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Monday, January 03, 2022

'नेह-नीर से सिंचित कर लो,आयेगी बहार गुलशन में' (चर्चा अंक 4298)

शीर्षक पंक्ति: आदरणीय रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' जी की रचना से। 

 सादर अभिवादन। 

सोमवारीय प्रस्तुति में आपका स्वागत है।

आइए पढ़ते हैं विभिन्न ब्लॉग्स पर प्रकाशित ताज़ा रचनाएँ-

गीत "उड़ जायें जाने कब तोते" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

जल का सोत धरा के नीचे,

नहीं गगन का आदि-अन्त है।

जब सुख की बहती पुरवाई,

तब समझो आया बसन्त है।

नेह-नीर से सिंचित कर लो.

आयेगी बहार गुलशन में।

जो होते आजाद परिन्दे,

वो उड़ते उन्मुक्त गगन में।।

*****

जिन्हें नाज़ है हिन्द परवो कहाँ हैं?

कमसिन दुख्तर सिसक रही थीबेगम ग़म से थीं बेज़ार,

उनकी इज्ज़त-अस्मत बिकतीफूला-फला देह-व्यापार.

सरे आम नीलाम छापतेसंस्कृति-रक्षकलाज-उतार,

'रूप-हाट फिर सजी हुई हैमत चूको मौक़ा इस बार !’

*****

खोया नहीं है जो

कोई बीज धरा की गहराई में जैसे

बोया हुआ सा लगता है

प्रीत का जलऊष्मा उर की

जब जब बहती है

उस पल कोई मीत

आया हुआ सा लगता है

*****

नए साल में | ग़ज़ल | डॉ (सुश्रीशरद सिंह

हो इंसानियत की तरफ़दारियां 

सभी के दिलों में ये जज़्बात हो।

मुश्क़िल जो आई गए साल में 

नए साल में उसकी भी मात हो।

*****

नए साल में ...

पीड़ा सहने

और आँसुओं में डूबे रहने से

किसी को रत्ती भर फ़र्क नहीं पड़ता है

*****

ये तो रंगरसिया

कभी दूसरी तितली का नहीं करती

प्रतिकार

क्योंकि

जानती है

ये बागान

उनकी उड़ान

और

रंगों से उत्साह पाता है

जीवन पाता है।

*****

अनियोजित नववर्ष !

रात में जब पहुंची तो भाभी बोली कि  हम तो गले मिलेंगे एक मुद्दत गुजर गयी गले मिले हुए।

ये बोले सोच लीजिए - 'कोरोना फिर से पैर पसार रहा है। '

हम लोगों ने कहा - ' ऐसे की तैसी कोरोना की , हम तो गले ही मिलेंगे।'

एक मुद्दत बाद हम गले मिले शायद दो साल बाद।

*****

प्यार दो---प्यार लो...नव वर्ष पोस्ट

जीवन झंझावात मेंधीरज अटल प्रबुद्ध 

ढल जाते हैं श्लोक मेंजाने कितने बुद्ध।।

गढ़ते हैं सबके लिएसदा नए आयाम।

दो पंक्ति में बँधे नहींउनके अनगिन काम ।।

*****

नवगीत : मुस्कुराते गीत मेरे : संजय कौशिक 'विज्ञात'

सप्त वारों ने सुनाए कष्ट नव रस के उमड़ते 

ऋतु छहों से व्यंजना के

 भाव कुछ जम के उखड़ते 

फाल्गुनी से कुछ सँवरते 

स्वप्न पकते पीत मेरे।।

*****

https://anchalpandey.blogspot.com/2022/01/blog-post.html

खीर

मोह-माया सब त्याग के

हम शंकर सम डमरू बजायें,

धन्य-धन्य बड़ भाग मनुज के

देवगण पछताए,

*****

 शगुन की धूप

माँ से जब मैंने आज सुबह बताया कि माँ रात अच्छी नींद नहीं आईधुकधुक होती रहीतो माँ ने मुस्कुराकर सर पर हाथ फेर दिया और कहा, 'कुछ अच्छा होगायह शगुन है.' उनके यह कहते ही धूप का एक टुकड़ा मेरे सर पर  गिरा.

मैं निसंकोच सिर्फ प्रकृति के सम्मुख होती हूँधूप के टुकड़े को हथेलियों में उतार लेती हूँ उसे कहती हूँ...तुम हो तो सब शगुन ही है.

*****

'सरहद से अनहदका विमोचन

*****

आज बस यहीं तक 

फिर मिलेंगे आगामी सोमवार। 

रवीन्द्र सिंह यादव 

 

12 comments:

  1. सादर नमस्कार आदरणीय रविंद्र जी सर।
    चर्चा के लिंको का एक बार अवलोकन करे।
    सादर

    ReplyDelete
  2. बहुत बेहतरीन चर्चा प्रस्तुति।
    आपका आभार आदरणीय रवीन्द्र सिंह यादव जी।

    ReplyDelete
  3. शानदार चर्चा 💐💐💐

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  4. सर लिंक के जरिए रचनाओं तक नहीं पहुचा जा पा रहा है शायद कोई समस्या है कृपया एक बार अवलोकन करने का कष्ट करें🙏🙏

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  5. बेहतरीन रचनाएं

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  6. बहुत सुंदर चर्चा प्रस्तुति

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  7. What is the Hashemite stone?
    Hashemite stone is one of the best types of natural stone for facades and is extracted from the mountains of Egypt from different places.
    Hashemi Hesam stone, which is the best raw material of the Hashemite stone and its quality.
    Hashemite stone, which is the favorite stone of many customers because of its distinctive color.
    White Hashemite stone, which is the most wonderful stone for finishing the facades of modern homes in the best color. The price of white Hashemite stone is a very average price and suits all customers
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    How to determine the price of the Hashemite stone
    The prices of the Hashemite stone are determined according to the applicable work rules on the basis of
    type of hashimi stone
    The required stone is first or second sorting
    Workplace

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  8. सुंदर सराहनीय लिंकों का चयन, बहुत-बहुत शुभकामनाएं आदरणीय सिंह यादव जी ।

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  9. खूब आभार आपका रवीन्द्र जी....। साधुवाद। सभी रचनाएं अच्छी हैं...।

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  10. विविध विषयों पर सुंदर रचनाओं से सजा सुंदर अंक, आभार!

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  11. सभी साथियों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं।
    आदरणीय शास्त्री जी को छोड़कर कोई लिंक नहीं कूल रहा मेरे,पता नहीं क्या समस्या है, कुछ प्रबुद्ध साथी तो लिंक्स पर घूम आयें हैं ,तो शायद मेरे साथ ही ये रूकावट की समस्या है।
    खैर
    आवरण से अवलोकन करते हुए सभी रचनाएं अच्छी लग रही है सभी रचनाकारों को बधाई।
    सादर सस्नेह।

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  12. कूल को खुल पढ़ें कृपया।

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