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शनिवार, दिसंबर 03, 2016

"करने मलाल निकले" (चर्चा अंक-2545)

मित्रों 
शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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ग़ज़ल  

"करने मलाल निकले" 

ये पात-पात निकलेवो डाल-डाल निकले
मुर्दार बस्तियों मेंलेकर मशाल निकले 

परदेशियों के आगेघुटने वो टेकते हैं,
ईमान के शिकारीगठरी खँगाल निकले ... 
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तोता और उसकी पर्ची 

सोशल मीडिया में यह खबर गरम है कि साहेब के पास एक पर्ची निकालने वाला तोता है. हमें पता चला है कि वो तोता उन्हें उनके एक खास दोस्त ने गिफ्ट किया था और तब से वो तोता साहेब के साथ उनके घर पर ही रहता है और साहेब उसी तोते से पर्ची निकलवा कर नित नई घोषणा करते हैं. आज सुबह जब साहेब जागे तब तोता बोला...’जिओ’ साहेब ने समझा कि तोता आशीष दे रहा है इतना अच्छा बहादुरीपूर्ण अथक काम करने के लिए ... साहेब भावुक हो उठे कि और कोई समझे न समझे, कम से कम यह पंछी तो समझ रहा है. आँख में नमी एवं अवरुद्ध कंठ लिए अनु्ग्रहित होने वाले ही थे कि तोता हँसा और बोला ...अब ३१ मार्च तक फ्री :) ... 
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तुम क्या जानों आग , 

कभी जले हुए नहीं हो - 

*दौर बीता सदियाँ बीतीं तुम वहीं पड़े हो 
तुम जग नहीं सकते,सबब सोये हुए नहीं हो 
जली हुई देह ही, बया करती है जलन को 
तुम क्या जानों आग ,कभी जले हुए नहीं हो ... 
udaya veer singh 
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सर्दी ने दी दस्तक  

पहला कोहरा देखने को मिला 

सर्दी ने दी दस्तक इस साल का पहला कोहरा छाया 
5-7 फिट से आगे का कुछ नही दे रहा है दिखाई। 
सबसे अनुरोध है की इस कोहरे व सर्दी से 
छोटे बच्चों बचा कर रखे और 
साथ साथ अपने स्वास्थय का भी ध्यान रखे... 
Surendra Singh bhamboo 
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For you Gaurav Pande,  

IIT Indore 

अनुज गौरव के लिए 
दुष्यंत कुमार की एक महत्वपूर्ण रचना
हम पराजित हैं मगर लज्जित नहीं हैं 
हमें खुद पर नहीं न पर हँसी आती है 
हम निहत्थों को जिन्होंने हराया 
अंधेरे व्यक्तिव को अन्धी गुफ़ाओं में 
रोशनी का आसरा देकर 
बड़ी आयोजना के साथ पहुँचाया...
Sandip Naik 
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प्रार्थनाएं हमेशा एकांत मांगती हैं-  

ब्रिटनी स्पियर्स 

आज 2 दिसम्बर को ब्रिटनी स्पियर्स का जन्मदिन है. 1981 को जन्मी ब्रिटनी स्पीयर्स को हम एक पॉप सिंगर, अभिनेत्री और डांसर के रूप में तो जानते ही हैं. पिछले दिनों टाइम मैगजीन में प्रकाशित उनका एक ख़त मिला जो उन्होंने अपने बच्चों ज्यादे और प्रेस्टन को लिखा था. यह ख़त बहुत पुराना नहीं है, लेकिन इसमें कुछ है जो एक स्थापित व्यक्तित्व को अलग ढंग से देखने, महसूसने की सलाहियत देता है... 
Pratibha Katiyar 
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ढाई लाख ले लो 

ढाई लाख ले लो – ढाई लाख ले लो, की आवाजें घर-घर से आ रही हैं। कुछ दिन पहले इन्हीं घरों से आवाजें आ रही थी – मेरे 15 लाख कहाँ है – 15 लाख कहाँ हैं? अब बाजी उलट गयी है, 15 लाख की मांग की जगह ढाई लाख देने की आवाज लगायी जा रही है। महिलाओं को लुभाया जा रहा है, अरे तुम तो गृहिणी हो तुम्हें तो ढाई लाख की छूट है तो हमारे ढाई लाख ले लो। जो लोग नौकरी करते हैं, जब ये आवाजें उनके घर से भी आना शुरू हो जाए तो मन कसैला सा हो जाता है... 
smt. Ajit Gupta 
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भक्तों का नोटों का कारोबार है 

उत्तर प्रदेश विधान सभा के सामने किसान अपना आलू बांटते हुए नोट बंदी के कारण कोई खरीददार नही है 8 नवम्बर को विमुद्रीकरण की घोषणा कि जाती है लेकिन सत्तारूढ़ दल के लोगों को पहले से ही मालूम था कि एक हज़ार वा पांच सौ के नोट सरकार बंद करने जा रही है जिसके चलते उन लोगों ने अपने हज़ार व पांच सौ के नोटों को सौ, पचास, बीस व दस के नोटों के रूप में परिवर्तित कर लिया था और घोषणा होने के बाद इन लोगों ने गाँव से लेकर शहर तक एक हज़ार रुपये की नोट 600 रुपये में व 500 की नोट 300 रुपये में खरीदने का काम ज़ारी कर दिया. आज उस कड़ी में भारतीय जनता पार्टी का एक नेता 20 लाख रुपये की करेंसी के साथ पकड़ा गया ... 
Randhir Singh Suman 
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Posts of 1 Dec 16 

वित्त_मंत्रालय की गाइड लाईंन के अनुसार 
कल से फेस बुक पर कमेंट 
और लाईक की सीमा तय की गयी है

विवाहित पुरुष 2 कमेंट और 5 लाईक
विवाहित महिला 5 कमेंट 50 लाईक
अविवाहित पुरुष 5 कमेंट और 100 लाईक
अविवाहित महिला 25 कमेंट और 150 लाईक
युवा सिंगल पुरुष 50 कमेंट और 300 लाईक
युवा सिंगल महिला 100 कमेंट और 1000 लाईक
बेरोजगार लोग 24X7 कमेंट और लाईक ना करने पर फेसबुक से ब्लॉक।
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पुरुष कवि मात्र 2 कविता पेलेंगे 
महिला कवि अधिकतम 25 कविता 
और सभी को महिला कवियों पर लाईक कमेंट अनिवार्य 
अन्यथा देशद्रोह में अंदर किया किया जा सकता है। 
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ज्ञानी और विद्वान मात्र 4 ब्लॉग के लिंक 
और अखबार की कतरनें या लिंक लगा सकते है
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बुद्धिजीवी ज्यादा से ज्यादा 3 पोस्ट में ज्ञान बघारेंगे 
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सनद रहे... 


Sandip Naik 
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अपना भी ज़माना होगा अब 

है उम्मीदें दामन में , 
दर्द का न अब कोई फ़साना होगा 
न होगा इतेफाक ही कोई , 
न अब कोई बहाना होगा... 
नीलांश 
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अब हमारा यह ज़माना हो गया 

आज फिर मौसम सुहाना हो गया 
प्यार में दिल यह दिवाना हो गया ... 
Ocean of Bliss पर 
Rekha Joshi 
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नागफ़नी 

तपते रेगिस्तान में कैक्टस सीना ताने खड़ा था। गुलाब-केतकी-गेंदे की तरह उसे कभी किसी माली ने खाद-पानी नहीं दिया था, कभी उसकी कटिंग-प्रूनिंग भी नहीं हुई थी। किसी ने कभी जड़ में पानी तक नहीं दिया। वक़्त के साथ कैक्टस के कांटे तीखे हो गए थे। एकदम दरांती की तरह तेज़। और कैक्टस उर्फ नागफनी का फन नाग की तरह ज़हरीला हो गया। तेज़ धूप, गरम हवा के थपेड़े, अपने ही कांटों से छिला बदन ... 
Manjit Thakur  
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*दो कविताएँ*. 

गिरीश बिल्लोरे मुकुल 
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पुण्य-स्मरण :  

प्रफुल्लचन्द्र ओझा 'मुक्त'  

आनन्द वर्धन ओझा 

शुक्रवार, दिसंबर 02, 2016

*सुखद भविष्य की प्रतीक्षा में दुःखद वर्तमान* (चर्चा अंक-2544)

मित्रों 
शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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*बुद्ध कब मुस्कुराओगे*

बाना अलाबेद
बुद्ध कब मुस्कुराओगे

तथागत सुना है 
गुना भी है 
जब मुस्कुराते हो

तब कुछ न कुछ बदलता है 

*सीरिया की बाना अलाबेद ने* 
बम न गिराने को कहा है 
अब फिर मुस्कुराओ 
बताओ ... 
गिरीश बिल्लोरे मुकुल 
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दोहे 

"जनता है कंगाल" 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक) 

बैंक हुई कंगाल सब, किसका है ये दोष।
उसको कहें दिवालिया, जिसका खाली कोष।।
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प्रजातन्त्र में क्यों हुआ, तन्त्र प्रजा से दूर।
समझो इसके मूल में शासक को मगरूर।।
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बैंकों के बाहर लगीं, लम्बी बहुत कतार।
अपने ही धन के लिए, जनता है लाचार... 
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693 

अश्कों का आजकल कोई दाम नहीं होता।
दिल टूट भी जाए तो कोहराम नहीं होता।।

परदेस में जाकर वो हो गया है निकम्मा ;
देश में आकर फिर उससे काम नहीं होता।।

बाट जोहते-जोहते माँ दिखती है पत्थर;
अखियों के नूर का अब पैगाम नहीं होता... 
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Laxmirangam: 

स्वर्णिम सुबह 

ऐ मेरे नाजुक मन 
मैं कैसे तुमको समझाऊँ।।
अंजुरी की खुशियाँ छोड़ सदा, 

अंतस में भरकर, 
बीते जीवन का क्रंदन, 
क्यों भूल गए हो तुम स्पंदन. 
ऐ मेरे नाजुक मन 
मैं कैसे तुमको समझाऊँ... 
M. Rangraj Iyengar 
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बहुमंजिला इमारतो में 

बिजली की ठेकेदारी प्रथा 

नोयडा के बहुमंजिला भवनों में एक नयी प्रथा का चलन है, बिजली की ठेकेदारी!!! बिल्डर को बिजली का कनेक्शन दिया जाता है और बिल्डर वहाँ के रहने वाले को बिजली का कनेक्शन देता है। बिजली के बिल जमा करने का पूरा सिस्टम प्री-पेड है। आप प्रीपेड जमा करिये वो जाता है अमूमन बिल्डर के अकाउंट में। बिल्डर कब और कैसे uppcl को पैसे जमा करता है। ये केवल बिल्डर जानता है... 
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ग़ज़ल -  

इस लम्हे का हुस्न यही है 

आँखों में फ़रयाद नहीं है 
यानी दिल बर्बाद नहीं है 
मुझ को छोड़ गई है गुमसुम 
ये तो तेरी याद नहीं है... 
Ankit Joshi  
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आर्थिक फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया से 

देश का भरोसा खोता विपक्ष 

नोटबन्दी के फैसले ने देश की जनता को परेशान किया है। रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में मुश्किल हो रही है। कई जगह पर तो लोगों को बेहद सामान्य जरूरत पूरा करने के लिए बड़ी मशक्कत करनी पड़ी है। ये सब सही है। लेकिन, आम जनता की परेशानी की असली वजह क्या है, इस पर पहले बात करनी चाहिए। दरअसल आम जनता को होने वाली इस सारी परेशानी की वजह नरेंद्र मोदी सरकार का वो फैसला है, जिसके बाद 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने की जरूरत आ पड़ी। इस वजह से देश की आम जनता परेशान है। वो कतारों में है... 
HARSHVARDHAN TRIPATHI 
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सुखद भविष्य की प्रतीक्षा में 

दुःखद वर्तमान 

कल एक डॉक्टर मित्र के पास बैठा था। एक रोगी हर सवाल का जवाब बड़े ही अटपटे ढंग से दे रहा था। वह शायद शरीरिक नहीं, मनोरोगी था। तनिक विचार कर डॉक्टर मित्र ने अपनी दराज से एक शीशी निकाली और मरीज को कहा कि वह बाहर जाए और शीशी की बाम माथे पर लगा कर दस मिनिट बाद आए। मरीज ने निर्देश पालन तो किया किन्तु दस मिनिट के बजाय दो मिनिट में ही लौट आया। बोला कि उसे ललाट पर असहनीय जलन हो रही है। डॉक्टर ने बड़े ही प्यार से फटकारते हुए कहा कि वह बाहर ही बैठे और दस मिनिट बाद ही आए। मरीज ने कहा कि जलन बर्दाश्त से बाहर है, 
दस मिनिट तो क्या वह एक पल भी प्रतीक्षा नहीं कर सकता... 
विष्णु बैरागी 
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आज पहली तालीख है ... 

रेडियो सीलोंन से हर माह की पहली तारीख को किशोरदा की आवाज में ये फ़िल्मी गाना सुबह सवेरे ताजगी और उम्मीदें देकर जाता था, वो दिन वो सुबह की फिजांयें, गाने की गुदगुदी सब गायब हो गयी हैं क्योंकि आज भी रोज की ही तरह देश भर में मुद्रा के लिए फिर मारा मारी होगी. यद्यपि मोदी जी की नोटबंदी से सारा ज़माना हलकान हुआ है पर बहुत से लोग खुश भी हैं कि पड़ोसी के गुदड़ी भी खुल रही है. भ्रष्टाचार में सरोबार देश एक इन्कलाब से गुजर रहा है, सभी राजनैतिक लोग इस सैलाब में अपना अपना नफ़ा-नुकसान तलाश रहे हैं. कल रात के समाचारों में ये चिंता भी व्यक्त की जा रही थी कि नौकरीपेशा को अपनी सैलरी की रकम कैसे मिल पायेगी...  
जाले पर पुरुषोत्तम पाण्डेय 
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इतनी अफरा तरफी, हाहाकार, परेशानियाँ, व्यापार का अरबों का नुकसान, थमा सहमा कतारों में खड़ा भारत, पेटीएम का फायदा, पहले से बंद भारत को ही फिर और बंद करने की विपक्षियों की जुगत, भक्तों की भक्ति की परीक्षा (सब अव्वल नम्बर से पास कहलाये), अभक्तों की साफ साफ पहचान (कुछ जो सरेन्डर हो गये वो ग्रेस मार्क से पास माने गये, बाकी के सब फेल और स्पेशल केस में नीतिश गुड सैकेण्ड क्लास से पास घोषित). संभाले नहीं संभलते हालात, नित बदलते नियम, अदूरदर्शिता और अहम ब्रह्मा की खुले आम नुमाईश, हड़बड़ी में लिए गये सभी स्वमेव फैसले, मगरमच्छीय आँसूं और हड़बड़ाहट में छपते नकली जैसे असली और असली जैसे नकली नोट ... 

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जब से मिले तुम मुझको 

जब से मिले तुम मुझको 
मेरे ख्याल बदल गए 
जीने से बेजार था दिल 
तुम बहार बन के आ गए... 
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लिली पाण्डेय 

लिली रेलवे बोर्ड में वरिष्ठ अधिकारी हैं और कार्मिक विभाग का उत्तरदायित्व वहन कर रही हैं।बंगलुरु में उनके साथ कार्य करने का सौभाग्य मिला है। कला और साहित्य में रुचि है। रेलवे में कला के विषय पर ‘सफर” नाम की पुस्तिका की सहलेखिका भी रही हैं। उसी के आगामी अंक के लिये लिली ने एक कविता लिखी थी। पढ़ने को दी, बहुत अच्छी लगी, गुनगुनायी और हिन्दी में अनुवाद कर दी। शाब्दिक के स्थान पर भावानुवाद किया है। आप भी पढ़ें... 
Praveen Pandey 
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अपानवायु,  

कुछ रोचक जानकारी 

दीमक जैसा छोटा सा कीड़ा सबसे ज्यादा गैस उत्पादित करता है। फिर कतार में लगते हैं ऊंट, ज़ेबरा, भेड़, गाय, हाथी, कुत्ते तथा इंसान। जान कर आश्चर्य होगा कि चीन में "Professional Smeller" द्वारा गंध सूंघ कर रोगों का निदान किया जाता रहा है। इनके काम की तरह ही इनको इस काम के एवज में मिलने वाली, करीब 50000 डॉलर की रकम भी हैरतंगेज है* अपानवायु, चिकित्सा जगत में भले ही इस पर काफी कुछ लिखा, बताया या शोध किया जा रहा हो, पर रोजमर्रा की जिंदगी में और आम बोल-चाल में यह काफी उपेक्षित सा विषय रहा है। आम धारणा में यह कुछ भदेस, असुसंस्कृत, बेशऊर, फूहड़ या कह सकते हैं कि कुछ हद तक अश्लीलता की श्रेणी...  
गगन शर्मा 
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मन , 

एक बदमाश बच्चा 

मन में जाने कितनी बातें चलती रहती हैं . 
कहीं कुछ पढो तो मन करता है कुछ चुहल की जाए 
लेकिन फिर लगता है छोडो , 
गीत बनाने के दौर गुजर चुके हैं .... 
आओ हकीकतों से करो सामना ये मन , 
एक बदमाश बच्चा , 
छेड़खानी खुद करता है 
खामियाज़ा या तो दिल 
या आँखें उठाती हैं... 
vandana gupta 
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प्यार 

बिना सुने कोई बहरा 
कैसे सुन लेता है अपनी प्रेमिका की बातें...  
कैसे प्यार करता है अपनी पत्नी से 
अपने बच्चों से भी बिना संवाद के तो 
प्यार के वशी भूत मोर 
अपनी संगिनी का 
दिल मोह लिया करते है ... 
प्रभात  
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साँसों में दबी ... 

कहीं खामोश रातें हैं तो कहीं तन्हा ज़िन्दगी 
कहीं साँसों में दबी शिशकियों की आवाज़ है 
किसी के अपनत्व की तलाश में 
भटकता बावँरा ये मन 
कुछ कहने की आस में सहमते हुए दो लब...  
आज कोई तो खलल है इस मंज़र में 
शायद दिल का गुबार फटने को है 
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तड़ित 

फटे हुए एम्प्लीफायर स्पीकर की तरह गडगड़ाता बादल,  
नमी से लबालब ट्रांसफॉर्मर के कनेक्शन वाले 
मोटे तार से ओवरलोडेड पॉवर सप्लाई के कारण 
कड़ कड़ाती बिजली, जो दूर तलक़ दिख रही 
किसी रोमांटिक मूवी की बेहद ख़ूबसूरत अभिनेत्री सी... 
Mukesh Kumar Sinha 

गुरुवार, दिसंबर 01, 2016

चर्चा - 2543

आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है
चलते हैं चर्चा की ओर
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ऋता शेखर 'मधु'
फ़ोटो:
धन्यवाद