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Saturday, August 18, 2018

"उजड़ गया है नीड़" श्रद्धांजलि अटलबिहारी वाजपेई (चर्चा अंक-3067)

मित्रों! 
शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। 
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अटल जी को श्रद्धांजलि  

राधा तिवारी " राधेगोपाल " 

अटल हमारे बीच सेचले गए सुखधाम।
 पर धरती पर रह गएउनके सारे काम... 
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कोटि-कोटि नमन तुम को..... 

हे जन-नायक अटल जी,  
तुम्हारी शक्सियत अनुपम थी।  
तुम स्तंभ बनकर खड़े रहे,  
सत्य-पथ पर अड़े रहे,  
भारत को विश्व-शक्ति बनाया... 
kuldeep thakur 
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एक संक्षिप्त 'अटल' संस्मरण ! 

पी.सी.गोदियाल "परचेत" 
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और तुम जीत गए 

*पक्का निश्चय कर 
साध कर अपना लक्ष्यचले थे  
इस बार ये कदममंजिल की ओर*  
*मन में विश्वास लिए 
मान ईश्वर को पालनहार 
कर दिया था अर्पित खुद को 
उस दाता के द्वार 
मेहनत का ध्येय लिए 
कर दिए दिन रात एक... 
सु-मन (Suman Kapoor) 
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मेरी पहचान 

Akanksha पर Asha Saxena  
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अमर अटल 

देवेन्द्र पाण्डेय  
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अटल तुम बहुत याद आओगे 

आप क्या गए सारा जग सूना हो गया  
ऐसा लगा सर से साया चला गया,  
आप हमको बताते थे नयी राह 
सारा जहा सूना सा हो गया... 

Friday, August 17, 2018

"दुआ करें या दवा करें" (चर्चा अंक-3066)

मित्रों! 
शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। 
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गीत  

"पंचांग" 

(राधा तिवारी" राधेगोपाल ") 

 बड़े बुजुर्गों के जैसे, पंचांग घरों में रहते हैं।
 कौन अभी त्यौहार आ रहा, हमसे कहते रहते हैं।।

 बतलाता तारीख हमें, खुद  खूंटी पर ही रहता है ।
ग्रह काल नक्षत्र हमें, हर रोज बताता रहता है... 
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582.  

सिंहनाद करो 

व्यर्थ लगता है   
शब्दों में समेटकर   
हिम्मत में लपेटकर   
अपनी संवेदनाओं को   
अभिव्यक्त करना,   
हम जिसे अपनी आजादी कहते हैं   
हम जिसे अपना अधिकार मानते हैं   
सुकून से दरवाजे के भीतर   
देश की दुर्व्यवस्था पर   
देश और सरकार को कोसते हैं   
अपनी खुशनसीबी पर   
अभिमान करते हैं कि   
हम सकुशल हैं,   
यह भ्रम जाने किस वक्त टूटे ... 
डॉ. जेन्नी शबनम  
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मकई के दानों से बनाइए  

स्वादिष्ट चीला  

(corn pancake) 

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हजारों रंग ख़ुशबू से बना गुलदान है भारत 

हज़ारों रंग ख़ुशबू से  बना गुलदान है भारत
कई तहज़ीब,भाषा,धर्म की पहचान है भारत
कहीं गिरजा, कहीं मस्जिद, शिवाला और गुरुद्वारा
कभी होली कभी क्रिसमस कभी रमज़ान है भारत... 

Himkar Shyam  
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यह देश हमारा भारत वर्ष 

ये देश हमारा भारत वर्ष
अद्भुत है इसका उत्कर्ष
उत्तर में है हिम का ताज
दक्षिण में सागर का राज
पूरब से आती है हर दिन
मनभावन सुखमय प्रभात 
है इसी भूमि पर अपना स्वर्ग
        यह देश हमारा भारत वर्ष.....  
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कुछ हट के ....। 

मैं सोचता हूँ  
कुछ ऐसा ही जेहन में उभरता है,  
जब उमंग और उत्साह से लबरेज  
इस एक दिन ... 
शायद हाँ इस एक दिन  
देश प्रेम सार्वजनिक होकर उभरता है।  
और जब लहराता है तो कई जोड़ी आंखे  
उसे निहारते वही कही  
आसमान की अनंत गहराई में  
खो जाती है शायद... 
अंतर्नाद की थाप पर कौशल लाल 
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उलझन 

Sudhinama पर sadhana vaid  
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"उजड़ गया है नीड़" श्रद्धांजलि अटलबिहारी वाजपेई (चर्चा अंक-3067)

मित्रों!  शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।  (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   ...