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रविवार, दिसंबर 28, 2014

*सूरज दादा कहाँ गए तुम* (चर्चा अंक-1841)

मित्रों!
रविवासरीय चर्चा मंच में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के निम्न लिंक।
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*सूरज दादा कहाँ गए तुम* 

सूरज  दादा  कहाँ   गए  तुम, 
काह ईद  का  चाँद  भए तुम। 
घना   अँधेरा,  काला - काला, 
दिन निकला पर नहीं उजाला।... 
Anand Vishvas
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सिसकिया 

Abhilasha पर 
Neelima sharma 
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ये ठंड भला क्यों हमारी दुश्मन बने ? 
....सर्दी या गरमी तभी परेशान करते हैं जब आपके शरीर की इम्यूनिटी कमजोर हो गयी हो। उसको बनाये रखने के लिए आप २-४ चीजों का सहारा लीजिए। एक महीने ६ ग्राम अश्वगंधा चूर्ण रोज पानी से निगलिये ,दूसरे महीने ५ ग्राम हल्दी चूर्ण ,तीसरे महीने ५ छोटी हर्रे का चूर्ण। सुबह सवेरे नाश्ते से ५ मिनट पहले निगलना है। चौथे महीने फिर अश्वगंधा से क्रम शुरू कीजिए। विश्वास  कीजिए साल भर में एक बार भी डाक्टर के पास जाने की जरुरत नहीं पड़ेगी।  यही नहीं आप सारे मौसमों का भरपूर आनंद उठाएंगे।
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पृथु जीवन के प्रथम वर्ष पर 
कृत्य तुम्हारे, हर्ष परोसें,
नन्हे, कोमल, मृदुल करों से,
बरसायी कितनी ही खुशियाँ,
चंचलता में डूबी अँखियाँ,
देखूँ, सुख-सागर मिल जाये,
मीठी बोली जिधर बुलाये,
समय-चक्र उस ओर बढ़ा दूँ,
नहीं समझ में आता, क्या दूँ ?... 
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इतिहास कभी नया बन जाता 

ये दर्द अगर दवा बन जाता 
तो तू मेरा ख़ुदा बन जाता | 

है मन्दिर-मस्जिद के झगड़े
काश ! हर-सू मैकदा बन जाता |... 
साहित्य सुरभि
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कायरता है पुरुष की 

समझे बहादुरी है , 

झुलसाई ज़िन्दगी ही तेजाब फैंककर ,
दिखलाई हिम्मतें ही तेजाब फैंककर .

अरमान जब हवस के पूरे न हो सके ,
तडपाई  दिल्लगी से तेजाब फैंककर...  
! कौशल !परShalini Kaushik
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झुलसाई ज़िन्दगी ही तेजाब फैंककर ,
दिखलाई हिम्मतें ही तेजाब फैंककर .

अरमान जब हवस के पूरे न हो सके ,

तडपाई  दिल्लगी से तेजाब फैंककर... 

भारतीय नारीपरShalini Kaushik 
 
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असम 

 
असम के बारे में न्यूज़ देखते देखते 
मन रुआँसा हो गया। 
कौन है यह बोडो ? 
क्यों चाहिए बोडो लैंड ? 
कितने नरसंहार और कब तक... 
Sunehra Ehsaas पर 
Nivedita Dinkar
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"दोहे-ब्लॉगिंग के पश्चात ही, 

फेसबूक को देख" 

फेसबूक पर आ गये, अब तो सारे मित्र।
हिन्दी ब्लॉगिंग की हुई, हालत बहुत विचित्र।१।

लगा रहे हैं सब यहाँ, अपने मन के चित्र।
अच्छे-अच्छों का हुआ, दूषित यहाँ चरित्र।२।... 

शनिवार, दिसंबर 27, 2014

"वास्तविक भारत 'रत्नों' की पहचान जरुरी" (चर्चा अंक-1840)

मित्रों!
शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के निम्न लिंक।
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मैरी क्रिसमस टू यू 

उलूक टाइम्स पर सुशील कुमार जोशी 
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फ़रेब ..... 

हर किसी को यहाँ मिलते हैं 
झूठे प्यार जिन्दगी के 
कुछ धोखे हैं 
कुछ मतलब हैं यहाँ 
सच्चे प्यार कहाँ मिलते हैं... 
आपका ब्लॉग पर इंतज़ार
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Deewan 46 Qataat 

Junbishen पर Munkir 
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१. मत छेड़ना इस राख को . . 
इसमें दबे  ज़ज्बात हैं . .
ज़ज्बात जाग गए गर तो , 
आग फिर लग जाएगी ।
२. उसके ख्यालों के क़र्ज़ मे दबे जाते हैं रोज़ाना,
 मोहब्बत! पूरे ब्याज़ के साथ उधार लेता है ।
 मेरी साँसें मेरी धड़कन सिर्फ अब मेरी न रही
     मोहब्बत! मिलकियत पर फ़क़त हिस्सेदार देता है...

कुमार शिवा "कुश" 

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मेरे सुपुत्र कुमार शिवा "कुश" की रचना 

नहाकर नज्म निकली है, बालकोनी में आज अपनी ।
मेरी कलम को मिली वज्म , बालकोनी में आज अपनी.. 
"लिंक-लिक्खाड़" पर रविकर
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मैं अकेला 

Akanksha पर Asha Saxena
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479. एक सांता आ जाता... 

मन चाहता  

भूले भटके

मेरे लिए
दोनों हाथों में तोहफ़े लिए
काश ! 
आज मेरे घर  
एक सांता 
आ जाता... 
डॉ. जेन्नी शबनम 
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ये दौरे-दहशत... 

न दिल रहेगा, न जां रहेगी 
रहेगी तो दास्तां रहेगी 
है वक़्त अब भी निबाह कर लें 
तो ज़िंदगी मेह्रबां रहेगी ... 
साझा आसमानपरSuresh Swapnil
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"नयासाल-एक दोहा और गीत" 

आयेगा इस वर्ष भी, नया-नवेला साल।
आशाएँ फिर से जगीं, सुधरेंगे अब हाल।।
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नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!
नव-वर्ष खड़ा द्वारे-द्वारे!
गधे चबाते हैं काजू,
महँगाई खाते बेचारे!!...

शुक्रवार, दिसंबर 26, 2014

‘जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि’ (चर्चा अंक-1839)

नमस्कार मित्रों, आज की चर्चा में आप सब का हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को क्रिस्मस पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ ! प्रस्तुत है आज के कुछ चुनिंदा लिंको की चर्चा। सर्वप्रथम द्विजेन्द्र 'द्विज' की एक सुन्दर ग़ज़ल को देखते हैं।
अँधेरे चंद लोगों का अगर मक़सद नहीं होते
यहाँ के लोग अपने आप में सरहद नहीं होते

न भूलो, तुमने ये ऊँचाईयाँ भी हमसे छीनी हैं
हमारा क़द नहीं लेते तो आदमक़द नहीं होते

फ़रेबों की कहानी है तुम्हारे मापदण्डों में
वगरना हर जगह बौने कभी अंगद नहीं होते

तुम्हारी यह इमारत रोक पाएगी हमें कब तक
वहाँ भी तो बसेरे हैं जहाँ गुम्बद नहीं होते

चले हैं घर से तो फिर धूप से भी जूझना होगा
सफ़र में हर जगह सुन्दर घने बरगद नही होते
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यशवंत यश 
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निवेदिता दिनकर 
कभी कभी ख़ुशी का कारण भी बनना, कितना सुखदायक होता है, न। आज फूटपाथ पर फेरी लगाकर बैठने वाले से जब मैंने ऊनी दस्ताने ख़रीदे या जब पैसे देने की जगह उस पतले ...
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साधना वैद
कैसा लगता है 
जब गहन भावना से परिपूर्ण 
सुदृढ़ नींव वाले प्रेम के अंतर महल को 
सागर का एक छोटा सा ज्वार का रेला 
पल भर में बहा ले जाता है । 
अनीता शर्मा 
प्रखर राष्ट्रवादी भारतमाता के सपूत पं. अटल बिहारी वाजपेयी जी का जन्म दिवस '25 दिसंबर' को 'सुशासन दिवस' के रूप में मनाने का निर्णय अति प्रशंसनिय है। आदरणीय अटल जी अनुशासन के परिचायक हैं।
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श्यामल सुमन
तेरा हो या मेरा हो
हृदय प्रेम का डेरा हो
खुद को पात्र बना ले यूँ
जैसे कुशल ठठेरा हो
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ऋता शेखर 'मधु'
मन के अपरिमित वितान पर
बिछे हुए हैं शब्द अथाह
कुछ कोमल कुछ तपे हुए
कुछ हल्के कुछ सधे हुए
अधर द्वार पर टिक जाते
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 (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)
मधुमक्खी है नाम तुम्हारा।
शहद बनाना काम तुम्हारा।।

छत्ते में मधु को रखती हो।
कभी नही इसको चखती हो।।

कंजूसी इतनी करती हो।
रोज तिजोरी को भरती हो।।
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रश्मि शर्मा
' मेरे घर के आंगन में आकर सुस्‍ताया था शाम सूरज
कहा-कल 'बड़ा दि‍न' है, बहुत देर तक चलना होगा ''
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जी.के. अवधिया

क्रिसमस (Christmas) ईसु मसीह के जन्म की याद में मनाया जाने वाला त्यौहार है।
बाइबिल में ईसु मसीह के जन्म के विशिष्ट दिन के बारे में कोई भी उल्लेख नहीं है।
क्रिसमस (Christmas) का त्यौहार प्रतिवर्ष 25 दिसम्बर को मनाया जाता है।
प्रबोध कुमार गोविल 
वो आ रहा है। हम खुश हों, कि वो आ रहा है, या हम उदासीन हो जाएँ, वो तो आ रहा है। क्योंकि वो हमारी नहीं, अपनी चाल से आता है, इसलिए हरबार आता है। इस बार भी आ रहा है।
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अपर्णा त्रिपाठी 
मनोहर भइया आज हमार जी मा बार बार रहि रहि के जाने काहे ई बिचार आ रहा है जइसन हम कउनो दगा करा है। हमका कुच्छौ समझ नही आ रहा, का सही है का गलत। अब आपै हमाका रास्ता दिखाओ।
प्रतिभा वर्मा 
माँ तेरे लिए वो ख़ुशी
कहाँ से लाऊँ
कहाँ से वो तेरा
सुकून लाऊँ
हाँ मैंने वादा किया था
बाबा से..
कि तुझे हर ख़ुशी दूँगी
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शिखा कौशिक 'नूतन '
ओमप्रकाश बाबू के घर में गर्मियों की छुट्टियाँ आते ही रौनक आ गयी .विवाहित बेटा सौरभ व् विवाहित बेटी विभा सपरिवार अपने पैतृक घर जो आ गए थे .ओमप्रकाश बाबू का पोता बंटी व् नाती चीकू हमउम्र थे और सारे दिन घर में धूम मचाते .एक दिन चीकू दौड़कर विभा के पास रोता हुआ पहुंचा और सुबकते हुए बोला -'' ''मम्मा चलो यहाँ से ......
विशाल चर्चित
काल के कपाल पर भी
लिख चुके हैं नाम आप,
इतिहास नहीं भूलेगा
कर चुके वो काम आप...
सत्ता में आते ही
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नीरज कुमार नीर 
सितारों से सजे बड़े बड़े होटलों में, 
नरम नरम गद्दियों वाली कुर्सियां,
 करीने से सजी मेजें, मद्धिम प्रकाश,
 अदब से खड़े वेटर, 
खूबसूरत मेन्यू पर दर्ज, 
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(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
मानवता के लिए,
सलीबों को जिसने अपनाया।
लोहे की कीलों से,
अपना तन जिसने बिंधवाया।
आओ उस यीशू को,
हम प्रणाम करें!
उस बलिदानी का,
आओ गुणगान करें!!
कालीपद "प्रसाद"
कुछ ही दिन पहले मैंने ब्लॉग में एक लेख पढ़ा l एक महिला ने नारी की दयनीय दशा का जिम्मेदार हिन्दू धर्म ग्रंथों को माना है l उन्होंने कहा कि पुरुषप्रधान समाज में पुरुषों द्वारा रचित धर्मग्रंथों के आधार पर पुरुषों के सुविधानुसार नारी को कभी पूजनीय कहा है, तो कभी बुद्धिहीन,पतित ,अपावित्र , ताड्निया कहा हैl
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सुशील बाकलीवाल 
डेंगू की बीमारी एक बार फिर देश भर में पैर पसार रही है । यह एक बड़ी समस्या के तौर पर उभर रही है, पूरे भारत में ये बड़ी तेजी से बढ़ती जा रही है
प्रवीण चोपड़ा 
आप ने नोटिस किया होगा जब रात के वक्त सोते समय हमें अपने अपने मोबाइल पर कोई मैसेज देखना या पढना पड़ता है, तो हमें कितना भारी लगता है यह सब। कम से कम मुझे तो ऐसा लगता है।