मित्रों!बिना किसी भूमिका के चर्चा मंच पर मंगलवार के लिए लिंक पेश कर रहा हूँ!
*हरियाली तीज के शुभअवसर पर आप सभी को बहुत बहुत शुभकामनायें /* * हरियाली तीज* * * ** *सावन की बहार छाई है ,चले आइये * *अपने प्रिय के साथ
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कल 1 अगस्त को 'विश्व पत्र दिवस' के बहाने डाकिया डाक लाया![]() संदेश माध्यमों ने सुस्त-रफ़्तार कबूतरों से लेकर तेज -रफ़्तार ई-मेल और एस.एम.एस. तक का सफर तय कर लिया है। इंटरनेट और सेल-फोन जैसी अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी ने भले ही फौरन पैगाम भेजने और पाने की हमारी खवाहिश पूरी कर दी हो... लेकिन रफ़्तार के चक्कर में हम कहीं न कहीं अपनी लेखनी की धार खोते जा रहे हैं। |
प्रेम रस पर शाहनवाज जी कह रहे हैं!उसने बख्श दी आँखे - हैवानियत को तमाचा ईरान में रहने वाली अमीना बहरामी नामक युवती ने कोर्ट के द्वारा अदालत में 7 साल लम्बी जद्दोजहद के बाद इन्साफ मिलने पर मुजरिम माजिद की आँखों में तेज़ाब डालने की सज़ा को बख्श कर उसकी हैवानियत के मुंह पर तमाचा मारा है. अपने इस फैसले से अमीना ने दिखा दिया कि कमज़ोर दिखने वाली औरत कमज़ोर होती नहीं, बल्कि अपने आप को मज़बूत समझने वाले मर्दों के मुकाबले ज़हनी तौर पर कई गुना मज़बूत होती है. |
पूरबिया पर प्रेम प्रकाश जी बता रहे हैं!50 लाख पन्नों पर लिखी दोस्ती♥♥ प्यार और दोस्ती जीवन से जुड़े ऐसे सरोकार हैं जिनको निभाने के लिए हमारी आपकी फिक्रमंदी भले कम हुई हो पर इसे उत्सव की तरह मनाने वाली सोच बकायदा संगठित उद्योग का रूप ले चुका है। दिलचस्प यह भी है कि कल तक लक्ष्मी के जिन उल्लुओं की चोंच और आंखें सबसे ज्यादा परिवार और परंपरा का दूध पीकर बलिष्ठ हो रहे संबंधों पर भिंची रहतीं थी, अब वही कलाई पर दोस्ती और प्यार का धागा बांधने का पोस्टमार्डन फंडा हिट कराने में लगे हैं। फ्रेंड और फ्रेंडशिप का जो जश्न पूरी दुनिया में अगस्त के पहले रविवार से शुरू होगा उसके पीछे का अतीत मानवीय संवेदनाओं को खुरचने वाली कई क्रूर सचाइयों पर से भी परदा उठाता है। |
| My Unveil Emotions में डॉ.आशुतोष मिश्र ‘आशु’ कह रहे हैं! ये तुम्हारी पलकें हैंया हैं पिटारी जादू की | परिकल्पना पर पढ़िए या खुदा कैसा ये ज़माना है … रश्मि प्रभा नेट का ज़माना है ... बेबी स्टेप्स में सबकुछ करना है ...... या खुदा कैसा ये ज़माना है |
| हिंदुस्तान की आवाज़ -- आपकी धरोहर लाखों महिलाओं के कंधे पर टिका करोड़ों का व्यापार है पर फिर भी महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था में कोई सुधार नहीं, | Love Everybody![]() कुछ पाने की आश - *सब कुछ लूटकर भी हम अपना,* *कुछ पाने की आस लगाये बैठे है. | हम और हमारी लेखनी![]() तीन कवितायें ..कवि,गीतकार चेतन रामकिशन "देव" की... |
शब्द-शिखर![]() स्लट-वाक और बे-शर्म लोग - कनाडा की तर्ज पर भारत में भी स्लट-वाक निकला. नाम दिया गया बेशर्मी मोर्चा. कनाडा में एक कांस्टेबल ने टिपण्णी की कि महिलाओं के कपड़े उनके प्रति हो रहे अपराध ... | Hindi Tech Blog - तकनीक हिंदी में![]() अपने ब्लॉग पोस्ट में जोड़े "Read More" विकल्प - Read More यानि आगे पढने के विकल्प को ब्लॉग में लगाने के तरीके के बारे में बहुत बार पूछा गया है अब जानिये और अपने ब्लॉग पर लगाइए Read More या Jump break ... |
| शब्दों का दंगल “मेरी पन्तनगर यात्रा” | ZEAL पुरुषों की व्यथा पुरुषों के कष्ट भी असीमित हैं ! उनके कष्टों का परिमाण इसलिए और भी बढ़ जाता है ... | अष्टावक्र सोहन शर्मा उर्फ़ कांग्रेसी का स्लट वाक भाई सोहन शर्मा नुक्कड़ पर ठहाके लगा रहे थे कारण पूछने पर बोले - " |
नीरज![]() किताबों की दुनिया -57 - मैंने देखा है, जरूरी नहीं के मैंने जो देखा है उस से आप भी सहमत हों, के खूबसूरत अशआर कहने वाले शायर अक्सर खूबसूरत नहीं होते. शायर का नाम आने पर हमारे ज़ेहन ... | उड़न तश्तरी ....![]() तुम धड़कन पढ़ना जानती हो.... - अक्सर अकेले में डायरी के पीले पड़ गये सफहों से गुजरने का भी मन कर आता है. गांव के पीले सूखे खेत में अक्सर ही घूमता रहा हूँ मैं. नंगे पैर. चलने में करीचिय... |
| Science Bloggers' Association मदद करने की जन्मजात प्रवृत्ति के साथ आया है इंसान ?…. | मेरे दिल की बात सबसे बड़े सरपंच की सबसे बड़ी हुंकार ! - आज के अखबार का ताजा समाचार… | मुसाफिर हूँ यारों श्रीखण्ड महादेव यात्रा- जांव से थाचडू - इस यात्रा वृत्तान्त को शुरू से पढने के लिये यहां क्लिक …. |
RAINBOW/इंद्रधनुष कैंसर अनुसंधान के लिए एक कुत्ते ने जुटाए 13 हज़ार डॉलर - डोज़र तीन साल का है। अपने मालिक के घर से छूट भागा तो एक मैराथन रेस के ट्रैक पर पहुंच गया। यह हाफ मैराथन कैंसर अनुसंधान के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से आयो... | मेरे मन की इस बार "यूनिवर्सल मदर" गर्भनाल पत्रिका में ...जुलाई 2011 -अंक- 56 ,पेज -12 - इसे यहाँ भी पढ़ सकते है ---(इसके साथ और भी) गर्भनाल पत्रिका जुलाई अंक *युनिवर्सल मदर ..**.* आज पूजा बहुत उदास थी । "पूजा"मेरी हमउम्र सहेली एवं स्कूल में ... |
| अक्षर जब शब्द बनते हैं सुनना केवल तुम - सुनना केवल तुम वह आवाज़ जो बज रही है इस तन-तंबूरे में स्वाँस के नगाड़े पर प्रतिपल दिनरात वहाँ लय भी है, और ताल भी,..तो जरुर वहाँ नृत्य भी होगा और ... |
| उन्नयन (UNNAYANA) **वक्त -बेवक्त** - आगोश-ए- समंदर का, अहसास हमको , आगोश - ए- गुलों का, भरोषा नहीं है -- मुकाम -ए-दुश्मनी का, अंजाम मालूम इश्क - ए - रकीबां भरोषा नहीं है -- चले ... |
| विचार मद्रास पहुंचे *गांधी और गांधीवाद-* 57 *मद्रास पहुंचे*** *अक्तूबर 1896* ट्रेन से गांधी जी 14* *अक्तूबर को मद्रास (चेन्नई) पहुंचे। मद्रास (चेन्नई) की ... |
anupama's sukrity!![]() देखो ..देखो मतवारी वर्षा....! धन घड़ी आई...पिया के आवन की पतियाँ लायी ....!! अपनी सभ्यता और संस्कृति से जुड़े ,हम जैसे लोगों के लिए तीज का त्यौहार अपार हर्ष, आनंद ,उत्साह लेकर आता है... |
| हिंदी ब्लॉगर्स फ़ोरम इंटरनेशनल HBFI मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले - आसमान की गोद में टिमटिमाते कई तारे सितारों के बीच एक छवि तू बनाले, मेरे दिल तू आज फ़िर मुस्कुरा ले। हँसा था तू, बात पुरानी हो चुकी, यादों को आगोश में ले, स... |
| अंधड़ ! कार्टून कुछ बोलता है - टुच्चेपन की! हद |
कार्टून:- हाय ओ रब्बा, हाय ओ रब्बा, हाय ओ रब्बा ... |
संविधान को सीरियसली ले रहे होते तो... Cartoon by Kirtish Bhatt (www.bamulahija.com) |
| मनोज सेंमल सी फूल गई बदली - *नवगीत*** *सेंमल सी फूल गई बदली*** *श्यामनारायण मिश्र*** पछुआ की बांह थाम कर घाटी में झूल गई बदली।… | ज्ञान दर्पण मृत्यु के वक्त भी कविता मेवाड़ के महाराणा अड़सिंहजी के वक्त मेवाड़ में जबरदस्त गृह कलह फैला हुआ था| |
srijan![]() A baby - A Baby is a Toy To its Mother, A Heir to its Father , A Soul To The Priest, A Biological specimen to a Doctor , A Customer to a shopkeeper , ... |
vikhyat![]() महाशिव पुराण [5 ] - *महाशिव पुराण * *सूत जी बोले -सुनाता हूँ तुम्हे मैं एक कथा * *शिव भक्ति से विरत जीवन तो है एक व्यथा * *है पुरानी बात ये समुद्र तट प्रदेश की * *जिसके निव... | HINDI KAVITAYEN ,AAPKE VICHAAR![]() जब यह रूह जिस्म से जुदा हो रही होगी *मौत का तांडव यहाँ हर रोज होता है !* *कब ,कौन ,कहाँ ,कैसे अपनों को खोता है !* *क्यूँ लाचार है इंसानियत ,क्यूँ हावी है हैवानियत !* *आओ मिलकर ये सोचेंगे * *जिं... |
मयंक![]() "उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचन्द के जन्म-दिवस पर विशेष" - *मुंशी प्रेमचन्द का जीवन परिचय * *(Premchand's Biography)* ** *जन्म-* प्रेमचन्द का जन्म ३१ जुलाई सन् १८८० को बनारस शहर से चार मील दूर लमही गाँव में हुआ था।... |
ज़िंदगी के मेले![]() हम सब सूअर की चर्बी खा रहे हैं! - "सूअर के बच्चोsssssssss" गब्बर की यही चीख भरी आवाज़ मेरे ज़हन में आई जब आज दोपहर आया एक एस एम एस पढ़ा मैंने, जो मेरे एक सहयोगी द्वारा भेजा गया था। SMS का संद... | कागज मेरा मीत है, कलम मेरी सहेली......![]() याद गली इस याद गली को मैं ...जितना छोटी और संकरी करने कि कोशिश करती जाती हूँ ........उतना ही वह लंबी और विशाल होती जाती है ....... लंबी इसलिए कि... |
| Khuch baatein unkahi - दौरे-उल्फत की हर बात याद है मुझे तुझसे हुई वह मुलाकात याद है मुझे। बरसते पानी में हुस्न का धुल जाना दहकी हुई वह बरसात याद है मुझे। तेरा संवरना उसपे ढलका आंचल... |
| Patali बैराग्य - भोगे रोगभयं कुले च्युतिभयं वित्ते नृपालाद भयं माने दैन्य भयं बले रिपुभयं रुपे जराया भयं|| शास्त्रे वादभयं गुणे खलभयं काये कृतान्ताभ्दयं सर्व वस्तु भयावहं... | के.सी.वर्मा विश्वास की इन टूटती डालियों को.....!! - विश्वास की इन टूटती डालियों को ,कोई तो उठ के सहारा दे दो ,छोडो ना इनको भाग्य के भरोसे ,बस साथ होने का इशारा दे दो ,पहुँच कर रहेंगे ये अपनी मंजिल तलक ,पूरी ... |
Mushayera![]() इब्ने सफ़ी की ग़ज़ल - Anwer Jamal गिर रहा है तो किसी और तरह ख़ुद को संभाल हाथ यूं भी तो न फैले कि बने दस्ते सवाल घर बनाना भी तो असीरी ही कहलाएगा ख़ुद को आज़ाद समझता है तो ये रोग न पाल मह-जब... |
| रेत के महल हिंदी रामायण १० - इस कविता रामायण के पिछले भाग देखें - *भाग १ ,भाग २, भाग ३, भाग ४, भाग ५, भाग ६ भाग ७ भाग ८ भाग ९ से आगे * ऋषिवर संग चल निकले हैं, सेवा में तत्पर रघुराई ... | अन्ना को बाबा सा घेरलोकपाल का कच्चा जाल,कचरा-बकरा होय हलाल | मगरमच्छ तो काटे जाल, लेकर बैठा बढ़िया ढाल | |
क्यों साऊथ अफ्रीका मैं बलात्कार इंडिया से अधिक होते हैं? |
HOME REMEDY(chehara sundar banayen)होम रेमेडी (चेहरा सुन्दर बनायें )चेहरे को सुन्दर बनाने के लिए हम क्या कुछ नहीं करते,बाज़ार नए-२ प्रोडक्ट से भरा पड़ा है .क्या लगायें ,क्या छोड़े,हर प्रोडक्ट के बड़े-२ वादे. है… . तो क्या करे ??????? | 'बच्चन' जी की 'मधुशाला' पर दो शब्द अपने भीहर्ष विकम्पित कर में लेकर, मद्यप झूम रहा प्याला,क्षीण वसन, उन्नत उरोज, कृश लंक, मचलती मधुबाला। जलतरंग को मात दे रही, मधु-प्याले की मधुर खनक; मधु सौरभ से महक रही, मदमस्त नशीली मधुशाला॥… |
हाइकु गीत![]() खुद बेवफा दूसरों से चाहते करें वो वफा . सच कहा तो तमाम दोस्त मेरे हो गए खफा . | "बहारें यूँ ही नहीं आती हैं ..."ये हरी - भरी धरा औरये नीला - नीला आकाश उल्लसित प्रफुल्लित कर गया जीने की एक हसरत दे गया आस का एक बीज बो गया |
हर खता माफजयपुर। कार्मिक और अन्य विभागों ने रिश्वत लेने, पद के दुरूपयोग और भ्रष्टाचार के मामलों में अभियोजन की स्वीकृति देने के सम्बंध में दोहरा रवैया अपना रखा है। भ्रष्टाचार में लिप्त चपरासी, बाबू, पटवारी, ग्राम सेवक आदि चतुर्थ और तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों के अभियोजन स्वीकृति के आवेदन पर तो तुरत-फुरत मंजूरी मिल जाती है, लेकिन अफसरों के प्रति कार्मिक और अन्य सरकारी विभाग नरम रूख अपनाए रखते हैं।….. |
| रमजान के मुक़द्दस महीने कि अज्मतें और फ़ज़ीलतें आपको मुबारक हो. आज की चर्चा में इतना ही काफी है! अगले मंगलवार फिर उपस्थित हो जाऊँगा! |
































