सादर अभिवादन।
हवा में ख़ूब घुल रहा है ज़हर,
प्रदूषण अब ढा रहा है क़हर,
साँस घुट रही पहर-दर-पहर,
धुंध में क्या सुबह क्या दोपहर।
रवीन्द्र सिंह यादव
हवा में ख़ूब घुल रहा है ज़हर,
प्रदूषण अब ढा रहा है क़हर,
साँस घुट रही पहर-दर-पहर,
धुंध में क्या सुबह क्या दोपहर।
रवीन्द्र सिंह यादव
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भारत त्योहारों का देश है। करवा-चौथ के बाद आज अहोई-अष्टमी है। इस दिन पुत्र की कामना लिये उपवास की परंपरा है जो अब एक आलोच्य विषय है। बेटा-बेटी में भेद रखने वाली सामाजिक बुराई पर सार्थक संदेश देती आदरणीय शास्त्री जी की दोहावली-
भारत त्योहारों का देश है। करवा-चौथ के बाद आज अहोई-अष्टमी है। इस दिन पुत्र की कामना लिये उपवास की परंपरा है जो अब एक आलोच्य विषय है। बेटा-बेटी में भेद रखने वाली सामाजिक बुराई पर सार्थक संदेश देती आदरणीय शास्त्री जी की दोहावली-
दोहे
"पर्व अहोई-अष्टमी"
(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

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आदरणीय प्रोफ़ेसर गोपेश मोहन जैसवाल जी के संस्मरण साहित्यिक धरोहर हैं जिनमें तत्कालीन समाज की दशा का सूक्ष्म चित्रण मिलता है जो समाज के बदलते स्वरुप की कहानी कहते हैं। आइए पढ़ते हैं 'तिरछी नज़र' ब्लॉग पर एक शानदार संस्मरण -
खीरगति

तिरछी नज़र
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आज आलोचना किसी कोने में दुबककर सुबक रही है। आत्ममुग्धता की आँधी में आलोचना के तिनके हमें चुभने लगे हैं फलस्वरूप साहित्य में सृजन का स्तर वाँछित ऊँचाइयों तक पहुँचने से पूर्व ही हाँफने लगा है। पढ़िए आदरणीय संतोष त्रिवेदी का एक विशिष्ट व्यंग्य -
आलोचक की चपेट में साहित्य !

टेढ़ी उँगली
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वर्तमान में दाम्पत्य जीवन में व्याप्त होती नीरसता और प्रेम के नये प्रतिमान प्रेम में आधुनिक मूल्यों की स्थापना कर रहे हैं। ध्रुव सिंह 'एकलव्य' जी की रचना रोबोटिक-प्रेम और स्वाभाविक प्रेम पर प्रकाश डालती हुई व्यापक संदेश छोड़ती है -
आदरणीय प्रोफ़ेसर गोपेश मोहन जैसवाल जी के संस्मरण साहित्यिक धरोहर हैं जिनमें तत्कालीन समाज की दशा का सूक्ष्म चित्रण मिलता है जो समाज के बदलते स्वरुप की कहानी कहते हैं। आइए पढ़ते हैं 'तिरछी नज़र' ब्लॉग पर एक शानदार संस्मरण -
खीरगति
तिरछी नज़र
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आज आलोचना किसी कोने में दुबककर सुबक रही है। आत्ममुग्धता की आँधी में आलोचना के तिनके हमें चुभने लगे हैं फलस्वरूप साहित्य में सृजन का स्तर वाँछित ऊँचाइयों तक पहुँचने से पूर्व ही हाँफने लगा है। पढ़िए आदरणीय संतोष त्रिवेदी का एक विशिष्ट व्यंग्य -
आलोचक की चपेट में साहित्य !

टेढ़ी उँगली
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वर्तमान में दाम्पत्य जीवन में व्याप्त होती नीरसता और प्रेम के नये प्रतिमान प्रेम में आधुनिक मूल्यों की स्थापना कर रहे हैं। ध्रुव सिंह 'एकलव्य' जी की रचना रोबोटिक-प्रेम और स्वाभाविक प्रेम पर प्रकाश डालती हुई व्यापक संदेश छोड़ती है -
आभासी क्षितिज

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शब्द बोलते हैं। शब्द का जीवंत होना ही जीवन है और शब्द का ख़ामोश हो जाना मृत्यु। न्यूनतम शब्दों में भाव गाम्भीर्य से ओतप्रोत सीमा सदा जी की एक ख़ूबसूरत एहसासात से सजी रचना आपकी नज़र -
शब्द बोलते हैं। शब्द का जीवंत होना ही जीवन है और शब्द का ख़ामोश हो जाना मृत्यु। न्यूनतम शब्दों में भाव गाम्भीर्य से ओतप्रोत सीमा सदा जी की एक ख़ूबसूरत एहसासात से सजी रचना आपकी नज़र -
परिक्रमा मन से मन तक !!

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मख़मली जज़्बात को समेटे हमारे एहसासात से गुज़रती आदरणीया पम्मी सिंह 'तृप्ति' जी की मनमोहक प्रस्तुति आपकी सेवा में पेश-ए-नज़र है-
माहिया

गुफ़्तगू
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सवालों की झड़ी लगाती अपने वजूद को स्वीकारती वक़्त को ललकारती अनीता लागुरी 'अनु' जी की मुखर अभिव्यक्ति में कई गंभीर सवाल किये गये हैं जो उन विशिष्ट परिस्थितियों से जूझ रहे व्याकुल दिल-ओ-जिगर को बींधते नज़र आते हैं। पढ़िए एक जीवंत चित्रण-
तुम क्यों नहीं..?

अनु की दुनिया : भावों का सफ़र
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सुखों में सर्वश्रेष्ठ सुख आध्यात्मिक सुख है। आँचल पाण्डेय जी अपने लघु लेख में विस्तारपूर्वक चर्चा कर रहीं हैं सुख के प्रकारों और तत्त्वबोध के महत्त्व पर और भौतिकता के मायाजाल से सचेत रहने का आह्वान विचारणीय है-
मख़मली जज़्बात को समेटे हमारे एहसासात से गुज़रती आदरणीया पम्मी सिंह 'तृप्ति' जी की मनमोहक प्रस्तुति आपकी सेवा में पेश-ए-नज़र है-
माहिया

गुफ़्तगू
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सवालों की झड़ी लगाती अपने वजूद को स्वीकारती वक़्त को ललकारती अनीता लागुरी 'अनु' जी की मुखर अभिव्यक्ति में कई गंभीर सवाल किये गये हैं जो उन विशिष्ट परिस्थितियों से जूझ रहे व्याकुल दिल-ओ-जिगर को बींधते नज़र आते हैं। पढ़िए एक जीवंत चित्रण-
तुम क्यों नहीं..?

अनु की दुनिया : भावों का सफ़र
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सुखों में सर्वश्रेष्ठ सुख आध्यात्मिक सुख है। आँचल पाण्डेय जी अपने लघु लेख में विस्तारपूर्वक चर्चा कर रहीं हैं सुख के प्रकारों और तत्त्वबोध के महत्त्व पर और भौतिकता के मायाजाल से सचेत रहने का आह्वान विचारणीय है-
सुख क्या है?

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ज़िंदगी में अति ख़ुशनुमा लम्हात आते हैं पर कभी-कभी लेकिन वे यादों की पूँजी बनकर जमा हो जाते हैं। आनन्द सिंह शेखावत जी प्रस्तुत कर रहे हैं एक मर्मस्पर्शी रचना-
ज़िंदगी में अति ख़ुशनुमा लम्हात आते हैं पर कभी-कभी लेकिन वे यादों की पूँजी बनकर जमा हो जाते हैं। आनन्द सिंह शेखावत जी प्रस्तुत कर रहे हैं एक मर्मस्पर्शी रचना-
यादें तेरी

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यथार्थपरक चिंतन में मार्मिकता की झलक को महसूस करा देना सृजन की सार्थकता है। आदरणीया अनुराधा चौहान जी पेश कर रहीं हैं अभावग्रस्त जीवन का एक हृदयस्पर्शी शब्दचित्र-
यथार्थपरक चिंतन में मार्मिकता की झलक को महसूस करा देना सृजन की सार्थकता है। आदरणीया अनुराधा चौहान जी पेश कर रहीं हैं अभावग्रस्त जीवन का एक हृदयस्पर्शी शब्दचित्र-
दफ़न हो जाते सपने

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भारतीय जीवन शैली में भोजन में अनेक शोधों के बाद जो सामग्री शामिल की गयी है वह आज तक अपनी उपयोगिता बनाये हुए है। मैंथी एक आयुर्वेद औषधि भी है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करती एक प्रस्तुति आपकी सेवा में-
भारतीय जीवन शैली में भोजन में अनेक शोधों के बाद जो सामग्री शामिल की गयी है वह आज तक अपनी उपयोगिता बनाये हुए है। मैंथी एक आयुर्वेद औषधि भी है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करती एक प्रस्तुति आपकी सेवा में-
जादुई मैथीदाने के लज़ीज़ व्यंजन -
मैथी खिचड़ी

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और अब चलते-चलते पेश-ए-नज़र है आधुनिक कविता में युवा पीढ़ी का आधुनिक चिंतन। रवीन्द्र भारद्वाज जी की प्रेम में चलती उथल-पुथल का नया रूप पेश कर रहे हैं-
