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मंगलवार, जून 04, 2013

तुलसी ममता राम से समता सब संसार मंगलवारीय चर्चा --- 1265

आज की मंगलवारीय  चर्चा में आप सब का स्वागत है राजेश कुमारी की आप सब को नमस्ते ,मुंबई में भांजे की शादी से वापस आई हूँ एक तस्वीर आप सब के आशीर्वादार्थ  


  आप सब का दिन मंगल मय हो अब चलते हैं आपके प्यारे ब्लॉग्स पर 

                                     तुलसी ममता राम से समता सब संसार

                               Anita at डायरी के पन्नों से

                                 परिचय : सरिता भाटिया

                          अरुन शर्मा 'अनन्त' at Nirjhar Times

                              क्या तुमने देखी है ऐसी कविता

                 बाबाश्री ताऊ महाराज चरितावली - भाग 2

                          ताऊ रामपुरिया at ताऊ डाट इन

                                                                  Junbishen 25

                                  Munkir at Junbishen

                             मेरी ख़ू तेरी ग़ज़ल में !

                 Suresh Swapnil at साझा आसमान 

                   नारी ने कहना छोड़ दिया ......श्रीमती संतोष सिंह

                Yashwant Mathur at जो मेरा मन कहे

                               कविता मानव सृजन नहीं ....

                Anupama Tripathi at anupama's sukrity

              जैसे किया सवाल देखिये / सत्ता में भूचाल देखिये

                        girish pankaj at गिरीश पंकज 

                            तेरा मेरा होना - डॉ नूतन गैरोला

                      डॉ. नूतन डिमरी गैरोला- नीति at अमृतरस - 

                                      नीम के ये पेड़

                                   नीरज गोस्वामी at नीरज 

                                     तुम्हारा आना .......

                            कुशवंश at अनुभूतियों का आकाश -

                                आईपीएल की कालिख

                 Brijesh Singh at Voice of Silent Majority

                       लम्बी चादर तान के, सोया था लिक्खाड़-

                          रविकर at "लिंक-लिक्खाड़" - 

                                  मंदिर जाता भेड़िया

                               श्यामल सुमन at मनोरमा 
                 डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) at उच्चारण - 

                                           जादू

                            नये स्‍कूल में पहला दिन..


                                       sapne

 shashi purwar at sapne 

Bheemili, Visakhapatnam, Andhra Pradesh भीमली, विशाखापटनम, आंध्रप्रदेश (भीम-बकासुर युद्ध-स्थल)


आज की चर्चा यहीं समाप्त करती हूँ  फिर चर्चामंच पर हाजिर होऊँगी  कुछ नए सूत्रों के साथ तब तक के लिए शुभ विदा बाय बाय ||


आगे देखिए..."मयंक का कोना"
(1)
वो आ जाए ख़ुदा से की दुआ अक्सर 
वो आया तो परेशाँ भी रहा अक्सर  ...

मेरी धरोहर पर yashoda agrawal 
(2)
सियाह रात में मुकम्मल देखा सितारों को भी चांदनी में 
मुज़म्मिल देखा रात चाँद की चांदनी में ...

तमाशा-ए-जिंदगी पर तुषार राज रस्तो

(3)
दुश्मन न बनो अपने ,ये बात जान लो ,
कुदरत को खेल खुद से ,न बर्दाश्त जान  लो...

! कौशल ! पर Shalini Kaushik 

(4)
गांव से माँ आई है। गर्मी पूरे यौवन पर है। गांव शहर में बहुत फर्क है। पर माँ को यह मालुम नहीं है। माँ तो शहर आई है अपने बेटे, बहू और पोते-पोतियों के पास, प्यार, ममता, स्नेह की गठरी बांधे...

कुछ अलग सा पर गगन शर्मा, कुछ अलग सा 

(5)
तू विदा लेकर भी कहाँ जुदा हो पाई माँ !...
My Photo
(6)

मन का पंछीपरशिवनाथ कुमार

(7)

भारतीय नारी पर shikha kaushik 

सोमवार, जून 03, 2013

फिर वोही गुज़ारिश :चर्चा मंच 1264

शुभम दोस्तों.. 
हाजिर हूँ 
मैं 
सरिता भाटिया 

आएं मेरे साथ 
लिए हाथों में हाथ 
बढ़ते हैं 
आज की सोमवारीय चर्चा 
की तरफ 

Photo
शगुन 
एक साल बाद 
पुलिस की छवि 
Little_boys : illustration of a boy cheering on a white background
यह कैसा देश में बदलाव हुआ 
अंगूठा 
मुझे पहले यूँ लगता था ..
हो गई बेवा गजल 
कुछ अनकही 
Photo: दोस्तो कुछ काव्य रचनाएँ जो कभी बहुत पहले 
लिखीं थी आज आप लोगों के साथ बाँटना चाहता 
हूँ...''कुछ अनकही''...और आशा करता हूँ आप सबको
यह पसंद आएँगी और आप सब की हौंसला अफ़साई 
इस में और इज़ाफ़ा करने में पूर्णतया सहायक होगी........
          ''कुछ अनकही''
          ........1..........
कुरेदो किसी भी इंसान को, अपना सा लगता है
दिल में उसके भी ,एक जख्म कहीं पलता है
हर शख्स दोहरी सी जिंदगी जीता है
हंसता है महफ़िल में,अक्सर अकेले में रोता है

सारी दुनिया से जीत जाता है,
लेकिन अपनों से ही हमेशा हारता है
पूछो उससे तो कहता है,
वो तो दुनिया भर का मज़ा मारता है

आस का पंछी दूर डाल पर होता है
ना ही उड़ता है और ना हाथ आता है
दर्द हर इंसान का,इंसान अपने सा ही पाता है
इंसान फिर भी ना जाने क्यों जीना चाहता है? 
..................यशपाल भाटिया [26दिसंबर,1997]
बातचीत की कला
अब सुनामी की चेतावनी 
खुदा ही के लिए 
फेसबुक अकाउंट किसी ने खोला है
पाराशर मंदिर हिमाचल प्रदेश 

ऐसी गजल गाता नहीं 
दोहे 
कुण्डलिया छंद 
क्योंकि तुम प्रेम हो 
आम हो गया ख़ास 
देती हूँ आज की चर्चा को विराम 
आपको सुनाते हुए 
बड़ों को नमस्कार 
छोटों को प्यार 
शुभविदा ...
आगे देखिए..."मयंक का कोना"
(1)
दिल का पैगाम साहिबा लाया ...
छंद भावो के फिर सजा लाया...


sapne पर shashi purwar 
(2)
मैंने उसको....सताया नही !!!
 कलम हाथ में लिए बैठा हूँ उसने कुछ सुझाया ही नही, 
बोला दिल कुछ,मुझसे ऐसे 
किसी ने मुझे,दुखाया ही नही ...
यादें...परAshok Saluja 
(3)
विशेष सूचना
सभी दोस्तों से गुज़ारिश है कि वो 'पिता दिवस' पर समर्पित स्वरचित रचनाएँ हमें प्रेषित करें रचनाएँ 6 से 8 पंक्तिओं की होनी चाहिए प्राप्त सभी रचनाएँ ब्लॉग पर प्रकाशित की जाएंगी सर्वश्रेष्ठ 3 या 4 रचनाओं को 'अंजुम पत्रिका' के जुलाई अंक में प्रकाशित किया जाएगा एवं ब्लॉग प्रसारण के विशेष रचना कोना में स्थान दिया जाएगा रचनाओं का चयन वरिष्ठ साहित्यकारों द्वारा किया जाएगा रचनाएँ भेजने की अंतिम तिथि 14 जून,2013 है रचनाएँ निम्न ईमेल पर प्रेषित करें saru.bhatia66@gmail.com
गुज़ारिश पर सरिता भाटिया 
(4)
रिश्ते और ऑरथराइटिस

जब भी कोई कष्ट में चलता दिखता है ,तो सबसे पहला ख़याल यही आता है दिक्कत तो इस बंदे के जोड़ों में ही होगी । इसका एकमात्र कारण यही है कि कोई भी परेशानी हमारे सबसे कमजोर पलों में ही हावी हो पाती है और कोई भी बीमारी शरीर के दुर्बल होते अंगों पर ही अपना असर दिखा पाती है । मुझे लगता है कि जहाँ हम खुद को बहुत सामर्थ्यवान समझते हैं वहीं हम सबसे ज्यादा कमजोर भी होते हैं....
झरोख़ापरनिवेदिता श्रीवास्तव

(5)
"जिन्दादिली का प्रमाण दो"

जिन्दा हो गर, तो जिन्दादिली का प्रमाण दो।
मुर्दों की तरह, बुज-दिली के मत निशान दो।।...

रविवार, जून 02, 2013

मुकद्दर आजमाना चाहता है : चर्चा मंच १२६३

"जय माता दी" रु की ओर से आप सबको सादर प्रणाम. चलते हैं आप सभी के चुने हुए प्यारे लिंक्स पर.
डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
पी.सी.गोदियाल "परचेत"
कविता रावत
Rajesh Kumari
उपासना सियाग
ताऊ रामपुरिया
अरुणा
लेखक : डॉ. योगेन्द्र नाथ शर्मा ’अरुण’
प्रस्तुतकर्ता: Yashoda Agrawal
Sushila
साँसों की डोर उखड़ रही थी.......उसने चूल्हे की ओर देखा........जिसकी आँच में उंगलियाँ जला कितनी तृप्त होती रही वो......परिंडा, घड़े ....सींचती रही जिस अमृत से.... अपनों को, खुद को उस तपते रेगिस्तान में......नज़रें घूमती रहीं.......हर उस चीज़ पर जो उसकी ज़िन्दगी का बरसों से हिस्सा बनी रही
सुमन कपूर 'मीत'
Shikha Kaushik
अंत में कंप्यूटर से सम्बंधित उपयोगी जानकारियाँ
Abhimanyu Bhardwaj
Hitesh Rathi
Sanny Chauhan
इसी के साथ आप सबको शुभविदा मिलते हैं रविवार को. आप सब चर्चामंच पर गुरुजनों एवं मित्रों के साथ बने रहें. आपका दिन मंगलमय हो
आगे देखिए.."मयंक का कोना"
(1)
धोनी पर क्यों खामोश है मीडिया ?

देश में एक बार फिर मीडिया का गैरजिम्मेदाराना रवैया देखने को मिला। आप सबको पता है कि आईपीएल 6 में क्या नहीं हुआ ? सट्टेबाजी हुई, स्पाँट फिक्सिंग हुई, खेल को प्रभावित करने के लिए लड़कियों की सप्लाई हुई, देश के करोंडो खेल प्रेमियों के आंख में धूल झोंका गया। इतने गंभीर अपराधों का खुलासा होने के बाद तो इसके जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजने की बात होनी चाहिए थी। लेकिन देश का अपरिपक्व मीडिया श्रीनिवासन के इस्तीफे के लिए गिड़गिड़ाता रहा...
TV स्टेशन ...पर महेन्द्र श्रीवास्तव 

(2)
मधु सिंह : ज़लील -सी गाली
बे-नकाब होने को है
   मेरा फोटो   
     सज़ा   बे- वफ़ाई   की   आता  होने  को  है
     शौके  -  फ़ितरत   की   कज़ा   होने  को है...
(3)
लघुकथा

 बेटा आस्ट्रेलिया से वापस आ रहा है ,बुढ़ापे में उनको सहारा मिलेगा --माँ -बाप की खुशी का ठिकाना नहीं । बाप ने ऊपर की मंजिल के कमरे बाथरूम आधुनिक उपकरणों से सजा दिये ताकि बहू बेटे शान से रहें । पोती करीब चार माह की थी ,उसकी परवरिश के लिए एक आया का भी इंतजाम हो गया । बेटा आया ,माँ बाप ने उसे कलेजे से लगा लिया...
तूलिकासदन पर सुधाकल्प

(4)
शतरंज
खिलाड़ी समय और अवसर देखकर बिछा देते हैं बिसात सजा देते हैं मोहरे फूँक देते हैं प्राण बांट देते हैं अधिकार और चलने लगते हैं अपनी-अपनी चालें...
बेचैन आत्मा पर देवेन्द्र पाण्डेय

(5)
'शादी करके फंस गया यार ,...
अच्छा खासा था कुंवारा .''

! कौशल !परShalini Kaushik
(6)
मगर ये हो न सका ...
कभी ख़्वाब सजाया था कि, तेरे जुल्फों में फुल गुलाब का लगायेंगे मगर ये हो न सका ... सपने बुने थे कि, तेरे लिए चाँद -सितारे जमी में लायेंगे मगर ये हो न सका ...
हृदयगाथा : मन की बातें ...

(7)
"बड़ा होने से डरता हूँ"

बड़ों की देख कर हालत, बड़ा होने से डरता हूँ
मैं इस खुदगर्ज़ दुनिया में, खड़ा होने से डरता हूँ...

शनिवार, जून 01, 2013

बिना अपने शब्दों को आवाज़ दिये (चर्चा मंचःअंक-1262)

जून माह की पहली चर्चा में आपका स्वागत है 
चलिये सीधे चलते हैं आज लिंक्स पर 
बिना अपने शब्दों को आवाज़ दिये 

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आपके कंप्यूटर / मोबाइल फ़ोन का आधार कार्ड बना या नहीं?

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रात गुलज़ार के संग काट आयी, बाबुषा



आज के लिये बस इतना ही ………फिर मिलते हैं ………नमस्कार...!

आगे देखिए..."मयंक का कोना"
(1)
ग़ज़ल

कोई गीत नये सुरों में जब गाया जायेगा 
साँसों के साज़ को कैसे भुलाया जायेगा ...
कागज मेरा मीत है, कलम मेरी सहेली......

(2)
अज़ीज़ जौनपुरी : दिये मकबरे पर जलाती रहो

पास आओ मेंरे, चंद लमहें गुज़ारो,
मेरे पहलू में तुम यूँ ही बैठी रहो ...
Zindagi se muthbhedपरAziz Jaunpuri

(3)
मनपसन्द अपने अशआर -

साहित्यिक सहचर
मत उलझ हमसे अमीरे कारवां, ये सोच ले,
जिन्दगी हमसे उलझ कर,चैन से अब तक नहीं...
साहित्यिक सहचर 

(4)
ब्लॉग महिमा
मेरा फोटो
गुज़ारिश पर सरिता भाटिया 

(5)
बिदाई गीत
छुट गयल बाबुल तोर अंगनवा  छूटल आपन ई देस रे   
काहे का बिटिया भइल परायी   काहे दीजो परदेस रे  ...
Voice of Silent Majority पर Brijesh Singh