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बुधवार, अगस्त 28, 2013

रूपया छा-सठ में फँसा, उन-सठ से हैरान: चर्चा मंच 3051


नौ दो ग्यारह होय, निवेशक धन बहु-रूपया


रूपया छा-सठ में फँसा, उन-सठ से हैरान |

इक-सठ कब से मौन है, अड़-सठ सड़-सठियान |



अड़-सठ सड़-सठियान, तीन-तेरह हो जाता |

तीन-पाँच हर वक्त, पञ्च-जन माल खपाता |


मची हुई है लूट, रपट आती है खुफिया |
नौ दो ग्यारह होय, निवेशक धन बहु-रूपया ||

"रासरचैया कहकर मत बदनाम करो"

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 

कान्हां ने धूम मचाई

Asha Saxena 



बापू की बच्ची, नहीं रहेगी कच्ची बोलना महंगा 

पड़ेगा आसाराम को…

Jai Sudhir 

कब लब होंगे आज़ाद कब लेंगें खुलकर साँस ?


shikha kaushik


धरती भी काँप गयी


Surendra shukla" Bhramar"5




मदन मोहन सक्सेना


आना श्याम...

Kuldeep Thakur

चि‍रैये को खुद ही उड़ा देता है...

रश्मि शर्मा

हवा ये कैसी चली….

Maheshwari kaneri 


मीराबाई :साधौ कर्मन की गति न्यारी

Virendra Kumar Sharma 

चलो यहाँ से 'अलबेला' हम भी कारोबार करें

Albela Khtari 


खाद्य सुरक्षा बिल / घोटाला / रेटिंग एजेन्सियाँ / जीडीपी / फ़ायदे

  (Vivek Rastogi)

खाद्य सुरक्षा - गरीबों की या खुद की ?

Sanjay Mahapatra 


!! जी रहा आदमी !! (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 


कार्टून :- लला, खाद्य सुरक्षा से तो लार टपकने लगी



ऐसे चलता है भारत नाम का कंप्यूटर

Bamulahija dot Com 


फ़ूड बिल पास

Sriram Roy 


मुलायम के लैपटोप का जवाब है सोनिया के बोरों में! 



काश्मीर की बर्फीली चोटियों पर

Anita
जाने मरजीना कहाँ, चली बांटने अन्न |
चालू चालीस चोर के, अच्छे दिन आसन्न |

अच्छे दिन आसन्न, रहा अब तक मन-रेगा |
कई फीसदी लाभ, यही भोजन बिल देगा |

चाहे डूबे देश, चले हम वोट कमाने |
भूखें सोवें लोग, लूटते चोर खजाने ||


 "मयंक का कोना" अद्यतन लिंक
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लन्दन की गलियों कुछ तो बोलो
 एक शोर मचा है लंदन में कब हुस्न के प्याले छलकेगें, 
कब जामें -मोहब्बत बहकेगी कब जिश्म के शोले भड़केंगें 
लंदन की गलियों कुछ तो बोलो ……
Zindagi se muthbhed

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अंधश्रद्धा और अपराध

बाबा तुलसीदास तो कब का लिख गए है कि सामर्थ्‍यशाली को दोष नहीं होता, जी हां मैं भी यही मानता हूं नहीं होता है, समाज में उनका आदेश चलता, उनके कथन ही देववाक्‍य होते हैं, विधान होते हैं, और कभी कभी तो उनके अंधश्रद्धालु उनके अनुसार ही दिशा भी निर्धारित करते हैं...
आइये, कुछ बातें करें ! 
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ये राजस्थान नहीं आसाराम की पुलिस है !

आधा सच...परमहेन्द्र श्रीवास्तव

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कृष्ण लीला ...डा श्याम गुप्त के पद...

आपका ब्लॉग

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हे कृष्ण

JHAROKHA

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मुझ अनाम को
आपका ब्लॉग
मुझ अनाम को तुमने दिये कितने नाम कभी राघव कभी राम कभी कान्हा कभी शाम । 
सर्वव्यापी को किया बंदि पूजा घर में मसजिद, गिरजाघर, गुरुद्वारे, मंदिर में ।
 अपने मन के ही लिये किये सारे काम ...
आपका ब्लॉग पर आशा जोगळेकर

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राधा की प्रीत

ॐ ..प्रीतम साक्षात्कार ..ॐ

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"मेरा कम्प्यूटर" 
 बालकृति "नन्हें सुमन" से
एक बालकविता
" मेरा कम्प्यूटर "
 
यह मेरा कम्प्यूटर प्यारा,
इसमें ज्ञान भरा है सारा।

भइया इससे नेट चलाते,
नई-नई बातें बतलाते।
यह प्रश्नों का उत्तर देता,
पल भर में गणना कर लेता।

 
माउस, सी.पी.यू, मानीटर,
मिलकर बन जाता कम्प्यूटर।
इसमें ही की-बोर्ड लगाते,
जिससे भाषा को लिख पाते।

नया जमाना अब है आया,
हमने नया खजाना पाया।
बड़ा अनोखा है यह ट्यूटर,
सभी सीख लो अब कम्प्यूटर।
नन्हे सुमनपर
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प्रेम और जुदाई (एक कृष्ण लीला ...उस लीलाधारी की)

अपनों का साथ

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शुभ जन्माष्टमी

ज्योति-कलश

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कन्हैया मेरे


सभी को 'कृष्ण-जन्माष्टमी' की हार्दिक भाव-भीनी बधाई ! 
प्रस्तुतकर्ता 

मंगलवार, अगस्त 27, 2013

मंगलवारीय चर्चा ---1350--जहाँ परिवार में परस्पर प्यार है , वह केवल अपना हिंदुस्तान है

 एक अन्तराल के बाद फिर हाजिर हूँ आप की सेवा में इन पंक्तियों के साथ
उतरी रेल को पटरी पर आने में वक़्त लगता है
दूर कहीं मंजिल तो वहां जाने में वक़्त लगता है
कहो क्यूँ किस लिए किस बात की आपा धापी?
रुकी जिंदगी को रफ़्तार पाने में वक़्त लगता है
आज की मंगलवारीय  चर्चा में आप सब का स्वागत है राजेश कुमारी की आप सब को नमस्ते , आप सब का दिन मंगल मय हो अब चलते हैं आपके प्यारे ब्लॉग्स पर 
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मन मोम है और आँखें झील...

रश्मि शर्मा at रूप-अरूप

हर तस्वीर अधूरी है

नीरज गोस्वामी at नीरज

कौन किसे सम्मानित करता,खूब जानते मेरे गीत -सतीश सक्सेना

सतीश सक्सेना at मेरे गीत ! - 

साक्षी हो तुम !

प्रतिभा सक्सेना at शिप्रा की लहरें

नाकारा हु
क्मरान ...

उदय - uday at कडुवा सच

सोच नफा-नुक्सान, हुवे खुश दोनों खेमे-

चलें मूल की ओर

बिन पहियों का रथ!

अनुपमा पाठक at अनुशील

"फेक -स्टिंग - ऋचा " (अनीता राठी जी की कहानी)

मुझे पंख चाहिए

रश्मि प्रभा... at मेरी भावनायें... 

दो और दो पांच में फ़ंसे दिगंबर नासवा

ताऊ रामपुरिया at ताऊ डाट इन 

उल्फ़त की नई मंज़िल को चला,तू बाँहें डाल के बाँहों में…क़तील शिफ़ाई

डा. मेराज अहमद at समय-सृजन (samay-srijan)

junbishen 63

Munkir at Junbishen

Untitled

सतीश जायसवाल at सतीश का संसार

अगर अपना समझते हो तो फिर नखरे दिखाओ मत - नवीन

NAVIN C. CHATURVEDI at ठाले बैठे

जहाँ परिवार में परस्पर प्यार है , वह केवल अपना हिंदुस्तान है---

डॉ टी एस दराल at अंतर्मंथन

"खरगोश" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक at उच्चारण 
आज की चर्चा यहीं समाप्त करती हूँ  फिर चर्चामंच पर हाजिर होऊँगी  कुछ नए सूत्रों के साथ तब तक के लिए शुभ विदा बाय बाय ||
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"मयंक का कोना" अद्यतन लिंक
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My Photo
 नदी अकेली नहीं बहती साथ बहता है उसका कौमार्य नदी का प्रस्फुटन उसके प्रेम का प्रस्फुटन होता है नीला रंग नदी का रंग नहीं वो आसमान का पागलपन है, नदी के प्रति संगीत नदी का अंतर्मन है जो मछली कहलाता है सूर्य शान्ति की ख़ोज में निकला एक साधू सूर्यास्त उसका समर्पण...
हम और हमारी लेखनी पर गीता पंडित

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आपका ब्लॉग पर Virendra Kumar Sharma 

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Abhilasha
Abhilasha पर नीलिमा शर्मा

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सरोकार
जब ढेरो महिलाएं मूंह अँधेरे 

जाती हैं झुण्ड बनाकर 
खुले में शौच,  
देश की राजधानी में 
पब से लौट रही होती हैं 
महिलाएं 
रात भर के जगरने के बाद 
बाँट कर दारु आदि आदि 
दोनों ओर महिलाएं 
इसी देश की हैं...

सरोकार पर अरुण चन्द्र रॉय 

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हवा खुशनुमा वादियाँ भी हसीं हैं , 
तुझे याद करने को दिल चाहता है। 
मेरा आज सब दूरियों को मिटाकर , 
तेरे पास आने को दिल चाहता है...

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ॐ ..प्रीतम साक्षात्कार ..ॐ पर सरिता भाटिया

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 'धरा के रंग' से एक गीत
"सावन आया"
रिम-झिम करता सावन आया।
शीतल पवन सभी को भाया।।

उगे गगन में गहरे बादल,
भरा हुआ जिनमें निर्मल जल,
इन्द्रधनुष ने रूप दिखाया।

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My Photo
हर इन्सां परदे में है, बिन परदे का यहाँ कोई नहीं 
रंग-बिरंगे, मोटे-झीने, परदे तो न जाने कितने हैं ..
काव्य मंजूषा पर स्वप्न मञ्जूषा

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अंग्रेजों के चंगुल से तो,
भारत माँ आजाद हो गयी!
लेकिन काले अंग्रेजों के,
जुल्मों से नाशाद हो गयी।।

आज वाटिका के माली के,
कपड़े उजले, दिल हैं काले,
मसल रहे भोले सुमनों को,
बनकर ये हाथी मतवाले,
आजादी की उत्कण्ठा अब,
कुण्ठा-पश्चाताप हो गयी।
भारत माँ आजाद हो गयी!!

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मास्साब मिले पर बहुत ही दिनों के बाद हुई नमस्कार पूछने लगा उनके हाल चाल मोटे ताजे बहुत नजर आ रहे हो मतलब बीमारी से निपट के तो नहीं आ रहे हो जरूर कहीं एल टी सी पर घूम घाम कर आ रहे हो अरे नहीं बस कुछ तैय्यारी में लगा हुआ हूँ इसलिये कहीं भी नहीं जा रहा हूँ अडो़स पडो़स की शादी में भी बीबी को भिजवा रहा हूँ...
उल्लूक टाईम्स पर Sushil Kumar Joshi

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