सुधि पाठकों!
बुधवार की चर्चा में
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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जनता तेरा नेता दीवाना....
जनता तेरा नेता दीवाना
हाय राम ..... इलेक्शन में डाले दाना ।
धंधा है यह इनका पुराना
हाय राम ...... इलेक्शन में डाले दाना...
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-ठिठुरन
कोहरे की घनी चादर
यह ठिठुरन और
ठंडी हवा की चुभन
हम महसूस करते हैं
सब नहीं
सुबह होते हुए भी
रात के अँधेरे का अहसास
हमें होता है...
Akanksha पर
Asha Saxena
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आर बी आई कैश रिजर्व का इस्तेमाल
खजाने की लूट ------
अरविंद सुब्रमण्यम

क्रांति स्वर पर
विजय राज बली माथुर
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सड़क दुर्घटनायें और हमारी बेपरवाही
सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में हर दिन चार सौ से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं. निश्चय ही यह एक भयानक सच्चाई है. पर इस त्रासदी को लेकर हम सब जितने बेपरवाह हैं वह देख कर कभी-कभी आश्चर्य होता है; लगता है कि सभ्य होने में अभी कई वर्ष और लगेंगे. अब जो आंकड़े विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने जारी किये हैं वह पढ़ कर तो लगता है कि स्थिती बहुत ही भयावह है...
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एचआयवी एड्स
इस विषय को लेकर
जागरूकता हेतु
एक साईकिल यात्रा के अनुभव: ६.
बीड से अंबेजोगाई
Niranjan Welankar
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भारतीय समाज में विवाह !
भारतीय समाज में विवाह एक महत्वपूर्ण संस्था है बल्कि दूसरे शब्दों में कहें तो परिवार की नींव यही है । वैसे तो ये मानव जाति में विवाह का अस्तित्व पाया जाता है लेकिन जितनी विविधता हमारे समाज में पायी जाती है , उतनी कहीं और नहीं मिलेगी । एक ही देश में इतनी विभिन्नता और एक ही संस्था में विचारणीय और विस्मय का विषय हो सकता है लेकिन उनमें एक ही सम्बद्धता पायी जाती है और वह है परिवार संस्था में अटूट गठबंधन और सृष्टि के लिए एक सामाजिक , भावात्मक , आध्यात्मिक बंधन। हर रीति इसी उम्मीद के साथ पूरी की जाती है कि विवाह चिरस्थायी और प्रेमपूर्ण जीवन का मार्ग है...
मेरा सरोकार पर
रेखा श्रीवास्तव























