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बुधवार, मार्च 03, 2010

“बिना ब्याहे घर नहीं लौटे..... !” (चर्चा मंच)

"चर्चा मंच" अंक-80
चर्चाकारः डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
आइए आज का
"चर्चा मंच" सजाते हैं-

निवेदन यह है कि यदि आप
पल-पल! हर पल!! http://palpalhalchal.feedcluster.com/

में अपना ब्लॉग शामिल कर लेंगे तो
मुझे
चर्चा मंच में आपका लिंक उठाने में सरलता होगी।

''पाबला जी से खुली बातचीत !''

____________साथियो आपका हार्दिक अभिवादन, होली के पूर्व श्री बी एस पाबला से खुल कर चर्चा हुई . किन्तु नेट एवं अन्य विवषताओं के चलते पाडकास्ट पोस्ट न कर सका. सादर प्रस्तुत है. आपसे पाडकास्ट इंटरव्यू की कमियों की ओर इंगित

मिसफिट

गिरीश बिल्लोरे मुकुल अब पॉडकास्टर

देसिल बयना - 20 : बिना ब्याहे घर नहीं लौटे..... !

-- -- करण समस्तीपुरी जय हो ! जनता-जनार्दन !! कैसन रही होली ? सब कुशल है ना.... ? अरे मरदे का बताएं.... हमरे होली में तो ऐसन गुलाल उड़ा कि जिनगी भर नहीं भूलेंगे। बड़ी शौक से गए रहे गाँव होली खेले.... लेकिन वही हो गया, 'शौक में सोहारी [रोटी] ! आलू बैगन के

मनोज

करण समस्तीपुरी

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हम हैं बच्चे सबसे अच्छे : विश्वबंधु की एक बालकविता

| Author: रावेंद्रकुमार रवि | Source: सरस पायस

हम हैं बच्चे सबसे अच्छे ----------- आज आपको 7 साल के एक नन्हे कवि की कविता पढ़वाई जा रही है, जो शाहजहाँपुर (उ.प्र.) के एम. आर. सिंधिया पब्लिक स्कूल में कक्षा - 2 के छात्र हैं । नन्हे कवि की अभिव्यक्ति को ज्यों का त्यों प्रकाशित किया जा रहा है - ----------- हम हैं बच्चे मन के सच्चे पाठशा ... [read more]

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bhartimayank

“रविवासरीय साप्ताहिक पहेली-22 का उत्तर” (अमर भारती) - * र**विवासरीय साप्ताहिक पहेली-21 का सही उत्तर है- * ब्लॉगर-1- श्रीमती संगीता स्वरूप मुख्य ब्लॉग- “गीत” ब्लॉगर-2- श्री रावेंद्रकुमार रवि मुख्य ब्लॉग- “स...

बुरा भला

सिजदा शेख सलीम चिश्ती की शान में - तेरी इक निगाह पर सब कुछ लुटाने आये हैं... 27 फरवरी का दिन बेहद खास था....उस दिन में फ़तेहपुर सिकरी में था।इस दिन पूरी दुनिया हजरत मोहम्मद साहब का जन्मदिन मन...

simte lamhen

बोले तू कौनसी बोली ? - कुछ अरसा हुआ इस बात को...पूरानें मित्र परिवार के घर भोजन के लिए गए थे। उनके यहाँ पोहोंचते ही हमारा परिचय, वहाँ, पहले से ही मौजूद एक जोड़े से कराया गया। उसमे..

तेताला

लाल बहादुर शास्त्री जी और मंगलवार का दिन !!! - कभी-कभी कुछ ऐसा घटता है जिसके सामने कोई भी तर्क काम नहीं करता और हम इन संयोगों को मुंह बाए आंखें फैलाये कुदरती करिश्मा कह अपने आप को समझा लेते हैं। कुछ इसी..

अंधड़ !

पत्थर फेंकू सभ्यता और सोच ! - *बहुत पहले किसी किताब में (किताब का नाम याद नहीं आ रहा) भेड़ो के बारे में एक सुन्दर प्रसंग पढ़ा था! वो एक आम लोकोक्ति तो आपने सुनी ही होगी कि अगर एक भेड़ ...

नन्हा मन

गुड़िया - आकांक्षा यादव - नई-नवेली प्यारी गुड़िया, लगती कितनी न्यारी गुड़िया। नीली, पीली, लाल, गुलाबी, सबको खूब लुभाती गुड़िया। झालरदार फ्राक पहने, ठुमककर इतराती गुड़िया। कभी हँसाती, कभी...

SADA

तोड़ने से पहले ... - तुम मेरा ही अंश हो, आओ तुमको बतलाऊं, तुम्‍हें तुम्‍हारे बारे में मेरी धड़कनों से तुम्‍हें हवा मिलने लगी है तुम्‍हारा वजूद अस्तित्‍व में आ...

नन्हें सुमन

“मदारी का खेल : रानीविशाल” * "एक खेल मदारी का"* * डम-डम, डम-डम डमरू बाजा। उछला-कूदा, छुटकू राजा।।* *खाना खाकर ताजा-ताजा।* *ठुमक-ठुमककर छुटकू नाचा।।* *वानर-राजा खेल दिखाते।* *बच्चे त...

प्रतिभा की दुनिया ...!!!

बेवजह का लिखना -

यूं मैं बिना मन के कभी नहीं लिखती. नौकरी की जरूरतों के अलावा. अब तक इक्का-दुक्का मौकों पर ही ऐसा बेमन का लिखा है जैसा आज लिखने बैठी हूं. कुछ-कुछ पीछा छुड़...

गीत सुनहरे

पति - पत्नी - पति - पत्नी अहा ! मन में बिखरी खुशियाँ, अहा ! दिल में खिलती कलियाँ . आज यौवना का परिणय है, अपने सपनों में तन्मय है . लेकर भाव पूर्ण समर्पण, करना है..

उच्चारण

“पढ़ना-लिखना मजबूरी है!” - * मुश्किल हैं विज्ञान, गणित, हिन्दी ने बहुत सताया है। अंग्रेजी की देख जटिलता, मेरा मन घबराया है।। भूगोल और इतिहास मुझे, बिल्कुल भी नही सुहाते हैं। ...

नुक्कड़

हिन्‍दी ब्‍लॉगरों पर्यावरण की मदद कीजिए : सीएनजी गैस (अविनाश वाचस्‍पति) - नीचे इमेज पर क्लिक करिए और जानिए वही जो जानना चाहते हैं यहीं दिल्‍ली मथुरा हाईवे पर फरीदाबाद में मिलेगी सी एन जी गैस जब भी निकलें वहां से भरवा सकते हैं...

मसि-कागद

तुमने समझा तो मगर शायर ही बस समझा मुझे...--->>> दीपक 'मशाल' - शायर तुमको खोने का वो डर था जिससे मैं डरता रहा मेरे डर को देख तुमने कायर ही बस समझा मुझे जब भी अपना हाल-ए-दिल मैंने लफ़्ज़ों में कहा तुमने समझा तो मगर शायर ह...

जज़्बात

जबसे आँख लगी है ~~ - *हर घर के सामने* *एक कार खड़ी है* *यूँ तो जिन्दगी खुद* *उधार पड़ी है* *~~~~~~~* *लोग 'आँख लगने' को* *कहते हैं सो जाना* *पर * *जबसे आँख लगी है* *तड़पत..

काव्य तरंग

विकास नहीं गुलामी की सिड़ी है GMO......प्रकृति के साथ छेड़ छाड़ विनाश की द्योतक {Bt brinjal} - ज़रा सोचिये आज से कई साल पहले जब पारम्परिक खेती की जाती थी तब कभी आपने सुना था किसी को कहते की हमें टमाटर से एलर्जी है या सोयाबीन या फिर मूंगफली से एलर्जी ...

ललितडॉटकॉम

फुरसतिया जी...............जरा इसे भी पढ़िए................!!!ललित शर्मा - अब क्या बताये हम अपनी कहानी.........आये थे ब्लागिंग करने को और दरबानी करने लगे.........इसे ही कहते हैं........*आये थे हरिभजन को ओटन लगे कपास*.......... हम...

Gyanvani

असर तो है .........!! - खेतों में सरसों का रंग और चटक हुआ लहराया मेरा आँचल चुनरी का कसूमल गालों के भंवर मुस्कुराते रहे गुलाबी रंगत चेहरे की हुई और सुर्ख रतनारी कदम नापते रहे द...

गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष

गत्यात्मक ज्योतिष का संक्षिप्त परिचय और इसके जनक के बारे में जानकारी - कई दिन पूर्व के अपने पोस्‍ट में मैं यह स्‍पष्‍ट कर चुकी हूं कि मैने अपने ब्‍लॉग को हल्‍का बनाने के लिए कई विजेट्स हटा दिए हैं। इसी क्रम में...

शब्दों का दंगल

“सामान सौ बरस का, पल की खबर नही!” - “मत्यु का समय निश्चित है!” *आज दो घटनाक्रम सुनाने का मन है-* *1- पाण्ड्वों के अज्ञातवास के समय बियाबान जंगल में जब पाँचों भाइयों को प्यास ने सताया तो युधि..

Gyan Darpan ज्ञान दर्पण

संवेदनहीन द्वारा संवेदनशीलता की अपेक्षा - कुछ दिन पहले मै लाला रामजीलाल के कारखाने में उनके ऑफिस उनके पास बैठा था , लाला जी अपने कुछ देनदारों की संवेदनहीनता पर बड़े खीजे हुए और नाराज थे लाला

शिल्पकार के मुख से

लाल -गुलाल -अबीर के छाये हए हैं रंग-----चित्र होली के----------ललित शर्मा - कल होली का हुआ धमाल-हम तो सुबह से ही तैयार हो कर अपने दालान में बैठ चुके थे.........हमारे यहाँ परंपरा है कि लोग अपने से बड़े (पद, प्रतिष्ठा, उम्र और अजीज ...

saMVAdGhar संवादघर

धत्त तसलीमा ! - तसलीमा जो हैं सो बचपन से ही अत्यंत षड्यंत्रकारी प्रवृत्ति की रहीं। उन्होंने ख़ुद ही अपने चाचा-मामा को उकसाया कि वे उनसे दुराचार करें या इसकी कोशिश करें ताक...

दिनेश दधीचि - बर्फ़ के ख़िलाफ़

तस्वीरों के रोग बहुत हैं... - तस्वीरों के रोग बहुत हैं . आँखें बँधुआ बन जाती हैं, छिन जाती मन की आज़ादी, तय हो जाती चिंतन-धारा, उड़ते पाखी का ऊर्ध्वंग वेग भी सीमित हो जाता है . सुवि...

शब्द-शिखर

जहां मुट्ठी में - अक्सर हम लोग चर्चा में कहते हैं कि इस दुनिया में कुछ भी मुश्किल नहीं है. यदि व्यक्ति चाहे तो धरती क्या असमान भी मुट्ठी में समां सकता है. भले ही यह बात प्रत...



मित्रों ६-७ मार्च को मैं अमृतसर, पंजाब में रहूँगा! ४ मार्च से ८ मार्च तक श्री ललित शर्मा जी चर्चा मंच को सजायेंगे!



पंजाब के ब्लॉगर मित्र मेरे मोबाइल पर

सम्पर्क कर सकते हैं!


मेरा मोबाइल नं है- 09368499921,

09997996437


डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"

बहुत याद आती है उनकी.....मुझे तो कम से कम!



आज की चर्चा को देता हूँ -

यहीं पर विराम!

मंगलवार, मार्च 02, 2010

“होली का धमाल! ताऊ का कमाल!!” (चर्चा मंच)

"चर्चा मंच" अंक-79
चर्चाकारः डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
आइए आज का
"चर्चा मंच" सजाते हैं-  
सभी ब्लॉगर्स को “होली की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!”


निवेदन यह  है कि यदि आप
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होली तो हो ली मगर इस बार की होली में ताऊ ने न जाने कितने ब्लॉगर्स के लिंग परिवर्तित कर दिये!

सबसे पहले देखिए कनाडा के समीर लाल जी की पोस्ट!
इनके सुन्दर गीत को अपना मधुर स्वर दिया है
“अदा” जी ने-

गीला रंग मोहे लगाई दो!!
Author: Udan Tashtari | Source: उड़न तश्तरी ....
पिछले साल होली पर यह गीत लिखा था किन्तु इस साल अदा जी की आवाज और संतोष जी की म्यूजिक नें इस गीत में चार चाँद लगा दिये. बिना किसी की भूमिका के आप आनन्द उठायें.
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ताऊ पहेली - 63 : होलीनुमा जवाब मे श्री प्रकाश गोविंद विजेता
Author: ताऊ रामपुरिया | Source: ताऊ डॉट इन 

हैल्लो एवरीवन...हाऊ आर यू? कोई बात नही जी, आप जैसे भी होंगे आज तो भंग-भवानी के नशे में अंटाचित ही होंगे...जैसे मैं हूं...असल में ताऊ का हीरामन जिम कार्बेट पार्क की सैर को निकल गया, होली की छुट्टियों में, तो ताऊ पहेली - 63 के रिजल्ट की जिम्मेदारी मुझे दी गई है...आप पूछेंगे की संतू जी...ताऊ पहेली ...

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तेरे चहरे में उस खुदा की इबारत नज़र आती है
Author: RaniVishal | Source:काव्यतरंग Hindi kavya sangrah
मेरी नन्ही परी अनुष्का
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आँखों में मुस्काते सपने : रावेंद्रकुमार रवि का एक बालगीत 
Author: रावेंद्रकुमार रवि | Source: नन्हा मन

आँखों में मुस्काते सपने चलो, मिलकर कुछ गाएँ, हँसी से ख़ुशी सजाएँ!

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“एक पुराना गीत” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
| Author: डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक | Source: उच्चारण
"दिल किसी काम में नही लगता, याद जब से तुम्हारी आयी है।
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Veer Bahuti
सच्ची साधना{आखिरी किश्त } pपिछली किश्तों मे आपने पढा कि शिव दास कैसे साधू बना और उसे फिर भी सँतुष्टी नही मिली तो वापिस अपने गाँव लौटा। जहाँ उसे राम किशन { अपने बचपन के दोस्त} का जीवन और लोक सेवा देख कर उसे कैसे बोध हुया कि सच्ची साधना वो नही जो वो कर रहा

Veer Bahuti
निर्मला कपिला

हुसैन की अभिव्यक्ति किसी ब्लू फिल्म से कम नहीं है...


देश की अखंडता के सामने ना ही किसी धर्म का कोई मोल है ना ही मज़हब का ..देश और देशवासियों की सुरक्षा से  पहले कुछ भी नहीं आना  चाहिए ...फिर चाहे वो हुसैन हों या फिर शाहरुख़ या फिर बाल ठाकरे ....जब किसी की बात या अभिव्यक्ति देश के तंतुओं को तार-तार करने लगे तो वह व्यक्ति निश्चित तौर पर धिक्कार का पात्र है...मकबूल फ़िदा हुसैन एक ऐसा ही नाम है ...

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'ओ पालनहारे निरगुन और न्यारे(प्रार्थना )

'ओ पालनहारे निरगुन और न्यारे ,
तुम्हारे बिन हमरा कौनु नाहीं,
हमरी उलझन सुलझाओ भगवान,
तुम्हारे बिन हमरा कौनु नाहीं....
गुनगुनाती धूप..
अल्पना वर्मा



ब्लोगवाणी नियंत्रक ध्यान दें/ भाई दूज पर कविता---->>>>दीपक 'मशाल' 
Author: दीपक 'मशाल' | Source: मसि-कागद

माफ़ी चाहूँगा लेकिन मुझे पता नहीं कि ब्लोगवाणी नियंत्रक तक कैसे अपनी बात पहुंचाई जाती है.. बस सिर्फ इसीलिए यहाँ पर लिख कर उनका ध्यान बंटाना चाहूंगा उस एक गलती पर जो मैं कई महीनों से देख रहा हूँ लेकिन अभी तक सुधर नहीं पायी और इस पर किसी का ध्यान भी नहीं गया..  --> जब भी कोई पोस्ट दोपहर के १२ बजे ...
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ग़ज़ल- तेरा क्या और मेरा क्या है
| Author: मानसी | Source: मानसी 
तेरा मेरा रिश्ता क्या है फिर इस दर्द का मुद्दा क्या है

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आओ सीखें हिंदी

फागुन आया - फागुन आया, फागुन आया, आओ मिल सब खेलें होली। रंग लगाएं, धूम मचाएं, हम बच्चों की है ये टोली। हर घर में और हर गली में, हम बच्चों के दंगे होंगे। ढोल बजेंगे ...
Rhythm of words...
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नासमझी - जब दूर बहुत दूर तुम अपने ही ख़्वाबों में मशगूल थे मेरे ख्वाब तुम्हारे न होने को दे रहे तूल थे ॥ उलझ रहे थे बेवजह ही मेरी अपनी तन्हाई से खुश नहीं थे वो शायद ...
ललितडॉटकॉम
ब्लागवाणी से एक प्रश्न-------यह क्यों हो रहा है?--------(ललित शर्मा) - *ब्लाग वाणी* पर एक चमत्कार हो रहा है और मेरी समझ में नहीं आ रहा कि क्यों और कैसे हो रहा है? *२५/०२/२०१० को रात ९ बजे करीब मैंने ब्लाग वाणी खोली तो उस पर अ...
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फगुनाहट

देखो फिर से वसंती हवा आ गयी।
तान कोयल की कानों में यूँ छा गयी।
कामिनी मिल खोजेंगे रंगीनियाँ।।
इस कदर डूबी क्यों बाहरी रंग में।
रंग फागुन का गहरा पिया संग मे।
हो छटा फागुनी और घटा जुल्फ की,
है मिलन की तड़प मेरे अंग अंग में।
दामिनी कुछ कर देंगे नादानियाँ।।

…..
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घर सा घर ... अब कहाँ है घर

प्रकाश गोविन्द

'घर' एक वास्तु मात्र न होकर भावसूचक संज्ञा भी है ! घर से अधिक सजीव एवं घर से अधिक निर्जीव भला क्या हो सकता है ! अनगिनत भावनाओं और प्रतीकों का मिला-जुला रूप है घर !
"कमरा नंबर एक / जहाँ दो-दो सड़कों के दुःशासनी हाथ / उसकी दीवारें उतार लेने को / लपके ही रहते हैं / / कमरा नंबर दो / जहाँ खिड़की से आसमान दिखता है / धुप भी आती है / कमरा नंबर तीन जो आँगन में खुलता है / जिसका दरवाजा पूरे घर को / रौशनी की बाढ़ में तैरा सकता है !! मगर अफसोस कि / रौशनी के साथ-साथ / पडोसी घरों का धुआं भी / भीतर भर आता है "….image
भांग, मालपुआ, और होलियाते हम .....अमा कभी तो बुरा मानो

जब से इस बेकार से शहर में आकर बस जाने टाईप की मजबूरी हो गई तभी से सारे त्यौहारों के मायने ही बदल गए हैं ,न मुई ये होली रंगीन लगती है न ही दिवाली की चमक बरकरार है । कहने को तो सब कुछ हो ही रहा होगा मगर हम का करें कि ई ससुर दिल जो बिहारी रह गया है ।
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http://yeduniyahai.blogspot.com/2010/02/blog-post_28.htmlimage
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श्री रजनीश परिहार 
देखनें में भोला है दिल का सलोना!
का, के, की, में, पर...
शब्द सीखने के बाद अब बारी है वाक्य बनाना सीखने की.. और वाक्य बनाने के लिए क्या चाहिए.. "का, के, की, में, पर...." तो अब में कुछ वाक्य बना सकता हूँ.. जैसे..
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श्री रंजन 'आदि के पापा '
फाग-५ -फागुन का चरम और चैत का आरम्भ ....

होली के हुडदंग के साथ आज फगुआ भी अपनें चरम पर पहुंच गया .आज से ही चैत मॉस का आरम्भ हो गया।
गांव में फाग गायकों की टोली अभी आठ दिन तक धमाल मचाती रहेगी,जिसे आठो चैता के नाम से जाना जाताहै। आठो चैता के समापन के साथ ही फागुन के यह दिन चार बीत जायेंगे,फिर से अगले बरस आने के लिए।
आज गांव में भी फाग गायन मंडली जगह -जगह जमीं और एक बैठकी सदा की तरह मेरे घर पर भी हुई ।…


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किसी मन्त्र जाप,उपासना अथवा कर्मकांड इत्यादि का हमे सही लाभ क्यों नहीं प्राप्त होता ?
ऎसी स्थिति स्वभावत: किसी के भी मन को असमंजस में डाल देती है कि मन्त्र-तन्त्र, कर्मकांड,भक्ति,पूजा-उपासना इत्यादि की एक जैसी ही प्रक्रिया का अवलम्बन करने पर भी एक व्यक्ति को तो लाभ हो जाता है, जब कि दूसरे किसी अन्य को कोई सफलता नहीं मिलती, ऎसा क्यों?। एक को सिद्धि, दूसरे के हाथ निराशा, ऎसा किसलिए?। वही देवता, वही मन्त्र, वही विधि---एक को सफलता ओर दूसरे को असफलता क्यूं?। यदि पूजा पाठ, उपासना,भक्ति, धर्म-कर्म अन्धविश्वास है तो फिर उससे कितने ही लोग लाभान्वित क्यों होते हैं?……image

आत्महत्या क्यों कर रहे हैं समीरलाल उड़नतश्तरी?


ये आघात जनक समाचार है. समीरलाल उड़नतश्तरी वाले आत्महत्या का विचार कर रहे हैं, वहीं दुर्योधन के हाथों पीटे शिवकुमार मिश्र दवा-दारू में व्यस्त बताए जा रहे हैं. इधर अनूप शुक्ल को एटीएस ने गिरफ्तार किया है.


613
   श्री संजय बेंगाणी
जज़्बात 
मन भीगे तो होली है ~~ - [image: image] धरती के आंचल में आज, रची हुई रंगोली है तन भीगे से क्या होता है, मन भीगे तो होली है! * जो चूल्हा नाराज न होवे, गर तवा न आपा खोवे, सु...

614
श्री एम वर्मा
कुछ पुरानी यादे

कुछ पुरानी यादे
टेलिविज़न के वे पुराने दिन भले ही तकनीकी रूप से आज के प्रोग्राम के बराबरी नही कर सके पर उनमे एक ताजगी एक सुकून का अहसास होता था उसके उलट आज २४ घंटो चलने वाले प्रोग्राम सिवाय दिमाग को तनाव ग्रस्त , प्रदूषित करने के आलावा कुछ नही करते

..

615
श्री जितेंद्र


"शब्द भी रोने लगे "

"शब्द भी रोने लगे "
निष्प्राण हृदय के ज़ीने पे,
अनुभूतियों के मानचित्र
विद्रोह कर
अपना अस्तित्व संजोने लगे
विवश हो,
अभिव्यक्तियों के काफिले भी
साथ होने लगे......

616
सुश्री सीमा गुप्ता
सोदा

विकसित होने से पहले
कुचल जाते हैं
कुछ शब्दों के भ्रूण
बाहर आने से पहले
फँस जाते हैं होठों के बीच
कुछ जवाब

…..

617
श्री दिगम्बर नासवा
नोस्ताल्ज़िया @ होली

आज से बीस साल पहले जब कॉलेज छोड़ा(छोड़ना पडा) तो हम दोस्तों ने यह फैसला किया कि संपर्क जरूर रखेंगे| ऐसे ख्वाम्ख्याली वाले बहुत से फैसले हम शुरू से ही लेते रहे हैं| वैसे भी ये थ्योरी हम उसी समय प्रतिपादित कर चुके थे कि हमारा(हमारे आयु वर्ग वालों का) जन्म ***


618
श्री मो सम कौन?
1411-स्थानीय ग्रामीण ही बचा सकतें है बाघ

में सिर्फ १४११ बाघ ही बचे है यह गिनती सही है या गलत इस पर सवाल उठाया जा सकता है पर यह सच है कि हमारे देश के जंगलों व अभ्यारण्यों में तस्करों द्वारा किये गए अवैध शिकार के चलते  बाघों की संख्या में तेजी से गिरावट आई है और यही हाल रहा तो वो दिन दूर नहीं जब बाघ सिर्फ चिड़ियाघरों तक ही सिमित हो जायेंगे | हमारे नन्हे ब्लोगर आदि की आशंका...


619
श्री रतन सिंह शेखावत
क्या एक ट्रिगर ही काफी है मौत के लिए ?

मैं बात कर रहा हूँ रिश्तों के एक झटके में मर जाने की. ये थोड़ा कठिन मसला लगता है, यहाँ अगर मौत हो भी गयी तो वापस जिंदगी डाली जा सकती है. क्या कहा आपने गाँठ पड़ जायेगी? नहीं ! मैं रहीम बाबा के 'टूटे से फिर ना जुड़े, जुड़े गाँठ पड़ जाए'  से पूर्णतया सहमत नहीं हूँ. कम से कम एक झटके में सब ख़त्म तो नहीं हो सकता. अगर किसी गलतफहमी से चटक के टूट भी गया तो सच्चाई सामने आने पर क्या और और मजबूत नहीं हो सकता? अब ऐसा मसला है तो मन तो भटकेगा...


620
श्री अभिषेक ओझा
कुछ और सँवर गये होते

दीदी “समता” की एक रचना-
बीते दिनों को याद करते है हम,
वक्त कुछ कम न था,
ओह !!!  कुछ और सँवर गये होते ।
हँसी जो ठहाको में बदल जाती थी,
मगर थी सूखी और बेवजह की,
कुछ वजह होती और मुस्करा लिये होते,
कुछ और सँवर गये होते ।……


621
श्री चंदन कुमार झा
तेरे हुस्न ने मोहब्बत को मेरे दिल का पता दिया -------- (फ़कीरा)

तेरे हुस्न ने मोहब्बत को मेरे दिल का पता दिया 
मेरी उलझी जिन्दगी को तेरी उलफ़त ने सुलझा दिया
तेरी मोहब्बत के आफ़ताब ने हर सुबह को खिला दिया 
मेरी दीवानगी के माहताब ने हर रात को शायराना बना दिया …..



322-1
श्री यशवंत मेहता “फ़कीरा”


हर हर महादेव
महाशिवरात्रि के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं!

हर हर महादेव

कल महाशिवरात्रि का पर्व हर्षौल्लास, उपवास, पूजा,अर्चना, मंगल आरती, जागरण और भजन से पुरे देश मे मनाया जायेगा. बाबा भोलेनाथ से यही प्रार्थना है कि वो हम सब पर अपने आशीष और कृपा बनाए रखे. सब करकमल जोड़ कर बोलिए:
हर हर महादेव कि जय !रुद्राष्टकम


623
सुश्री रेखा प्रहलाद
Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून
कार्टून:- होली के अगले दिन का कार्टून...


सभी कार्टून-चित्र ताऊ डॉट इन से 
साभार !

अब दीजिए आज्ञा…….!