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Monday, October 23, 2017

"मोहब्बत बस मोहब्बत है" (चर्चा अंक 2766)

मित्रों!
सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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चर्चा मंच के चर्चाकार जिनकी पोस्ट का लिंक अपनी चर्चा में लगाते हैं।
उनको सूचना भी प्रेषित करते हैं। सूचना देने का उद्देश्य है कि 
यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक 
किसी स्थान पर लगाया जाये तो 
उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
इसके बावजूद भी कुछ लोग 
चर्चामंच पर अपनी उपस्थिति का 
आभास नहीं कराते हैं तो 
बड़ा अफसोस होता है। 
इसलिए ऐसे लोगों की पोस्ट का लिंक 
चर्चा मंच पर लगाना बन्द कर दिया गया है।
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कुत्ता हड्डी और इतिहास 

सुशील कुमार जोशी  
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मोहब्बत बस मोहब्बत है.. 

जो मोहब्बत नींद उडाये तो..  
फिर कभी आशिक नहीं सोता,  
मोहब्बत बस मोहब्बत है..  
ये कम या फिर ज्यादा नहीं होता... 
Dipanshu Ranjan 
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भाईचारे के ब्रांड एम्बेसडर 

आज ज्ञान पान भंडार पर घंसू सुबह सुबह बड़ी चिंताजनक मुद्रा में बैठे थे. दुकान के बाहर लगा बोर्ड ‘कृपया यहाँ ज्ञान न बांटे, यहाँ सभी ज्ञानी हैं’ तो मानो सरकारी दफ्तर में लगी गांधी जी की तस्वीर हो जो कहने को तो ईमानदारी और सच्ची लगन से देश सेवा का प्रतीक है मगर इसके ठीक उलटे अर्थ ऐसा माना जाता है कि यहाँ बिना भेंट चढ़ाये कोई भी कार्य सम्पन्न नहीं होगा. ‘ज्ञान पान भंडार‘ पर भी इसी बोर्ड के चलते दिन भर ज्ञान सरिता बहती रहती है. किसी ने एकाएक घंसू से उनकी चिंता का कारण पूछ लिया. अंधा क्या चाहे दो आँखे. घंसू तो बैठे ही इसी इंतज़ार में थे कि कोई पूछे तो वो शुरू हों... 
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चहुँओर दिखे मोहे प्यार 

तू गंगा सी बहती रहे..  
मैं गोमुख काशी पटना हो जाऊं, 
तेरी छोटी छोटी अंखियों का..  
मैं एकलौता सपना हो जाऊं... 
Dipanshu Ranjan  

Sunday, October 22, 2017

"एक दिया लड़ता रहा" (चर्चा अंक 2765)

मित्रों!
रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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दिया और हवाएं 

इस बार की दिवाली कुछ अलग थी, 
बस थोड़े से चिराग़ जल रहे थे, 
अचानक तेज़ हवाएं चलीं, 
एक-एक कर बुझ गए दिए सारे, 
पर एक दिया जलता रहा, 
लड़ता रहा तब तक, 
जब तक थक-हारकर चुप नहीं बैठ गईं हवाएं... 
कविताएँ पर Onkar 
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मुक्त-ग़ज़ल : 242 -  

महुए की कच्ची सुरा हूँ ॥ 

गड़ता कम भुंकता बुरा हूँ ॥ 
पिन नहीं पैना छुरा हूँ... 
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वर्तमान परिवेश में हमारे पर्व  

दिवाली के अवसर पर हिन्दुओं के पंचपर्व की श्रंखला में आज अंतिम पर्व है , भैया दूज। यह महज़ एक संयोग हो सकता है कि हिन्दुओं के सभी त्यौहार तीज के बाद आरम्भ होकर मार्च में होली पर जाकर समाप्त होते हैं। फिर ५ महीने के अंतराल के बाद पुन: तीज पर आरम्भ होते हैं। निश्चित ही इसके सामाजिक , आर्थिक , भूगोलिक और मौसमी कारण भी हो सकते हैं... 
अंतर्मंथन पर डॉ टी एस दराल 
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ये दिये रात की ज़रूरत थे.... 

बशीर बद्र 

मेरी धरोहर पर yashoda Agrawal  
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पल दो पल 

पल दो पल सकून से जी लेने दे ए जिंदगी
कुछ और नहीं
बस अपने आप से गुफ्तगूँ कर लेने दे ए जिंदगी
साँसों के अहसानों की रजामंदी में
ग़लतफ़हमी से खुशफ़हमी कर लेने दे ये जिंदगी... 

RAAGDEVRAN पर 
MANOJ KAYAL  
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गीत  

"भइया दूज का तिलक"  

Saturday, October 21, 2017

"भाईदूज के अवसर पर" (चर्चा अंक 2764)

मित्रों!
शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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चर्चा मंच पर प्रतिदिन अद्यतन लिंकों की चर्चा होती है।
आश्चर्य तो तब होता है जब वो लोग भी चर्चा मंच पर 
अपनी उपस्थिति का आभास नहीं कराते है, 
जिनके लिंक हम लोग परिश्रम के साथ मंच पर लगाते हैं।
अतः आज के बाद ऐसे धुरन्धर लोगों के ब्लॉग का लिंक 
चर्चा मंच पर नहीं लगाया जायेगा।
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तीन पीढ़ी, तीन साल 
और तीन महिने का हिसाब 
परसों ९ अक्टूबर २०१७ को 
तोताराम ने हमसे प्रतिज्ञा करवाई थी कि 
जब तक चोर- लुटेरे और भ्रष्टाचारी 
मोदी जी के खिलाफ... 

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जिधर तू नहीं .... 

हवा में घुटन है मगर क्या करें 
कि तूफ़ान में और घर क्या करें 
फ़क़त एक ही लफ़्ज़ है दर्द का ये: 
क़िस्सा-ए-ग़म मुख़्तसर क्या करें... 
Suresh Swapnil 
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