Wednesday, January 16, 2019

"सरदी ने रंग जमाया" (चर्चा अंक-3218)

मित्रों! 
बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।  
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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सिरा सुख दुःख का ... 

दुःख नहीं होगा तो क्या जी सकेंगे ...
खिलती हुई धूप के दुबारा आने की उमंग
स्याह रात को दिन के लील लेने के बाद जागती है
सर्दी के इंतज़ार में देवदार के ठूंठ न सूखें
तो बर्फ की सफ़ेद चादर तले प्रेम के अंकुर नहीं फूटते... 
Digamber Naswa 
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उड़ी-द सर्जीकल स्ट्राइक 

पिछली फिल्म "केदारनाथ"देखते समय "उड़ी-द सर्जीकल स्ट्राइक" का ट्रेलर देख ये निश्चित था कि इसे देखना है।क्योंकि फ़िल्म की कहानी का विषय वस्तु ही कुछ ऐसा है कि वो पहली नजर से ही आपको आकर्षित करने की क्षमता रखता है... 
Dark Gamers 
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आई लव यू 

Mukesh Kumar Sinha  

Tuesday, January 15, 2019

"सूर्य उत्तरायण हुआ" (चर्चा अंक-3217)

मित्रों! 
मंगलवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।  
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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दोहे  

"सिर पर खड़ा बसन्त"  

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वो आकर्षण....... 

संजय भास्कर 

yashoda Agrawal  
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मैं लिखूँगी उनका नाम 

रश्मि प्रभा...  
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मेरी सद्य प्रकाशित ग़ज़ल संग्रह------  

पीर ज़माने की -----  

डा श्याम गुप्त --- 

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कैसे ना तारीफ करें 

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा  
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इच्छा शक्ति 

प्रबल हो अगर इच्छा शक्ति
हिमालय की भी नहीं कोई हस्ती
धड़क रही हो ज्वाला जब दिलों में
आतुर उतनी तब होती जीतने की प्रवृति... 

RAAGDEVRAN पर 
MANOJ KAYAL 
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मकरसंक्रांति की बधाई... 

Lovely life पर
ovely edu  
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शीत ऋतु----- 

डा श्याम गुप्त 

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बसपा-सपा ने क्यों की  

कांग्रेस से किनाराकशी? 

pramod joshi  
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भूमंडलोत्तर कहानी – २३ :  

चयनित अकेलेपन का अनिवार्य उपोत्पाद  

(समापन) 

समालोचनपरarun dev 

Monday, January 14, 2019

"उड़ती हुई पतंग" (चर्चा अंक-3216)

मित्रों! 
सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।  
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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चिट्ठाकारी और दस साल 

पता है
कुछ नहीं होना है
इस लिखने लिखाने से

और यूँ ही
दस साल से
लिखा लिखाया
खुद ही झण्ड हो गया... 
सुशील कुमार जोशी 
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लौट आना 

Anita Saini  
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जानिए…  

क्‍या है अघोर संप्रदाय,  

और कैसे होते हैं अघोरी साधु 

Alaknanda Singh 
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उम्र फ़साना 

उम्र तो सिर्फ़ और सिर्फ़ एक फ़साना हैं  
चेहरे की झुर्रियाँ ही सिर्फ़ वक़्त का अफ़साना हैं... 
RAAGDEVRAN पर 
MANOJ KAYAL 
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स्वर उनके ही 

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा 
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जाड़े की एक सुबह 

कुहासे की चिलमन से झाँकते सूर्य ने 
भेज दीं कुछ किरणें भूमि पर  
वे लगीं बड़ी भली  
सर्द शरीरों में पड़ गई जान  
खुल गए अंग... 
Jayanti Prasad Sharma -
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