फ़ॉलोअर



यह ब्लॉग खोजें

चर्चाकार : राजेन्द्र कुमार लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
चर्चाकार : राजेन्द्र कुमार लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, मार्च 11, 2016

"एक फौजी की होली" (चर्चा अंक-2278)

आज की चर्चा में आपका हार्दिक अभिनन्दन है,  
आज सीधे चलते हैं कुछ चुने हुए लिंको की तरफ। 
 (डॉ.रूपचन्द्र शस्त्री 'मयंक') 
पतझड़ में जिनके हुए, गात-पात बदरंग,
अब उन बिरुओं का ग़ज़ब खिला हुआ है अंग।
फागुन में मधुमास का ऐसा चढ़ा खुमार,
होली का चढ़ने लगा, लोगों पर अब रंग।। 
======================
आशा सक्सेना 
सरहद पर फाई के लिए चित्र परिणाम
बाल अरुण की स्वर्णिम किरणें 
यहाँ हैं बर्फ की चादर पर 
हिम बिंदु भी यदाकदा छू जाते 
मेरे तन मन को 
एहसास तुम्हारा होता 
फागुन के आने का होता 
पर हुई छुट्टी निरस्त 
आना संभव ना होगा 
======================
समीर लाल समीर
सभी शहर मध्य प्रदेश का हरसूद नहीं हुआ करते.. जो नदी में डूब में आकर अपना अस्तित्व
खो दें...कुछ शहर यूँ भी खो जाते हैं, बेवजह!!
आकांक्षा सक्सेना 
उपभोक्ता न्यायालयों के रूप में सर्वप्रथम अमेरिकी कांग्रेस में 'अधिकार के उपभोक्ता बिल' की शुरुआत की 15 मार्च 1962 को अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी उपभोक्ता अधिकारों के बारे में एक ऐतिहासिक भाषण दिया। जब से, दुनिया भर के देशों में विश्व उपभोक्ता दिवस के रूप में 15 मार्च को मनाया है।
======================
रेखा श्रीवास्तव 
My Photo
कुछ धुँधली सी 
यादों पर 
जब पड़ जाती है 
उजली सी तस्वीरों का 
चमकता हुआ सूरज।
डा० उर्मिला सिंह 
अकेली थी—नितांत नहीं?
अंग्रेजी में—इन दो शब्दों को बहुत खूबसूरती से अलग कर के जोडा गया है,
Aloneness and Lonaliness.
आइये चलते हैं—नदी के इन दो किनारों के बीच और बह निकलते हैं-- यादों के दरिया में—शब्दों की पतवार लिये—यही है
======================
मधुरेश 
मनुस्मृति ही क्यों, तुम 
वेद-पुराण भी जला डालो,
धर्म, शास्त्र, नीतियों को 
तुम हँसी में ही उड़ा डालो! 
महेश कुशवंश 
हम आज़ाद हैं
देश भी आज़ाद है
देश की हवा, पानी सब आज़ाद हैं
कौन सी हवा कहाँ रोकनी है
किसको कौन सी हवा मिलनी चाहिए
प्रमोद जोशी 
विडंबना है कि जब देश के 17 सरकारी बैंकों के कंसोर्शियम ने सुप्रीम कोर्ट में रंगीले उद्योगपति विजय माल्‍या के देश छोड़ने पर रोक लगाने की मांग की तब तक माल्या देश छोड़कर बाहर जा चुके थे. अब सवाल इन बैंकों से किया जाना चाहिए कि उन्होंने क्या सोचकर माल्या को कर्जा दिया था?
प्रमोद सिंह 
हिन्‍दी के अखबार और मास्‍टर आपको जाने काम की क्‍या-क्‍या चीज़ें बतायेंगे, ऐसे और शहर के वैसे दूसरे ढेरों सवाल होंगे, जिनका उनके पास कोई जवाब न होगा.
======================
आनन्द विश्वास 
1.
मन की बात
सोचो, समझो और
मनन करो।
2.
देश बढ़ेगा
अपने दम पर
आगे ही आगे।
======================
शारदा अरोड़ा 
मेरा फोटो
गुलाब को उसके काँटों की वजह से मत छोड़ो 
अवगुणों की वजह से गुणों को मत छोड़ो 
गुजारा है जो वक़्त साथ-साथ , वो बोलता ही मिलेगा 
खुशबुएँ साथ-साथ चलती हैं ,
वरना दिल तन्हा ही मिलेगा
======================
आमिर अली 
डियर रीडर्स , आज मै आपको 5 एंड्राइड मोबाईल की वो एप्प्स बताने जा रहा हूँ ,जिनकी मदद से आप किसी भी विडियो को अपने मोबाईल पर डाऊनलोड कर सकते हैं.ये बेस्ट एपस हैं जो लोग अपने मोबाईल पर  ......
======================
चैतन्य शर्मा 
स्कूल बुक फेयर
======================
रेखा श्रीवास्तव 
जीवन की बढ़ती आपाधापी और दूर दूर फैले कार्यक्षेत्र में लगने वाले समय ने और खाने पीने की नयी नयी सुविधाओं ने जीवन सहज बना दिया है लेकिन शरीर को जल्दी ही दवाओं पर निर्भर भी बनाता जा रहा है।
======================

रंजना भाटिया 
दे कर मेरी ज़िंदगी को कुछ लम्हे खुशी के 
ना जाने वो शख्स फिर कहाँ चला गया 

जो भी मिला मुझे मोहब्बत के सफ़र में 
वो ही मुझे तन्हा और उदास कर गया
======================

आनंद कुमार द्विवेदी 
हमारा हाल भी अब और ही सुनाये मुझे
सितम करे तो कोई इस तरह सताए मुझे

न जाने कौन सा ये श्राप है दुर्वासा का
शहर से मेरे वो गुजरे तो भूल जाए मुझे

दर्द की बात पुरानी हुई दुनिया वालों
अब वो रूठे तो बड़ी देर तक हँसाये मुझे
======================
धन्यवाद, फिर मिलेंगे... 

शुक्रवार, फ़रवरी 26, 2016

"कर्तव्य और दायित्व" (चर्चा अंक-2264)

आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है। 
'जमाना बहुत बदल गया है', 'लोग बदल गए हैं', आजकल ईमानदार लोग मिलते कहाँ हैं' ऐसे वाक्य अक्सर सुनने को मिलते हैं। हम सब दूसरों को कोसने और उनकी आलोचना करने में ही अपनी ऊर्जा खर्च करते रहते हैं पर अपने कर्तव्य और दायित्व के पालन पर ध्यान नहीं देते हैं।  हम सब चाहते हैं की सब कुछ सरकार करे पर सरकार में भी तो आज के कमजोर, खुदगर्ज, लालची और बेईमान लोग घुस गए हैं वे न तो खुद कर्तव्य और दायित्व का पालन करते हैं और न दूसरों को करने देते हैं।  अब तो ऐसा लगता है की भलाई करना जुर्म लगने लगा है और ऐसे भले आदमी को सज्जनता का ऐसा दण्ड मिलता है की होश ठिकाने आ जाते हैं फिर भी ऐसे सज्जन लोग कष्टों और संघर्षों से हारते नही, डट  कर मुकाबला करते हैं।  मैं आप सब से अपील करता हूँ अपने कर्तव्य और दायित्व का पालन करने से कदापि पीछे न हटें। 
=========================
आकांक्षा सक्सेना 
दोस्तों हमेशा सिर्फ अपने लिये जीना बस खुद के लिऐ सोचना क्या ये खुदगर्जी नहीं और क्या आप यही जीवन चुनना चाहेंगे शायद नहीं |
कुछ लोग बड़े मंच पर खड़े होकर समाजहित, राष्ट्रहित, प्रेम और दया की बड़ी - बड़ी बातें करते हैं पर देखा गया है कि वही लोग जब बस और ट्रेन का सफर कर रहे होते हैं तब अपने साथी यात्री को पूरी यात्रा में उसे खड़े हुऐ यात्रा करते देख,उनका मन नहीं पसीजता जो थोड़ा सा खिसक जाते और वो भी यात्री बैठ जाता |
=========================
 (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
यहाँ मोहन दास कर्मचन्द गान्धी की आत्मा बसती है!
आठ अक्टूबर 2008 को मेरा 
किसी समारोह में जाने का कार्यक्रम 
पहले से ही निश्चित था। 
समारोह/सम्मेलन दो दिन तक चला।
यूँ तो अहमदाबाद के कई दर्शनीय स्थलों का भ्रमण किया, 
परन्तु मुझे गांधी जी का साबरमती आश्रम देख कर बहुत अच्छा लगा।
डॉ मोनिका शर्मा 
ज़िन्दगी संभलती नहीं है | 
ये पकड़ो तो वो छूट जाता है और वो संभालो तो ये बिखर जाता है | 
हर लेखक अपनी रचना के बाद मर जाता है | नई रचना के लिए वह फिर से जन्म लेता है | साहित्य की समझ हो तो पत्रकारिता में भी निखार आता है | 
लेखन, समय और एकांत चाहता है | 
 =========================
प्रभात रंजन 
मैं तो एक बनी बनाई औरत थी । औरत क्या बीवी थी । और तुम जब अपने लड़कपन में जमाने भर के चस्खे ले रहे थे लफंगई ,गुंडई ,तफरी कर रहे थे तब मैं घास थोड़े न छील रही थी ।
तुम बेहथियार जंग में उतरे हो और मैं न जाने कबसे अपनी काबिलियत तराश रही थी ।
 =========================
अशोक पाण्डेय 
चिंतन में श्रृगाल परिपाटी,
हुआं-हुआं इत हुआं-हुआं उत फिर क्यों उम्मत बांटी
हर सियार का रंग अलग है तिरक चाल भन्नाटी
अलग तंज़ मुनफ़रिद किनाया चौकस कन्नी काटी
 =========================
डॉ दिव्या श्रीवास्तव (ZEAL)
क्या थी विभाजन की पीड़ा ? विभाजन के समय हुआ क्या क्या ?
विभाजन के लिए क्या था विभिन्न राजनैतिक पार्टियों दृष्टिकोण ?
क्या थी पीड़ा पाकिस्तान से आये हिन्दू शरणार्थियों की ... मदन लाल पाहवा और विष्णु करकरे की?
क्या थी गोडसे की विवशता ?
 =========================
उदयवीर सिंह 
हे संसद ! तूँ स्वस्थ रहे स्वच्छ रहे निशिवासर तूँ
संविधान की गुरुता का देख सके विधि आदर तूँ
गंतव्य बने स्तम्भ बने मंतव्य बने हित चिंतन का
राष्ट्र निरंतर प्रणीत हो पथ्य-पाथेय की गागर तूँ
 =========================
मनोज कुमार 
आपको यह जानकर ख़ुशी होगी की तकनीक के इस समय में सुचना एवं संचार तकनीक के उपयोग के क्षेत्र में हुयी अद्भुत क्रांति के चलते आज भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 35 करोड़ के पार पहुंच गयी है अभी हाल ही में  ...... 
 =========================
इंदुरवी सिंह 
हमारे तुम्हारे बीच का
ये मौन
बहुत शोर करता है
इसकी बातें
कभी ख़त्म नहीं होतीं
अनगिनत सवाल-जवाब
 =========================
उपासना सिआग 
समुन्दर से
मन की लहरें
भागती है क्यूँ
बार -बार
किनारे की तरफ !
 =========================

मुकेश कुमार सिन्हा 
देखी है कभी कवि की डायरी ?
अधिकतर कवियों के पास होती है
पुरानी, जर्द पन्नो वाली किसी कंपनी की
उपहारस्वरूप प्राप्त डायरी !
 =========================
अशोक कुमार पाण्डेय 
नेपाली के युवा कवि सुमन पोखरेल की ये कविताएं उस जीवन जगत के प्रामाणिक चित्र हैं जिनसे कवि वाबस्ता है। यहाँ बच्चों का एक मासूम जीवन है जिसमें बहुत सी बदशक्ल सरंचनायेँ भी उनके स्पर्श से कोमल हो जाती है, बनता-बिगड़ता-बदलता शहर है जो
लोकेन्द्र सिंह 
इं दौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय पर एक रोचक वाकया घटित हुआ है। इसकी चर्चा सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में हो रही है। कांग्रेस ने 22 फरवरी को मध्यप्रदेश के संघ कार्यालयों पर तिरंगा फहराने की योजना बनाई थी।
 =========================
आमिर अली 
डियर रीडर्स ,बहुत सारे लोग इंटरनेट पर अर्निंग करने के बारे में सर्चिंग करते रहते हैं.और कई बार किसी गलत जगह में जाकर भी फस जाते हैं, तो कई बार फेक  ..... 
वीरेन्द्र कुमार शर्मा 
जिनके गुरूजी अफजल हों ,साधू संतों में में जिन्हें कोई गुरु ही न मिले ,ऐसे कांग्रेस के सुरजेवाला नुमा प्रवक्ता सोच के भगोड़े संसद छोड़कर भाग गए ईरानी के सच की आंच को सह न सके। जबकि कश्मीरियों में गुरु सरनेम किसी का नहीं है।
 =========================
आशा सक्सेना 
श्यामल गात 
सुदर्शन सुन्दर 
मनमोहक छवि तेरी 
रोम रोम में बसी 
भाव भंगिमा तेरी 
तेरा मुकुट 
तेरी बाँसुरी
रश्मि शर्मा
नीला शहर...नीला आसमान
सुरमई सी शाम थी
जब
शहर की बूढ़ी दरख़्त तले
नजरें बचा
उसने पि‍या था
 =========================

धन्यवाद,




शुक्रवार, फ़रवरी 19, 2016

"सफर रुक सकता नहीं" (चर्चा अंक-2257)

आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है।
सर्वप्रथम उर्मिला माधव जी की एक खूबसूरत ग़ज़ल को देखते हुए चलते हैं आज की चर्चा के तरफ। 
अदब अब सभी के दफ़ा हो गए हैं,
बुज़ुर्गाने आला ख़फा हो गए है

समेटे नहीं जा सके दिल के टुकड़े,
ये हिस्से भी कितनी दफ़ा हो गए हैं,

सिखाई मुहब्बत-ऑ-तहज़ीब जिनको,
जवां क्या हुए, बे-वफ़ा हो गए हैं,

मुहब्बत के मानी बचे ही कहाँ कुछ,
फ़क़त अब ज़ियाँ और नफ़ा हो गए हैं

वो सर को झुकाना ऑ तस्लीम कहना,
किताबों का बस फ़लसफ़ा होगये हैं!
 =======================

"पढ़ना-लिखना मजबूरी है" 
मुश्किल हैं विज्ञान, गणित, 
हिन्दी ने बहुत सताया है। 
अंग्रेजी की देख जटिलता, 
मेरा मन घबराया है।।
 =======================
डॉ जाकिर अली रजनीश 
obedient dog
यह एक कुत्ते और आदमी की हैरतअंगेज कहानी है, जो मुझे वाट्सअप पर प्राप्त हुई। यकीन जानिए, मैं इतनी ज़बरदस्त कहानी पहले नहीं पढ़ी। आप भी पढ़ कर देखे: 
रात के दस बज गये थे। एक दुकानदार अपनी दुकान बंद करने की तैयारी कर रहा था। वह लाइट को ऑफ करने ही जा रहा था कि तभी  ....... 
लोकेन्द्र सिंह 
केरल के कन्नूर जिले में बीते सोमवार की रात को वामपंथी गुण्डों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नौजवान कार्यकर्ता की बेरहमी से हत्या कर दी। लेकिन, कहीं से प्रतिरोध की कोई आवाज नहीं आई। असहिष्णुता के नाम पर देश को बदनाम करने का षड्यंत्र रचने वाले बुद्धिजीवी भी  .... 
=======================
अर्पणा खरे 
मुझमे मेरा क्या था
सब तो तुम्हारे द्वारा 
तय 
किया गया था
मेरी बाहर की जिंदगी
कहाँ जाना है
मदन मोहन सक्सेना 
बिरह के कुछ अहसासों को ब्यक्त करती प्रेम कवितायेँ .
(एक )
जुदा हो करके के तुमसे अब ,तुम्हारी याद आती है
मेरे दिलबर तेरी सूरत ही मुझको रास आती है
कहूं कैसे मैं ये तुमसे बहुत मुश्किल गुजारा है
भरी दुनियां में बिन तेरे नहीं कोई सहारा है
=======================
आनंद पाठक 
:1: 
दीवार उठाते हो
 तनहा जब होते 
फिर क्यूँ घबराते हो
 :2: 
इतना भी सताना क्या
 दम ही निकल जाए 
फिर बाद में आना क्या
प्रबोध कुमार गोविल 
आपको याद होगा कि वर्षों पहले तो शादियां भी लड़के-लड़की को एक दूसरे को दिखाए बिना तय हो जाती थीं। लेकिन उस समय भी समाज ने ये व्यवस्था की थी कि दावेदार की पूरी परख हो सके। शादी तय करवाने का काम "नाई" के जिम्मे था। जानते हैं क्यों? क्योंकि बदन मालिश के जरिये आपकी टोह ले लेने में ..... 
=======================
आमिर अली
  Apna Blog kaise bnayen ?
डियर रीडर्स , ब्लॉग को आप टेम्परेरी वेबसाईट भी कह सकते हैं.अगर आपके अन्दर हुनर है ,आप टेलेंटेड हैं.और आप बहुत कुछ लिख सकते...
अशोक पाण्डेय 
आत्मकथा लिखने का मेरा आशय नहीं है. मुझे तो आत्मकथा के बहाने सत्य के जो अनेक प्रयोग मैंने किये हैं, उसकी कथा लिखनी है. उसमें मेरा जीवन ओतप्रोत होने के कारण कथा एक जीवन ओतप्रोत होने के कारण कथा एक जीवन-वृत्तान्त जैसी बन जायेगी,यह सहीं है; लेकिन उसके हर पन्ने पर मेरे प्रयोग ही प्रकट हो तो मैं स्वयं इस कथा को निर्दोष मानूँगा.
रविकर जी 
राष्ट्रवाद का पक्ष लो, या विपक्ष के साथ।
रह सकते निरपेक्ष भी, धरे हाथ पर हाथ।

धरे हाथ पर हाथ, करे क्या देख गिलानी ।
राष्ट्र-विरोधी नाद, सुनो हाफिज की बानी ।
त्रिलोक सिंह ठकुरेला
1. वही प्रबुद्ध
 जिसने जीत लिया
 जीवन युद्ध
 2.
 दौड़ाती रही
 आशाओं की कस्तूरी
 जीवन भर
=======================
आमिर अली 
डियर फ्रेंड्स , इस विडियो में आप देख सकते हैं की किसी भी यूट्यूब चैनल को कैसे सबस्क्राइब किया जाता है , इसमें प्रेक्टिकल आपको बताया गया है , इस विडियो को देख कर आप अपने पसंद के सभी यू ट्यूब चैनल्स को सबस्क्राइब कर सकते हैं .सबस्क्राइब करने के बाद आपको उस चैनल की सभी विडियो ईमेल के जरिये मिल जाती हैं
=======================
(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
सियाह रात है, छाया बहुत अन्धेरा है
अभी तो दूर तलक भी नहीं सवेरा है

अभी तो तुमसे मुझे दिल के राज़ कहने हैं
मगर फलक़ पे लगा बादलों का डेरा है

छटेंगी काली घटाएँ तो बोल निकलेंगे
गमों के बोझ का साया बहुत घनेरा है
=======================
गौतम राजरिशी
शब्दों की बेमानियाँ...बेईमानियाँ भी | लफ़्फ़ाजियाँ...जुमलेबाजियाँ...और इन सबके बीच बैठा निरीह सा सच | तुम्हारा भी...मेरा भी | 
तुम्हारे झूठ पर सच का लबादा
तुम्हारे मौन में भी शोर की सरगोशियाँ
तुम्हारे ढोंग पर मासूमियत की
न जाने कितनी परतें हैं चढी
=======================
क्षणिकाएं
कैलाश शर्मा 
हर खिड़की दरवाज़े से
आ जाते यादों के झोंके
दे जाते कभी
सिहरन ठंडक की
कभी तपन लू की।
=======================
दीपक बाबा 
मेरा फोटो
देश में माहौल गर्म है. ट्विटर/फेसबुक पर धड़ाधढ ख़बरें / विचार आ रहे है, जब तक आप सोचो नयी ट्वीट/पोस्ट आ जाती है. सारा दिन गहमागहमी. कन्हैया से लेकर बस्सी तक. कई ब्यान आये और कई पलट गए. मिनट मिनट में यारलोग भी अपडेट होते रहे/करते रहे.
शारदा अरोड़ा 
विशाल , जिसे मैंने बच्चे से बड़े होते हुये देखा , आज उसी को श्रद्धाँजलि दे रही हूँ। उसके भोलेपन और सादगी को मैं बार-बार प्रणाम करती हूँ।
चिरनिद्रा में सो गये तुम
माँ का दिल ये कैसे माने
तुम्हारी जैकेट , तुम्हारी दवा की खुली शीशी
तुम्हारे बिस्तर पर पड़ी सलवटों से
अभी अभी तुम्हारे उठ कर जाने का अहसास
अभी तो तुम्हारे बोल भी सुनाई देते हैं
=======================
"धन्यवाद" 

शुक्रवार, फ़रवरी 12, 2016

"विचार ही हमें बदल सकते हैं" (चर्चा अंक-2250)

आज की चर्चा में आपका हार्दिक स्वागत है। वसन्त पंचमी की हार्दिक शुभकामनायें। 
मनुष्य का विकास और भविष्य उसकी मन:स्थिति पर निर्भर है। जैसा बीज होगा वैसा ही पौधा उगेगा। जैसे विचार होंगे वैसे ही कर्म बनेंगे। जैसे कर्म करेंगे वैसी ही परिस्थितियां बन जाएंगी। भली-बुरी परिस्थितियां अनायास ही सामने नहीं आ खड़ी होतीं। उनका अपने कर्तव्य से बड़ा गहरा संबंध होता है। वृत्तियों की प्रतिक्रिया परिस्थितियों के रूप में सामने आती हैं। तथ्य यह है कि वृत्तियां अनायास ही नहीं बनने लगतीं, वरन् चिरकाल से मन में स्थित विचार पध्दति का परिणाम होती हैं। वास्तविक पूंजी धन नहीं विचार हैं। वास्तविक शक्ति साधनों में नहीं, विचारों में सन्निहित है। व्यक्तित्व का निखार विचारशीलता पर अवलंबित है। सोचने के ढंग से जीवन को दिशा मिलती है और दिशा निर्धारण पर भविष्य का भला-बुरा होना निश्चित है। सच तो यह है कि आज कोई व्यक्ति जिस भी स्थिति में है वह उसके अब तक के विचारों का ही परिणाम है और भविष्य में जैसा कुछ बन सकेगा उसका आधार उसकी विचारशैली ही होगी।
===============================
साधना वैद 
ऐ हंसवाहिनी
माँ शारदे
दे दो ज्ञान !
सद्मति और संस्कार से
अभिसिंचित करो
हमारे मन प्राण !
गूँजे दिग्दिगंत में
चहुँ ओर
तुम्हारा यश गान !
कविता रावत 
व्रत ग्रंथों और पुराणों में असंख्य उत्सवों का उल्लेख मिलता है। ‘उत्सव’ का अभिप्राय है आनन्द का अतिरेक। ’उत्सव’ शब्द का प्रयोग साधारणतः त्यौहार के लिए किया जाता है। उत्सव में आनन्द का सामूहिक रूप समाहित है। इसलिए उत्सव के दिन साज-श्रृंगार, श्रेष्ठ व्यंजन, आपसी मिलन के साथ ही उदारता से दान-पुण्य किये जाने का प्रचलन भी है। वसंत इसी श्रेणी में आता है।
===============================
 (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
प्रण करने का बन रहा, आज सुखद संयोग।
सदा प्रतिज्ञा में बँधो, होगा नहीं वियोग।।
--
सोच-समझ कर बोलिए, वाणी है अनमोल।
अपने वचनों को सदा, तोल-तोल कर बोल।।
--
हाड़-मांस की जीभ को, कभी न देना छूट।
रसना ही तो डालती, सम्बन्धों में फूट।।
===============================
अर्पणा खरे 
वादे
जो दिल से
किये जाते है
वो महज
रस्म नहीं होती
===============================

कुलदीप ठाकुर 

न खुश हैं
वो
जिन के पास 
पैसा बेशुमार हैं।
सोने के लिये
मखमल के बिसतर है
पर क्या करे
नींद नहीं आती।
भूख नहीं लगती
===============================

फ़िरदौस खान 
आज प्रोमिस डे है...यानी वादों का दिन... एक-दूजे से वादा करने का दिन...
लेकिन हम मानते हैं कि सबके अपने-अपने प्रोमिस डे हुआ करते हैं... जो किसी भी माह के किसी भी दिन, किसी भी तारीख़ को हो सकते हैं... बहरहाल, इसी बहाने कुछ गुज़श्ता लम्हे सामने आकर खड़े हो गए...
===============================

ई. प्रदीप कुमार साहनी
हे भोलेनाथ मैं करुँ निवेदन,
आप हो दानी, मैं अकिंचन ।

आप नाथ हो हे त्रिपुरारी,
दास हूँ मैं भोले भंडारी ।
===============================
अशोक पाण्डेय 
बदलती शक्लों 
बदलते जिस्मों में 
चलता-फिरता ये इक शरारा 
जो इस घड़ी 
नाम है तुम्हारा
===============================

वीरेंदर कुमार शर्मा 

गतिविधियाँ आतंक की, जे एन यू में नित्य।
देश द्रोहिता चरम पर, शर्मनाक ये कृत्य।
शर्मनाक यह कृत्य, सबक इनको सिखलाओ ।
कहते जिन्हें शहीद, इन्हें उनतक पहुँचाओ।
सरकारी संज्ञान, अन्यथा जनता रक्षति।
राष्ट्रभक्त तैयार, करे हम इनकी दुर्गति।
===============================

अजय यादव 
मित्रो ! अपना जीवन साथी कैसे चुने ?के लिखने के बाद अब* प्रेग्नेंसी* पर एक विस्तृत लेख माला प्रस्तुत करने जा रहा हूँ |अपने विचारो प्रश्नों से अवगत कराते ...
===============================
भारती  दास 
हे हंस वाहिनी शारदे
अज्ञानता से उबार दे , हे .............
सुन्दर छवि शोभा अपार
नैनों में छाई है खुमार
इक बार माँ तू निहार दे
अज्ञानता से उबार दे , हे............
तू श्वेत पद्दम विराजती
===============================
वन्दना गुप्ता 
शहीदों को नमन किया
श्रद्धांजलि अर्पित की
और हो गया कर्तव्य पूरा

ए मेरे देशवासियों
किस हाल में है मेरे घर के वासी
कभी जाकर पूछना हाल उनका
===============================

आशा सक्सेना 
संवेदना विहीन
निष्ठुरता के पुरोधा 
क्या है सोच जानना कठिन 
अंतस की हल चल का
यदि कभी कुछ सहा होता 
कष्ट का अनुभव किया होता 
तभी अनुभव होता
कष्ट किसे कहा जाए
===============================
आकांक्षा सक्सेना
कल 12 फरवरी है और पूरा देश बंसतोत्सव की तैयारियों में व्यस्त है | यह पर्व प्रकृति के श्रंगार का नवीनता,प्रेम और खुशी का पर्व माना जाता है|इस त्योहार में जहाँ एक ओर पतंगे उड़ाई जाती हैं कि हम पतंग की ही तरह आसमान की उँचाइयाों को स्पर्श कर सके|
डॉ दयाराम अस्लोक 
डायबटीज ऐसी बीमारी है जिससे निजात पाना बहुत कठिन है। इसलिए बेहतर है कि पहले से ही शरीर को इतना चुस्त रखें कि बीमारी छू भी न पाए। ऐसे में ये योगासन बहुत फायदेमंद हैं। अगर डायबीटीज के मरीज हैं भी तो ये योगा करने से सेहत ठीक रहेगी। ब्लड शुगर नियंत्रित रहेगी और तनाव, थकान जैसी परेशानियां दूर होंगी। जानते हैं किन योगासन से आप डॉयबटीज को दूर कर सकते हैं।
राजेश कुमार 
सर्दियों में पैरों के पंजे बहुत ठंडे पड़ जाते हैं और अनेक तरह के पापड़ बेलने पर भी गर्म नहीं होते। यह समस्या पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में अधिक होती है। युवाओं में कम और बुजुर्गों में अधिक पाई जाती है शारीरिक दृष्टि से पैर ठंडे तब होते हैं
===============================
धन्यवाद , फिर मिलेंगे अगले