सादर अभिवादन।
शुक्रवारीय प्रस्तुति में आपका स्वागत है।
मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ।
मकर संक्रांति पर्व पर सूर्य दक्षिणायण से उत्तरायण दिशा में आकर मकर राशि में प्रवेश करता है। अर्थात दक्षिण पूर्व दिशा से उत्तर-पूर्व दिशा की ओर सूर्य का दिखाई देना बढ़ने लगता है। यह घटनाक्रम पृथ्वी द्वारा सूर्य के चारों ओर सालाना चक्कर पूरा करते रहने से नियमित अंतराल पर घटित होता रहता है। इसीलिए अन्य भारतीय त्योहारों की तरह मकर संक्रांति की अँग्रेज़ी कलेंडर के अनुसार हर वर्ष तारीख़ नहीं बदलती है अर्थात यह पर्व हर वर्ष 14 जनवरी को ही मनाया जाता है। मान्यता है कि रुके हुए शुभ कार्य संक्रांति पर्व से शुरु किए जाते हैं। भारतीय समाज पर शास्त्र निर्धारित ज्ञान व मान्यताओं का गहरा प्रभाव है अतः पौष (पूष) माह में शुभ कार्य आरंभ करने से लोग परहेज़ करते हैं।
माघ माह 18 जनवरी 2022 से आरंभ होगा।
आइए पढ़ते हैं चंद चुनिंदा रचनाएँ-
दोहे "लोहिड़ी-लोगों में उल्लास" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
खाकर मीठा बोलिए, बना रहेगा नेह।३।
--
चारों ओर भरा हुआ, लोगों में उल्लास।
सुधरेगा परिवेश अब, सबको यह विश्वास।४।
जैसे ही कोई मित्र आए
मम्मी को पसंद नहीं आता
वह इशारे से मना कर देती
छत के ऊपर जाने को
रंगबिरंगी पतंग काटने को |
प्री वेडिंग फोटो शूट - उचित या अनुचित
मेरे विचार से इन विदेशी परम्पराओं और रीतियों से हमारे समाज को और हमारे बच्चों को बचना चाहिए ! कुछ बातें बहुत ही निजी और अन्तरंग होती हैं उनका प्रदर्शन सबके सामने किया जाए यह कतई ज़रूरी नहीं होता !
अचानक ऐसा क्या हुआ
कि तुम्हारी कोई मंज़िल ही नहीं रही,
अब तुम तैयार हो
किसी भी उस जगह उतरने को,
जहाँ मुझे नहीं उतरना है.
*****
Watch: भारतीय डॉक्टर ने
1997 में ही इनसान में कर दिया था सुअर का दिल इंप्लांट
*****
चंद्र बिन्दु जहाँ है
वहीं अच्छा है
मैं माथे की बिंदिया सी
ख्यालों का चंद्रबिंदु क्यूँ बनूं..
*****
आज बस यहीं तक
फिर मिलेंगे आगामी सोमवार।
रवीन्द्र सिंह यादव