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शनिवार, सितंबर 27, 2014

"अहसास--शब्दों की लड़ी में" (चर्चा मंच 1749)

मित्रों।
आप सबको शारदेय नवरात्रों की शुभकामनाएँ।
शनिवार की चर्चा में मेरी पसन्द के कुछ लिंक देखिए।
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आई माता शेरावाली 

Photo
शरद ऋतू की सुन्दर वेला 
मनभावन मौसम अनुकूला 
प्रकृति की ये छटा निखरती 
मीठी मीठी हवा बिखरती 
खुशियाँ हरपल छाई रहती 
उमंग तरंग समायी रहती 
नौ दिनों तक पूजन होता 
माँ दुर्गे की अर्चन होता 
आई माता शेरावाली 
बाधा व्यथा मिटानेवाली...
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हिन्दी मे गुण बहुत है, सम्यक देती अर्थ।
भाव प्रवण अति शुद्ध यह, संस्कृति सहित समर्थ।।
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वैयाकरणिक रूप में, जानी गयी है सिद्ध।
जिसका व्यापक कोश है, है सर्वज्ञ प्रसिद्ध।।...
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तेरे बगैर.... 

उम्रेदराज़ काट रहा हूँ तेरे बगैर 
गुलों से खार छांट रहा हूँ तेरे बगैर 
हँसने को जी करे है न, रोने को जी करे 
मुर्दा शबाब काट रहा हूँ तेरे बगैर... 

निकेत मलिक 

मेरी धरोहर पर yashoda agrawa
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दिलनवाज़ी के लिए... 

ख़ुल्द में क्या-क्या मिलेगा, साथ चल कर देख लें 
अस्लियत क्या है ख़ुदा की, आंख मल कर देख लें... 
Suresh Swapnil 
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पानी 

Akanksha पर Asha Saxena 
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हमारा गर्व 

'इसरो' ने जारी की 
मंगल यान की भेजी पहली तस्वीर... 
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सार संकल्प संसार 

मेरा फोटो
...हमारे लिए कामनाओं के बदले संकल्प का दामन थामना ही श्रेयस्कर है जिसकी पूर्णताहेतु पूरा का पूरा निसर्ग हमारा सहयोगी होता है, उसकी दिशा में जब हम एक कदमबढ़ाते हैं तब प्रकृति हमारे लिए हज़ार कदमों के मार्ग को स्वयं प्रशस्त करती दीखतीहै।
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भीगे शब्द -- शिवनाथ कुमार 

भीगे गीले शब्द 
जिन्हें मैं छोड़ चुका था 
हर रिश्ते नाते 
जिनसे मैं तोड़ चुका था...
कविता मंच पर संजय भास्‍कर 
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तेरे इंतज़ार में....मेरा चौका 

आज भी मेरा चौका तेरी बांट जोह रहा है
चूल्हे में अब तक सूखी लकड़ियां बचा रखी है
हंडिया आज भी वहीं है
बस बदला है तो केवल खाने का... 

My Photo
swatikisoch पर swati jain
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कार्टून कुछ बोलता है - आह्वान 

अंधड़ ! पर पी.सी.गोदियाल "परचेत" 
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"ग़ज़ल-रूप की बुनियाद" 

लोग जब जुट जायेंगे,

तो काफिला हो जायेगा

आम देगा तब मज़ा, 

जब पिलपिला हो जायेगा

पास में आकर कभी,

कुछ वार्ता तो कीजिए

बात करने से रफू, 

शिकवा-गिला हो जायेगा...

शुक्रवार, सितंबर 26, 2014

"नवरात महिमा" (चर्चा मंच 1748)

नमस्कार मित्रों, आज के चर्चा अंक में आपका हार्दिक स्वागत है। 
नवरात्र आरम्भ हो चुका है। नवरात्र हिन्दू धर्म ग्रंथ पुराणों के अनुसार माता भगवती की आराधना का श्रेष्ठ समय होता है। भारत में नवरात्र का पर्व, एक ऐसा पर्व है जो हमारी संस्कृति में महिलाओं के गरिमामय स्थान को दर्शाता है। वर्ष में चार नवरात्र चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ महीने की शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक नौ दिन के होते हैं, परंतु प्रसिद्धि में चैत्र और आश्विन के नवरात्र ही मुख्य माने जाते हैं। इनमें भी देवीभक्त आश्विन के नवरात्र अधिक करते हैं। इनको यथाक्रम वासन्ती और शारदीय नवरात्र भी कहते हैं। इनका आरम्भ चैत्र और आश्विन शुक्ल प्रतिपदा से होता है। अतः यह प्रतिपदा ’सम्मुखी’ शुभ होती है। शारदीय नवरात्र आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिप्रदा से शुरू होता है। आश्विन मास में आने वाले नवरात्र का अधिक महत्त्व माना गया है। इसी नवरात्र में जगह-जगह गरबों की धूम रहती है। आज के भागमभाग के युग में अधिकाँश लोग अपने कुल देवी-देवताओं को भूलते जा रहे हैं। कुछ लोग समयाभाव के कारण भी पूजा-पाठ में कम ध्यान दे पाते हैं। जबकि इस ओर ध्यान देकर आने वाली अनजान मुसीबतों से बचा जा सकता है। ये कोई अन्धविश्वास नहीं बल्कि शाश्वत सत्य है।
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रेखा जोशी 
जग की महाशक्ति हो तुम माँ अम्बे 
वरदान शक्ति का दो तुम माँ अम्बे 
नाम तेरा ले ध्याय हम सब यहाँ 
मेरी परम भक्ति हो तुम माँ अम्बे
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वन्दना गुप्ता 
प्रथम दिवस प्रथम रूप का दर्शन 
कर बने सम्पूर्ण जगत खुशहाल 

शक्ति औ दृढता करो माँ प्रदान 
जो दे जीवन को स्थिरता का आधार
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(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
दर्दे-दिल अपना छुपाना चाहिए
महफिलों में मुस्कराना चाहिए

ज़िन्दग़ी तो एक प्यारा गीत है
ज़िन्दग़ी को गुनगुनाना चाहिए

फूल के ही साथ रहते शूल हैं
ख़ार से दामन बचाना चाहिए
साधना वैद 
दिल्ली के चिड़ियाघर में दो दिन पूर्व सफ़ेद शेर ने एक युवक को मार दिया ! आजकल मीडिया में और कई घरों में भी सारी कवायद इस बात पर हो रही है कि इस अत्यंत लोमहर्षक दुर्घटना के लिये किसे ज़िम्मेदार माना जाए,
प्रवीण चोपडा 
कल मेरे पास एक ४५-५० वर्ष की उम्र का आदमी आया...उसने कहा कि उसने कोई दवा खाई थी दो तीन दिन पहले जिस से उस के सारे शरीर में खुजली होने लगी और मुंह में बहुत बड़ा घाव हो गया।
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पूर्वा भारद्वाज 
प्रीति न अरुण साँझ के घन सखि !
पल-भर चमक बिखर जाते जो 
मना कनक-गोधूलि-लगन सखि !
प्रीति न अरुण साँझ के घन सखि !
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अनीता जी 
परमात्मा को पाकर हमें आनंद मिलता है, यह नया आनन्द है पर इस पर रुकना नहीं है. हमें आगे जाना है जहाँ आनन्द का सागर है. परमात्मा हीरा है, उसे केवल आनन्द का स्रोत समझा तो हम वहीं रुक जायेंगे. इस आनन्द को अपना आधार बनाकर आगे बढना है. इसे असीम तक ले जाना है. वही तो हमारा स्वभाव है. जैसे ही हमारी दुःख की पकड़ छूटी, भीतर सुख का झरना बहने लगता है.
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दिगम्बर नासवा 
समय की ताकत को पहचानने वाले पल, बस कुछ ही आते हैं जीवन में ... आज की तारीख के बारे में सोचता हूँ तो कुछ ऐसा ही महसूस होता है ... बीतते बीतते आज माँ से बिछड़े दो साल हो ही गए ... हालांकि उस दीवार पर आज भी उनकी फोटो नहीं लगा पाया ... स्वर्गीय, श्रधांजलि जैसे शब्द  ……… 
मुझे पाता है
तु कहीं नहीं जाओगी

हालांकि जो कुछ भी तुम्हारे बस में था
उससे कहीं ज्यादा कर चुकी हो हम सब के लिए
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फ़िरदौस ख़ान
लड़की छत पर टहल रही थी. मौसम ख़ुशगवार था. आसमान में काली घटायें छाई हुई थीं. ठंडी हवा चल रही थी. लगता था, कहीं दूर बारिश हो रही है. लड़की बेचैन थी. वह क्यों बेचैन थी, इसका जवाब वह ख़ुद भी नहीं जानती थी. बस वो भीगना चाहती थी. वह चाहती थी कि सारी घटा यहीं बरस जाए और उसका रोम-रोम बारिश में भीग जाए. बूंदों की ठंडक उसके जिस्म में समा जाए, उसकी रूह में उतर जाए. लेकिन किसी के चाहने से घटायें कहां बरसने वाली थीं. उन्हें जब और जहां बरसना होता है, वहीं बरसा करती हैं.
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यशोदा अग्रवाल 
विचित्र है..
और सत्य भी तो है, 
कि हजारों वर्ष के 
इतिहास नें कभी भी, 
किसी ने भी 
नारी की आर्थिक स्थिति की 
ओर ध्यान ही नहीं दिया
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कुलदीप ठाकुर 
हे ईश्वर,
तुम्हारे मंदिर में,
आते हैं वो,
जिन के पास
होता है सब कुछ,
और पाने की इच्छा लिये
तुम्हे प्रसन्न करने के लिये,
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मनजीत ठाकुर 
बड़ी अच्छी ख़बर मिली, भारत का मंगलयान मंगल की कक्षा तक पहुंच गया। प्रधानमंत्री ने कहा, मंगल को मॉम मिल गई। देश के प्रधानमंत्री खुश थे, साइंसदान खुश थे। हमारे चैनल के एंकर ने कहा, बीमींग स्माइल। अर्थात् चौड़ी चकली मुस्कान। सही है।
उपासना जी 
गीत जो तुम ,
मेरे लिए
गुनगुनाते हो
हवाएं मुझ तक
पहुंचा देती है ......
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रंजना भाटिया 
यह सर्द रातो में
सिमटी हुई सी कोई नाज़ुकी
दिल में जैसे कोई पिघल के शमा जले
कोई शोला सा भड़के जैसे बदन में
आज फिर से
कोई इश्क़ का जाम नज़रो में ढले
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श्याम कोरी 'उदय'
खुदा' जाने, किस राह पर, किस मोड़ पर हैं 
मंजिलों से अब कोई वास्ता नहीं है हमारा ? 
… 
कभी कभी ही सही, मिल लिया करो यारो 
कुछ ख्याल अच्छे-बुरे तो होते हैं सभी के ?
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कविता रावत 
हमारे भारतीय चिन्तन में शरीर को धर्म का पहला साधन माना गया है। महाकवि कालिदास की सूक्ति "शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्" और इस हेतु सदैव स्वस्थ रहने को कर्तव्य निरूपित किया है। "धर्मार्थ काममोक्षाणाम् आरोग्यम् मूल मुत्तमम्।" इसीलिए अच्छा स्वास्थ्य महा-वरदान है। इसकी रक्षा करना प्रत्येक मनुष्य का दायित्व है। शरीर का स्वस्थ रहना परम आवश्यक है। यदि शरीर स्वस्थ नहीं हो, तो मन स्वस्थ नहीं रह सकता, मन स्वस्थ नहीं तो विचार स्वस्थ नहीं होते। उर्दू में एक सूक्ति है- 'तन्दुरूस्ती हजार न्यामत' अर्थात स्वास्थ्य हजार अन्य अच्छे भोगों से बढ़कर है। अंग्रेजी में भी कहावत है- 'Health is Wealth' अर्थात् स्वास्थ्य ही धन है।
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अरुणा जी 

24 सितम्बर २०१४ भारत के लिए सुनहरा दिन बन गया एक अनोखा इतिहास लिख डाला हमारे वैज्ञानिकों ने -----
सभी वैज्ञानिक बने बधाई के पात्र उन्ही के प्रयासों से भारत के इतिहास में आज का दिन 
'स्वर्णाक्षरों' में लिखा गया , एक अनोखा इतिहास लिखा गया सभी वैज्ञानिकों को इस अभियान से जुड़े हर व्यक्ति को दिल से बधाई उन्होंने विश्व में भारत का नाम उंचा किया 
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