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Wednesday, September 19, 2018

"दिखता नहीं जमीर" (चर्चा अंक- 3099)

सुधि पाठकों!
 बुधवार की चर्चा में 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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जब तक प्रसंग और सन्दर्भ का 
हवाला न दिया जाए तब तक 
किसी बात का सही अर्थ नहीं खुलता ... 
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मोहन भागवत के कन्फेशन  

और संघ का  

मोदी शाह से मोह भंग 

संघ प्रमुख ने सम्भवतः पहली बार मुक्त कंठ से कांग्रेस की तारीफ करते हुए कहा कि आजादी के आंदोलन में कांग्रेस का योगदान महत्वपूर्ण है और कई महान व्यक्तित्व कांग्रेस ने देश को दिए है ...
,,,,बाबा रामदेव ने एन डी टीवी के कार्यक्रम में खुले आम धमकी देते हुए कह दिया है कि महंगाई सरकार को खा जायेगी और इसलिए उन्होंने अपने को अलग कर लिया है साथ ही लगभग जेटली जैसों को चुनौती देते हुए कहा है कि यदि उन्हें सरकार पेट्रोल पम्प दे दें तो वे 30 से 40 रूपये में पेट्रोल डीजल बेचकर दिखा देंगे मेरा ख्याल है कि किसी सरकार के लिए इससे बड़ी शर्म की बात नही होगी . दुर्भाग्य यह है कि यह दावा देशप्रेमी अम्बानी या अडानी को करना ही नही था बल्कि अपने आउट लेट्स से बेचकर दिखाना भी था तो जनता उन्हें भी देवता मानती......
ज़िन्दगीनामा पर Sandip Naik 
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आंकड़ो के खेल में  

भारत 6ठवें अमीर देशो में 

शरारती बचपन पर sunil kumar  
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कभी तो ... 

कभी तो गूंजो कान में
गुज़र जाओ छू के कंधा
गुज़र जाती है क़रीब से जैसे आवारा हवा... 
Digamber Naswa 
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न फेसबुक से हूँ,  

न व्हाट्सैप से 

न फ़ेसबुक से हूँ, न व्हाट्सैप से
जैसा भी हूँ, अपने आप हूँ
जिनसे मिला इनसे पहले मैं
मैं उन सबकी धुँधली याद हूँ... 
Rahul Upadhyaya  at  
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*जलहरण घनाक्षरी* 

(विधान - परस्पर तुकांतता लिए चार पद/ 8, 8, 8, 8  
या 16, 16 वर्णों पर यति/ अंत में दो लघु अनिवार्य)
धूल धूसरित तन, केश राशि श्याम घनबाल क्रीड़ा में मगन, अलमस्त हैं किसन।छनन छनन छन, पग बजती पैजनलिपट रही किरण, चूम रही है पवन।काज तज देवगण, देख रहे जन-जनपुलकित तन-मन, निर्निमेष से नयन।काग एक उसी क्षण, देख के रोटी माखनआया छीन भाग गया, उत्तर दिशा गगन।। 

Tuesday, September 18, 2018

"बादलों को इस बरस क्या हो रहा है?" (चर्चा अंक-3098)

मित्रों! 
मंगलवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। 

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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गीत  

"धान खेतों में लरजकर पक गया है"  

आषाढ़ से आकाश अब तक रो रहा है।
बादलों को इस बरस क्या हो रहा है?... 

उच्चारण 

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तम को हरदम ही हरे, नन्हा माटी दीप l
 अँधियारे में राखिए, दीपक आप समीप... 
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हैरान हिंदी 

Sudhinama पर sadhana vaid  
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हौसलों के गीत 


sapne(सपने) पर shashi purwar 
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बच्चों को बख्श दो मालिक  

बच्चों के साथ और बच्चों के लिए काम करना बहुत जरूरी है उन्नत राष्ट्र, वर्तमान के समाज में मूल्य बनाएं रखने को और सुसंस्कृत राष्ट्र के भविष्य के लिए पर यह सेफ पैसेज है कामरेड्स , बहुत आसानी से कम्फर्ट ज़ोन्स में रह सकते हो और गुजर बसर बहुत ही सुलभ सरलता से हो सकता है ताउम्र असली चुनौती समाज के दीगर क्षेत्रों की है , इन दिनों रोज कॉलेज जाता हूँ तो उज्जड, भयानक बदतमीज और हर छोटी सी बात पर लड़ने और माँ - बहन करने पर उतारूँ युवाओं को देखता हूँ जो किसी की भी बात सुनने को तैयार नही और इतना ख़ौफ़ है इनका कि ना प्राचार्य, प्राध्यापक , प्रशासक और ना ही पुलिस कुछ भी करने में सक्षम है... 
ज़िन्दगीनामा पर Sandip Naik 

Monday, September 17, 2018

"मौन-निमन्त्रण तो दे दो" (चर्चा अंक-3097)

सुधि पाठकों!
 सोमवार की चर्चा में 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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चन्द माहिया :  

क़िस्त 54 

1:  
ये कैसी माया है  
तन तो है जग में  
मन तुझ में समाया है  
:2:  
जब तेरे दर आया  
हर चेहरा मुझ को  
मासूम नज़र आया... 
आपका ब्लॉग पर आनन्द पाठक 
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ये कैसा शहर है.. 

ये कैसा शहर है ना कोई काफ़िया ना कोई बहर है। 
क्यूँ उनींदा सा है ए बोझिल पलकों में सुबह की पहर है... 
kamlesh chander verma 
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स्तन कैंसर 

Kishore Ghildiyal  
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"दिखता नहीं जमीर" (चर्चा अंक- 3099)

सुधि पाठकों!  बुधवार   की चर्चा में  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। राधा तिवारी (राधे गोपाल) -- बालकविता   "छुट्टी दे द...