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चर्चाकार: ई.प्रदीप कुमार साहनी लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
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बुधवार, मार्च 20, 2013

ठिठक गयी कोयल की कूक (बुधवार की चर्चा-1189)

आप सबको प्रदीप का नमस्कार |
बिना देर किये चलते हैं आज की चर्चा की ओर:
बरसों का साथ
@ परवाज़...शब्दों के पंख

dharmnirpekshtaa
@ samandar
(१)
ढाई आखर प्रेम का पढ़ै सो पंडित होय....
धरा स्वर्ग हो जायेगी, जब बरसेगा प्यार।
ढाई आखर प्रेम का, बहुत बड़ा उपहार।।
(२)
उन यादों को मैं क्यूं भूलूं मैं........प्रीति सुराना
भरी हुई हैं ग़ज़ल में, जीवन की कुछ याद।
आता है इनमें मुझे, खट्टा-मीठा स्वाद।।
(३)
प्यार कैसे करें
धीरे-धीरे बस गई, वो धड़कन के संग।
जीवन में उसने भरे, कई अनोखे रंग।।
(४)
कविता और प्यार
बना रहीं हैं मक़बरा, देखो नूतन आज।
काग़ज़ में छाया हुआ, प्यार-प्रीत का राज।।
आज के लिए बस इतना ही | मुझे अब आज्ञा दीजिये | मिलते हैं अगले बुधवार को कुछ अन्य लिंक्स के साथ |
तब तक के लिए अनंत शुभकामनायें |
आभार |

बुधवार, मार्च 13, 2013

फागुन आने को है (बुधवार की चर्चा-1182)

आप सबको प्रदीप का नमस्कार |
आज बुधवार है, चर्चा मंच में मेरे योगदान का दिन है और संयोगवश आज ही (13 मार्च) मेरा जन्मदिन भी है | ऐसा संयोग दुबारा  13 मार्च 2019 को होगा जब बुधवार भी होगा |
-- हमेशा की तरह आज भी आप लोगों के लिए अपने गुलदस्ते में विभिन्न प्रकार के पुष्पों को सजा कर लाया हूँ, आप सब आनंद लीजिये:-
बारिश और मैं ....
- Pallavi saxena
फागुन आने को है
- रश्मि प्रभा
हिन्दी का 'विकि-हाऊ'
- अनुनाद सिंह
होरी नही सुहाय,
- धीरेन्द्र सिंह भदौरिया
"हाथ में खंजर उठा लिया "
- डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

सेहतनामा
- Virendra Kumar Sharma
कार्टून कुछ बोलता है- अब तक का सबसे तीब्र विरोध !
- पी.सी.गोदियाल "परचेत"

शुद्ध श्रद्धा : आत्मविश्वास

 सुज्ञ

पुराने जमाने की बात है। एक शिष्य अपने गुरु के आश्रम में कई वर्षों तक रहा। उसने उनसे शास्त्रों का ज्ञान प्राप्त किया। एक दिन उसने देखा कि उसके गुरु पानी पर चले आ रहे हैं। यह देखकर उसे बहुत हैरानी हुई। जब गुरु पास में आए तो वह उनके पैरों पर गिरकर बोला, 'आप तो बड़े चमत्कारी हैं। यह रहस्य आपने अब तक क्यों छिपाए रखा? कृपया मुझे भी यह सूत्र बताइए कि पानी पर किस प्रकार चला जाता है, अन्यथा मैं आप के पैर नहीं छोडूंगा?' गुरु ने कहा, 'उसमें कोई रहस्य नहीं है। बस भरोसा करने की बात है। श्रद्धा चाहिए। श्रद्धा हो तो सब कुछ संभव है। इसके लिए उसका नाम स्मरण ही पर्याप्त है जिसके प्रति तुम भक्ति रखते हो।
आगे है
"मयंक का कोना"
(1)
क्यों नहीं आते...
मनवा में आते नहीं, हल्के-फुल्के ख्याल।
भारी-भरकम ख्याल से, मन होता बेहाल।।
(2)
चेहरा धड़ से अलग देख रहा हूँ
अब तो बस अलगाव की,चलने लगी बयार।
जीवन जीने का यहाँ, खिसक रहा आधार।।
(3)
बंजर जैसा हो रहा, संसद का अब हाल।
नेताओं ने देश का, लूट लिया सब माल।
(4)

...तुम्हे मैं याद आऊँगा

नहीं देखना चाँद को, आऊँगा मैं याद।
दर्पण से करना नहीं, कोई भी फरियाद।।
आज के लिए बस इतना ही | मुझे अब आज्ञा दीजिये | मिलते हैं अगले बुधवार को कुछ अन्य लिंक्स के साथ |
तब तक के लिए अनंत शुभकामनायें |
आभार |

बुधवार, मार्च 06, 2013

आख़िर मैं लिखता ही क्यों हूँ (बुधवार की चर्चा-1175)


आप सबको प्रदीप का नमस्कार |
शुरू करते हैं आज की चर्चा:-
टाल मटोल
@ JHAROKHA

....बोझ
@ मेरे हिस्से की धूप

कार्टून :- धंधा ये भी ठीक है
"मयंक का कोना"
शायद रविकर जी बिजी है!
(१)
" प्राञ्जल की 14वीं वर्षगाँठ" 


जब हम आते हैं   दुनिया मेंसभी बधायी देते हैं,
अनजानी सी मूरत मेंहम बचपन को पा लेते हैं,
खुशियों का परिवेशजगत में सबको बहुत सुहाता है।
मन-उपवन का हर कोनातब खिलकर मुस्काता है।।
(२)
महिला दिवस या मज़ाक ?
दिवस दिखावा हो गये, होने लगी मज़ाक।
जीवनदाता वृक्षा की, काट रहे हम शाख।।
(३)
चचा का यूँ गुजर जाना....हाय!!
उड़नतश्तरी लिख रहे, कितने दस्तावेज।
हमने मपने हृदय में, उनको लिया सहेज।।
आज के लिए बस इतना ही | मुझे अब आज्ञा दीजिये | मिलते हैं अगले बुधवार को कुछ अन्य लिंक्स के साथ |
तब तक के लिए अनंत शुभकामनायें |
आभार |

बुधवार, फ़रवरी 20, 2013

दिन हौले-हौले ढलता है (बुधवार की चर्चा-1161)


आप सबको प्रदीप का नमस्कार |
शुरू करते हैं आज की चर्चा |
सहजि सहजि गुन रमैं : मनोज छाबड़ा
बहनें - बहनें
"मयंक का कोना"
अक्सर उन लोगों को घोर निराशावादी कहके उनका
उल्काओ के रश्म को, बीन रहा है विश्व।
देखेंगे क्या मिलेगा, ये तो हैं जीवाश्व।।
इजहार भी तो जरूरी है ..
अब तो हाथ बढाइए, छाया है मधुमास।
जल में रहकर मीन की, बढ़ जाती है प्यास।।
"देश की कहानी"

काठ भी तो बन गया है अब सुचालक,
अब नहीं मासूम लगता कोई बालक,
सभ्यता की अब नहीं बाकी निशानी।
आज के लिए बस इतना ही | मुझे अब आज्ञा दीजिये | मिलते हैं अगले बुधवार को कुछ अन्य लिंक्स के साथ |
तब तक के लिए अनंत शुभकामनायें |
आभार |