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रविवार, अक्टूबर 13, 2019

' गहरे में उतरो तो ही मिलते हैं मोती ' (चर्चा अंक- 3487)

स्नेहिल अभिवादन
चर्चामंच की रविवारीय प्रस्तुति में आप का हार्दिक स्वागत है 
पेश है हाल ही में प्रकाशित पसंदीदा रचनाओं के लिंक एवं अंश | 
"अंत:सलिला की गहराई  में, कुरेदने से मिलते हैं,  
अपार स्नेह नीर के स्रोत , पनपती  है, 
अनदेखी अनकही, बँधुत्व की  पीर, 
अंत:सलिला-सा है, चंचल चित्त  "
- अनीता सैनी 
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 मकरंद 
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जलंधर  
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अहंकार के आँगन में त्रिदेवों को ललकार रहा है , 
अनुनय- विनय वचन प्रार्थना सबको ठोकर मार रहा है।
 आज बहुत चिंघाड़ रहा है बदला - भाव दर्शाने को , 
आज जलंधर फिर आया है हाहाकार ---
हिन्दी-आभा*भारत 
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खुशखबरी - जोगनी गंध  

 sapne(सपने) 
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"त्रिवेणी"  
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गहरे में उतरो तो ही मिलते हैं मोती ।
उथले में तो काई-गारा ही हाथ लगता है

उत्कृष्टता वक्त और हुनर मांगती है ।। मंथन ------
गुफ्तगूँ  
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साँसों की गुफ्तगूँ में
गुस्ताख़ी नजरों की हो गयी
खुले केशवों की लटों में
अरमानों की ताबीर खो गयी
RAAGDEVRAN 
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सच्चाई ज़िन्दगी  
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काश जिंदगी के जद्दोजहद में
सच का आईना भी लगा लेते
हम कभी गलत न थे
अपने आप पहचान लेते
मेरी भावना 
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बचपन....  

तुमसे जुड़े हर नाम से सुखद पय ही तो 
रिसता पाया! 
धूप हो, बारिश हो, सर्दी हो या गर्मी 
तुमने जीवन को सदा उमंगों से सजाया! 
मेरा विद्यालय 
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इश्क़ के परचम बेहतर हैं ..... 
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तेरी नज़रों से देखा ,
पाया कुछ तो हम बेहतर हैं
 तुझसे फिर भी जानेजां कुछ तो हम कम बेहतर हैं
 डरना क्या अब ज़ख्मों से 
एहसास अंतर्मन  
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तुम कहाँ गए बापू 
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आज़ादी हुई कितनी पुरानी
पर भारत की वही कहानी -2
रोता ठगा हुआ किसान
सूली पर लटक रहा
तुम कहाँ गए बापू….
 आत्म रंजन 
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इंद्रधनुष बन जाओगे क्या! 



दिन भर की थकान से बदन टूट जाता है, 
शाम को घर आने पर मेरे पाँव दबाओगे क्या 

iwillrocknow:nitish tiwary's blog. 
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अपनी लाश का बोझ उठाऊं, नामुमकिनमौत से पहले ही मर जाऊं, नामुमकिन- अमन चाँदपुरी अरुण कुमार निगम (हिंदी कवितायेँ) 
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श्रद्धांजलि  "अमन चाँदपुरी" 
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आज  का सफ़र यहीं तक 
फिर मिलेंगे आगामी शनिवार, रविवार।  
अपनी बहुमूल्य समीक्षा अवश्य दें 🙏 |