फ़ॉलोअर



यह ब्लॉग खोजें

बाबा रामदेव लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
बाबा रामदेव लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, जून 08, 2011

"अरूणेश सी दवे का सादर नमस्कार!" (चर्चा मंच-539)

मित्रों! 

आप सभी को चर्चा मंच के  डाकिये 

अरूणेश सी दवे का सादर नमस्कार!  

सुबह सवेरे  भाई सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी का सोनिया मम्मी को खत    लेकर चला ही था कि शास्त्री जी ने रोका बोले आपके कहने से लिखा है सोनिया मम्मी नाराज होगी तो आप ही जानो "हास्यगीत-चप्पल-जूता मम्मी जी!" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक")  लीजिये  साहब लिखें आप और पिटे डाकिया ये भी सही है । खैर साहब आगे बढ़ा तो खरे जी ने भी अपना पत्र थमाया एक पाती बाबा जी के नाम  फ़िर आगे बढ़ा तो भाई ललित शर्मा मूछॆ  एठते बिना टिकट की डाक लिये खड़े थे । बोले डाक   मन करता है मोहन तु्मसे, पूछूँ एक सवाल ! ---- ललित शर्मा समय से न पहुंची तो ठीक न होगा । मन ही मन भुनभनाता सोच रहा था कि सबको आज नेता बाबा को ही खत लिखना है कोई  प्रेम पत्र मिलता तो पढ़ने में मजा भी आता । इतने में बाजू खड़े शेखावत जी ने याद दिलाया डाकिया बाबू  जैसी करनी वैसी भरनी आप दूसरो का खत पढ़ोगे तो कोई और आप का भी पढ़ लेगा । तभी वीरू भाई ने रोका बोले डाकिया बाबू काहे ये सब लोग नेता बाबा को खत लिखता है 
खैर बात तो सही ही है इस देश में पिछले एक हफ़्ते मे बाबा से लेकर मम्मी तक और रीढ़ विहीन विपक्ष  ने जो किया वह अक्षम्य है । यही सोच रहा था कि सर मे  दुनाली आ टिकी बोले क्या जानते हो जो बड़बड़ा रहे हो सीखो पहले ''रामलीला में महाभारत'' के बाद राजनीतिक परिभाषाएं   पढ़ते ही दिमाग खुल गया फिर सोचा अच्छा हुआ किसी को मालूम न  पड़ा हमारा आई क्यू लेवल । लेकिन वन्दना बहन से क्या छुपा था मुस्कुराई भाई आखिर अपनों से कैसी पर्दादारी?    पोल खुलने के बाद क्या करें सोचते ही हबीब जी ने  संवाद की दवाई दे दी । दवाई लेकर बढ़ा ही था कि संजीव जी की डाक अफगानिस्तान - दिलेर लोगों की खूबसूरत जमीन  पढ़ते ही मन प्रसन्न हो गया लेकिन मित्रों  खुशी और ग़म डाकिये के साथ-साथ चलता है ।  ई-मेल मिलने पर गूगल आकर ढाँढस नही बँधा सकता एसएमएस मिलने पर नोकिया आपको साहस नही दिला सकता । ऐसे ही दौर में गगन शर्मा जी दुखी थे भारतीय होने की असहायता पर आज मन बहुत व्यथित है, अपने आप को जान कर !!!  उनका मन बहलाने के लिये मैंने उनको राज भाटिया जी का एक छोटी सी भूल और सॊंहलवा जन्म दिन   दिखाया और कहा भी भाई शर्मा जी मेरी हर सोच ...............केवल राम से काम होने वाला नही है । देश हित में सर्व समाज सर्व धर्म हित में हमे लिखना होगा ।संक्रमण काल मे लेखक ही समाज को नई दिशा और धारा दिखाता है । आज मीडियासुर के बिकाऊ होने की स्थिति में हमे जिम्मेदारी से लेखन करते हुये देश हित में काम करना है ।

जय हिन्द!!