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Tuesday, June 28, 2022

"आओ पर्यावरण बचाएं"(चर्चा अंक-4474)

सादर अभिवादन आज की प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है (शीषक और भूमिका आदरणीय ओंकार सिंह विवेक  जी की रचना से )सरकारें, शासन और प्रशासन के साथ साथ ही हम सबको भी अपना दायित्व समझना पड़ेगा तभी बिगड़ते पर्यावरण को बचाया जा सकता है।माँ सरस्वती हमें बुद्धि-विवेक दे ताकि हम अपने अधिकार के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी निबाह ईमानदारी से कर सकें माता की चरण-वंदना करते हुए चलते हैं,आज की कुछ खास रचनाओं की ओर...-------------------------------------------------------सरस्वतीवन्दना "जीवन आसान बना देना" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


हो ज्ञानदायिनी माता तुम,

मुझको गुणवान बना देना।

विद्या का दान मुझे देकर,

माता विद्वान बना देना।।

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आओ पर्यावरण बचाएं


हम अपने आस-पास सफ़ाई रखें, पेड़ लगाकर हरियाली को बचाएं और बढ़ाएं। नदियों में कूड़ा और कचरा न डालें।वनों का अनावश्यक दोहन और पहाड़ों से छेड़-छाड़ न करें।आसमान में बढ़ते हस्तक्षेप को रोकें तथा पेट्रोलियम पदार्थों के अत्यधिक प्रयोग पर भी लगाम लगाएं। ऐसे ही असंख्य और उपाय हो सकते हैं जिनसे प्रदूषित होते पर्यावरण को बचाकर धरती के हर जीवधारी के जीवन की रक्षा की जा सकती है ।जितनी जल्दी हो सके हम सबको चेतना होगा वर्ना जीवन संकट में पड़ जाएगा।
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 जीवण जेवड़ी


जीवण जेवड़ी रहट घूमे 

चौमासे री रात गळे।।

नाच नचावै है मृगतृष्णा 

ताती माटी पैर तळे।।

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दीवाना मन समझ न पाए


जीवन इक लय में बढ़ता है

जागे भोर साँझ सो जाये,

कभी हिलोर कभी पीड़ा दे

जाने क्या हमको समझाये !


कुछ यूँ ही

चाल पासा चल गया अभियान में
ढेर होते  सूरमा मैदान में।।

झूमता सा पद नशे में जब चला
दौड़ कुर्सी की लगी दालान में।।

चार दिन की चाँदनी धूमिल हुई
बीतती है उम्र भी पहचान में।।

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जब मौन गहे !!


कोई तो कहता है तेरी आस रहे ,

पथ के पथ पर शीर्ष दिगन्तर बना रहे  ,

चलते रहने का सुख सबसे बढ़कर है ,

लिख पाऊं कुछ ऐसा जग में मान रहे !!

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यह मेरे लिए हर मायने में स्पेशल यात्रा थी, एक तो यह मेरी पहली जिंदगी की "हवाई यात्रा "थी, दूसरा बेटी की जॉब करके "नोवाटेल होटल " फाइवस्टार में बिल्कुल समुंद्र के सामने कमरा बुक था। और बहुत ही vip वेलकम रहना घूमना था। उस पर यह जगह बहुत ही सुंदर थी। मुझे वैसे ही समुंद्र बहुत पसंद है। तो इस तरह से चार दिन के ट्रिप की हर बात खास थी। 

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#द्रोपदी मुर्मू- एक सहज राजनेता

सादगी और सहजता के साथ आम से खास होने की कहानी 

#द्रोपदीमुर्मू , झारखंड की पूर्व राज्यपाल और अब राष्ट्रपति भवन की राह पर अग्रसर एक आदिवासी महिला 

आइए जानते हैं उनकी कहानी 

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आज का सफर यही तक,अब आज्ञा दे,

आपका दिन मंगलमय हो 

कामिनी सिन्हा 

Monday, June 27, 2022

'कितनी अजीब होती हैं यादें'(चर्चा अंक-4473)

सादर अभिवादन। 

सोमवारीय प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है। 

शीर्षक व काव्यांश आदरणीय दिगम्बर नासवा जी की रचना 'जवाब 'से -

खिड़की की चौखट पे बैठे
उदास परिंदों के प्रश्नों का जवाब किसी के पास नहीं होता 
सायं-सायं करती आवारा हवाओं के पास तो बिलकुल नहीं

कितनी अजीब होती हैं यादें किसी भी बात से ट्रिगर हो जाती हैं 
मेरे प्रश्नों का भी जवाब भी किसी के पास कहाँ होता है

आइए अब पढ़ते हैं आज की पसंदीदा रचनाएँ-  
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उच्चारण: गीत "केवल दुर्नीति चलती है" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

प्रियतम का प्यार नसीब नही,
कितनी ही प्राण-प्यारियों को,
दानव दहेज़ का निगल चुका ,
कितनी निर्दोष नारियों को ,
--

खिड़की की चौखट पे बैठे
उदास परिंदों के प्रश्नों का जवाब किसी के पास नहीं होता 
सायं-सायं करती आवारा हवाओं के पास तो बिलकुल नहीं
--
जब जब होती हूं उदास
चुपचाप चली आती हूं
खिड़की के पास
खिड़की मुझे समझाती नहीं
बस दिखलाती है
--
धुआँ धुआँ सा गगन हुआ है बुझा बुझा सा प्रकाश दिखता।
न चाँद पूरा दिखे धरा से नहीं कहीं पर उजास दिखता।।
करें अहित के विरुद्ध बातें दिखा रहे हैं महान निज को।
रहस्य खुलने लगे उन्हीं के मलिन हुआ सा विभास दिखता।।
--
ना मैं कविता, ना ही गीतिका,
मैं तो नज़्म पुरानी हूँ। 
ना भुला पाओगे कभी जिसे,
मैं वो अधुरी कहानी हूँ।। 
--
कितना मनमोहक
है सौंदर्य प्रकृति का
बिखरा चहुँ ओर मेरे
खूबसूरत नजारों का
आंनद लेना चाहता हूँ
गुनगुनाता हूँ  
गीत नया गाता हूँ
--
 बहुत छोटी सी बात है ये शायद
एक साधारण अति साधारण सी घटना है शायद
कि एक पौधे को माली ने
कर दिया उसी मिट्टी के हवाले
जिसमें एक दिन वो हुआ था अंकुरित
पौधा जब नन्हा सा था
--
उम्र का पहिया
अनुभव 
का पथ होता है। 
सिंदूरी सांझ 
और 
स्याह रात के बीच
आदमी अक्सर घटता है
--
मीत कुमीत दोऊ का, मत कीजे विश्वास।
मीत कबहूँ कुपित भयो, करे भेद परकास।।3।।
--

बुलबुल के बच्चे दिखे क्या ?

उनको बिल्ली खा गई ये देखो ये गमले भी गिरे पड़े हैं उसने सक्यूलेन्ट्स के छोटे गिरे पड़े कुछ पॉट्स की तरफ़ झाड़ू लगातेलगाते लापरवाही से इशारा किया।

-क्या…? हमें जोर का धक्का लगा और अन्दर अपने बैड पर वापिस जाकर रोने लगे।बहुत दुख हो रहा था। सारे दिन धूप में जाजाकर भूखेप्यासे चारों तरफ़ पेड़ों पर ढूँढते रहे पर कोई 

--

बस्तर की अभिव्यक्ति -जैसे कोई झरना....: पारिस्थितिकी हार रही है

कुलाँचे भरती कौतुकीसभ्यता और संसाधनों की छीना झपटी के लिए होने वाले युद्धों ने पारिस्थितिकी को सर्वाधिक क्षतिग्रस्त किया है। चीन और अमेरिका जैसे “सभ्य माने जाने वाले असभ्य देश” पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों में सबसे आगे हैं। इस दौड़ में भारत भी पीछे नहीं है। सिक्किम को छोड़ दें तो भारत का कोई भी प्रांत स्वच्छता के प्रति न तो जागरूक हुआ है और न गम्भीर। उत्तर के हिमांचलउत्तराखण्ड और पञ्जाब तथा पूर्व के बंगालअसम और मेघालय जैसे प्राकृतिकदृष्टि से रमणीय प्रांतों में भी स्वच्छता के प्रति उदासीनता कष्टदायी है। वह बात अलग है कि पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक बनावट कचरे को छिपाने का भरपूर प्रयास करती है।

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आज का सफ़र यहीं तक 

@अनीता सैनी 'दीप्ति' 

Sunday, June 26, 2022

"चाहे महाभारत हो या रामायण" (चर्चा अंक-4472)

सादर अभिवादन 

आज की प्रस्तुति में आप सभी का हार्दिक स्वागत है 

(शीर्षक और भूमिका आदरणीय दीपक कुमार भानरे जी की रचना से)


जब स्वार्थ का बादल हो घनघोर ,

जब अपने ही साथ रहे हो छोड़ ,

तब अपना अधिकार पाने के लिए ,

धर्म और कर्तव्य निभाने के लिए ,

भगवान को भी करना पड़ा पलायन ,

चाहे महाभारत हो या रामायण । 


युग भले ही बदल जाते हैं

कुछ तथ्य निर्विवाद सत्य ही रहते हैं 


चलते हैं आज की कुछ खास रचनाओं की ओर.............

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गीत "महफिल में नीलाम हो गये"

 (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

गुमनामों की इस बस्ती में,

नेकनाम बदनाम हो गये।

जो मक्कारी में अव्वल थे,

वे सारे सरनाम हो गये।।

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चाहे #महाभारत हो या #रामायण ।


जब अत्याचार बढ़ जाए सघन ,

धर्म और न्याय का फूलने लगे दम ,

अत्याचारी को सबक सिखाने के लिए ,

विधर्मियों को सजा दिलाने के लिए ,

भगवान को भी करना पड़ा रण ,

चाहे महाभारत हो या रामायण । 


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मैं भीष्म


मैं भीष्म
वाणों की शय्या पर
अपने इच्छित मृत्यु वरदान के साथ
कुरुक्षेत्र का परिणाम देख रहा हूँ
या ....... !
अपनी प्रतिज्ञा से बने कुरुक्षेत्र की
विवेचना कर रहा हूँ ?!?

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बकैती


 उसने बताया

ठंढ़ा-ठंढ़ा – कूल-कूल

तेल गमकऊआ/गमकौआ

दर्द निवारक बाम

चेहरा चमकऊआ (फेसपाउडर)

में पिपरमिंट का रस मिला होता है

जो उगा लिया जाता है


विदेशी विद्यार्थी या कुछ और

मुंबई आने के बाद करीब 2003- 4 में कलीना यूनिवर्सिटी में राजनीतिशास्त्र से एम ए में प्रवेश ले लिया ताकि मुंबई में अकेले आने जाने और शहर को देख समझ सकूँ | पहला दिन कॉलेज का सबके परिचय का दिन था | एक व्यक्ति उसका नाम और उसका परिचय ने क्लास में सभी को चौका दिया | वैसे उसके देखते ही सब पहले ही चौक गए थे | 

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 दिल वाली शायरी।

दिल की ख्वाहिशों को सम्भाल रखा है,

मैंने अपना हाल बेहाल बना रखा है,

तेरा नाम गुलाब के साथ जिस पर लिखवाया था,

मेरे कमरे में अब भी वो रुमाल रखा है।


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फाँस


"माँ..माँ.. पापा आ गए...!सात साल की नन्ही रुनझुन ने परब को आते देख दौड़कर पायल को जगाया।

"कहाँ है तेरे पापा..?परब के आने की खबर से पायल के चेहरे पर पसीने की बूँदे छलकने लगीं।

"बाहर मयूर के पापा से बात कर रहे थे तो मैंने देख लिया और दौड़कर आपको बता दिया..! रुनझुन बोली।

"ठीक है तुम अपने कमरे में जाकर होमवर्क करो और बाहर की किसी आवाज पर बाहर मत आना..!पायल ने आइने में खुद को ठीक किया और शाम के खाने की तैयारी करने लगी।

"पायल..?"परब ने घर में प्रवेश करते ही पायल को पुकारा।

------------------------------------कृपाण घनाक्षरी छंद

दया कर तारो-तारो, ईश्वर हमें उबारो,
जीवन आज सँवारो, विकल है अन्तर्मन।

मैं तो हूँ तेरी ही दासी,तेरे दर्शन की प्यासी,
बैठी हूँ आज उदासी,तड़पता मेरा मन।

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आज का सफर यही तक,अब आज्ञा दे 
आपका दिन मंगलमय हो 
कामिनी सिन्हा