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मंगलवार, सितंबर 03, 2013

"उपासना में वासना" (चर्चा मंचःअंक-1358)

मित्रों!
आज मंगलवार की चर्चाकार श्रीमती राजेश कुमारी जी के पास लैपटॉप नहीं है। इसलिए सोमवार की चर्चा में मेरी पसंद के कुछ लिंक देखिए।
 (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
उपासना में वासना, मुख में है हरिनाम।
सत्संगों की आड़ में, करते गन्दे काम।।
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इत्ती सी हंसी, इत्ती सी खुशी, इत्ता सा टुकड़ा चाँद का...

मेरे अनुभव पर Pallavi saxena

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आस्था....धर्मवीर भारती


मेरी धरोहर पर yashoda agrawal
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My Photo
एकांत में एकदम चुप कँपते ठंडे पड़े हाथों को आपस की रगड़ से गरम करती वो शांत है ना भूख है ना प्यास है बस बैठी है उड़ते पंछीयों को देखती घास को छूती तो कभी सहलाती और कभी उखाड़ती है जिस पर वो बैठी है उसी बग़ीचे में जहाँ के फूलों से प्यार है पर वो फूल सूख रहें हैं धीरे धीरे ...
स्पर्श पर Deepti Sharma
 
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एक पुराना टुकड़ा मिला, हृदय के बहुत करीब है यह… इसे यहाँ लिख कर रख लेना चाहिए.  जाने फिर कलम यह लिख पाए या नहीं, जाने कविता फिर हमसे कभी यूँ कुछ कह पाए या नहीं…! 

कविता ने जिस क्षण यह कहा था, उसे स्मरण करते हुए…  उस पल को जीते हुए, सहेज लेते हैं यहाँ भी, वह क्षण और कविता का कथ्य, दोनों ही...

अनुशील पर अनुपमा पाठक
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"लिंक-लिक्खाड़"
सिखा वक्त की मार दे, रविकर बात तमाम | 
जब तक जीवनसार दे, लेत लकुटिया थाम...
"लिंक-लिक्खाड़" पर रविकर 
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तू अक्सर कहा करती थी वक़्त की मार का इलाज 
हकीम लुकमान के पास भी नहीं ...    
समय की करनी के आगे सर झुकाना पड़ता है ... 

सही कहती थी माँ 
समय के एक ही वार ने हर बात सिखा दी 
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प्रेमरस.कॉम पर Shah Nawaz
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रविकर की कुण्डलियाँ
गलती का पुतला मनुज, दनुज सरिस नहिं क्रूर |
मापदण्ड दुहरे मगर, व्यवहारिक भरपूर |...
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खूँटी पर लटका दिया ,भीतर नहीं प्रकाश 
पर मेरे तुम काट कर ,निगल गए आकाश...
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बाबा का साक्षात्कार

प्रश्न .....बाबाजी आपके ऊपर यौन शोषण और दुष्कर्म के इलज़ाम लगे हैं, इस पर आपको क्या कहना है ? बाबा जी ....आप लोगों की सांसारिक शब्दावली हमारे पल्ले नहीं पड़ती | आप लोग जिसे शोषण कहते हैं हमारे यहाँ उसी को पोषण कहा जाता है | और दुष्कर्म हम नहीं करते | हम तो बस कर्म करते हैं, जिसके आगे आप लोग दुर्भावना से ग्रसित होकर के दुष लगा देते हैं वैसे ये सब हमारे दुश्मनों का कर्म है हमें फंसाने केलिए | प्रश्न .....बाबाजी आप गिरफ्तारी से बचने के लिए भागे - भागे क्यूँ फिर रहे हैं ? बाबाजी .... मुर्ख प्राणी ! हम क्यूँ भागेंगे ? भागता तो आम इंसान है....
सादर ब्लॉगस्ते! पर rachna
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गौ ह्त्या , गो हत्यारे

ZEAL

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कशमकश
कभी कभी परिस्थितियाँ इन्सान को बचपन में ही सयाना बना कर जिम्मेदारियां थमा देती हैं. मोहन भगत जब सात साल का था, तभी पिता का साया सिर से उठ गया. उस समय उसकी दो छोटी और दो बड़ी बहनें सभी नाबालिग थी. इसके अलावा घर में पाँच बड़ी सयानी अनब्याही बुआयें भी थी, पर माँ बहुत जीवट वाली थी. परिवार की गाड़ी रुकी नहीं. बुरा समय भी कट जाता है, हिम्मत रखनी होती है....
जाले पर पुरुषोत्तम पाण्डेय

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आसाराम पे अंधविश्वास क्या हम दोषी नहीं हैं?
ख़बरों की मानें तो जब 15 अगस्त के दिन पूरा हिन्दुस्तान आजादी दिवस मना रहा था आसाराम बापू जी धर्म के नाम पे खुद को मिली आजादी का जश्न एक नाबालिग़ लड़की के साथ बेशर्मी कर के मना रहे थे | और तो और उस लड़की की माँ का इन आसाराम पे इतना अन्धविश्वास था की उसी कमरे के दरवाज़े पे बैठी बाबा के कहे अनुसार तंत्र-मंत्र अनुष्ठान में जप के लिए बाहर बैठी थीं। 15 अगस्त को आश्रम में तांत्रिक अनुष्ठान के आयोजन से पहले आसाराम ने लड़की के माता-पिता से बात की थी। आसाराम ने पीड़िता के माता-पिता से कॉटेज के बाहर गेट के बगल में बैठकर ध्यान लगाने के बाद जाने को कहा था...
अमन का पैग़ाम

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O Arjuna !Of these three Gunas Sattva being 
pure is luminous and wholesome
आपका ब्लॉग
आपका ब्लॉग पर Virendra Kumar Sharma

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कार्टून :- बाबा अभी बि‍ज़ी है

काजल कुमार के कार्टून

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कामिनी के श्रृंगार कभी
जीवन से तो मोह बहुत पर फीका है संसार 
कभी लगते हैं कुछ दिन फीके तो आ जाते त्योहार 
कभी सूरज आस जगाने आता और चाँदनी मुस्काती 
पल कुछ ऐसे भी मिलते जब बढ़ जाता है प्यार...
मनोरमा पर श्यामल सुमन

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क्या हश्र हुआ शाहजहाँ के तख्ते ताऊस 
या मयूर सिंहासन का ?

कुछ अलग सा

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शायद आपमें से कोई सुझा पाये 
जानती हूं कि मुझे class में बच्चों के सामने इस तरह नहीं रो देना था... यूं कमज़ोर हो कर टूट नहीं जाना चाहिये था. पता नहीं मेरा उन पर स्नेह था या उनकी सज़ा की वज़ह होने की ग्लानि कि मैं आंसुओं को रोक ही नहीं पायी. उस orphanage cum school की दीवारें ज्ञान से र्ंगी हुई हैं... ये आश्रम बाल गोपालों का निवास है... बच्चों की सेवा, प्रभु की सेवा .. वगैरह वगैरह....
मन के झरोखे से...पर monali 

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"बसन्त"
अपने काव्य संकलन सुख का सूरज से
एक गीत

हर्षित होकर राग भ्रमर ने गाया है!  
लगता है बसन्त आया है!!...
सुख का सूरज
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"उपासना में वासना"
समाज
इस ब्लॉग पर सभ्यता के साथ चोरी की जाती है!
  1. इस प्रकार से अपनी रचनाएँ प्रकाशित करने की मैं अनुमति नही देता हूँ।
    मेरे नाम और ब्लॉग के लिंक के साथ प्रकाशित कीजए मेरी रचनाओं को।
    नहीं तो इस पोस्ट को हटा दीजिए।
    ReplyDelete
  2. अब आप यह तर्क मत देने लगना कि "Labels: डॉ0 रूपचन्द्र शास्त्री मयंक, यौन अपराध, सामाजिक" में आपका नाम है।
    --
    लेबिल में भी क्लिक करने से समाज ही खुल रहा है।
    मेरा लिंक है कहाँ मान्यवर।
    --
    तुरन्त हटाइए इस पोस्ट को या मेरे नाम और ब्लॉग का लिंक दीजिए।
    अन्यथा यह सभ्यता के दायरे में की गयी चोरी मानी जायेगी

सोमवार, सितंबर 02, 2013

प्रभु से गुज़ारिश : चर्चामंच 1356

..शुभम दोस्तो..
मैं 
सरिता भाटिया
हाजिर हूँ 
चर्चा मंच 1356 पर 
सितम्बर माह की 
पहली सोमवारीय चर्चा 
लेकर  

बच्चा नहीं जच्चा 


हालात से दो दो हाथ 

मिटटी का दीपक 


बुतों से अर्जे हाल 

पाता पोती दुष्ट 


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मैंने तो अपनी भाषा को प्यार किया है 


भगवत गीता दूसरा अध्याय 

मूक अहसास 


नालायक बनने में ही आदमी का बचाव 

मुक्तक 


बलात्कारी और मनमर्जी 

आपको..प्रेम संस्मरण 

दोस्तो कीजिए विदा 
एक मेरी पसंद का गीत सुनते हुए 

बड़ों को नमस्कार 
छोटों को प्यार 
..शुभविदा ..
मित्रों!
अभी मेरा ब्रॉडबैंड खराब ही है,
लेकिन प्रयास है "मयंक का कोना"
स्लोकनक्शन से लगाने का...!
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समाज की बलि चढ़ती बेटियां

समाज पर Kartikey Raj 

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कंकरीट के जंगल

मेरा मन पंछी सा पर Reena Maurya

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मैं अतीत के पन्ने नही पढ़ती ..

Rhythm पर नीलिमा शर्मा 

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माखनचोर- हाइगा में

हिन्दी-हाइगा पर ऋता शेखर मधु 

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न्याय-अन्याय

अंतर्नाद की थाप पर Kaushal Lal

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मत चींखो मत लड़ो दामिनी

कागज मेरा मीत है, कलम मेरी सहेली.

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कार्टून :- सो रहे थे क्‍या ?

काजल कुमार के कार्टून
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"दो और दो पांच" में एम. ए. शर्मा ’सेहर’

ताऊ डाट इन

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"रंग-बिरंगे छाते" 
"हँसता गाता बचपन" से
एक बालकविता
"रंग-बिरंगे छाते"
कई दिनों में वर्षा आई,
जाग गई मन में उमंग हैं।
भाई-बहन दोनों ही खुश हैं,
दो छातों के अलग रंग हैं।।
हँसता गाता बचपन
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"दोहे-कुंठित हुआ समाज"
धार लबादा सन्त का, करते पापाचार।
कश्ती को अब धर्म की, कौन करेगा पार।।
उच्चारण
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"बहुत काम का"
बालकृति "नन्हें सुमन" से
एक बालकविता

नौकर है यह बिना दाम का।
वफादार है बड़े काम का।।
नन्हे सुमन

रविवार, सितंबर 01, 2013

तुम गोकुल में मत आना: चर्चा मंच-1355


"जय माता दी" रु की ओर से आप सबको सादर प्रणाम. चलते हैं आप सभी के चुने हुए प्यारे लिंक्स पर.

प्रस्तुतकर्ता : Sadhana Vaid


प्रस्तुतकर्ता : Naveen Mani Tripathi

प्रस्तुतकर्ता : Kiran Arya
प्रस्तुतकर्ता : Ranjana Bhatia

प्रस्तुतकर्ता : Aarsi Chauhan
प्रस्तुतकर्ता : प्रतिभा सक्सेना
प्रस्तुतकर्ता : शकुन्‍तला शर्मा
प्रस्तुतकर्ता : सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
प्रस्तुतकर्ता : प्रवीण पाण्डेय
प्रस्तुतकर्ता : निहार रंजन
प्रस्तुतकर्ता : Sehar
प्रस्तुतकर्ता : Dr. Pratibha Sowaty

प्रस्तुतकर्ता : Asha Saxena

प्रस्तुतकर्ता : Hitesh Rathi


प्रस्तुतकर्ता : Rekha Joshi


प्रस्तुतकर्ता : रेखा श्रीवास्तव


प्रस्तुतकर्ता : Neeraj Kumar


प्रस्तुतकर्ता : Aamir Dubai


प्रस्तुतकर्ता : काजल कुमार

इसी के साथ आप सबको शुभविदा मिलते हैं रविवार को. आप सब चर्चामंच पर गुरुजनों एवं मित्रों के साथ बने रहें. आपका दिन मंगलमय हो


जारी है 'मयंक का कोना'

प्रधानमंत्री जी को गुस्सा क्यों आता है !

पूरण खण्डेलवाल at शंखनाद -  







दिखा अंगूठा दे खुदा, करता भटकल रोष-रविकर 

दिखा अंगूठा दे खुदा,  करता भटकल रोष |
ऊपर उँगली कर तभी, रहा खुदा को कोस |

रहा खुदा को कोस, उसे ही करे इशारा |
मारे कई हजार, कहाँ है स्वर्ग हमारा |

रविकर दिया जवाब, मिला जो जेल अनूठा |
यही तुम्हारा स्वर्ग, चिढ़ा तू दिखा अंगूठा ||  

टला फैसला दस दफा, लगी दफाएँ बीस |
अंध-न्याय की देवि ही, खड़ी निकाले खीस |

खड़ी निकाले खीस, रेप वह भी तो झेले |
न्याय मरे प्रत्यक्ष, कोर्ट के सहे झमेले |

नाबालिग को छूट, बढ़ाए विकट हौसला |
और बढ़ेंगे रेप, अगर यूँ टला फैसला ||