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Sunday, December 30, 2012

“बिटिया देश को जगाकर सो गई” (चर्चा मंच-1109)

मित्रों!
      रविवार के लिए कुछ लिंक दे रहा हूँ। इसके बाद तो नये साल 2013 में ही भेंट होगी।
नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!
नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!
"गधे चबाते हैं काजू, महँगाई खाते बेचारे"
आप सभी पाठकों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ!
बिटिया देश को जगाकर सो गई ...
बिटिया  देश को जगाकर सो गई
माँ की लाडली हमेशा के लिए खो गई…
एक लडकी ही तो मरी है...
एक लडकी ही तो मरी है... मैंने खोल दी हैं घर की तमाम खिडकियां, बिछा दी है गुलाबी फूलों वाली नई चादर, टी.वी. पर set कर दिया है reminder नये साल पर आने वाले नय program के लिये. ओह्! नये साल का resolution तो रह गया. क्या कहा? देशहित.. नारीहित में संकल्प लूं? कसमें खाऊं उन्हें तोड देने के लिये? क्यूं? ऐसा क्या हो गया है रातोंरात? "एक और" लडकी ही तो मरी है.. और मैं तो उसे जानती भी नहीं. हां मैं भी गई थी एक candle march में मगर वो तो बस सबको ये बताने के लिये कि मैं भी खासी संवेदनशील हूं.. और फेसबुक पर फोटो भी तो लगाने थे, image का ख़याल रख्ना पडता है यार...
काश ऐसा संभव हो!
बलात्कार की पीडिता की मौत की खबर सुनी . मेरे 60 वर्षीय जीवन में इतना संताप,इतना दर्द मुझे किसी घटना से शायद ही कभी हुआ हो जितना कि पिछले कुछ दिनों में हुआ । मै कानून को अपने हाथों में लेने के हक में कभी नहीं रही .लेकिन आज लग रहा है कि इन मुजरिमों को सजाए मौत तो मिलनी ही चाहिए…
दामिनी के लिए दो शब्द
जिन्दगी को जीना अब उसे बोझ लगने लगा होगा \ मरहम ही अब उसे चोट लगने लगा होगा । सोचा होगा उसने ,यहाँ बहुत राजनीती है मेरे जिन्दा रहने में जिन्दगी से ही उसका भरोषा उठने लगा होगा छोड़ दिया होगा उसने जिन्दगी की राह में चलना उसने उसको खुद का जिन्दा रहने से ज्यादा खामोश रहना ही सही लगा होगा ,,,
बलात्कारियों का प्रतिरोध करने वाली युवती की मौत पर जसम की शोक संवेदना
अपनी माटी डॉट कॉम(www.ApniMaati.com)आजादी, बराबरी और इंसाफ तथा उसके लिए प्रतिरोध महान जीवन मूल्य है : जन संस्कृति मंच नई दिल्ली: 29 दिसंबर 2012 हम उस बहादुर लड़की के प्रतिरोध का गहरा सम्मान करते हैं, जिसने विगत 16 सितंबर की रात अपनी आजादी और आत्मसम्मान के लिए अपनी जान को दांव पर लगा दिया और बलात्कारियों द्वारा नृशंस तरीके से शरीर के अंदरूनी अंगों के क्षत-विक्षत कर देने के बावजूद न केवल जीवन के लिए लंबा संघर्ष किया, बल्कि न्याय की अदम्य इच्छा के साथ शहीद हुई। आजादी, बराबरी और इंसाफ तथा उसके लिए प्रतिरोध महान जीवन मूल्य है,...
जिंदगी मौत के कदमो पे सफ़र करती है
"ओ बी ओ तरही मुशायरा" अंक ३० में शामिल मेरी पहली ग़ज़ल. दिल्लगी यार की बेकार हुनर करती है, मार के चोट वो *गम़ख्व़ार* फ़िकर करती है, इन्तहां याद की जब पार करे हद यारों, रात अंगारों के बिस्तर पे बसर करती है, आरजू है की तुझे भूल भुला मैं जाऊं, चाह हर बार तेरी पास मगर करती है, देखने की तुझे न चाह न कोई हसरत, माफ़ करना जो ये गुस्ताख नज़र करती है…
मास्टर्स टेक टिप्स

ऑनलाइन You Tube विडियो डाऊनलोड करें बगैर सोफ्टवेयर के - मास्टर्स टैक ब्लॉग की 100 पोस्ट्स पूरी करने के बाद आज एक नयी पोस्ट यू ट्यूब के नाम। ज्यादातर लोग यू ट्यूब विडियो ऑनलाइन देखने के बजाय डाऊनलोड करके देखना…

माधव

सर्दी की छुट्टियाँ (Winter vacation - माधव का स्कुल बंद गया है . क्रिसमस की छुट्टियाँ २३ दिसंबर से १ जनवरी तक है . छुट्टियों का उपयोग करते हुए हम आरा चले गए….
साहित्य प्रसून
सामयिकी (४)हृदय में जली हुई ज्वाला !(एक विरोधाभास) काव्य ज्वालामुखी में एक नयी सामयिक रचना - विचित्र बात है कि,एक ओर प्रगति का 'अमन के डंके' पर 'स्वाँग भरा नाटक' !दूसरी ओर 'भ्रष्टाचार का दानवीय विकास ! 'अमन' के 'ठंडे आवरण' में 'दुराचरणों की जलती...
तराने सुहाने

JOGI JAB SE TU AAYA MERE DWAARE -LATA (BANDINI 1963)-SHAILENDRA-S D BURMAN - SINGER : LATA JI LYRICS : SHAILENDRA MUSIC : S D BURMAN MOVIE : BANDINI…
ज़ख्म…जो फूलों ने दिये
ख़ामोशी की गूँज ऐसी होनी चाहिए
क्या कहूं सत्ता बीमार है या मानसिकता इंसानियत मर गयी या शर्मसार है मौत तो आनी है इक दिन मगर मौत से पहले हुयी मौत से कौन कौन शर्मसार है…


हो जाये तो क्या बात है ... -आइये आज बिना किसी भूमिका के मैं आपको उनलोगों से मिलाऊं जो शायद आपको देखन में छोटन लगे पर घाव करें गंभीर .....

न दैन्यं न पलायनम्

यार्ड में लेखन - वरिष्ठ अधिकारी का निरीक्षण है, यार्ड में नयी पिट लाइनों का निर्माण कार्य चल रहा है, पिट लाइनों का उपयोग यात्री ट्रेनों के नियमित रख रखाव के लिये किया जाता...
KAVITA RAWAT

गाँव-शहर हर जगह ठण्डो रे ठण्डो! - सुदूर पहाड़ों पर बर्फवारी के चलते वहाँ से आने वाली सर्द हवाओं से जब देश के अधिकांश हिस्से ठिठुर रहे हों, ऐसे में वे अपनी हिमपूरित पहाड़ी हवाएं अपने शहर मे...
takniki gyan

भारत बनाम पाकिस्तान क्रिकेट मैच देखे लाइव... -दोस्तों वैसे भी क्रिकेट का सीजन चल रहा है, और भारत बनाम पाकिस्तान के क्रिकेट मैच चल रहे है....
दास्ताँने - दिल (ये दुनिया है दिलवालों की)
कुण्डलिया प्रथम प्रयास
आदरणीय श्री अरुण कुमार निगम सर के द्वारा संशोधित कुण्डलिया प्रथम प्रयास सोवत जागत हर पिता, करता रहता जाप, रखना बिटिया को सुखी, हे नारायण आप…
mridula's blog
कहते हैं माँ-बाप आजकल......  बड़े होशियार हैं मेरे बच्चे, सारे 'पोयम्स' याद हैं इन्हें 'बाई -हार्ट', 'चैम्पियन'हैं 'स्विमिंग' के, हर बार 'फर्स्ट' आते हैं…
ठाले बैठे
फ़लक पे उड़ने वालो ये नसीहत भूल मत जाना - नवीन - अमावस रात को अम्बर में ज़ीनत कोई करता नईं मेरे हालात पे नज़रेइनायत कोई करता नईं….

परिवर्तन की नायिकाए... -सुधीर मौर्या 'सुधीर' 18 दिसम्बर 2011 को मिस्र की तहरीर चोक पर पर्दर्शन के दौरान सैनिको के हाथो मारपीट और खीचतान में सड़क पर एक लड़्की...
Hindi :: MyWebdunia
राष्ट्रपति बनने के बाद भी प्रणव मुखर्जी आर्थिक सुधारों के जरिये बाजार के प्रति अपनी प्रतिबद्ध! -राष्ट्रपति बनने के बाद भी प्रणव मुखर्जी आर्थिक सुधारों के जरिये बाजार के प्रति अपनी प्रतिबद्ध! एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वासबलात्कार कार्निवाल जारी…
उसे भुलाने के लिए ...
मैंने,
उसे भुलाने के लिए
क्या कुछ नहीं किया
गीत लिखने का लिया
सहारा
बार-बार शब्द बदले
कई बार भाव बदले
लेकिन लिखते-लिखते
हर बार गीत उसीका
निकला ....
‘मुझको मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन'- ग़ालिब को खिराजे अक़ीदत

'बुनियाद' ब्लॉग पर ग़ालिब को खिराजे अक़ीदत पेश करते हुए - ‘मुझको मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन  दिल के ख़ुश रखने को..
आलेख.....
- हर मंदिर की नींव में रखी हुई हर ईंट उतनी ही महत्त्वपूर्ण होती हैं जितना कि मंदिर के ऊपर दिखाई देने वाला गुम्बद...और वो आकाश की तरफ मुंह उठाये लोगों के ...
' नारी ' होने की सजा
वेदना की सीमाओं से परे
एक दबी चीख सुनी क्या
' निर्भया ' खामोश है अब
क्या कहे ? कह चुकी सब
यातनाओं से परे जो भी सहा
मौत से आँख मिलाये पड़ी…
सन्नाटा सा है दिल में
सुनो ...
आज कुछ लफ्ज़ दे दो मुझे
ना जाने मेरी कविता के
सब मायने
कहाँ खो  गये हैं
मेरे अपने लिखे लफ्ज़ अब
ना जाने क्यों ,
बेमानी  से हो गये हैं
दिखते  हैं अब सिर्फ़ इसमें
विस्फोटक ,बलात्कार,  भ्रष्टाचार…
# चिता की आग #
तुझको अग्नि के हवाले कर के ....
मैं  जड़- सी हो गई हूँ .....
कभी अपनी छाती का लहू पिलाया था  मैने ..
तेरी वो नटखट आँखें ..
वो चेहरे का भोलापन .
वो प्यारी -सी मुस्कान ? 




लो खत्म कहानी हो गई ?
दिमागी सूजन ने ले ली निर्भया की जान .इस दिमागी सूजन की वजह मंगलवार रात को पड़े दिल के दो दौरे
बने जिनमें  से एक को डायरक्त करेंट शोक देकर संभाल लिया गया .ह्रदय गति चालू कर दी गई लेकिन
दूसरा घातक साबित हुआ जिस दौरान तीन मिनिट तक उसकी नवज गायब रही .यही वह विधायक क्षण था
जब उसके दिमाग में दाब बढ़ गया .दिमाग में इसी दौरान तरल ज़रुरत से ज्यादा बढ़ गया .इसे ही सेरिब्रल
इडिमा (brain edema )कहा गया है .
इसी दौरान अंत :रक्त स्राव हुआ दिमाग में ,संक्रमण शुरू हुआ .
ब्लड वेसिल्स (रक्त वाहिकाएं सिकुड़ गईं )ऑक्सीजन आपूरण (आपूर्ति ) ठप्प हो गया .दिमागी कोशाएं
एक एक करके मरने लगीं .इन कोशाओं की मृत्यु ही अंतिम मृत्यु होती हैं .जब किसी को ब्रेन डेड घोषित
किया जाता है .हालाकि क्लीनिकली उसे ज़िंदा रखा जा सकता है तकनीकी तौर  पर .लेकिन अंतिम मृत्यु
ब्रेन डेथ होती है जिसके बाद क्लीनिकली भी किसी मरीज़ को लाइव नहीं रखा जा सकता है .
सलाम निर्भया !
TV स्टेशन-महेंद्र श्रीवास्तव
गैंगरेप : जिम्मेदार बने मीडिया !

दिल्ली गैंगरेप का मुद्दा काफी संवेदनशील है, मैं बेवजह किसी की भावनाओं को आहत नहीं करना चाहता , लेकिन मुझे लगता है कि मीडिया से जुड़े होने के कारण मुझे कम से कम इस पूरे मामले में मीडिया की भूमिका पर जरूर अपनी बात रखनी चाहिए। अगर ये बात मैं ईमानदारी से कहूं तो मुझे लगता है कि मीडिया को इस पूरे मामले में जितना संवेदनशील और सतर्क होकर काम करना चाहिए था, कहीं ना कहीं उसमें कमी रही। कमी थोड़ी बहुत नहीं, बल्कि मैं कहूंगा कि बहुत ज्यादा कमी रही। मुझे ये कहने में कत्तई संकोच नहीं है कि मीडिया को जहां इस संवेदनशील मुद्दे पर आगे बढ़कर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभानी चाहिए थी, वो जिम्मेदारी निभाने में मीडिया चूक गई, बल्कि मीडिया महज जंतर मंतर और इंडिया गेट पर जमीं भीड़ का हिस्सा भर बनकर रह गई। सच्चाई तो ये है कि मीडिया भीड़ के उबाल में अपनी टीआरपी बटोरने में लगी रही। हां वैसे हिंदी समाचार पत्र दैनिक भाष्कर ने जरूर कुछ अलग करने की कोशिश की, मगर उसमें भटकाव दिखा, वो क्या करना चाहते हैं, उनका फोकस क्लीयर नहीं था…
लो क सं घ र्ष !-रणधीर सिंह सुमन
अमीर बनने के लिए बेचैन रहना

    अमीर बनने का सपना मुझे हमेशा  ही से किसी बुरी इच्छा जैसा लगता रहा है। ऐसा कई बार हुआ जब मेरे कुछ शुभ चिन्तकों ने मुझे पैसा कमाने तथा अमीर बनने की तरकीबें बताईं, विशेष रूप से उन दिनों जब मेरी आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। पिता की बेरोजगारी फिर उनकी असमय मृत्यु ने माँ सहित मेरे सात भाई बहनों की हालत खराब कर दी थी, उन दिनों भी अमीर बनने की तरकीब बताने वालों को मैं अच्छी नजर से नहीं देखता था। हाँ, परिश्रम से आय अर्जित करने या उसमें वृद्धि का तरीका बताने वालों को अवश्य मैं गंभीरता से सुनता था, ऐसे समय में जब प्रत्येक व्यक्ति जल्द से जल्द अमीर बन जाना चाहता है और यदि वह पहले से अमीर या अच्छी आय वाला है तो अपनी अमीरी को तीन-तिकड़म और नितांत अनैतिक तरीके से…
Tips Hindi Mein / टिप्स हिंदी में
happy new year
happy new year in 3d
नया साल मुबारक* कहें नये अंदाज में *3D टेक्स्ट के रूप में ये लाइव डेमो आप नीचे देख रहे हैं Happy New Year ये डेमो Mozilla...
Tech Prévue · तकनीक दृष्टा

अपने Blog की Speed (Loading time) Optimize कीजिए
Optimize your Blog Loading Speed | Make your Web Site Faster [image: Make your web site and blog faster] जब से गूगल (Google) ने यह सूचना जारी की है
ई-पण्डित / ePandit - Hindi Tech Blog
स्विफ्टकी ऍण्ड्रॉइड कीबोर्ड ३.१ में हिन्दी, हिंग्लिश समर्थन शामिल-
स्विफ्टकी ऍण्ड्रॉइड स्मार्टफोन तथा टैबलेट के लिये एक प्रसिद्ध और लोकप्रिय कीबोर्ड ऍप्लिकेशन है। जैसे-जैसे आप टाइप करते जाते हैं यह सीखती जाती है ताकि आपको ...
आधा सच-महेंद्र श्रीवास्तव
शिरड़ी : बाबा के वीआईपी

बात बड़े दिन यानि इसी 25 दिसंबर की है। बच्चों के स्कूल की छुट्टी थी,  मुझे भी आफिस से छुट्टी मिल गई, सोचा चलो बड़े दिन पर कुछ बड़ा करते हैं, शिरड़ी चल कर बाबा का दर्शन कर आते हैं। कार्यक्रम ये बना कि 23 दिसंबर की रात कर्नाटक एक्सप्रेस से दिल्ली से चलें  अगले दिन दोपहर तीन बजे के करीब वहां पहुंच जाऊंगा। चूंकि 25 दिसंबर को बड़ा दिन होने की वजह से बाबा का दर्शन आसान नहीं होगा, लिहाजा 24 को ही बाबा का दर्शन कर रात्रि विश्राम किया जाए और अगले दिन शनि महाराज के यहां हाजिरी लगाकर शाम को वापसी की ट्रेन पकड़ी जाए। पर ऐसा हुआ नहीं, क्योंकि कुहरे की वजह से हमारी ट्रेन लगभग आठ घंटे लेट हो गई। लिहाजा अब 24 तारीख को तो कुछ होना नहीं था, 25 को दर्शन और वापसी भी थी। क्या करता, पूरा सफर मैने वीआईपी दर्शन के इंतजाम में काट दिया…
ये पन्ने ........सारे मेरे अपने
मै अपनी तकदीर खुद लिखूंगी

इन दोनों मन बहुत विचलित रहा
एक अजीब सी उदासी घेरे हैं
नींद मानो बैर ठाने है
आखिर थक कर पलकें झपक जाती है
फिर वही ख्वाब जो बार बार दीखता है
कोई मेरे हाथों से कलम छीनता है
और कहता है मै तेरी किस्मत लिखूंगा
मै मुकद्दर का फ़रिश्ता हूँ….

"देश की बेटी दामिनी" (भावभीनी श्रद्धांजलि!)

ज़ुल्म की सलीब पे, वार गई ज़िन्दग़ी 
लड़ते-लड़ते मौत से, हार गई ज़िन्दग़ी
अन्त में कुछ कार्टून!

"धरना-प्रद्र्शन, लोकतन्त्र की शान!"


कार्टूनिस्ट-मयंक खटीमा (CARTOONIST-MAYANK)
-0-0-0-

कार्टून:- ताला उद्योग के भी दि‍न फि‍रे
 kajal
काजल कुमार के कार्टून

27 comments:

  1. उम्दा लिंक चर्चा के लिए !!

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  2. बहुत सुन्दर लिंक्स का संयोजन शास्त्री जी। आभार ,मास्टर्स टैक की पोस्ट को अपनी चर्चा में शामिल करने के लिए।

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  3. नववर्ष की हार्दिक शुभकामनायें आपको !
    बहुत बढ़िया लिंक्स दिए है जरुर पढूंगी
    मुझे स्थान देने के लिए बहुत आभारी हूँ !

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  4. monitor kharab hai aur laptop par abhi hindi option nahi hai isliye jaise taise kaam chala rahi hun kyonki bete ko kaam karna hota hai is par ..........umda link sanyojan

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  5. आदरणीय शास्त्री सर चर्चा मंच के सभी आदरणीय गुरुजनों, मित्रों एवं पाठकों को आने वाले नव वर्ष के ढेरों शुभकामनायें. आज के हालात को मद्देनज़र रखते हुए सुन्दर चर्चा लगाई है, आज की की सुन्दर चर्चा में मेरी दो रचनाओं को स्थान दे कर मुझे कृतज कर दिया है सर, ह्रदय के अन्तः स्थल से अनेक-२ धन्यवाद. सादर अरुन शर्मा

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  6. मन दुखी है | कुछ भी लिखने का मन नहीं कर रहा | इसलिए 31 तारीख की शेड्यूल पोस्ट जो टिप्स हिंदी में ब्लॉग पर पब्लिश होने वाली थी, कैंसल कर दी गयी है | टिप्स हिंदी में पर कोई पोस्ट प्रकाशित नहीं होगी | शास्त्री जी मेरी पोस्ट को स्थान देने के लिए धन्यवाद |

    वंदना जी लैपटॉप पर Google IME Hindi इंस्टाल कर लें | ये आफलाइन काम करता है व सबसे उत्तम है | मैं इसकी सेटअप फ़ाइल आपको rosered8flower@gmail.com इस मेल पर भेज रहा हूँ | बहुत आसान है इस पर काम करना |

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  7. बेटी दामिनी को श्रद्धांजलि

    अच्छे लिंक्स, बढिया चर्चा

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  8. शुक्रिया शास्त्री जी...
    मेरी रचना को चर्चा मंच में स्थान देने के लिए....!
    कुछ नए-पुराने मित्र मिले...
    अच्छी रचनाएँ....!
    शुक्रिया....!!

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  9. बहुत सुन्दर लिंक्स का संयोजन बढिया चर्चा

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  10. हाँ वह सभी सोये हुए लोगों को जगाके चली गई उनका क्या करें जो जागे हुए हैं सोने का अभिनय कर रहें हैं .इन्हें कौन जगाये .प्रासंगिक दर्द लिए हैं तमाम लिंक हृदय से सहज निसृत उदगार लिए .


    आपकी सभी की सद्य टिप्पणियों का शुक्रिया .आदरणीय भाव रखेंगे सभी महिलामात्र के प्रति यही इस बरस का शुभ सामूहिक संकल्प होना चाहिए .आभार .

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  11. सो गई स्वयं मगर, देश को जगा गई
    लड़ते-लड़ते मौत से, हार गई ज़िन्दग़ी

    आह ही निकलेगी इस कहानी के यूं खत्म होने पर


    बे -शक जंग अभी ज़ारी है .

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  12. शुभ कामनाओं से प्रेरित तंज भरा गीत नव वर्ष का .बढ़िया प्रासंगिक लेखन .बधाई .


    टूटा तन-मन भी टूटा है, अभिलाषाएँ ही जिन्दा हैं,
    आयेगीं जीवन में बहार, यह सोच रहा कारिन्दा हैं,
    कब चमकेंगें नभ में तारे!
    नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!!

    "गधे चबाते हैं काजू, महँगाई खाते बेचारे"

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  13. और चाबी खो जाए ......अन्दर हो काग भगोड़ा और उसकी मम्मी चाबी जनता रखे अपने पास .

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  14. विश्लेषण परक रिपोर्ताज .महात्मा गांधी को भारत दर्शन रेल यात्राओं ने ही कराया दर्ज़ा तीन पूरा भारत लिए चलता है अब तो चवन्नी की तरह गायब है दर्जा तीन .सामान्य डिब्बे हैं हौसले वाले इनमें


    चढ़ते हैं पूरा कुनबा और रसोई घर साथ लिए .मुंबई में तो रातसे ही लाइन लग जाती है CST में .शुक्रिया आपकी सद्य टिप्पणियों का .नव वर्ष शुभ हो .चौतरफा तरक्की करें .बड़े और बड़े लेखक बने .
    न दैन्यं न पलायनम्

    यार्ड में लेखन - वरिष्ठ अधिकारी का निरीक्षण है, यार्ड में नयी पिट लाइनों का निर्माण कार्य चल रहा है, पिट लाइनों का उपयोग यात्री ट्रेनों के नियमित रख रखाव के लिये किया जाता...

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  15. ये बलात्कार प्रजातंत्र के साथ था .निर्भया ने एक पूरा तंत्र हिला दिया ,जी हाँ एक ही निर्भया ने .......

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  16. एक ही निर्भया भारी है ,

    इस सेकुलर सरकार पर ,

    गर सभी निर्भया बाहर आ गईं ,

    तब न जाने क्या होगा ?

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  17. बहुत सुन्दर लिंक्स...आभार

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  18. शास्त्री जी समसामयिक चर्चाए है आज के परिपेक्ष्य में
    नारी युग आधार शिला है फिर भी विकती क्यू नारी।
    नारी के कारण जग जीवित फिर भी मिटती क्यू नारी।।
    दुर्योधन को जिता रहै है लाज गवाती है नारी ।
    शासन में नारी होने पर भी जान गवाती क्यूं नारी।।
    दिल्ली के दोनो छोरो पर शाशन करती है नारी।
    फिर कैसे नारी की अस्मत होती दिल्ली में तारी।।
    कैसे ये कांग्रेसी नेता वयान कर देते जारी ।
    जिनसे नारी की इज्जत होती है तारी तारी।।
    जिसके कारण अपराधी की हिम्मत होती है भारी।
    और भुततती जिसका फल है भारत की अबला नारी।।



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  19. दामिनी की आत्मा को ईश्वर शांति दे... ॐ शांति ॐ शांति
    उसके हत्यारों को जल्द सज़ा मिले यही कामना है। :(

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  20. भावपूर्ण रचना !
    बिटिया ने देश को तो जगा दिया...... मगर देश के ठेकेदारों को जगा-जगा कर थक गयी...! थक कर सो गयी...! काश ! युवाओं की ये अंगड़ाई इंसाफ़ को जगा सके...
    ~सादर!!!

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  21. अच्छे लिनक्स .......... नववर्ष की शुभकामना के साथ अच्छे वर्ष की कामना ......

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  22. बहुत सुन्दर लिंक्स...

    चिरनिद्रा में सोकर खुद,आज बन गई कहानी,
    जाते-जाते जगा गई,बेकार नही जायगी कुर्बानी,,,,

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  23. बहुत अच्छे सूत्रों के साथ आज की चर्चा सजाई है शास्त्री जी ! 'तराने सुहाने' से मेरी पसंद के गीत को आपने स्थान दिया आभारी हूँ ! दामिनी की अकाल मृत्यु ने मन विचलित कर दिया है ! इश्वर से प्रार्थना है वे उसे अपनी शरण में लें और उसके घायल तन मन पर मरहम लगा दें कि उसे कम से कम वहाँ तो आराम मिल सके !

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  24. मेरी पोस्ट शामिल करने के लिए बहुत आभार ..

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