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बुधवार, अक्टूबर 28, 2020

"स्वच्छ रहे आँगन-गलियारा" (चर्चा अंक- 3868)

 मित्रों!
बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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गीत  

"आओ दूर करें अँधियारा"  

आलोकित हो चमन हमारा।
हो सारे जग में उजियारा।।
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कंचन जैसा तन चमका हो,
उल्लासों से मन दमका हो,
खुशियों से महके चौबारा।
हो सारे जग में उजियारा।। 
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परिवर्तन सब निगल चुका था 
हमने शब्दों का व्यापार करना चाहा 
परंतु शब्द भी खोखले प्रभावरहित थे 
हमारा व्यवहार संवेदनारहित 
भाव दिशा भूल ज़माने से भटक चुके थे 
शुष्क हृदय पर दरारें पड़ चुकी थी 
अब रिश्ते रिश्ते नहीं पहचान दर्शाने हेतु 
मात्र एक प्रतीक बन चुके थे 
अनीता सैनी, गूँगी गुड़िया 
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  • करवा चौथ 
  • सुख-सौभाग्य की इच्छा का संकल्प 
    होता नहीं जिसका विकल्प 
    एक ही अक्स समाया रहता 
    आँख से ह्रदय तक 
    जीवनसाथी को समर्पित 
    निर्जला व्रत  चंद्रोदय तक।  
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  • जलें दीप से दीप  
  • दीवाली त्यौहार पर, जलें दीप से दीप 
    सब अन्धकार दूर हों, हो रौशनी समीप ।
    हो रौशनी समीप, उमंग जगे हर घर में 
    करें तमस का नाश, हो उजास विश्व भर में ।
    कहे विर्क कविराय, भरे खुशियों की थाली 
    फैले हर्षोल्लास , मनाएं जब दीवाली । 
दिलबागसिंह विर्क, Sahitya Surbhi 
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कितनी सुन्दर होती धरती 
कितनी सुन्दर होती धरती, 
जो हम सब मिल जुल कर रहते 
झरने गाते, बहती नदिया,  
दूर क्षितिज तक पंछी उड़ते 
Sadhana Vaid, Sudhinama 
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परस्पर स्नेह की अमृत- धारा,
 इस  जग में जहाँ बह जायेगी। 
क्षमा, दया और करुणा ,
वहाँ स्वतः चली आएगी। 

अपरिचित को अपरिचित से ,
सहायता सुलभ मिल जायेगी। 
असहाय और दीन भावना,
स्वतः नष्ट हो जायेगी।  
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एक व्यंग्य व्यथा :  रावण का पुतला रावण वध देखने नेता आयेंगे,अधिकारी गण आयेंगे। । मंच पर वो भी आयेंगे जिन पर ’बलात्कार’ का आरोप है ।वो भी आयेंगे जिनपर ’घोटाला’ का आरोप है।वो भी आयेंगे जो ’बाहुबली’ है जिन्होने आम जनता के ’ खून’ का बूँद बूँद इकट्ठा कर अपना अपना ’घट’ भरा है । रावण ने भी भरा था। वो भी आयेंगे जो कई ’लड़कियों’ का अपहरण कर चुके है -वो भी आयेंगे जिन पर ’रिश्वत’ का आरोप है
आनन्द पाठक, आपका ब्लॉग  
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अंकगणित के बाहर 
उड़ता हुआ कोई ख़त, ड्रोंगो की तरह
कलाबाज़ी दिखाता हुआ, मेघ को
अपने हाथों, धीरे से सरकाता
हुआ, उतरे कभी अधपके
धान के दहलीज़,
ओस की बूंदों
से है लिखा
हुआ,
मेरे घर का पता, सुख गंध को तुम -
बांट देना सभी को 
शांतनु सान्याल, अग्निशिखा 
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विजयादशमी राम को आना होगा  (कविता) 
राम भक्त बनने के लिए
मन शुद्ध बुद्ध बनाना होगा।
अंतर का राम जगाना होगा
राम को आना होगा 
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गज़ल 
तूफानों में जो जल सके वो चिराग लाओ
हरसू अंधेरा ही अंधेरा  है उजाले लाओ !!

मजहब के छालों से जख़्मी तन मन होरहा
हो सके तो मोहब्बत के भरे  प्याले लाओ!! 
उर्मिला सिंह, सागर लहरें  
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संवाद :  खुशी और दुःख का 

धुंध भरी सड़क पर टहलते हुए दो रेखाओं ने 

एक दूजे को देखा और बस देखती ही रह गईं ।  

एक सी होते हुए भी कितनी अलग लग रही थीं ।  

एक मानो उगती खिलखिलाती रश्मिरथी , 

तो दूसरी निशा की डूबती सिसकी सी लग रही थी । 

दोनों के रास्ते अब एक ही थे 

और बहुत देर की ख़ामोशी से भी  

मन घबरा कर चीत्कार कर , 

कुछ भी बोलना चाहता है । 

बस उन दोनों की ख़ामोशी भी 

आपस में बात करने को अंकुरित होने लगी । 

निवेदिता श्रीवास्तव, झरोख़ा  
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विकास नैनवाल 'अंजान', एक बुक जर्नल  
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आज के लिए बस इतना ही...।
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