वो कहाँ ले जा रहे हैं ।
ब्लॉग परिचय '' कंप्यूटर टिप्स एंड ट्रिक्स ''
ध्यान से देखिये आमिर जी हम सब के लिए क्या लाये हैं
धूप का उबटन और भागते दिन...
Pratibha
Katiyar at प्रतिभा की दुनिया ...---- धूप का उबटन जो निःस्वार्थ ,मुफ्त प्रकृति हमे बांटती है देखिये प्रतिभा जी के सफ़र में क्या गुल खिलाती है
आस ना दो....
Mridula Harshvardhan at अभिव्यक्ति
आस ना दो!!! पर कहते हैं जब तक सांस है तब तक आस है देखते हैं मृदुला जी क्या कहती हैं
हर बात निभा लेते हैं
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अन्त में-
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री मयंक बता रहे हैं-
*अभी दो दिन बहुत व्यस्तता है!*
*5 दिसम्बर को हमारी *
*40वीं वैवाहिक वर्षगाँठ है!*
*इसलिए आज पढिए!*
उच्चारण में छपी एक रचना-
"हास्य कवि गेंदालाल शर्मा 'निर्जन' का व्यंग्य"
आज की चर्चा यहीं समाप्त करती हूँ अगले मंगल वार फिर मिलूंगी कुछ नए सूत्रों के साथ तब तक के लिए शुभ विदा बाय बाय
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