शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
--
--
--
शराफत की ठंड से सिहर गये हैं लोग
दुश्मनी की आंच से बिखर गये हैं लोग...
Jyoti Khare
--
--
--
--
--
--
*पद्मावती का बवाल इतना विकट होता जा रहा है कि यह कब और कैसे थमेगा समझ ही नहीं आ रहा है ! संजय लीला भंसाली जी की प्रवृत्ति तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर प्रस्तुत करने की है इसमें तो कोई शंका शुबहा है ही नहीं ! कलात्मक स्वतन्त्रता की आड़ लेकर वे मूल कथा की किस तरह गर्दन मरोड़ते हैं देवदास इसका ज्वलंत उदाहरण है...
--
--
--
श्रद्धेय नीरज से माफ़ी के साथ मानव होना पाप है गरीब होना अभिशाप बन्दर होना भाग्य है चिम्पेंजी होना सौभाग्य . एक टीवी के ऐड मैं चिम्पेंजी को च्यवनप्राश खाते दिखाया गया है .श्री राम दूरदर्शी थे उन्हें मालूम था एक बार फिर इन्सान बन्दर बनेगा बनेगा फिर चिम्पांजी वाही उसका लक्ष्य होगा कम से कम च्यवनप्राश तो खाने को मिलेगा मतलब इसे खाकर बन्दर बन जाओगे
--
--
--
--
--
--
फ़िरदौस इस वतन में फ़रहत नहीं रही ,
पुरवाई मुहब्बत की यहाँ अब नहीं रही .
नारी का जिस्म रौंद रहे जानवर बनकर ,
हैवानियत में कोई कमी अब नहीं रही .
--
--