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शनिवार, जनवरी 03, 2015

"नया साल कुछ नये सवाल" (चर्चा-1847)

मित्रों।
नववर्ष में आपका स्वागत है।
आप ब्लॉग पर सक्रिय रहिए।
हम चर्चा मंच के माध्यम से
आपके लिंक पाठकों तक पहुँचाते रहेंगे।
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शनिवार की चर्चा में 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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"विवध दोहावली-नूतन वर्ष" 

आया नूतन वर्ष तो, ठहर गयी रफ्तार।
नभ पर बादल छा रहे, शीतलता की मार।१।
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झूम रहा है हर्ष से, अब सम्पूर्ण समाज।
आशाएँ मन में बढ़ीं, नये साल से आज।२।... 
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नए स्वप्न ले नयन में 

कुण्डलियाँ : डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा
1
नए स्वप्न  ले नयन में ,अधरों पर मुस्कान ,
समय-सखा फिर आ गया ,पहन नवल परिधान ।
पहन नवल परिधान , बजी है शहनाई -सी , 
तुहिन आवरण ओढ़ , धरा है शरमाई- सी ।  
किरण-करों से कौन , भला घूँघट पट खोले ,
धरा नतमुखी मौन , मुदित है नए स्वप्न  ले ।।...
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नववर्ष पर शुभकामनाएं 

नव वर्ष का शुभ प्रभात, 
नव स्वर्णिम आभा से भर दे । 
नव दृष्टिकोण नव लक्ष्य सहित , 
पंछी को ऊंचा अम्बर दे... 
Naveen Mani Tripathi
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पूज्य भारत 

स्मृतियों में बीता वर्ष [2014]... 
नूतन वर्ष [ 2015 ] का 
स्वागत अभिनन्दन...  
उन्नयन  पर udaya veer singh 
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मेरे इश्क की दुल्हन 

श्रृंगार विहीन होने पर ही 
सुन्दर लगा करती है 
फिर नज़र के टीके के लिए 
रात की स्याही कौन लगाये 
बस चाँद का फूल ही काफी है 
उसके केशों में सजने को ...
vandana gupta 
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खोखले 

आज  दरिया  में पत्थर तैरते देखा
क्या पत्थर भी  
वायदों  की तरह खोखले हो गए हैं?...
कविता-एक कोशिश पर नीलांश
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नूतन साल 

(नव वर्ष पर 7 हाइकु) 

1. 
वक़्त सरका  
लम्हा भर को रुका   
यादें दे गया ! 
2. 
फूल खिलेंगे  
तिथियों के बाग़ में   
खुशबू देंगे ! 
3... 
डॉ. जेन्नी शबनम 
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....जो लड़की आज सरेआम सड़क किनारे अपने प्रेमी के साथ किस कर रही थी। उसको 14 फरवरी के दिन होने वाले हिंदू संगठनों के हमले याद नहीं होंगे। अगले महीने 14 फरवरी का दिन आने वाला है। अब पूरे देश में सरकार भी हिंदूत्व प्रेमियों की है। इस स्थिति में देश के पार्कों में दीवानों के मेले लगेंगे या हिंदू संगठनों का रौब कायम होगा। अंजाम देखने के लिए इंतजार तो करना होगा। हालांकि, आज नूतन वर्ष की बधाई के सामने आया, दोस्त का जवाब आने वाले कल की ख़बर दे रहा है। 
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सांवरे की मनुहार 

वसुधा मिली थी भोर से जब, ओढ़ चुनरी लाल सी।
पनघट चली राधा लजीली,  हंसिनी  की  चाल  सी।।
इत वो ठिठोली कर रही थी,   गोपियों  के साथ में ।
नटखट कन्हैया उत छुपे थे,   कंकड़ी  ले  हाथ  में ।१।...
ऋता शेखर मधु 
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नवगीत (14)  

व्यर्थ रहूँ उससे आकर्षित ॥ 

व्यर्थ रहूँ उससे आकर्षित ॥ 
जिसको पाना सूर्य पे जाना । 
भर बारिश में पतंग उड़ाना । 
जिसने मुझको स्वयं रखा है –  
पाने से पहले आवर्जित... 
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ये: भगवा लबादे... 

शहर के इरादे ग़लत तो नहीं हैं ?  
कहीं इश्क़ज़ादे ग़लत तो नहीं हैं ? 
बयाज़े-नज़र में बयां कुछ नहीं है 
ये: सफ़हात सादे ग़लत तो नहीं हैं... 
Suresh Swapnil 
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----- ॥ उत्तर-काण्ड २६ ॥ ----- 

* बृहस्पतिवार, ०१ जनवरी, २०१५ * 
*मत्स्यावतार तुम्ह धारे । 
श्रुति रच्छत संखासुर मारे ॥ * 
*माह पुरुख तुम सब कुल मूला । 
तुहरेहि सँग जगत फल फूला ॥... 
NEET-NEET पर 
Neetu Singhal 
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मैं कबीर की इज्जत करता हूँ 

मुझे कोई आइना दिखाता है 
तो मैं आइने में 
अपनी शक्ल देखने के बाद 
मुँह धोने नहीं जाता! 
दौड़ा कर मारना चाहता हूँ 
मुझे लगता है 
आइना दिखाने वाला पी के है...
बेचैन आत्मा पर देवेन्द्र पाण्डेय 
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लोग इतना क़रीब रहकर भी 

दूरियां कैसे बना लेते हैं 

बात करना तो बड़ी बात हुई,
देखकर आँख चुरा लेते हैं।
फ़ासिला तीन और पाँच का मिटे कैसे,
चार दीवार खड़ी बीच से हटे कैसे,
मेरी नाकामयाब कोशिश पे,
लोग हँसते हैं, मज़ा लेते हैं... 
चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’
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नये साल के बहाने… 

.....कई तरह की भावनाओं, मंथन, अनसुलझे सवालों के साथ शुरु हुआ था साल का पहला दिन। प्यार, दोस्ती, परिवार… ये सब कभी दूर तो कभी मेरे साथ नजर आते हैं। एक बार फिर अफसोस कर लिया अपनी भूलों पर, उदास कर लिया दिल कमियों पर, गर्व कर लिया उस पर जो पास है या जो पाया। आँसुओं से धो दिया खूबसूरत गलतफ़हमियों को और मुस्कुरा ली वर्तमान पर। यूँ तो कोई अन्तर नहीं इस दिन में और बाकि दिनों में पर नये साल के बहाने से ही क्या पता दिल संभल जाए और दिमाग ठिकाने आ जाए।
लेखिका
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नए साल का पहला दि‍न तुम्‍हें मुबारक..... 
सभी ब्‍लॉगर साथि‍यों को 
नववर्ष की बधाई और शुभकामनाएं... 
'साल की आखि‍री शाम मुबारक हो' ....  
ढलते सूरज को देखना... 
कि‍तना खूबसूरत लगेगा, 
मेरी आंखें भी टि‍की रहेंगी उस नारंगी गोले पर।
साल की अंति‍म शाम ढलने से ठीक पहले कहा था उसने, 
मगर बादलों ने न पूरी होने दी कही बात, न मेरा वादा।
नए वर्ष का पहला दि‍न..... 
सूरज अाज भी छुपा रहा.. 
जाते साल की तरह... 
रूप-अरूप
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कुछ यूं आये साल नया 
कुछ ख्वाब अधूरे हों पूरे, 
कुछ नयी उम्मीदें पलें दामन में
कुछ बिगडी बाते बन जायें, 
कुछ नये रिश्ते महके आंगन में... 
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चिटिक अगोरव..... 
अँगरेजी के नवा साल बर, अतिक मया जी
कोन डहर ले  आइस , अइसन परंपरा जी... 
अरुण कुमार निगम 
mitanigoth

शुक्रवार, जनवरी 02, 2015

"ईस्वीय सन् 2015 की हार्दिक शुभकामनाएँ" (चर्चा-1846)

मित्रों।
सबसे पहले आप सबको
नव वर्ष आपके जीवन में 
ढेर सारी खुशियों के लेकर आये 
यही कामना करता हूँ।
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पिछले दो वर्ष ब्लॉगिंग के लिए 
अच्छे नहीं रहे हैं।
क्योंकि लगभग सारे के सारे ब्लॉगर
ब्लॉगिंग की बजाय फेसबुक पर
अपनी पोस्ट लगाने लगे थे।
मगर आज मुझे फिर से आभास हो रहा है कि
यह वर्ष ब्लॉगिंग के दृष्टिकोण से
बहुत अच्छा रहेगा।
जिसका प्रमाण साल के पहले ही दिन 
ये ढेर सारे लिंक हैं।
नहीं तो लिंक खोजने में तो 
नानी याद आ जाती थी
और टिप्पणियों का तो
ब्लॉग पोस्टों पर अकाल सा पड़ गया था।
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देखिए नये साल में 
मेरी पसन्द के निम्न लिंक... 
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"नये साल का सूरज"

मैं नये साल का सूरज हूँ,
हरने आया हूँ अँधियारा।
 मैं स्वर्णरश्मियों से अपनी,
लेकर आऊँगा उजियारा... 
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बात करें हम कल ही की... 

नए साल में कल की बात क्यों ना करें , 
कल से ही तो आज है.... 
नयी उड़ान + पर Upasna Siag 
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"नया वर्ष स्वागत करता है पहन नया परिधान" 

नया वर्ष स्वागत करता है , पहन नया परिधान ।
सारे जग से न्यारा अपना , है गणतन्त्र महान ॥
ज्ञान गंग की बहती धारा ,
चन्दा , सूरज से उजियारा ।
आन -बान और शान हमारी -
संविधान हम सबको प्यारा ।
प्रजातंत्र पर भारत वाले करते हैं अभिमान... 
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"काव्य की आत्मा? ...." 

*♥ रस काव्य की आत्मा है ♥* 
*सबसे पहले यह जानना आवश्यक है कि 
रस क्या होता है?* 
*कविता पढ़ने या नाटक देखने पर 
पाठक या दर्शक को जो आनन्द मिलता है 
उसे रस कहते हैं।* 
*आचार्यों ने रस को 
काव्य की आत्मा की संज्ञा दी है।*... 
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चल मन अब उठ 

निविया पर नीलिमा शर्मा 
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2015 मंगलमय हो 

मेरी भावनायें...पर रश्मि प्रभा... 
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मेरे हमनशीं ,मेरे हमनवां 

मेरे हमनशीं ,मेरे हमनवां , 
तुझसे ही है मेरा जहां 
मेरे बेबसी के हमसफ़र , 
तुझसा न कोई मेहरबां 
मेरे हमनशीं ,मेरे हमनवां ... 
कविता-एक कोशिश पर नीलांश 
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लिखते रहना है 

बिखरे हुए हैं अनेकों दृश्य जीवन के ....  
कहीं बहता पानी ऊंचे पहाड़ मैदान 
उगते डूबते सूरज चाँद .... 
अमीरी गरीबी उठने गिरने की 
सैकड़ों कही अनकही कहानी कविता और गीत 
सरगम की धुन भक्ति विरक्ति शक्ति और 
संघर्ष की गाथाओं से भरा पूरा इतिहास... 
Yashwant Yash 
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काँटों से ज़ार एक फूल के नाम 

एक जनवरी। रात के साढ़े बारह बजे हैं। नए साल के जश्न का तेज़ शोर बंद खिड़कियों के पार से सुनाई दे रहा है। व्हॉट्स ऍप पर नया साल मुबारक के संदेश लगा तार बजे जा रहे हैं। सो जाने की मेरी कोशिश असफल हो गयी है। सर्द सियाह रात की तन्हाई में मेरी रूह पीड़ा के अथाह सागर में उतरती चली जा रही है। जीवन ने एक पाठ बड़ी अच्छी तरह पढ़ाया है --कि पीड़ा आस्था और तर्क दोनों से ही नहीं मिटायी जा सकती ;उसे मानस छलना से बस भुलाया भर जा सकता है। कुछ यूँ कि जैसे जेठ की दुपहरी में काँटों की चुभन भुला कर मन को नागफणी के एक्के-दुक्के पर बेपनाह खूबसूरत सुर्ख फूलों के सौंदर्य में ही टाँग लिया जाये... 
parmeshwari choudhary 
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आ रे … 

Pratibha Katiyar 
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जाते जाते आने वाले को 

कुछ सिखाने के लिये 

कान में बहुत कुछ 

फुसफुसा गया 

एक साल 

उलूक टाइम्स पर सुशील कुमार जोशी 
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स्वागत नववर्ष 

Maheshwari kaneri 
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आशा के फूल ! 

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राहें थीं जानी-पहचानी 

Tere bin पर 
Dr.NISHA MAHARANA 
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और अन्त में...

"मुक्त छन्द-नये वर्ष में आप हर्षित रहें"

गुरुवार, जनवरी 01, 2015

नव वर्ष ( चर्चा - 1845 )

आज की चर्चा में आप सबका हार्दिक स्वागत है 
ब्लॉग जगत के सभी साथियों को चर्चा मंच परिवार की तरफ से नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ । भले ही यह नव वर्ष भारतीय कलैंडर अनुसार नहीं और हर दिन नया दिन होता है फिर भी इस अवसर को ख़ुशी के साथ मनाया जा  सकता है क्योंकि नव वर्ष मनाने का अर्थ है कि बीते समय का मूल्यांकन करें और आगे के लिए कुछ संकल्प लें । यह यूं तो कभी भी किया जा सकता है लेकिन खास तिथि से यह ज्यादा सुगम लगता है । एक जनवरी को हम इसी संदर्भ में देख सकते हैं, तो आइए नए वर्ष में कुछ नए स्वप्न बुने और इन्हें पूरा करने के लिए कोई कार्यक्रम बनाएँ । 
नए वर्ष की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ चलते हैं वर्ष 2015 की प्रथम चर्चा की ओर
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मंगल प्रभात मित्रों !
बयान दर्ज है - [ नशा दूर कर देता है परिवार व समाज दोनों से ]
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उन आँखों को ख्वाब दे दो
कदमों को जूते जुराब दे दो- 
प्यासे होठों को आब दे दो 
जो बेखबर है आवाज दे दो -
नुमाईस न हो कोई आबरू 
आँचल दे दो ,नकाब दे दो -
मुश्किल से उठाता है सिर 
फरियादी को हिसाब दे दो -
न दे सकते हो मरहम तो 
उदय जख्मों को जवाब दे दो -

उदय वीर सिंह
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धन्यवाद