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बुधवार, फ़रवरी 21, 2018

मंगलवार, फ़रवरी 13, 2018

दही जमाना छोड़ के, रही जमाती धाक; चर्चामंच 2877


पत्नी-पीड़ित संघ का प्रतिवेदन

रविकर 

बच्चों को नहला धुला, करता हूँ तैयार। 
फिर भी नहला पर रही, बीबी दहला मार।।
रहे पड़ोसी तभी कुँवारा।

‘कुछ’ न होने में ही सुख है

Anita 

या चले तो तीर सीनःपार होना चाहिए

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ 

औरत

Rewa tibrewal 

किताबों कीदुनिया -164

नीरज गोस्वामी 

From My Book " Dil banjara...."

Dr Varsha Singh 

स्याही से नहीं रुहानी लिखना.....कुसुम कोठारी

yashoda Agrawal 

फोटो-यात्रा-3: एवरेस्ट बेस कैंप - पशुपति दर्शन और आगे प्रस्थान

नीरज मुसाफ़िर 

दोहे "शिव-शंकर का ध्यान" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 

चुनाव का प्रस्थान-बिन्दु है मोदी का भाषण

pramod joshi 

कार्टून :- छि‍

Kajal Kumar 

बुधवार, फ़रवरी 07, 2018

"साहित्यकार समागम एवं पुस्तक विमोचन"; चर्चामंच 2872

मित्रों!
कल चार फरवरी, 2018 रविवार को
मेरे 68वों जन्म दिन पर मेरी सातवीं और आठवीं प्रकाशित पुस्तकों (स्मृति उपवन और ग़ज़लियात-ए-रूप) का विमोचन सम्पन्न हुआ।

इस अवसर पर डॉ. राकेशचन्द्र रस्तोगीः अध्यक्ष एवं प्रबन्ध निदेशक, खटीमा फाइबर्स कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे तथा अध्यक्षता राणाप्रताप इण्टर कॉलेज के प्रबन्धक  आदरणीय गीता राम बंसल ने की। समारोह का शुभारम्भ संगीत के जाने-माने हस्ताक्षर आदरणीय श्री श्रीभगवान मिश्र ने किया और स्वागत गान राज.आ.प.विद्यालय के 4 छात्रों द्वारा प्रस्तुत किया गया।
पुस्तकों के विमोचन के उपरान्त सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें साहित्य 
शिरोमणि से अलंकृत होने वालों में- डॉ. सुभाष चन्द्र वर्माःप्राचार्य-राजकीय महाविद्यालय, सितारगंज, डॉ. राजविन्दर हिन्दी विभागाध्यक्ष-राजकीय महाविद्यालय, सितारगंज, प्रो.वाचस्पति अवकाशप्राप्त हिन्दी विभागाध्यक्ष-राजकीय महाविद्यालय, वाराणसी, डॉ. सिद्धेश्वर सिंह हिन्दीविभागाध्यक्ष-राजकीय महाविद्यालय, बनबसा (चम्पावत), डॉ. जगदीशचन्द्र पन्त कुमुद थे।साहित्य श्री से अलंकृत होने वालों में डॉ. पुष्पा जोशी प्राकाम्य, श्रीमती राधा तिवारी "राधेगोपाल" थीं। श्रीमती अमिता प्रकाश असिस्टेंट प्रो. राजकीय स्नातकोत्तर महा विद्यालय, द्वाराहाट को  कथा शिरोमणि से अलंकृत किया गया।
गोसंवर्धन में उत्कृष्ट कार्य के लिए श्री मुन्नालाल आर्य को 
गोपाल शिरोमणि से अलंकृत किया गया। मंच संचालन और तकनीक के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए श्री अमन अग्रवाल मारवाड़ी को साहित्य भूषण से अलंकृत किया गया। श्री मनोज कामदेव तथा श्री अनिल शुक्ल अनिल को दोहा शिरोमणि से अलंकृत किया गया। साथ ही श्री जगदीश प्रसाद शुक्ल को संगीत श्री डॉ. विश्व मित्र शास्त्री को संग्त श्री तथा श्री राजेन्द्र अवस्थी किंकर को हास्य श्री से अलंकृत किया गया।
भोजनोपरान्त चले सत्र में काव्य संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया। जिसमें उपरोक्त के अतिरिक्त डॉ. मुकेश कुमार संस्कृत विभागाध्यक्ष-
राजकीय महाविद्यालय, बनबसा (चम्पावत) एड. शहाना कुरैशी, एड. डॉ. एम. इलियास सिद्दीकी, शुभांकर शुक्ला, सुश्री मनीषा उपाध्याय, श्रीमती राधा तिवारी 'राधेगोपाल', बालकवि आकाश, श्री दुर्बल सिंह बिन्द आदि ने अपना काव्यपाठ प्रस्तुत किया और इस संगोष्ठी की अध्यक्षता राज.आ.प.विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री आर.डी.जोशी ने की।
समारोह की चित्रावली निम्नवत् है-




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गीत  

''जन्मदिन पर प्यार का उपहार दें हम'' 

परम श्रद्धेय गुरु जी डॉक्टर रूपचन्द्र शास्त्री जी को 
जन्मदिन की हार्दिक बधाई देते हुए 
ईश्वर से प्रार्थना करती हूं कि आप 
सदा हँसते-मुस्कुराते रहें और दीर्घायु हों। 
मैं राधा तिवारीराधे गोपाल अपने मनोभावों को 
अपनी कविता के माध्यम से आपको समर्पित करती हूँ।.
जन्मदिन पर प्यार का उपहार दें हम
क्या भरे जल सिंधु को रसधार दें हम

बाँटता खुशियाँ चतुर्दिक जो सभी को
उस चमन को कौन सा आहार दें हम
जन्मदिन पर प्यार का उपहार दें हम... 
RADHA TIWARI  
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देह तक सिमटे  

''कथित फरिश्‍ते'' 

अब छोड़ो भी पर Alaknanda Singh  
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मेरी दोस्त डॉली का जन्मदिन और  

हमारी दोस्ती की अनोखी कहानी 

नन्ही कोपल पर कोपल कोकास  
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एक साथ चुनाव की सोच निरंकुशता का प्रतीक 

राम शिरोमणि शुक्ल  

क्रांति स्वर पर विजय राज बली माथुर 
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अनजाने में जूते हमारी बिमारी का  

कारण तो नहीं बन रहे....! 

कुछ अलग सा पर गगन शर्मा 
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रविकर 
रखे व्यर्थ ही भींच के, मुट्ठी भाग्य लकीर। 
कर ले दो दो हाथ तो, बदल जाय तकदीर।। 

प्रेम परम उपहार है, प्रेम परम सम्मान। 
रविकर खुश्बू सा बिखर, निखरो फूल समान।। 
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प्रतुल वशिष्ठ  
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Dr.pratibha sowaty 
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Dr.J.P.Tiwari 
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Deepak Saini 
 Aarzoo 
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haresh Kumar 
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Kirtish bhatt 
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Dr Varsha Singh 
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yashoda Agrawal 
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दिल से निकली भावना, है सच्चा उपहार।
जन्मदिवस पर सभी का, करता हूँ आभार।।
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वही चौपाल-चौबारे,
वही गलियाँ, वही द्वारे,
मगर इन्सान बेदम हैं!
दिलों में उल्फतें कम हैं!!

वही गुलशन वही कलियाँ,
वही फूलों भरी डलियाँ,
घटी खुशियाँ, बढ़े ग़म हैं!
दिलों में उल्फतें कम हैं!!
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