Friday, April 19, 2019

"जगह-जगह मतदान" (चर्चा अंक-3310)

सभी पाठकों को
हनुमान जयन्ती की
हार्दिक शुभकामनाएँ।
शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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भक्ति और शक्ति के  

बेजोड़ संगम हैं हनुमान 

चैत्र शुक्ल एकादशी के दिन  मघा नक्षत्र में भक्त शिरोमणि, भगवान राम के अनन्य स्नेही शत्रुओं का विनाश करने वाले हनुमान जी का जन्म हुआ। कुछ विद्वान कल्पभेद से चैत्र की पूर्णिमा के दिन हनुमान जी का शुभ जन्म होना बताते हैं।
वायुपुराण के अनुसार-  
“आश्विनस्यासिते पक्षे स्वात्यां भौमे चतुर्दशी। मेषलग्नेऽञ्जनी गर्भात् स्वयं जातो हरः शिवः।।“... 
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कुछ ऐसी बात फ़ानी कह रहा है 

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ 
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बेटियां 

Kailash Sharma 
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पीड़ा 

deepshikha70  
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अब न्याय होगा? 

किसी ने न्याय को देखा है क्या? विकास को भी तो नहीं देखा था ना! प्रजा के किसी अदने से बंदे ने राजा को ललकार दिया, तत्काल सर कलम कर दिया गया, राजा ने कहा कि हो गया न्याय! न्याय का निर्धारण राजा की पसन्द से होता है। जो राजा के हित में हो बस वही न्याय है। 1975 याद है ना, शायद नौजवानों को खबर नहीं लेकिन हम जैसे लोगों के तो दिलों में बसा है, भला उस न्याय को कैसे भूल सकते हैं! न्यायाधीश ने न्याय किया कि तात्कालीन प्रधानमंत्री ने चुनाव गलत तरीकों से जीता है लेकिन प्रधानमंत्री तो खुद को राजा मानती थी तो आपातकाल लगाकर, सारे विपक्ष को जैलों में ठूसकर, मीडिया की बोलती बन्द कर...  
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धर्म  

(सच्ची घटना पे आधारित लघु कथा)  
अरुण साथी 
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एक लोकभाषा गीत- 

फूलवा कमल कै महकै 

मोदी जी कै काम जइसे रात में अँजोरिया । 
फूलवा कमल कै महकै मह मह साँवरिया ।
सड़कन क जाल बिछलस्वच्छता देखात  

बागैस के कनेक्शन सेहियरा जुड़ात बा 
घर-घर में शौचालयबड़ी नीक बात बा 
खतम बा दलालीबन्द होई चोर बजरिया ... 
जयकृष्ण राय तुषार  

Thursday, April 18, 2019

"कवच की समीक्षा" (चर्चा अंक-3309)

मित्रों!
बृहस्पतिवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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समीक्षा-  

'कवच'  

वर्तमान परिवेश के धरातल पर रची गई काल्पनिक सत्य है 'कवच'
मानव का परिपक्व मन समाज की, परिवार की हर छोटी-बड़ी घटना से प्रभावित होता है और एक साहित्यकार तो हर शय में कहानी ढूँढ़ लेता है। आम व्यक्ति जिस बात या घटना को दैनिक प्रक्रिया में होने वाली मात्र एक साधारण घटना मान कर अनदेखा कर देते हैं या बहुत ही सामान्य प्रतिक्रिया देकर अपने मानस-पटल से विस्मृत कर देते हैं, उसी घटना की वेदना या रस को एक साहित्यिक हृदय बेहद संवेदनशीलता से महसूस करता है और फिर उसे जब वह शिल्प सौंदर्य के साथ कलमबद्ध करता है तो वही लोगों के लिए प्रेरक और संदेशप्रद कहानी बन जाती है। एक कहानीकार की कहानी कोरी काल्पनिक होते हुए भी अपने भीतर सच्चाई छिपाए रहती है, वह एक संदेश को लोगों के समक्ष रोचकता के साथ प्रकट करती है और चिंतन को विवश करती है... 

ANTARDHWANI 

रुहानी बातें-पुरानी बातें 

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा  
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हिमाचल में आठ दिन  

भाग --5 

Yeh Mera Jahaan पर 
गिरिजा कुलश्रेष्ठ  
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Wednesday, April 17, 2019

"बेचारा मत बनाओ" (चर्चा अंक-3308)

बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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समीक्षा  

"कोशिश तीन मिसरी शायरी 

(तिरोहे)"  

(समीक्षक-डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’) 

काफी दिनों से डॉ. सत्येन्द्र गुप्ता कीतीन मिसरी शायरी (तिरोहे) की नई विधा पर प्रकाशित कृति “कोशिश” मेरे पास समीक्षा की कतार में थी। मगर समयाभाव के कारण समय नहीं निकाल पाया था।“कोशिश” के नाम से तीन मिसरी शायरी (तिरोहे) के बारे में मेरे लिए लिखना एक नया अनुभव और कठिन कार्य था... 
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हमें भगवान के नाम पर  

बेचारा मत बनाओ !  

रश्मि प्रभा...  
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शरीफ के ही हैं  

शरीफ हैं सारे  

जुबाँ खुलते ही  

गुबार निकला 

सुशील कुमार जोशी  
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ललकी की पाती  

सीएम के नाम 

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ताज़ी नज़्म पकाते हैं.... 

दिलीप 

yashoda Agrawal  
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हिमाचल में आठ दिन  

भाग 4 

Yeh Mera Jahaan पर 
गिरिजा कुलश्रेष्ठ  
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कविता प्यासी रह गई 

हम बादल थे बरस गये  
पर जमीन सूखी रह गई  
तेरे समान के तह में दुनिया जहान सब था  
शरीर कुछ भी ना था हमारे लिये  
इक रुह की प्यास में हम जुदा रह गये  
ओंस थे घास पर और नमी आंखों की  
शब्द शब्द पिघले पर  
पंक्तियों की कतार में  
कविता प्यासी रह गई! 
संध्या आर्य 
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औकात -  

नरेश सक्सेना 

रवीन्द्र भारद्वाज  
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सौंफ प्रीमिक्स से इंस्टंट बनाइए  

सौंफ का पौष्टिक शरबत 

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मतदान 

आओ मतदान करे  
फिर से बदलाव करे  
लोकतंत्र की हो रही है शादी  
हम सब बन जाये बाराती  
वोट हमें डालना है जरुरी  
कोई शिकयत न रहे अधूरी  
हमें सबको जगाना है  
मतदान सबको कराना है... 
aashaye पर garima  
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आमराई में  

कैरी से लदा वृक्ष 

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सज़ा-ए-मौन 

( 'पूछो न कैसे मैंने रैन बिताई' गीत की तर्ज़ पर )  
पूछो न कैसे, मैंने बैन बिताया,  
इक जुग जैसे इक पल बीता,  
जुग बीते मोहे चैन न आया,  
मरघट जैसे सन्नाटे में,  
रहना हरगिज़ रास न आया... 
गोपेश मोहन जैसवाल 
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मां 

Vandana Ramasingh  
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मुक्कमल होने को शापित हैं -  

राजीव उपाध्याय 

Rajeev Upadhyay  
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खामोश लब 

ख़ामोशियों को मैंने  
नए अंदाज़ दे दिए  
लफ्ज़ जो जुबाँ पे आ ना पाए  
उन्हें नए मुक़ाम दे दिए... 
RAAGDEVRAN पर 
MANOJ KAYAL  
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एक गीत - 

वह देश का चौकीदार हुआ 

जयकृष्ण राय तुषार  
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महामूर्ख सम्मेलन 

shashi purwar  
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लालकिले पर तिरंगा 

Anita