| आप सबको प्रदीप का नमस्कार | (2 अक्टूबर 1869)-(30 जनवरी 1948) गांधीजी को सादर श्रद्धांजलि | अब चलते हैं आज की चर्चा की ओर | |
| इक अदद चेहरा - - @ अग्निशिखा मुखौटों की भीड़, और इक अदद ख़ालिस चेहरे की तलाश, बहोत मुश्किल है बहरान दरिया की सतह पर, अक्स नाख़ुदा का उभरना ! |
| दुःस्वप्न @ ॥ दर्शन-प्राशन ॥ निशा आधी नग्न होकर मेरी शैया के किनारे आई सुधा-मग्न होकर लिए नयनों में नज़ारे। |
| किसानों की आत्महत्या: कितनी बड़ी समस्या? @ दरअसल |
| कफ़न अपना बुने जा रही हूँ @ Benakab बेटिओं के किस्से लिखे जा रहीं हूँ कफ़न अपना ख़ुद बुने जा रही हूँ कब कहाँ जल उठे बेटिओं की चिता बन अभागन का आँचल जिए जा रही हूँ |
| फिर मुझे धोखा मिला, मैं क्या कहूँ... @ गिरीश पंकज फिर मुझे धोखा मिला, मैं क्या कहूँ है यही इक सिलसिला, मैं क्या कहूँ देख ली तेरी वफ़ा मैंने इधर - ला, जहर मुझको पिला, मैं क्या कहूँ |
| रिश्तों को चाहिये @ सफर के सजदे में कड़वे से घूँट सब्र के प्याले से हाय क्या अन्दाज़ हैं दर्द के निवाले से |
| पुस्तकालय ऐसे भी.. @ स्पंदन यदि विदेशी धरती पर उतरते ही मूलभूत जानकारियों के लिए कोई आपसे कहे कि पुस्तकालय चले जाइए तो आप क्या सोचेंगे? यही न कि पुस्तकालय तो किताबें और पत्र पत्रिकाएं पढ़ने की जगह होती है, वहां भला प्रशासन व सुविधाओं से जुड़ी जानकारियां कैसे मिलेंगी। |
| वंशवाद से नहीं विकासवाद से चलता है देश @ तेताला आखिर कुछ आच्छा दिखने लगा भाजपा में, एक बुरे दौर से गुजर रही भाजपा ने लोकसभा चुनाव के पहले कुछ अनोखे पहलुओ पर काम करते हुए देश को दिखा दिया की ये किसी परिवारवाद पर चलने वाला दल नहीं है ! |
| कविता उसके पार खडी है लुप्तप्राय सी @ Impleadment "प्यार के माने हमारे और ...तेरे और हैं इसलिए प्यार मेरे यार मैं लिखता नहीं स्नेह यदि स्वीकार हो सत्कार कर लेना |
| हमन है इश्क़ मस्ताना @ लिखो यहां वहां हमन है इश्क़ मस्ताना हमन को होशियारी क्या? रहें आज़ाद या जग से हमन दुनिया से यारी क्या? जो बिछुड़े हैं पियारे से भटाकते दर-ब-दर फिरते, हमारा यार है हम मेम हमन को इन्तज़ारी क्या? |
| भ्रष्ट कहा तो सुलग गई @ रायटोक्रेट कुमारेन्द्र चलिये, नंदी महोदय ने आरक्षण का एक और पहलू सामने रख दिया। उनके बयान के बाद भ्रष्टाचार की वर्गवार स्थिति पर वर्तमान में भले ही एक अलग प्रकार का माहौल बना दिख रहा हो, वर्ग विशेष में रोष का वातावरण दिख रहा हो किन्तु इस विषय पर एक प्रकार की बहस की गुंजाइश दिखाई देती है। |
| जिन्दगी है एक धूप छाँव सी; @ अन्तर्गगन जिन्दगी है एक धूप छाँव सी; पल-पल बदले शहर गाँव सी! |
| साहित्य सम्मेलन में साहित्यकार बीरबल @ सफ़ेद घर "बड़े काम ओछो करै, तो न बड़ाई होय। ज्यों रहीम हनुमंत को, गिरिधर कहे न कोय" |
| इस शख्श को बोलने के दस्त लगें हैं @ ram ram bhai जब से नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री के तौर पर देखने की आकांक्षा लोगों में बलवती होती जा रही है ,कांग्रेसियों के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं हैं .इसमें उन्हें अपनी करतूतों का डर ज्यादा सता रहा है |
| दामिनी.....नहीं मिलेगा तुम्हें न्याय @ रूप-अरूप ![]() मत करो दामिनी तुम किसी इंसाफ का इंतजार नहीं मिलेगा तुम्हें न्याय |
| रच शौर्य गाथा ना गा चाँचरी @ " सोच का सृजन " आ जा ,सुन ल जा बात खरी-खरी ना बताइब ,ना समझाइब बारी-बारी बहुत चला चु क ल जा जुबान के आरी अब आ गइल बा ओकर पारी |
| थका मादा @ बेचैन आत्मा देर शाम सब्जियों का भारी झोला उठाये लौटते हुए घर चढ़ते हुए फ्लैट की सीढ़ियाँ |
| मत बांधो मुझको परिभाषा के बंधन में @ Kashish - My Poetry ![]() मत बांधो मुझको परिभाषा के बंधन में, मुझको तो बस नारी बन कर जीने दो. |
| पहरा.... @ मैं और मेरी कविताएं बावली है... आजकल उसे चंदामामा, बिल्ली मौसी, चिड़िया रानी, परियों के सपने नहीं आते |
| तेरे आने से @ मेरा मन पंछी सा ![]() तेरे आने से रोशन मेरा जहाँ हो गया तेरे प्यार से महकता आशियाँ हो गया ..... |
| इक अदद चेहरा - - @ अग्निशिखा मुखौटों की भीड़, और इक अदद ख़ालिस चेहरे की तलाश, बहोत मुश्किल है बहरान दरिया की सतह पर, अक्स नाख़ुदा का उभरना ! |
| कोशिश @ मेरे हिस्से की धूप हर मुनासिब कोशिश की तुम्हें मनाने की तुमने तो ठान ली थी ...बस दूर जाने की जानते थे तेरी किस बात से डर लगता है अपना ली वही आदत पार पाने की |
| मेरे हक में जब भी फैसला होगा @ " मेरे जज्बात " मेरे हक में जब भी फैसला होगा पत्थर उनके और सर मेरा होगा लहुलुहान जिस्म है मेरे शहर का फिर से मजहबी खंजर चला होगा |
| तन की सुन्दरता या मन की @ Love हँसी आती है मुझे ये देख कर की लोगों के बोलने मे और सोच मे कितना फरक होता है |
| तुम्हारी याद @ Do Took लो, अबकी फिर से भूल गए अपनी यादें साथ ले जाना कितनी बार कहा था यादों का बैग छोड़ मत जाना बहुत परेशान करती हैं मुझे पीछे से... |
| अनचाहे ब्लॉग वेबसाइट ब्लॉगर के अपडेट से छुटकारा पायें @ कंप्यूटर वर्ल्ड हिंदी - |
| सुनो………। @ ज़िन्दगी…एक खामोश सफ़र सुनो तुम ज़लालत की ज़िन्दगी जीने और मरने के लिये ही पैदा होती हो सुनो तुम जागीर हो हमारी कैसे तुम्हारे भले का हम सोच सकते हैं |
नहीं करे एतबार, बड़ी चालाक प्रियतमा-![]() |
| "आने वाला है बसन्त" @ उच्चारण ![]() आने वाला है बसन्त, अब प्रणय दिवस में देर नहीं। कुहरा छँटने ही वाला है, फिर होगा अन्धेर नहीं।। |
| आज के लिए बस इतना ही | मुझे अब आज्ञा दीजिये | मिलते हैं अगले बुधवार को कुछ अन्य लिंक्स के साथ | तब तक के लिए अनंत शुभकामनायें | आभार | |

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