आज की मंगलवारीय चर्चा में आप सब का स्वागत है राजेश कुमारी की आप सब को नमस्ते ,मुंबई में भांजे की शादी से वापस आई हूँ एक तस्वीर आप सब के आशीर्वादार्थ
तुलसी ममता राम से समता सब संसार
Anita at डायरी के पन्नों से
परिचय : सरिता भाटिया
अरुन शर्मा 'अनन्त' at Nirjhar Times
क्या तुमने देखी है ऐसी कविता
Dr. Sarika Mukesh at अंतर्मन की लहरें Antarman Ki Lehren
बाबाश्री ताऊ महाराज चरितावली - भाग 2
ताऊ रामपुरिया at ताऊ डाट इन
Junbishen 25
Munkir at Junbishen
मेरी ख़ू तेरी ग़ज़ल में !
Suresh Swapnil at साझा आसमान
नारी ने कहना छोड़ दिया ......श्रीमती संतोष सिंह
Yashwant Mathur at जो मेरा मन कहे
कविता मानव सृजन नहीं ....
Anupama Tripathi at anupama's sukrity
जैसे किया सवाल देखिये / सत्ता में भूचाल देखिये
girish pankaj at गिरीश पंकज
तेरा मेरा होना - डॉ नूतन गैरोला
डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति at अमृतरस -
नीम के ये पेड़
नीरज गोस्वामी at नीरज
तुम्हारा आना .......
कुशवंश at अनुभूतियों का आकाश -
आईपीएल की कालिख
Brijesh Singh at Voice of Silent Majority
लम्बी चादर तान के, सोया था लिक्खाड़-
रविकर at "लिंक-लिक्खाड़" -
मंदिर जाता भेड़िया
श्यामल सुमन at मनोरमा
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) at उच्चारण -
जादू
नये स्कूल में पहला दिन..
नये स्कूल में पहला दिन..
Bheemili, Visakhapatnam, Andhra Pradesh भीमली, विशाखापटनम, आंध्रप्रदेश (भीम-बकासुर युद्ध-स्थल)
आज की चर्चा यहीं समाप्त करती हूँ फिर चर्चामंच पर हाजिर होऊँगी कुछ नए सूत्रों के साथ तब तक के लिए शुभ विदा बाय बाय ||
आगे देखिए..."मयंक का कोना"
(1)

वो आ जाए ख़ुदा से की दुआ अक्सर
वो आया तो परेशाँ भी रहा अक्सर ...
मेरी धरोहर पर yashoda agrawal
(2)

सियाह रात में मुकम्मल देखा सितारों को भी चांदनी में
मुज़म्मिल देखा रात चाँद की चांदनी में ...
तमाशा-ए-जिंदगी पर तुषार राज रस्तो
(3)
दुश्मन न बनो अपने ,ये बात जान लो ,
कुदरत को खेल खुद से ,न बर्दाश्त जान लो...
! कौशल ! पर Shalini Kaushik
(4)
गांव से माँ आई है। गर्मी पूरे यौवन पर है। गांव शहर में बहुत फर्क है। पर माँ को यह मालुम नहीं है। माँ तो शहर आई है अपने बेटे, बहू और पोते-पोतियों के पास, प्यार, ममता, स्नेह की गठरी बांधे...
कुछ अलग सा पर गगन शर्मा, कुछ अलग सा
(5)
तू विदा लेकर भी कहाँ जुदा हो पाई माँ !...

(6)

मन का पंछीपरशिवनाथ कुमार
(7)
भारतीय नारी पर shikha kaushik
















![Photo: दोस्तो कुछ काव्य रचनाएँ जो कभी बहुत पहले
लिखीं थी आज आप लोगों के साथ बाँटना चाहता
हूँ...''कुछ अनकही''...और आशा करता हूँ आप सबको
यह पसंद आएँगी और आप सब की हौंसला अफ़साई
इस में और इज़ाफ़ा करने में पूर्णतया सहायक होगी........
''कुछ अनकही''
........1..........
कुरेदो किसी भी इंसान को, अपना सा लगता है
दिल में उसके भी ,एक जख्म कहीं पलता है
हर शख्स दोहरी सी जिंदगी जीता है
हंसता है महफ़िल में,अक्सर अकेले में रोता है
सारी दुनिया से जीत जाता है,
लेकिन अपनों से ही हमेशा हारता है
पूछो उससे तो कहता है,
वो तो दुनिया भर का मज़ा मारता है
आस का पंछी दूर डाल पर होता है
ना ही उड़ता है और ना हाथ आता है
दर्द हर इंसान का,इंसान अपने सा ही पाता है
इंसान फिर भी ना जाने क्यों जीना चाहता है?
..................यशपाल भाटिया [26दिसंबर,1997]](https://fbcdn-sphotos-e-a.akamaihd.net/hphotos-ak-ash3/p480x480/395356_299605013436165_419598267_n.jpg)



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