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बुधवार, सितंबर 03, 2014

प्यार, इंसान, कुत्ता और भगवान; चर्चा मंच 1719

सरिता भाटिया 
Asha Saxena
Upasna Siag 

डॉ. जेन्नी शबनम 
सुशील कुमार जोशी 



--
 
भौंहें वक्र-कमान न कर
लक्ष्यहीन संधान न कर
--
ओछी हरक़त करके बन्दे
दुनिया को हैरान न कर..
(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


savan kumar 


 
alok chantia 

Brijesh Neeraj 

Prabodh Kumar Govil 
रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 

प्यार, इंसान, कुत्ता और भगवान !!

Anurag Anant
Virendra Kumar Sharma




yashoda agrawal

मेरी धरोहर
--
वजूद 

काव्यान्जलि पर 

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया 
काजल कुमार Kajal Kumar

मंगलवार, सितंबर 02, 2014

खटीमा (उत्तराखण्ड) का पावर हाउस बह गया ; चर्चा मंच-1724

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 

Kumar Gaurav Ajeetendu 
noreply@blogger.com (पुरुषोत्तम पाण्डेय)
noreply@blogger.com (विष्णु बैरागी)

नीरज गोस्वामी 

कूड़े के ढेर पर विद्यार्थीसिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी 
 
shashi purwar
SANDEEP PANWAR
 
 

सोमवार, सितंबर 01, 2014

"भूल गए" (चर्चा अंक:1723)

मित्रों नमस्कार!
कर्मचारियों और अधिकारियों की लापरवाही से 
दिनांक 31-08-2014 की रात को 2-30 AM पर 
उत्तराखण्ड खटीमा का सबसे पुराना पावर हाउस बह गया।
जिसके कारण पूरा क्षेत्र अन्धकार में डूब गया है।
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विदित हो कि लोहियाहेड पावरहाउस 
खटीमा से मात्र 5 किमी दूर है। 
शारदा मुख्य नहर पर यह पावरहाउस सन् 1955 में बना था।
इसकी विशेषता यह थी कि सबसे कम लागत पर 
विद्युत का उत्पादन करता था।
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दिनांक 31-08-2014 की रात को 2-30 AM पर 
अचानक नहर में पानी बढ़ गया 
और कर्मचारी/अघिकारी निद्रा पड़े हुए सोते रहे।
जिसके कारण पानी बिजलीघर के बाँध को तोड़कर
लोहियाहेड कालोनी को बहाकर ले गया।
इससे स्थानीय निवासियों में हड़कम्प मच गया।
लोग अपना घर बार छोड़कर 
जहाँ भी उनको सुरक्षित स्थान मिला 
वहाँ पर चले गये और कुछ 
इस अचानक आयी आपदा  में
कालकवलित भी हो गये।
विद्युत आपूर्ति बाधित है।
पता नहीं कब इन्वर्टर भी धोखा दे जाये।
इसलिए त्वरित चर्चा में 
मेरी पसंद के कुछ लिंक देखिए।
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देखिए आज के कुछ ताजा चित्र-

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गणपति वन्दना (चोका ) 

अनुभूति पर कालीपद "प्रसाद
--

लव जेहाद

Shabd Setu पर 
RAJIV CHATURVEDI
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धर्म जीवन को संवारता है गढ़ता है । 
अंहकार का भाव ना रखूं , 
नहीं किसी पर खेद करूं । 
देख दूसरों की बढ़ती को 
कभी ना ईष्या भाव धरूं ...
रसबतिया पर- सर्जना शर्मा-
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बताएं क्या तुम्हें ? 

इश्क़ के मानी बताएं क्या तुम्हें 
राह अनजानी बताएं क्या तुम्हें...
साझा आसमान पर Suresh Swapnil 
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जाना चाहती हूँ


जाना चाहती हूँ दूर बहुत
इस भव सागर से
सब कार्य पूर्ण हो गए
जो मुझे करने थे |
अब मन नहीं लगता
किसी भी कार्य में
कोई उत्साह नहीं शेष
थके हुए जीवन में 
Akanksha पर Asha Saxena 
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उतरप्रदेश में लगातार बिगडती स्थतियाँ 

चिंताजनक है !! 

शंखनादपरपूरण खण्डेलवाल
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प्रिय तुम्हारी मादकता में 

प्रिय तुम्हारी मादकता में, 
सारी बातें भूल गए  
गुज़रे कब ये सूरज चँदा, 
दिन और रातें भूल गए...
हालात-ए-बयाँ पर अभिषेक कुमार अभी 
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भारत सेक्स क्रांति के कगार पर! 

काव्य मंजूषा पर स्वप्न मञ्जूषा
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मेरा खाता - भाग्‍य विधाता 

मनोज कुमार श्रीवास्तव
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भविष्य की दुनिया बदल देंगी 

यह उभरती तकनीकें 

मोबाइल डॉक्टर -भविष्य की दुनिया
ज़िंदगी के मेलेपरबी एस पाबला 
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वृंदा की अद्भुत छवि 

निर्झर पर Brijesh Neeraj 
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साईं पर सियासत या साजिश ... 

manisha sanjee
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कुछ यूँ भी....!!! :) 

♥कुछ शब्‍द♥ पर निभा चौधरी
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ठेसियत की ठोसियत 

Smart Indian
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उर्दू बहर पर एक बातचीत : 

किस्त 09 

अहबाब-ए-महफ़िल !
बहुत दिनों बाद एक बार फिर इस ब्लाग पर हाज़िर हो रहा हूँ। ताख़ीर[विलम्ब] के लिए माज़रतख्वाह[क्षमा प्रार्थी] हूँ। दीगर कामों में मसरूफ़[व्यस्त] था। माहिया निगारी और तन्ज़-ओ-मिज़ाह को माइल [ आकर्षित] हो गया था ।मुझे लगा कि उर्दू बहर पर इस मज़्मून का कोई तलबगार नहीं है तो दीगर अक़्सात के लिए हौसला न हुआ । हमारे एक हिन्दीदाँ  दोस्त ने जब यह कहा कि इन मज़ामीन से वो काफी मुस्तफ़ीद हुए है और कुछ कुछ ग़ज़ल कहने का ज़ौक़-ओ-शौक़ पैदा हो रहा है तो मैं जज़्बाती हो गया कि कोई तो है जो इस मज़ामीन से मुस्तफ़ीद हो रहा है ,यही  सोच कर फिर आ गया हूँ अब ये सिलसिला चलता रहेगा। ख़ुदा इस कारफ़रमाई की तौफ़ीक़ अता करे...
आपका ब्लॉग पर आनन्द पाठक 
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"आदमी और सौर मण्डल"

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आदमी

घूमता है
तारा बन
अपने ही
बनाये
सौर मण्डल
में... 

"गीत-दो शब्द"

अब कैसे दो शब्द लिखूँ, 
कैसे उनमें अब भाव भरूँ?
तन-मन के रिसते छालों के, 
कैसे अब मैं घाव भरूँ?

मौसम की विपरीत चाल है,
धरा रक्त से हुई लाल है,
दस्तक देता कुटिल काल है,
प्रजा तन्त्र का बुरा हाल है,
बौने गीतों में कैसे मैं, 
लाड़-प्यार और चाव भरूँ?
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आटे की कुरकुरी चकली 

आपकी सहेली पर jyoti dehliwal -
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कार्टून :- उलटबॉंसी का योग 

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"कार्टूनिस्ट अनिल भार्गव का कार्टून-7" 

आम आदमी की सुबह ऐसे होती है!