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बुधवार, दिसंबर 12, 2018

"महज नहीं संयोग" (चर्चा अंक-3183)

सुधि पाठकों!
बुधवार की चर्चा में 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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जनता तेरा नेता दीवाना.... 

जनता तेरा नेता दीवाना   
हाय राम ..... इलेक्शन में डाले दाना ।  
धंधा है यह इनका पुराना  
हाय राम ...... इलेक्शन में डाले दाना... 
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-ठिठुरन 

कोहरे की घनी चादर 
यह ठिठुरन और
ठंडी हवा की चुभन
हम महसूस करते हैं
सब नहीं
सुबह होते हुए भी
रात के अँधेरे का अहसास
हमें होता है... 
Akanksha पर 
Asha Saxena  
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नदी हूँ मैं 

नदी हूँ मैं  
हाँ नदी हूँ  
अविरल बहना  
मेरी नियति है.... 
प्यार पर Rewa tibrewal  
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सड़क दुर्घटनायें और हमारी बेपरवाही  

सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में हर दिन चार सौ से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं. निश्चय ही यह एक भयानक सच्चाई है. पर इस त्रासदी को लेकर हम सब जितने बेपरवाह हैं वह देख कर कभी-कभी आश्चर्य होता है; लगता है कि सभ्य होने में अभी कई वर्ष और लगेंगे. अब जो आंकड़े विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने जारी किये हैं वह पढ़ कर तो लगता है कि स्थिती बहुत ही भयावह है... 
आपका ब्लॉग पर i b arora  
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भारतीय समाज में विवाह ! 

भारतीय समाज में विवाह एक महत्वपूर्ण संस्था है बल्कि दूसरे शब्दों में कहें तो परिवार की नींव यही है । वैसे तो ये मानव जाति में विवाह का अस्तित्व पाया जाता है लेकिन जितनी विविधता हमारे समाज में पायी जाती है , उतनी कहीं और नहीं मिलेगी । एक ही देश में इतनी विभिन्नता और एक ही संस्था में विचारणीय और विस्मय का विषय हो सकता है लेकिन उनमें एक ही सम्बद्धता पायी जाती है और वह है परिवार संस्था में अटूट गठबंधन और सृष्टि के लिए एक सामाजिक , भावात्मक , आध्यात्मिक बंधन। हर रीति इसी उम्मीद के साथ पूरी की जाती है कि विवाह चिरस्थायी और प्रेमपूर्ण जीवन का मार्ग है... 
रेखा श्रीवास्तव  

सोमवार, दिसंबर 10, 2018

"उभरेगी नई तस्वीर " (चर्चा अंक-3181)

सुधि पाठकों!
सोमवार की चर्चा में 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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बोहरा सा’ब नहीं मिलते तो..... 

मैं सचमुच में बड़भागी हूँ  
जो मुझे बोहरा सा’ब मिल गए। 
वे क्या मिले, मुझे जीवन-पाथेय मिल गया। 
वे नहीं मिलते तो पता नहीं कि  
मैं ‘हाथ का साफ’ रह पाता या नहीं।  
बोहरा सा’ब जैसे लोग 
आत्मा को निर्मल कर देते हैं... 
विष्णु बैरागी 
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अक्षर 

प्यार पर 
Rewa tibrewal  
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परिहास 

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा  
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शीर्षकहीन 

आनन्द वर्धन ओझा 
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हाइकू 

 १-मौसम ठंडा  
कांपता है बदन  
कम्पित मन  
२-सहज भाव  
चहरे पर दीखते  
आइना वही... 
Akanksha पर 
Asha Saxena 
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"जीवंतता" 


vibha rani Shrivastava  at  
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खाई को कम करिये 

लो जी चुनाव निपट गये, एक्जिट पोल भी आने लगे हैं। भाजपा के कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवीयों की नाराजगी फिर से उभरने लगी है। लोग कहने लगे हैं कि इतना काम करने के बाद भी चुनाव में हार क्यों हो जाती है? चुनाव में हार या जीत जनता से अधिक कार्यकर्ता या दल के समर्थक दिलाते हैं। इस मामले में कांग्रेस की प्रशंसा करूंगी कि उन्होंने ऐसी व्यवस्था खड़ी की कि कार्यकर्ता-समर्थक और नेता के बीच में खाई ना बने... 
smt. Ajit Gupta