कर्मशील भारती जी ने लिखा है क़ि ''कविता क्या कर सकती है ? इसी को आधार बना कर हम लाये है कुछ ऐसी भावाभिव्यक्तिया जो इसका उत्तर स्वयं दे देती है......अजब हैं लोग थोड़ी सी परेशानी से डरते हैं...............
**प्रीति टेलर जी को है ''एक फ़िक्र .....एक पतले कांचका गिलास था'' हम दोनों के दरमियाँ......उस पर आप इस पर हम......''
**शिकागो से राम त्यागी लिख रहे है--"शोध का सोच और आत्मनिर्भरता पर प्रभाव "
**शालिनी जी ढूढ़ रही है अपनी कविता में इस प्रश्न क़ा उत्तर
'' मन मछली क्यों तैरती है हवा में?'मन क्या करे ?"
**अब आते है कुछ और भावों पर ---यशवंत एक छोटे से सन्देश में बता रहे है क़ि ''क्या यही है हमारी आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा ?
एक प्रश्न ......क्या यही है हमारी आधुनिक और रोजगार परक शिक्षा ?
**राहुल प्रताप सिंह बता रहे क़ि ''अपने मनपसंद एप्लीकेशन;कही भी रन करो;बिना डाऊनलोड ; बिना इंस्टाल किये....वो भी ब्राउजर से.........''इण्टरनेट से बिल्कुल फ्री विज्ञापन एस.एम.एस."**
अंत में हरदीप जी क़ा ''बाल-दिवस में पढ़िए ''उसने बोर्ड पर एक अंग्रेज़ी का शब्द Nature लिख दिया । बच्चों को शब्द पढ़ने के लिए कहा । बच्चे बोले, '' लो सर यह भी कोई मुश्किल सवाल है.....आपने तो 'नटुरे ' लिखा है । आपको माने तो तब अगर आप खुशिये के सवाल का उत्तर बता दें ।''''
अब आज्ञा दीजिये ! चिंतारहित रहे-शहंशाह बने --
चाह गई;चिंता मिटी; मनुआ बेपरवाह ;
जिसको कछु न चाहिए ;ते ही शहंशाह.