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सोमवार, नवंबर 05, 2012

सोमवारीय चर्चामंच-1054

दोस्तों! चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल’ का नमस्कार! सोमवारीय चर्चामंच पर पेशे-ख़िदमत है आज की चर्चा का-
 लिंक 1- 
इंतज़ार में -मृदुला हर्षवर्द्धन
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लिंक 2-
आम को आम लिखेंगे -डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
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लिंक 3-
भारत और इण्डिया का भेद कम कीजिए! -दिव्या श्रीवास्तव ZEAL
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लिंक 4-
भावों के मोती -डॉ. निशा महाराणा
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लिंक 5-
सत्ता ब्यूटी पार्लर है -कमल कुमार सिंह
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लिंक 6-
ज़रा एक बार सोचकर देखिए -पल्लवी सक्सेना
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लिंक 7-
मेरा फोटो
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लिंक 8-
स्वीकारना होगा तुम्हे भी -डॉ. आशुतोष मिश्र ‘आशू’
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लिंक 9-
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लिंक 10-
मेरा फोटो
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लिंक 11-
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लिंक 12-
मेरा फोटो
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लिंक 13-
मंदिरों से शुरू सफ़र, मायानगरी में मंज़िल -उदित नारायण, प्रस्तोत्री माधवी गुलेरी
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लिंक 14-
मेरा फोटो
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लिंक 15-
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लिंक 16-
सोने का हिरन -प्रतिभा सक्सेना
मेरा फोटो
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लिंक 17-
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लिंक 18-
इन्तज़ार-चित्रग़ज़ल -डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
उच्चारण
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और अन्त में
लिंक 19-
ग़ाफ़िल की अमानत
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आज के लिए इतना ही, फिर मिलने तक नमस्कार!

रविवार, नवंबर 04, 2012

चर्चा मंच 1053 मोटी-चमड़ी पतला-खून, नंगा भी पहने पतलून |

"दीपक जलायें" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')

!! शुभ-दीपावली !!
रोशनी का पर्व है, दीपक जलायें।
नीड़ को नव-ज्योतियों से जगमगायें।।

बा और बापू की दृढ़ता

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कांग्रेस की मान्यता रद्द करने की अर्जी दूंगा:स्वामी


अधूरे सपनों की कसक (26) !

रेखा श्रीवास्तव 
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ब्लागर दम्पति आकांक्षा-कृष्ण कुमार यादव को उ. प्र. के मुख्यमंत्री द्वारा 'अवध सम्मान'

 
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चलो अपनी कुटिया जगमगायें 

 प्रवीण पाण्डेय

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जो प्रभु चौंच बनाता है... कहानी .....ड़ा श्याम गुप्त .. 

मोहब्बत और गणित - विज्ञान

उसकी दुश्मनी, उसकी रिश्तेदारी,

"अनंत" अरुन शर्मा 

वर्ड वेरिफिकेशन और कमेंट्स स्पेम प्रोब्लम

आमिर दुबई 

हिमांचल प्रदेश : बंदर हैं धूमल के दुश्मन नंबर 1

महेन्द्र श्रीवास्तव 

ग़ाफ़िल तो चाँदनी से भी जला अक्सर



घर कहीं गुम हो गया


प्यारे प्यारे पूत पे, पिता छिड़कता जान ।
अपने ख़्वाबों को करे, उसपर कुल कुर्बान ।
उसपर कुल कुर्बान, मनाये देव - देवियाँ ।
करे सकल उत्थान, फूलता देख खूबियाँ ।
पुत्र बसा परदेश, वहीँ से शान बघारे ।
पिता हुवे बीमार, और भगवन को प्यारे ।।

समय की पुकार है

कारे कृपण करेज कुछ, काटे सदा बवाल ।
इसीलिए तो बुरे हैं, भारत माँ के हाल ।
भारत माँ के हाल, हाल में घटना देखा ।
चोरों की घट-चाल, रेवड़ी बटना देखा ।
जाओ तनिक सुधर, समय नित यही पुकारे ।
चिंदी चिंदी होय, धरा दुष्टों धिक्कारे ।।
 

“सबसे अच्छी मेरी माता” (अरुणदेव यादव)


माता के चरणों तले, स्वर्ग-लोक का सार ।
 मनोयोग से पूँजिये,  बार बार आभार ।
बार बार आभार, बचुवा बड़ा लकी है ।
जरा दबा दे पैर, मैया, लगे थकी है । 
रविकर का आशीष, ब्लॉग जो भला बनाता ।
रहे सदा तू बीस, कृपा कर भारत माता ।।


भेंटे नब्बे खोखे नोट-भांजे दर्शन अफलातून ।

मोटी-चमड़ी पतला-खून ।
नंगा भी पहने पतलून  ।
भेंटे नब्बे खोखे नोट -
भांजे दर्शन अफलातून ।

भुना शहीदी दादी-डैड
*शीर्ष-घुटाले लगता चून ।
 *सिर मुड़ाना  / चोटी के घुटाले 

 पंजा बना शिकंजा खूब-
मातु-कलेजी खाए भून ।
मिली भगत सत्ता पुत्रों से 
लूटा तेली लकड़ी-नून ।

सर्ग-5 : भगवती शांता इति

श्री राम की सहोदरी : भगवती शांता

भाग-1

चंपा-सोम
कई दिनों का सफ़र था, आये चंपा द्वार |
नाविक के विश्राम का, बटुक उठाये भार ||

राज महल शांता गई, माता ली लिपटाय |
मस्तक चूमी प्यार से, लेती रही बलाय ||