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Sunday, February 25, 2018

"आदमी कब बनोगे" (चर्चा अंक-2892)

मित्रों!
रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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हे केजरीवाल तुम गधा से  

आदमी कब बनोगे.. 

हे केजरीवाल तुम गधा से आदमी कब बनोगो.. (डिस्क्लेमर:- यह एक व्यंग रचना है और यह पूरी तरह से काल्पनिक, मनगढ़ंत और एक गधा के द्वारा ही लिखा गया है। इसका किसी भी राजनीतिक व्यक्ति, पार्टी अथवा समर्थक से कोई सरोकार नहीं है... 
चौथाखंभा पर ARUN SATHI  
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प्रेम रस 

Sudha's insights  
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साँझ हो गई 

Sudhinama पर 
sadhana vaid  
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क्षणिकाएं 

1: 
पहचान यूँ तो उनसे हमारी जान पहचान बरसों की है पर....  
फिर लगता है कि क्या उन्हें सचमुच जानते हैं हम 
2:... 
Sudha's insights  
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Saturday, February 24, 2018

"सुबह का अखबार" (चर्चा अंक-2891)

मित्रों!
शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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तुम्हे तो शायद याद भी नहीं होगा 

तुम्हे तो शायद याद भी नहीं होगा,  
लेकिन मुझे अच्छी तरह से याद है  
जब हम पहली बार मिले थे  
तब घर के पीछे वाले बंजर टीले की  
रेतीली जमीनी पर पहली और आखरी बार  
ढेर सारे कंवल खिले थे... 

एक प्रश्न 

एक प्रश्न वो बेटी ईश्वर से पूछती है,  
क्यों भेजा गया मुझे उस गर्भ में,  
जहां मेरी नहीं बेटे की चाह थी.... ... 
kuldeep thakur  
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मधुऋतु - - 

Shantanu Sanyal  
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गुरूदेव को अंग 

गुरू को कीजै दंडवत, कोटि कोटि परनाम।
कीट न जानै भृंग को, गुरू करिले आप समान॥
दंडवत गोविंद गुरू, बन्दौं ‘अब जन’ सोय।
पहिले भये प्रनाम तिन, नमो जु आगे होय॥
गुरू गोविंद कर जानिये, रहिये शब्द समाय।
मिलै तो दंडवत बंदगी, नहिं पल पल ध्यान लगाय... 
rajeev Kulshrestha  

Friday, February 23, 2018

"त्योहारों की रीत" (चर्चा अंक-2890)

मित्रों!
शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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बेटी तो सदा दिल का 

अरमान होती है !!! 

बेटी बाबुल के दिल का टुकड़ा भैया की मुस्कान होती है,  
आँगन की चिड़िया माँ की परछाईं घर की शान होती है ! ..  
खुशियों के पँख लगे होते हैं उसको  
घर के हर कोने में रखती है अपनी निशानियां 
जो उसकी पहचान होती हैं ... 
SADA 
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जो हो न सका मेरा,  

मुझे वो मुक़ाम याद आया 

चाहतों के सफ़र में हुआ अंजाम याद आया 
जो हो न सका मेरा, मुझे वो मुक़ाम याद आया।

भुलाने से भी भूलते नहीं तेरे सितम मुझको 
जब भी मिला ज़ख़्म कोई, तेरा नाम याद आया... 
Sahitya Surbhi पर 
Dilbag Virk 
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गीत  

"तुमसे जीवन चलता है"  

(राधा तिवारी) 

जब तुमसे बातें होती है, दिल को अपनापन मिलता है। 
देख तुम्हारी अनुपम छवि को, मेरा उपवन खिलता है... 
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महफ़िल 

दिल कह रहा हैं आज 
फिर एक बार महफ़िल 
तेरी यादों के रंगों से सजा दूँ  
टूटे दिल को  
फ़िर से प्यार के रंगों से सजा दूँ ... 
RAAGDEVRAN पर 
MANOJ KAYAL 
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प्रश्न अनेक 

Akanksha पर Asha Saxena - 
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स्वप्न ज्ञान 

power पर Anjana kumar  
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"आदमी कब बनोगे" (चर्चा अंक-2892)

मित्रों! रविवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...