मित्रों!
बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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आलोकित हो चमन हमारा।
हो सारे जग में उजियारा।।
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कंचन जैसा तन चमका हो,
उल्लासों से मन दमका हो,
खुशियों से महके चौबारा।
हो सारे जग में उजियारा।।
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परिवर्तन सब निगल चुका था हमने शब्दों का व्यापार करना चाहा
परंतु शब्द भी खोखले प्रभावरहित थे
हमारा व्यवहार संवेदनारहित
भाव दिशा भूल ज़माने से भटक चुके थे
शुष्क हृदय पर दरारें पड़ चुकी थी
अब रिश्ते रिश्ते नहीं पहचान दर्शाने हेतु
मात्र एक प्रतीक बन चुके थे
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- करवा चौथ
सुख-सौभाग्य की इच्छा का संकल्प
होता नहीं जिसका विकल्प
एक ही अक्स समाया रहता
आँख से ह्रदय तक
जीवनसाथी को समर्पित
निर्जला व्रत चंद्रोदय तक।
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- जलें दीप से दीप
दीवाली त्यौहार पर, जलें दीप से दीप
सब अन्धकार दूर हों, हो रौशनी समीप ।
हो रौशनी समीप, उमंग जगे हर घर में
करें तमस का नाश, हो उजास विश्व भर में ।
कहे विर्क कविराय, भरे खुशियों की थाली
फैले हर्षोल्लास , मनाएं जब दीवाली ।
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कितनी सुन्दर होती धरती कितनी सुन्दर होती धरती,
जो हम सब मिल जुल कर रहते
झरने गाते, बहती नदिया,
दूर क्षितिज तक पंछी उड़ते
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परस्पर स्नेह की अमृत- धारा,
इस जग में जहाँ बह जायेगी।
क्षमा, दया और करुणा ,
वहाँ स्वतः चली आएगी।
अपरिचित को अपरिचित से ,
सहायता सुलभ मिल जायेगी।
असहाय और दीन भावना,
स्वतः नष्ट हो जायेगी।
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अंकगणित के बाहर उड़ता हुआ कोई ख़त, ड्रोंगो की तरह
कलाबाज़ी दिखाता हुआ, मेघ को
अपने हाथों, धीरे से सरकाता
हुआ, उतरे कभी अधपके
धान के दहलीज़,
ओस की बूंदों
से है लिखा
हुआ,
मेरे घर का पता, सुख गंध को तुम -
बांट देना सभी को --
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गज़ल तूफानों में जो जल सके वो चिराग लाओ
हरसू अंधेरा ही अंधेरा है उजाले लाओ !!
मजहब के छालों से जख़्मी तन मन होरहा
हो सके तो मोहब्बत के भरे प्याले लाओ!!
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आज के लिए बस इतना ही...।
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