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Wednesday, September 28, 2016

तू कर बहाना बैठकर आंसू बहाना सीख ले: चर्चा मंच 2479


तू कर बहाना बैठकर आंसू बहाना सीख ले 

रविकर 
जब धाक धाकड़ आदमी छल से जमाना सीख ले |
सारा जमाना नाम धन-दौलत कमाना सीख ले |
ईमान रिश्ते दीन दुख जब बेंच खाना सीख ले |
तू कर बहाना बैठकर आंसू बहाना सीख ले || 

खाया-पिया कुछ नहीं……..  

गिलास तोडा बारह-आना 

haresh Kumar 

मुस्लिम महिलाओं को भी मिले 

तीन तलाक का अधिकार 

Shalini Kaushik 

छत्तीसगढ़ की ब्रांड एम्बेसडर 

पंडवानी गायिका तीजनबाई - 

विनोद साव 

विनोद साव 

पटरि‍यों सी जिंदगी 

रश्मि शर्मा 

संवेदनहीनता की इन्तहां 

Veena Sethi 

कबीरा मन निर्मल भया जैसे गंगा नीर , 

पाछै लागै हरि फिरै ,कहत कबीर कबीर। 

Virendra Kumar Sharma 

दोहे 

"निज पुरुखों को याद" 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 

Tuesday, September 27, 2016

दाता अपने नाम, भेजते रहिए डाटा-चर्चा मंच : 2478


दाता अपने नाम, भेजते रहिए डाटा- 

रविकर 
Satish Saxena 
बैरी है ललकारता, प्रतिदिन होकर क्रुद्ध।
हिम्मत है तो कीजिए, आकर उससे युद्ध।।
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बन्दर घुड़की दे रहा, हो करके मग़रूर।
लेकिन शासक देश के, बने हुए मजबूर।।... 

चक्रव्यूह 

संगीता स्वरुप ( गीत ) 

ग़ज़ल - 

हज़ार दर्द सुनाना है बात क्या करना 

Naveen Mani Tripathi 

सरकारें किसानो के वोट से बनती हैं 

Randhir Singh Suman 

कार्टून :-  

ख़ुश-आमदीद, सुस्‍वागतम्, जीआएआंनू, वेलकम ... 

Kajal Kumar 

सिंधु संध‌ि पर भयभीत पाक 

सुधीर राघव 

खारुन नदी के संग-संग सफ़र: 

उद्गम से पदयात्रा 

ब्लॉ.ललित शर्मा 

शांति..शांति..ये कैसी है पहेली 

rohitash kumar 

थके हुए कुछ लोग.. 

मनोरंजन कुमार तिवारी 

yashoda Agrawal 

कार्टून :-  

ठंडाई और रजाई 

Kajal Kumar 


Monday, September 26, 2016

"मिटा देंगे पल भर में भूगोल सारा" (चर्चा अंक-2477)

मित्रों 
सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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पलायन का दर्द 

छुड़ाए गाँवनौकरी की तलाशचलो शहर

पेट की भूखउड़ा कर ले चलीघर से दूर


छूटे माँ बापछूटा घर आँगनरिक्त हृदय... 

Sudhinama पर sadhana vaid 
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अमन का चमन ये वतन है हमारा।
नही दानवों का यहाँ है गुजारा।।
खदेड़ा हैं गोरों को हमने यहाँ से,लहू दान करके बगीचा सँवारा।
बजें चैन की वंशियाँ मन-सुमन में,नही हमको हिंसा का आलम गवारा।
दिया पाक को देश का पाक हिस्सा,अनुज के हकों को नही हमने मारा।
शुरू से सहा आज तक सह रहे हैं,छोटा समझ कर दिया है सहारा।

दरियादिली बुजदिली मत समझना,
समझदार बन कर समझना इशारा।

हिदायत हमारी है सीमा न लाँघो,
मिटा देंगे पल भर में भूगोल सारा।
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लड़ी जा सकनेवाली एक लड़ाई 

पूरा देश राष्ट्रोन्माद और गुस्से में उफन रहा है। विदेशों में बैठे भारतीय भी इसी दशा में हैं। सबकी एक ही इच्छा है-इस बार पाकिस्तान को निपटा ही दिया जाए। यह भावना अकारण नहीं है। लोक सभा चुनावों के दौरान पाकिस्तान के सन्दर्भ में मोदी ने लोगों को जो भरोसा दिलाया था, उसी भरोसे के आधार पर लोग न केवल यह चाह रहे हैं बल्कि विश्वास भी कर रहे हैं कि मोदी अपनी बात पर अमल करेंगे... 
एकोऽहम् पर विष्णु बैरागी 
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लघुकथा- 

चिपको 

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मधुर गुंजन पर ऋता शेखर मधु 
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कैराना : 

राजनीति पलायन की 

कैराना उत्तर प्रदेश की यूं तो मात्र एक तहसील है किन्तु वर्तमान विधान सभा चुनाव के मद्देनजर वोटों की राजधानी बना हुआ है. इसमे पलायन का मुद्दा उठाया गया है और निरन्तर उछाल दे देकर इस मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देकर वोट बैंक में तब्दील किया जा रहा है जबकि अगर हम मुद्दे की गहराई में जाते हैं तो पलायन की जो मुख्य वजह है "अपराध" वह कोई एक दो दिन में पनपा हुआ नहीं है वह कैराना क्षेत्र की जड़ों में बरसो - बरस से फैला हुआ है. रंगदारी की मांग यहाँ अपराध का एक नवीन तरीका मात्र है. आम जनता में अगर हम जाकर अपराध की स्थिति की बात करें तो आम आदमी का ही कहना है कि कैराना में कभी दंगे नहीं हो सकते क्योंकि अगर यहां दंगे होते हैं तो सेना यहां आकर घर घर पर दबिश देगी और उससे यहां पर घर घर पर अस्तित्व में रहने वाले बम, कट्टे, तमंचे, नशीली दवाओं आदि के अवैध कारोबार का पटाक्षेप हो जायेगा और यही एक कारण है जिस वजह से आज कैराना " मिनी पाकिस्तान" की उपाधि पा चुका है. मिनी पाकिस्तान यूं क्योंकि जो मुख्यतः पाकिस्तान है वह आतंक के अपराध के अड्डे के रूप में वर्तमान में विश्व में   खूब नाम कमा रहा है... 
! कौशल ! पर Shalini Kaushik 
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मोदी का भाषण : 

कान खोल कर सुन ले पाकिस्तान... 

खुशदीप 

उरी आर्मी बेस पर आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान रिश्तों में तनाव चरम पर है. ऐसे में हर किसी को इंतजार था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पाकिस्तान को क्या संदेश देते हैं. हमले के एक हफ़्ता बीतने के बाद प्रधानमंत्री कोझीकोड में बीजेपी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में बोलने के लिए सामने आए. पीएम मोदी ने इस भाषण में नपे-तुले शब्दों का इस्तेमाल किया. मोदी के भाषण में पाकिस्तान को लेकर अहम बातें ये रही- 1 पाकिस्तान के हुक्मरान ये कान खोल कर सुन ले कि हम उरी में अपने 18 जवानों के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देंगे. हम पाकिस्तान को दुनिया भर में अलग-थलग यानी अकेला रहने को मजबूर कर देंगे... 
देशनामा पर Khushdeep Sehgal 
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प्यार की धुन पर सजन फिर से बजी शहनाइयाँ 

तुम मिले साजन हमें अब मिट गई तनहाइयाँ 
अब हमारे बीच तो बढ़ने लगी नज़दीकियाँ .. 
साज़ मेरी ज़िन्दगी का बज उठा दिल में सजन 
प्यार की धुन पर सजन फिर से बजी शहनाइयाँ ... 
Ocean of Bliss पर 
Rekha Joshi 
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ग्राम 

गांधी चरखा 
सूत कातती बाला 
व्यस्त कार्य में | 

काम ही काम 
नहीं कोई आराम 
यही जीवन।...  
Akanksha पर Asha Saxena 
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स्त्री - भोग्या नही भाग्य है 

मेरी मुस्कान, कब बन गयी मौन स्वीकृति वो स्वीकृति जो मैने कभी दी ही नही वो स्वीकृति जो चाहता था पुरुष कभी अनजानी लडकी से, कभी अपनी सहकर्मी से कभी अपनी शिष्या से, कभी जीवनसंगिनी से खुद से ही गढ लेता है पुरुष वो परिभाषायें जैसा वो चाहता है और परिभाषित कर देता है स्त्री का पहनावा, उसकी चाल ढाल अधिकारी बन जाता है समाज आंचल में ट्कने को अनगिनत नाम हद की पराकाष्ठा को भी पार करते हुये अपने हिसाब से रच देता है उसका चरित्र दोषी बन, नजरें छुपाये ताने सुनती है वो छलनी की जाती है जिसकी अस्मिता तार तार हो जाता है सुहागिन बनने का सपना और लुटेरा छलता रहता है जाने कितने सुहाग कब समझेगा दम्भी, अभिमान... 
डॉ. अपर्णा त्रिपाठी 
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लोहे का घर-20 

एक झपकी सी लगी थी लोहे के घर में। बर्फिली पहाड़ियों से दिखते कास के फूल लहुलुहान हो गये थे सहसा! आ गया होऊँ जैसे युद्ध के मैदान में। नहीं, शामिल नहीं था किसी आत्मघाती दस्ते में। ऐसे दस्ते बनाने की मनाही है अपने देश में। पार कर रहा था पाक अधिकृत कश्मीर का आखिरी दर्रा अकेले ही। खलबली थी पाक खेमे में। ये कौन कर रहा है बमों की बारिश... 
बेचैन आत्मा पर देवेन्द्र पाण्डेय 
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**~प्यारी बेटियाँ ~** 

जीवन में कुछ रिश्ते दिल के बहुत-बहुत क़रीब होते हैं -माँ, पिता, बेटा, बेटी और दोस्त ! विशेषकर 'बिटिया' तो दिल की धडकन की तरह हरपल साथ होती है !फिर उसके लिए किसी एक दिवस की कोई दरक़ार कहाँ !
ये कविता हर दिन, हर पल - सभी बेटियों को असीमित स्नेह एवं शुभकामनाओं सहित समर्पित ~
भोर सी सुहानी होती हैं बेटियाँ !
पाँव पड़ते ही जिनके
हो जाता है घर में उजाला,
सूरज की किरणों सी-
बिछ जाती हैं,
ढक लेती हैं,
हर अँधेरे कोने को
अपनी सुनहरी आभा से ... 

बूँद-बूँद लम्हे पर 

Anita Lalit 

(अनिता ललित) 

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माँ तू बोली थी न 

माँ तू बोली थी जब पापा तेरे आएंगेढेर खिलौने लाएंगेपर पापा खाली हाथ लिए 
ओढे तिरंगा सोए हुए हैंमाँ ! क्या हुआ है पापा कोक्यों बाहर इतनी भीड़ लगी हैंजय जय सब क्यों बोल रहे हैअंदर दादी रोए रही हैतू काहे बेहोश पडी हैउठ माँ! ये तो बतला देक्या हुआ है पापा को... 
Maheshwari kaneri 
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"पाक"से युद्ध चाहने वाले देश भक्त हैं 

या नहीं चाहने वाले ?? -  

56"का सीना जो आजकल नापने वाले लोग हैं,उनके चाल,चेहरे और चरित्र की परीक्षा-समीक्षा शायद ही किसी पुरस्कार वापिस करने वाले लेखकों, असहिष्णु बताने वाले अभिनेताओं,कामरेडों और समझदार दिखाई देने वाले पत्रकारों ने करने की कोशिश करि हो !कोशिश इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि ऐसा करने का "दम" तो कभी उनमें था ही नहीं ... 

5TH Pillar Corruption Killer पर 

PITAMBER DUTT SHARMA  

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बड़ी मग़रूर किस्मत हो गई है 

हमें जबसे मुहब्बत हो गई है
मुहब्बत भी सियासत हो गई है

चलो फिर इश्क़ में खाते हैं धोखा
हमें तो इसकी आदत हो गई है... 
चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ 
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The unreal but Royal Dinner Conference 



झा जी कहिन पर अजय कुमार झा  
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हम ख़ुद बताएं 

न तुम कुछ कहोगे न हम कुछ कहेंगे 
यहां सिर्फ़ अह् ले-सितम कुछ कहेंगे 
जहां तुमको एहसासे-तनहाई होगा 
वहां मेरे नक़्शे-क़दम कुछ कहेंगे ... 
Suresh Swapnil 
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माँ को गए आज चार साल हो गए पर वो हमसे दूर है शायद ही किसी पल ऐसा लगा ... न सिर्फ मुझसे बल्कि परिवार के हर छोटे बड़े सदस्य के साथ माँ का जो रिश्ता था वो सिर्फ वही समझ सकता है ... मुझे पूरा यकीन है जब तक साँसें रहेंगी माँ के साथ उस विशेष लगाव को उन्हें भुलाना आसान नहीं होगा ... बस में होता तो आज का दिन कभी ना आने देता पर शायद माँ जानती थी जीवन के सबसे बड़े सत्य का पाठ वही पढ़ा सकती थी ... सच बताना माँ ... क्या इसलिए ही तुम चली गईं ना ...   
ज़िन्दगी की अंजान राहों पर
अब डर लगने लगा है
तुमने ही तो बताया था 
ये कल-युग है द्वापर नहीं  
कृष्ण बस लीलाओं में आते हैं अब
युद्ध के तमाम नियम
दुर्योधन के कहने पर तय होते हैं
देवों के श्राप शक्ति हीन हो चुके हैं
 
मैं अकेला और दूर तक फैली क्रूर नारायणी सेना
हालांकि तेरा सिखाया हर दाव
खून बन के दौड़ता है मेरी रगो में
एक तुम ही तो सारथी थीं
हाथ पकड़ कर ले आईं यहाँ तक
मेरी कृष्ण, मेरी माया
जिसके हाथों सुरक्षित थी मेरी जीवन वल्गा
अकेला तो मैं अब भी हूँ
जिंदगी के ऊबड़-खाबड़ रास्ते भी हैं हर पल 
और मेरा रथ भी वैसे ही दौड़ रहा है
सच बताना माँ
मेरी जीवन वल्गा अब भी तुम्हारे हाथों में ही है न ...? 

Digamber Naswa 

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