Sunday, May 26, 2019

"मोदी की सरकार"(चर्चा अंक- 3347)

स्नेहिल अभिवादन   
रविवासरीय चर्चा में आप का हार्दिक स्वागत है|  
देखिये मेरी पसन्द की कुछ रचनाओं के लिंक |  
 अनीता सैनी 
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दोहे 

 "मोदी की सरकार" 

 (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

roopchandrashastri at 
 उच्चारण 
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अष्टावक्र गीता -  

भावपद्यानुवा (इकसठवीं कड़ी) 



Kailash Sharma at 
------अधूरे ख्वाब 

 

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा at 

 कविता "जीवन कलश" 

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सबद भेद : 

 पॉल गोमरा का स्कूटर 

 (उदय प्रकाश) : शिप्रा किरण 


arun dev at 
 समालोचन 
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संसृति की मादकता 

 

Sudha Singh at 

मेरी जुबानी 

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हमारी प्यारी धरती ---- 

 खतरे में 

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ए ग़लीचा ! 

 वहम ये रहने दो.. 


व्याकुल पथिक at 
व्याकुल पथिक 
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गलीचा 

मन की वीणा at 
मन की वीणा - कुसुम कोठारी। 
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सोल्यूशन 

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हताशा की पराकाष्ठा 

My Photo
Anuradha chauhan at 
 मेरे मन के भाव 

एक बात खटकती है 

जीत का जश्न मनया जा रहा देश में तमाम। प्रतीत हो रहा ऐसा हम जीत गए कोई संग्राम। जीत नहीं चयन है, जनता द्वारा जनता की सरकार का। खुशी नहीं है जीत की, न मातम कोई हार का। हाँ एक बात मन में, बहुत ही खटकती है। दिल में नहीं उतरती है, गले में अटकती है। पैदा न हुआ भारत में, ऐसा दूसरा कोई लाल। जो और बेहतरीन तरीके से, देश की बागडोर लेता सम्हाल।
Sujata Priye at अपराजिता 
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जनता की आकांक्षा को समझने में असफल रहे राजनीतिक दल

*जनता की आकांक्षा को समझने में असफल रहे राजनीतिक दल* *- अरुण चन्द्र रॉय * पंडित नेहरू के बाद नरेन्द्र मोदी दूसरे ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने लगातार दो बार अपने दल को लोकसभा चुनाव में जिताया है। जब देश के लगभग सभी राजनीतिक दल एकजुट होकर भाजपा का विरोध कर रही हो ऐसे समय में चुनाव के जो नतीजे आयें हैं वह चौकाने वाला आया है। 
अरुण चन्द्र रॉय at सरोकार 
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हादसे सिखाते हैं 

हादसे सिखाते हैं कि एक पल सिर्फ एक पल और दुनिया बदल जाती है सपने-अपने छूट जाते हैं अरमान सारे रूठ जाते हैं जाने वाले रुकते नहीं पर जो रह जाते हैं शेष वो टूट जाते हैं,.. हाँ! हादसे सिखाते हैं। सुनो! भूलकर गिले-शिकवे-तोहमतें नई दुनिया बनाते है मिलकर करते है याद खुशियाँ गम भूल जाते हैं चलो कुछ कदम तुम हम भी लौट आते हैं क्या भरोसा ज़िन्दगी का मौत किस पल ….
 "मेरा मन"  
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