देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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रोक लेता चीखकर तुमको मगर अहसास ऐसा,
ज़िंदगी की वादियों में शोक का अधिवास कैसा?
नासमझ, अहसास मेरे क्रंदनों के गीत गाते,
लालची इन चक्षुओं को चाँद से मनमीत भाते...
Digvijay Agrawal
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इस बार का हमारा विषय है वेदना । यह वह मानसिक कष्ट, संताप है, जिससे मनुष्य का सम्पूर्ण जीवन ही कभी- कभी बिखर जाता है। जब कभी स्नेह आहत होता है, किसी प्रियजन से वियोग होता है अथवा कटु वचन से स्वाभिमान को ठेस पहुँँचता है, तब हृदय में इसकी अनुभूति होती है।
मेरा मानना है कि जिस भी मनुष्य में संवेदना है , उसमें वेदना निश्चित होगी...
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सुकून की तलाश में दौड़ रही ज़िंदगी
गमों से खेल गई
खुशियों से भरा दामन लाँघ,
हँसी को तरस गई...
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बनारस की एक गली
गली में चबूतरा
चबूतरे पर खुलती बड़े से कमरे की खिड़की
खिड़की से झाँको कमरे में टी.वी.
टी.वी. में दूरदर्शन
एक से बढ़कर एक सीरियल...
देवेन्द्र पाण्डेय