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Wednesday, August 23, 2017

"खारिज तीन तलाक" (चर्चा अंक 2705)

मित्रों!
बुधवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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गीत 

"कॉफी की चुस्की"  

क्षणिक शक्ति को देने वाली।
कॉफी की तासीर निराली।।

जब तन में आलस जगता हो,
नहीं काम में मन लगता हो,
थर्मस से उडेलकर कप में,
पीना इसकी एक प्याली।
कॉफी की तासीर निराली... 
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जूही बेला मोंगरा की कली 

जूही बेला मोंगरा की कली 
खिलती बाबुल के अँगना 
महकती महकाती संवारती 
घर पिया का... 
Ocean of Bliss पर Rekha Joshi  
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चले यह जिंदगी लेकर हमेशा शाम तक रिश्ते- 

कहीं बेनाम हैं रिश्ते, कहीं बस नाम के रिश्ते। 
चतुर मानुष बनाते हैं हमेशा काम से रिश्ते... 
रविकर 
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जोड़ी बनाई ईश ने तो स्वाद मीठा लीजिए

रविकर 
अरबपति पुत्र की माता, बनी कंकाल सड़ गलकर।
रहे रेमंड का मालिक, किराये की कुटी लेकर।
कलेक्टर खुदकुशी करता, कलह जीना करे दूभर।
हितैषी खोज तू, है व्यर्थ रुतबा शक्ति धन रविकर... 
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कहीं कुछ रह तो नहीं गया।।

रविकर 
मैया कार्यालय चली, सुत आया के पास। 
पर्स घड़ी चाभी उठा, प्रश्न पूछती खास... 
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प्रवचन 

प्रवचन में कथाऐं केवल भावुकता बढ़ाने वाली होती हैं जिससे भावुक होकर स्त्री पुरुषों की आंखों में नमी आ जाये और अब भक्त जब अपनी वीडिओ बनते देखते हें या कैमरे की जद में बैठते हैं तो ऑंखें पोंछने लगते हैं जिससे टीवी में अव्छे से भक्त दिखाई दें । हर कथा भेदभाव  अपना तेरी छोड़ने बड़ों का मान आदर करने  ईश्वर में आस्था रखो लड़ो नहीं भाई भाई में प्यार... 
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महाराष्ट्र का माटुंगा रेलवे स्टेशन हाल में पूरी तरह से महिलाओं के हाथ में दे दिया गया। ये देश का ऐसा पहला रेलवे स्टेशन है जिसकी सभी व्यवस्थाएं महिलाओं के हाथ में होंगी। स्टेशन में गाड़ियों के आने जाने के समय के एनाउंसमेंट्स से लेकर यात्रियों के टिकट चेक करने तक के सभी काम महिलाओं के ही जिम्मे हैं। स्टेशन का कंट्रोल रूम भी महिलाएं संभालती हैं। टिकट काटने का काम भी महिलाओं के ही जिम्मे है। ये एक सुखद एहसास है... 

अग्निवार्ता पर ASHISH TIWARI  
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Tuesday, August 22, 2017

"सभ्यता पर ज़ुल्म ढाती है सुरा" (चर्चा अंक 2704)

मित्रों!
मंगलवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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अमरीका में रहना विज्ञान 

और भारत में रहना कला 

आज जुगलबंदी का विषय ’हवा’ था. हवा जब आक्सीजन सिलेंडर से हवा हो जाती है तब गोरखपुर जैसी हृदय विदारक घटना घटित होती है जिसमें ६२ बच्चे अपनी जान से हाथ धो बैठेते हैं और कारण पता चलता है कि सिलेंडर सप्लाई करने वाली कम्पनी को पेमेंट नहीं किया गया था अतः सिलेंडर भरे नहीं गये. ऐसे में जब पेमेंट के आभाव में सिलेंडर से हवा गायब हो सकती है तो हमें ही लिखने के कौन से पैसे मिले जा रहे हैं..  
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आसपास कुछ ईश्वरीय होने का अहसास 

सूक्ष्म मध्यम महत दिव्य अलौकिक 
या और भी कई प्रकार के आभास कराते 
अपने ही आसपास के कार्यकलाप... 
उलूक टाइम्स पर सुशील कुमार जोशी  
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हर घर में पल रहा है इक साथी नवाब का-- 

ग़ज़ल 

मजमून ही न पढ़ पाए दिल की किताब का 
क्या फ़ायदा मिला उसे फिर आफ़ताब का... 
मधुर गुंजन पर ऋता शेखर 'मधु' 
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अब क्यों नहीं बजते 

ये फ़िल्मी गाने ? 

कुछ दशक पहले के फ़िल्मी गीतों में मनोरंजन के साथ कोई न कोई सामाजिक सन्देश भी हुआ करता था । उन गीतों के जरिए देश और समाज की बुराइयों पर और बुरे लोगों पर तीखे प्रहार भी किए जाते थे । जैसे - *दो जासूस करे महसूस कि दुनिया बड़ी खराब है , कौन है सच्चा ,कौन है झूठा , हर चेहरे पे नकाब है । ---
 *क्या मिलिए ऐसे लोगों से , जिनकी फितरत छुपी रहे , 
नकली चेहरा सामने आए , असली सूरत छिपी रहे... 
मेरे दिल की बात पर Swarajya karun 
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प्रीत की भाँवरें 

मुझ सी हठी न मिली होगी कोई 
तभी तो तुमने भी चुनी उलट राह ... 
एक प्रयास पर vandana gupta 
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रिश्ते 

देखे भीड़ में हमने बिखरते रिश्ते 
जीवन की भाग दौड़ में सिसकते रिश्ते... 
Ocean of Bliss पर Rekha Joshi 
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जो अपने दिल में इन्कलाब लिए बैठा है ... 

वो रौशनी का हर हिसाब लिए बैठा है 
जो घर में अपने आफताब लिए बैठा है... 
स्वप्न मेरे ...पर Digamber Naswa 
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किताबों की दुनिया - 139 

नीरज पर नीरज गोस्वामी 
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