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सोमवार, सितंबर 25, 2017

"माता के नवरात्र" (चर्चा अंक 2738)

मित्रों!
सोमवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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प्रथम नवरात्रि  

( कुंडलिया) 

अम्बे माँ का प्रथम दिन ,लाया शुभ आगाज। 
रूप शैलपुत्री धरा, कर मैया पर नाज।। 
कर मैया पर नाज, वृषभ वाहन बन आया 
दायें हस्त त्रिशूल,कमल बायें अपनाया 
उज्ज्वल शांति प्रतीक,विराजो माँ जगदम्बे 
सरिता अविचल ज्ञान, सदा लाये माँ अम्बे ।। 
गुज़ारिश पर सरिता भाटिया 
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छुट्टी ही chutti 

भारत मैं अनेक धर्म हैं अंक रंग हैं वर्ण हैं सम्रदाय हैं उनके अपने अपने त्यौहार हैं अपने अपने पूज्य हैं हर धर्म हर वर्ग हर जाति चाहती है कि वह भी समाज मैं जाने जय यदि एक हिन्दू धर्म की छुट्टी है एक हिन्दू संत की जयंती है उनके भी गुरुओं की भी छुट्टी मिले राष्ट्रीय त्योहारों के आलावा भी भारत मैं पर्व और त्योहारों की छुट्टी कॉलेज दफ्तरों मैं की जाती है और धीरे दीरे संह्क्य बढ़ रही है एक के बाद एक नै मांग बढती है कि उनके मान्य के नाम की भी छुट्टी की जाये। छुट्टी करने से तात्पर्य क्या है यह समझ नहीं आता है... 
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चंदा ऊगे बड़े भिन्सारे….. 

अपनी बात...पर वन्दना अवस्थी दुबे 
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लाशों का दरिया 

जिन्दा लाशों का दरिया 
बन गया मेरा शहर 
रूहों का यहाँ नहीं कोई हमसफ़र 
बिक गयी मानों यहाँ हर एक आत्मा... 
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आगे बढ़, इतिहास गढ़... 

छोड़ डरना, सीख लड़ना। 
जो डरा है, वो मरा है। 
यही कहावत, बदले किस्मत। 
जो हारा , हुआ बेचारा... 
Lovely life पर Sriram Roy 
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ख़ुमारी 

नींद को जागते रहने की ख़ुमारी लग गयी  
नयनों को जाने कौन सी बीमारी लग गयी... 
RAAGDEVRAN पर 
MANOJ KAYAL  
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ये गर्मी है बेनरमी, 
कितनो को है इसने सताया | ... 
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कभी जो थी सीने मे, आग, 
वो अब पेट में धधकती हैं। 
बूढ़ी होती जिन्दंगी, 
कुछ यू रंग बदलती हैं। 
कभी आँखों में आसमां समेटे थे हमने। 
आज देह मेरी, जमीं के टुकड़े को ... 
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चोरी ना करे ना करे , 

झूठ ना बोले तो क्या करे 

नन्ही कोपल पर कोपल कोकास 
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मां मेरे भी सर सर पे अपना हाथ रख दे 

SURENDRA SINGH BHAMBOO  
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एक ग़ज़ल :-  

ये गुलशन तो सभी का है--- 

ये गुलशन तो सभी का है ,तुम्हारा है, हमारा है 
लगा दे आग कोई ये नही हमको गवारा है... 
आपका ब्लॉग पर आनन्द पाठक 
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दीवारें ........ 

झरोख़ा पर निवेदिता श्रीवास्तव 
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कीमत 

Sahitya Surbhi पर Dilbag Virk 
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शुक्रवार, नवंबर 25, 2016

"हर इक कदम पर भरे पेंच-औ-खम हैं" (चर्चा अंक-2537)

मित्रों 
शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है। 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।

(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक') 

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मुखौटा 

Sudhinama पर 
sadhana vaid 
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अछूत .... 

नोट 

वह बृद्धा पेन्सन के पाई थी बैंक से पाँच सौ के तीन नोट गई थी पंसारी की दुकान लेने नमक आटा आदि समान रख पोटली में बढ़ाया दाम में एक पाँच सौ का नोट उछल गया दुकानदार देख मानो किसी विषधर को देख लिया छिन लिया हाथों से समान की पोटली दूर हट माई ये नोट लेकर क्यों आई ? जा काही और कहीं और ये लेकर अछूत शापित नोट... 
udaya veer singh 
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क़तरे समंदर को डराते नही हैं 

छीनकर किसी से कुछ पाते नहीं हैं , 
समन्दर को क़तरे डराते नहीं हैं . 
है अपने जीने का अलग ही अंदाज़ . 
बिन बुलाये किसी के दर जाते नही हैं 
रजनी मल्होत्रा नैय्यर 
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सफलता और शुभकामनाएं  

[पूर्व प्रकाशित रचना ] 

सफलता और असफलता 
ज़िंदगी के दो पहलू है ,
लेकिन सफलता की राह में 
कई बार असफलता से 
रू ब रू भी होना पड़ता है , 
बल्कि असफलता वह सीढ़ी है 
जो सफलता पर जा कर खत्म होती है... 
Ocean of Bliss पर Rekha Joshi 
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स्वर वायु 

rajeev kumar Kulshrestha  
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गाली का जवाब 

भगवान बुद्ध एक दिन अपने एक शिष्य के साथ सुबह की सैर कर रहे थे । तभी अचानक एक आदमी उनके पास आया और भगवान बुद्ध को बुरा भला कहने लगा । उसने बुद्ध के लिए बहुत सारे अपशब्द कहे लेकिन बुद्ध फिर भी मुस्कुराते हुए चलते रहे । उस आदमी ने देखा कि 
बुद्ध पर कोई भी असर नहीं हो रहा है... 
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बालभवन जबलपुर का दबदबा रहा 

गिरीश बिल्लोरे मुकुल 
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मैं हमेशा नहीं रहूंगा 

तुम साथ रहोगे न हमेशा? 
नहीं, तुम हमेशा नहीं रहोगे। 
सूरज, धरती, चांद, सितारे 
और भी जो हैं जगमग सारे 
और सपनों की भी होती है एक उम्र... 
Manjit Thakur 
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मैं तुम्हारी तरह परफेक्ट तो नही हूँ.. 

नही आता सलीका मुझे, 
अपनी उम्र के हिसाब से जीने का... 
मैं तो बचपने में ही जीती हूँ, 
बड़ी खुशियों का मुझे इन्तजार नही, 
हर को खुशियो से भर देती हूँ... 
तुम्हारे दर्द में मै नही दे पाती, 
वो बड़े-बड़े शब्दो की सांत्वना, 
मैं तो संग तुम्हारे रो लेती हूँ.....  
Sushma Verma 
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