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Wednesday, November 10, 2010

"विविध भाव:सुन्दर अभिव्यक्ति" (चर्चा मंच-334)

जाग जाइये भगवान आदित्य अंधकार क़ा विनाश कर उदित हो गए हैं और गगन में चहुँ ओर लालिमा छा गयी है--
उषा सुनहले तीर बरसती ;जय लक्ष्मी सी उदित हुई;
उधर पराजित कालरात्रि भी ;जल में अन्तर्निहित हुई.[श्री जयशंकरप्रसाद]
आज मैं लेकर आई हूँ विविध भावों से भरी विविध अभिव्यक्तिया---
*सबसे पहले मैं ''अजित जी' को उनके जन्मदिन की शुभकामनाये दूंगी. ''आज स्‍वीट सिक्‍सटी में प्रवेश का दिन – ''.
*वंदना जी ''मैं और मेरी पीड़ा'' में अभिव्यक्त कर रही है क़ि ''बिना पीड़ा के मुझे अस्तित्व बोध नहीं होता.
*अब आते है कुछ गंभीर मुद्दों पर--एक खबर पढ़ी भइया -दूज पर टीका करा कर लौट रहे कई भाई सड़क-हादसों के शिकार बने.इस समस्या को केंद्र में रखकर स्वराज्य करुण जी लिखते है --''बढ़ते सड़क हादसे : एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या''
*चित्र-कला; अभिनय-कला--आदि के विषय में तो आप जानते ही है पर ''सतीश पंचम जी'' बता रहे है ''बर्तन मांजना भी एक कला है''.
ये समझदारी अच्छी नहीं होती .
*शिखा वार्ष्णेय जी क़ा ''टूटते देश में बनता भविष्य.(मेरा रूस प्रवास.) बताता है रूस में प्रवर्तित होते हालातों को.
** कुछ और लिंक्स भी है विविध भावों को अभिव्यक्त करते हुए --

--'एक ये भी दिवाली..'
--'बिन धुँआ, बिन धमाका, हरियाली सी इक दीवाली''
--''क्या ऐसे होगा देश निर्माण ???".
--"भूकम्‍प का ग्रह योग 16 नवंबर 2010 को सर्वाधिक प्रभावी होगा !"
--"यूँ नही हम ऐसे "
--"मृत्यु में सौन्दर्य का बोध -"
--"दर्शन कर लो बारम्बार।*ये गुरूनानक का दरबार।"
--"'दिमाग की बत्ती' जलने में 20 लाख साल लग गए!"
--"“जन्मदिवस:उत्तराखण्ड”
--"कार्टून:- अब इस जीने का क्या फ़ायदा लल्लू -"
--"मित्र - बीना अवस्थी बस स्टाप के समीप स्थित पार्क में तुषार और उसके मित्र बैठे थे। अचानक बड़ी तेज आवाज हुई। वातावरण को दहलाने वाली। ....धड़ाम। "
--एस.एम.एस बन जाते हैं कँवल
इसके साथ ही मुझे अनुमति दीजिये..आज क़ा दिन आप सभी के लिए शुभ व् मंगलकारी हो--
और यह क्या तुम सुनते नहीं विधाता क़ा मंगल वरदान;
''शक्तिशाली हो; विजयी बनों''विश्व में गूंज रहा जय गान.
डरो मत अरे अमृत संतान अग्रसर है मंगलमय वृद्धी ;
पूर्ण आकर्षण जीवन केंद्र खिची आवेगी सकल समृधि.[श्री जयशंकर प्रसाद]

19 comments:

  1. सच में विविध भावों की सुंदर अभिव्यक्ति रही आज की चर्चा शिखा .....सभी लिनक्स अच्छे .....धन्यवाद

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  2. सराहनीय सार-संकलन के साथ एक सुंदर प्रस्तुतिकरण.मेरे आलेख को भी आपने जगह दी . आभार .

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  3. vividh bhavon ki abhivyakti vakai vividhtayukt aur prabhavi hai.

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  4. सुंदर रही आज की चर्चा ....

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  5. आपका अन्दाज़ बेहद खूबसूरत है……………हर बार नये रंग समाहित होते हैं……………काफ़ी अच्छे लिंक्स्………………आभार्।

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  6. बहुत अच्छी चर्चा ...अच्छे लिंक्स मिले .

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  7. बहुत बढ़िया लिंक्स!

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  8. jayshankar prasad ji ki panktiyon se shuruwat aur ant ke beech vividhta liye bahut sundar charcha!!!

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  9. अच्छी चर्चा ,आभार ।

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  10. बहुत अच्छे लिंक्स. सुंदर एवं सार्थक चर्चा. आभार.
    सादर,
    डोरोथी.

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  11. सहज, सुंदर और रोचक चर्चा।

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  12. ाच्छे लिंक्स । अच्छी चर्चा। बधाई।

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