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"चर्चा मंच" ललित शर्मा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
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गुरुवार, जनवरी 21, 2010

बी एस पाबला जी को कोसने वालों पर कृपा करो सरस्वती माँ ! "चर्चा मंच" (ललित शर्मा)

चर्चा मंच-अंक-३६
चर्चाकार-ललित शर्मा 
कल बसंत पंचमी का त्यौहार धूम धाम से मनाया गया. हमारे छत्तीसगढ़ में बसंत पंचमी से ही होली त्यौहार की शुरुवात होती है. इस दिन अंडा पेड (अरंड) काट कर होली दहन के स्थल पर पूजन करेक गाडा जाता है. इसके पश्चात् इस पेड के इर्द-गिर्द लकड़ियाँ और छेना(कंडे) इकट्ठे करके होली बनायीं जाती है. रात को नंगाडा लेकर ग्राम वासी सामूहिक रूप से फाग गाकर मनोरंजन करते हैं. नगाड़े की धुन और फाग गाने लय का मधुर ताल मेल झुमने को मजबूर कर देता है. मानो रोज ही होली मन रही हो. चलिए आज की चिटठा चर्चा पर चलते हैं और प्रारंभ करते हैं अलबेला खत्री जी के चिट्ठे से........

कल ब्लोगवाणी में मित्रों के आलेख और टिप्पणियां पढ़ते - पढ़ते बाबा समीरानंद के रास्ते, रचना की एक टिप्पणी के ज़रिये मैं"मसिजीवी" पर पहुँच गया जहाँ "चिट्ठाचर्चा" के स्वामित्व को लेकर हंगामा मचा था और लोग पानी पी पी कर बी एस पाबला को इसलिए कोस रहे थे क्योंकि उनके परिवारजन ने या उन्हींने 'चिट्ठाचर्चा' डोट कॉम का डोमेन अपने नाम लिया हुआ है ।लोगों का गुस्सा देखा और ये फ़ालतू सा तर्क भी देखा कि चूँकि चिट्ठाचर्चा पुराना है, पहले से चला आ रहा है इसलिए नैतिकता के नाते पाबला जी को ये नाम नहीं लेना चाहिए था । इसका मतलब ये हुआ कि हज़ारों साल पहले दशरथ ने अपने पुत्र का नाम राम रखा था तो अब किसी को भी नैतिकता के नाते वह नाम नहीं रखना चाहिए..........हा हा हा हा
देखिये दिल्ली की धुंध और दिल्ली की सर्दी------.आज सुबह जब हॉस्पिटल जाने के लिए तैयार हुआ और बाहर निकल कर बालकनी से देखा, तो देखकर दांग रह गया। साढ़े आठ बजे भी सामने वाला ब्लॉक नज़र नहीं आ रहा था। कुछ देर इंतज़ार कर जब सड़क पर पहुंचे , तो ऐसा नज़ारा था। 
 

** *सखि, वसंत आया . * *भरा हर्ष वन में मन, नवोत्कर्ष छाया .* *किसलय-वसना नव-वय-लतिका* *मिली मधुर प्रिय-उर तरु पतिका,* *मधुप-वृंद वंदी पिक़- स्वर नभ गहराया .* *लता-मुकुल -हार- गंध-भार भर * *बही पवन मन्द-मन्...
 
 
 
महावीर वचनामृत-1पिछले दिनों मै विनोबाजी का साहित्य पढ़ रहा था. संत विनोबा  महान क्रांतिकारी थे. सामाजिक जागरण की दिशा में उन्होंने गाँधी जी के काम को आगे बढ़ाने की कोशिश की. भूदान आन्दोलन, दस्यु-समर्पण जैसे अभिनव काम उन्होंने किये. गो हत्या पर रोक लगाने की मांग लेकर वे आमरण अनशन पर बैठ गए थे. (उनका अनशन चालाकी के साथ तुडवा दिया गया, लेकिन कुछ दिन बाद उनकी मृत्यु हो गयी.) विनोबा भावे ने सामाजिक काम ही नहीं किये, समाज को नैतिक बनाने वाले महान चिंतन भी दिया. उनका बीस खंडो में प्रकाशित साहित्य पढ़ कर पता चलता है कि विनोबा जी ने बौद्धिक चेतना जगाने के लिए इतना श्रेष्ठ लेखन-चिंतन किया


 
कुछ ज्यादा समय नहीं हुआ है जब हर देशवासी प्रत्येक ओलिम्पिकोत्सव पर निश्चिंत रहता था कम से कम एक स्वर्ण पदक की आवक को लेकर। फिर उसे नज़र लग गयी जमाने की। रही सही कसर पूरी कर दी एक इंसान के अक्खड़पन ने। कैसे क्या हुआ था उसे सभी जानते हैं।लगता है इतिहास अपने को फिर दोहरवा रहा है। इस बार निशाने पर वह पात्र है जिसने अपने बल-बूते पर स्वर्ण पदक हासिल किया है। जैसी की खबरें निकल कर आ रहीं हैं कि अहमों के टकराव से फिर एक खेल को नुक्सान होने जा रहा है। इस बार निशानेबाजी के खेल पर बुरी नज़र का निशाना है। हर बार की तरह बहती गंगा में हाथ धोने वाले लोगों की मंशाओं पर ओलम्पिक स्वर्ण पदक विजेता बिंद्रा ने तब पानी फेर दिया जब अपने स्वागत समारोह में उसने नेशनल राइफल एसोसिएशन द्वारा क्रेडिट लेने

कामदेव का पूजन होता था वसन्तोत्सव के दिन आज हम वसन्त ऋतु में वसन्त पंचमी और होली त्यौहार मनाते हैं किन्तु प्राचीन काल में वसन्तोत्सव मनाया जाता था। वसन्तोत्सव, जिसे कि मदनोत्सव के नाम से भी जाना जाता है, मनाने की परम्परा हमारे देश में अत्यन्त प्राचीनकाल से ही रही है। संस्कृत के प्रायः समस्त काव्यों, नाटकों, कथाओं में कहीं न कहीं पर वसन्त ऋतु और वसन्तोत्सव या मदनोत्सव का वर्णन अवश्य ही आता है। वसन्त को ऋतुराज माना गया है क्योंकि यह मानव की मादकता एवं कोमल भावनाओं को उद्दीप्त करता है। वसन्त पंचमी से लेकर रंग पंचमी तक का समय वसन्त की मादकता, होली की मस्ती और फाग का संगीत से सभी के मन को मचलाते रहता है। टेसू और सेमल के रक्तवर्ण पुष्प, जिन्हें कि वसन्त के श्रृंगार की उपमा दी गई है, सभी के मन को मादकता से परिपूर्ण कर देते हैं। शायद यही कारण है वसन्तोत्सव मनाने की।

उमड़त घुमड़त विचार -मित्रों ब्लागर बैठकी भिलाई की कुछ यादों को तुकबंदी के माध्यम से आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ. संजीवन ललित तव प्रेरणा लिखे पोस्ट उनचास उर्जा बिच बिच भरत रह्यो भाई ललित शरद कोकास ब्लॉगर बैठकी बुलाई क..

संजीव तिवारी  जूनियर कौंसिल पर
छत्तीसगढ उच्च न्यायालय ने आज बहुचर्चित रामअवतार हत्याकांड में निचली अदालत के फैसले के खिलाफ् दायर सतीश जग्गी की पुनरीक्षण याचिका विचारार्थ स्वीकार करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी के...

 

खुशदीप सहगल देशनामा  पर
जननायक कौन होता है...वो जो राजनीति की गोटियों को साधता हुआ सत्ता के शीर्ष पर पहुंच जन-जन का स्वयंभू भाग्यविधाता बन जाता है...या जननायक वो होता है जो सत्ता के लोभ को तज कर जन-जन के दिलों पर राज करता है...सत...



बङगङां बङगङां बङगङां -2महाराणा ! मेवाड़ के सरदार आए है , आपके चरणों का कुशल पूछने |''उन्हें कह दो लौट कर चितौड़ चले जाएँ और कुशल पूछें अपनी आयु और परिवार का | मुझपर सारंगदेव का अहसान था | पृथ्वीराज और जयमाल ने मुझ पर आक्रमण किया था तब उस स्वामिभक्त साथी ने उसके वार को अपने ही सिर पर ले लिया | अपने पुत्र लिम्बा को उसने मेरे लिए खोया | शरीर पर ३५ घाव लगे और अंत में बाठरडे देवी मंदिर में कपट से पृथ्वीराज के हाथों मारा गया | मेरी स्वामिभक्ति उसे कितनी महंगी पड़ी , पर मै अभागा तो अपने हित चिंतकों के अहसान भी नहीं उतार सका | इन कायर सदारों ने मेरी आयु पर डाका डाल दिया | काश ! मै स्वामिभक्त सारंगदेव की समाधी पर दो आंसू ही बहा सकता ! जाओ सरदारों ! मेवाड़ के मगरों पर खरगोशों की शिकार खेलो ! देखो , बचो , बचो ! 


ताऊ रामपुरिया द्वारा ताऊजी डॉट कॉम - पर
नमस्कार बहनों और भाईयो. रामप्यारी पहेली कमेटी की तरफ़ से मैं समीरलाल "समीर" यानि कि "उडनतश्तरी" फ़र्रुखाबादी सवाल का जवाब देने के लिये आचार्यश्री यानि कि हीरामन "अंकशाश्त्री" जी को निमंत्रित करता हूं कि वो...

नामुराद वो हसीं पल !

जिस्म तो पूरा ही निर्दोष था पर,
अनाडी इन ओंठो का है दोष सारा !
उनकी गली से हम कई बार गुजरे,
पत्थर किसी ने इसी बार मारा !!

ठिठुरती ठण्ड में, कमबख्त ये ओंठ ,
सीटी बजाने की जिद पर अड़े थे !
नहीं था हमें ज़रा भी अहसास कि वो,
भाई के संग बरामदे में खड़े थे !!

खुशियों की होम डिलीवरीजी हां मैं समझ रहा हूं कि आप लोग सोच रहे होंगे कि आज तो पिज्जा की होम डिलिवरी का जमाना है और वो भी बाकायदा पेमेंट करके मिलती है ।और यदि मुफ़्त में किसी चीज़ की होम डिलिवरी होती है तो वो है तनाव /दुख / गम और इनके ही भाई बंधु .........॥ तो ऐसे में यदि

कांग्रेसी ही कांग्रेस को हराते हैं, यह तो राहुल गांधी अभी-अभी रायपुर में हुआ हैकांग्रेस के कुछ पार्षद महापौर परिषद में न लिए जाने से विचलित हो गए हैं। वे पार्टी छोडऩे तक की धमकी दे रहे हैं। उनका कहना है कि वे वरिष्ठï पार्षद हैं और उनका हक पहले बनता है, महापौर परिषद में सम्मिलित होने का। सबसे ज्यादा आक्रोश तो मनोज कंदोई को महापौर

वेटिंग लिस्ट वाले बैठे हैं ,तत्काल सेवा वाले चले जा रहे ....बनारस का कल का तापक्रम ३.५  डिग्री तक ढुलक आया  ,इस हाड कपाऊँ ठण्ड में ३५ लोग अकाल मृत्य का वरण कर लिए . मित्रगण मुझे बसंत उत्सव पर आमंत्रित कर रहे हैं .उन्हें कह दिया भाई अभी तो ठण्ड के मारे बुरा हाल है कुछ राहत मिलेगी तो बसंत सेना

आपका जन्‍म 1954 या 1955 में फरवरी से अगस्‍त के मध्‍य तो नहीं हुआ था ??अपने पिछले आलेख ' कहीं आपका जन्‍म जनवरी - फरवरी 1981 में तो नहीं हुआ था ??' में मैने लिखा है कि किस तरह मई 1998 से मई 2000 के मध्‍य मेरे पास आनेवाले परेशान किशोरों की भीड ने मुझे उस बात की पुन: याद दिला दी, जो दस वर्ष पूर्व अपने अध्‍ययन के दौरान मेरे मन

चिट्ठी चर्चा : बसंत पंचमी पर्व की शुभकामना और बधाई के साथ दो सौ वीं पोस्ट " समयचक्र " परआज मै महेन्द्र मिश्र आपका सादर अभिनन्दन करते हुए दो सौ वीं पोस्ट के साथ चिट्ठी प्रस्तुत कर रहा हूँ . आज बसंत पंचमी का पर्व है .बसंत का बर्फीली हवाओं से स्वागत कर रहा है आज का दिन . चहुओर कड़ाके की ठण्ड पड़ रही है सामान्य जीवन अस्त व्यस्त हो गया है . उत्तर

आज वसंत पंचमी है !या कुन्देन्दु तुषारहार धवला, या शुभ्र वस्त्रावृता !या वीणावरदंडमंडितकरा, या श्वेत पद्मासना !!या ब्रह्मास्च्युत शंकर प्रभृतिर्भिरदेवाः सदाबंदिताः,सा मां पातु सरस्वती देवी, या निशेष जाड़यापहा !!शिशिर की शीत निशा से अवगुंठित मन-प्राण को नवजीवन का सन्देश

वो फरिश्ते की तरह ज़िन्दगी में आया है......ज़िन्दगी को 'जंग' भी कहा गया है और 'जुआ' भी, लेकिन कभी-कभी ऐसे हालात आ जाते हैं कि सब कुछ आपके खिलाफ़ होता चला जाता है। आप लाख सही हों, लाख प्रयत्न करें, पर स्थितियाँ विपरीत होती चली जाती हैं। ऐसे में आप अपने आपको एक भयानक तूफान में खड़ा पाते हैं। आप लाख

वसंत.. वसंत.. कहाँ हो तुम डॉ महेश परिमल अभी तो पूरे देश में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। लगता है इस बार वसंत जल्‍दी आ गया। बस कुछ ही दिनों की बात है, जब हमें लगेगा कि हवाओं में एक अजीब सी मादकता है। मन में उमंगें कुलांचे मार रही है। कुछ नया करने की इच्‍छा हो रही है। तब समझो, हमारे

मन की गलियाँमन कीविहंगम गलियाँऔर उसकेहर मोड़ परहर कोने मेंइक अहसासतेरे होने काबस और क्या चाहिएजीने के लिएवहाँ हमतुझसे बतियाते हैंऔर चले जाते हैंफिर उन्ही गलियों केकिसी मोड़ परऔर खोजते हैंउसमें खुद कोना तुझसे बिछड़ते हैंना खुद से मिल पाते हैंऔर मन की गलियों कीइन    

नर्मदा जयंती की पूर्व संकल्प लीजिये संग-ए-मरमरी सफ़ेद चट्टानों  के बीच होकर  प्रवाहित  माँ नर्मदा  को सादर प्रणाम करते हुए आपको याद दिला दूं की नर्मदा जयंती यानी 22 जनवरी 2010 हम अटूट संकल्प लें लें कि इसके घाटों को हम स्वच्छ रखेंगें. नदियाँ हमारी सांस्कृतिक एवं वैभव  

अब आज की चर्चा को देते हैं विराम-आप सभी को ललित शर्मा का राम-राम 

 

सोमवार, जनवरी 18, 2010

यदि यह सच है तो…..kaun kahta hai ki सार्वजनिक शौचालय हैं उनका ब्लॉग- (चर्चा मंच) ललित शर्मा

चर्चा मंच-अंक-33

चर्चाकार-ललित शर्मा

चिट्ठाकार राजकुमार ग्वालानी जी के लेखों को राजतंत्र पर पढ रहा था, कुछ समय मिला इनके लेखन को जानने समझने का। वैसे मै इन्हे एक खेल पत्रकार के रुप मे ही देखता था। इनका एक ब्लाग खेलगढ भी है जो खेल को ही समर्पित है।लेकिन राजतंत्र पढने पर पता चला कि सामाजिक सरोकार रख्नने वाले विषयों पर भी प्रखरता के साथ लिखते हैं। इनकी लेखनी समस्याओं की जड़ पर सीधा प्रहार करती है।इनका लेखन प्रशंसनीय है। स्वभाव से हंसमुख और मित्र सहयोगी अब ब्लागरी के सभी पहलुओं पर अपनी पकड़ रखते है। कल की इनकी एक पोस्ट ने मेरा ध्यान आकर्षित किया जिसमें इन्होने एक वर्ष मे एक हजार पोस्ट लिखने चर्चा की है।इनकी पोस्ट प्रतिदिन अपनी उपस्थिति ब्लाग जगत मे दर्ज कराती है ऐसे सक्रीय चिट्ठाकार का हम चर्चा मच पर स्वागत करते है और इनकी प्रथम और अद्यतन पोस्ट पर दृष्टिपात करते है।

एक परिचय ब्लागर प्रोफ़ाईल पर

राजकुमार ग्वालानीRajkumr Prins

मेरे बारे में

पत्रकारिता सॆ करीब दो दशक‌ से जुड़ा हूं। वैसे मैंने लंबे समय तक‌ देश की क‌ई पत्र-पत्रिकाऒ
में हर विषय में लेख लिखे हैं। मैंने दो बार उत्तर भारत की सायक‌ल यात्रा भी की है। रायपुर कॆ
प्रतिष्ठित समाचार पत्र देशबन्धु में 15 साल तक काम किया है। वर्तमान में मैं रायपुर कॆ सबसे
प्रतिष्ठित समाचार पत्र में एक पत्रकार कॆ रूप में काम क‌र रहा हूं।
इनकी प्रथम पोस्ट-दिनांक-बुधवार 25 फ़रवरी 2009 को ब्लाग जगत मे आई-आप अवलोकन किजिए

Wednesday, February 25, 2009

Rajim Khumbh

कुम्भ की मेजबानी में भी छत्तीसगढ़ नंबर वन

छत्तीसगढ़ का नाम आज राजिम कुम्भ की मेजबानी में नंबर वन पर आ गया है। छत्तीसगढ़ देश का ऐसा एक मात्र राज्य है जहां पर हर साल कुम्भ का आयोजन होता है। अब यह बात अलग है कि राजिम कुम्भ को कुम्भ कहने से कुछ लोगों को आपत्ति होती है, लेकिन देश के महान साधु-संतों ने जरूर इसको देश के पांचवें कुम्भ का नाम दे दिया है। वैसे राजिम को कुम्भ कहने से किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। अगर देश में एक और कुम्भ प्रारंभ हुआ है और वह भी एक ऐसा कुम्भ जहां पर हर साल देश भर के साधु-संतों का जमावड़ा लगता है तो इसमें बुरा क्या है। वैसे राजिम को कुम्भ का दर्जा दिलाने में सबसे बड़ा हाथ प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी की सरकार और उसके मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के साथ पयर्टन- संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल का है। आज देश का ऐसा कोई साधु-संत नहीं होगा जो इन दोनों को नहीं जानता होगा। राजिम की नगरी पुराने जमाने से साधु-संतों की नगर रही है। यहां पर लोमष ऋषि का आश्रम है। इसी आश्रम में आकर देश के नागा साधुओं को जो सकुन और चैन मिलता है,
इनकी अद्यतन पोस्ट 17जनवरी 2010 की है।

Sunday, January 17, 2010

एक साल में एक हजार पोस्ट किसके खाते में है
अब जबकि हमारे ब्लाग राजतंत्र और खेलगढ़ को मिलाकर हमारी एक हजार पोस्ट का आंकड़ा पूरा होने वाला है, इसी के साथ ब्लाग जगत में हमें कदम रखे अगले माह एक साल हो जाएगा, तो हमारे मन में एक विचार आया कि क्यों न जाना जाए अपने ब्लागर मित्रों में किनके खाते में एक साल में एक हजार पोस्ट लिखने का रिकॉर्ड है।
अगर आप जानते हों कि और किसी ने भी ऐसा रिकॉर्ड कायम किया है तो जरूर बताएं।


ajay-kumar-jha
इस चर्चा के पश्चात एक आवश्यक चर्चा भी कर ली जाए-अजय कुमार झा जी का प्रश्न है कितो आखिर क्या हो पैमाना चिट्ठा चर्चा के लिए ??? यह प्रश्न बहुत जरुरी है और अधिक जरुरी है इसका उत्तर पाना। पढिए क्या कह रहे है।
लेकिन जब बहस चल ही पडी है तो फ़िर आप सभी ब्लोग्गर्स ये भी तय कीजीए न कि आखिर क्या हो फ़िर इस चिट्ठा चर्चा का पैमाना ??। आखिर वो कौन सी बातें हैं जो कि चिट्ठा चर्चा कार को अपने जेहन में रखनी चाहिए ??
क्या उन पोस्टों को छोड दिया जाए जो उस दिन बहुत अच्छी लिखी गई हैं , तर्क ये दिया जाता है उन पोस्टों तो स्वाभाविक रूप से पहले ही सब पढ चुके होते हैं फ़िर चर्चा में उनकी लिंक लगाने का क्या फ़ायदा ??? तो क्या उन्हें इस बात के लिए ये दंड दिया जाए कि उन्होंने उस दिन अच्छा लिखी और जब सबने वैसे ही पढ लिया तो फ़िर चर्चा क्यों हो भाई ???? ये ठीक रहेगा न ??
या फ़िर ऐसा किया जाए कि सिर्फ़ नए ब्लोग्स को , या बिल्कुल भी पढे नहीं गए ब्लोग्स को , अनछुए ब्लोग्स को उठाया जाए ,और उनकी लिंक लगा के पढाया जाए । अच्छी बात है ये तो होना ही चाहिए , बस अपने दिल पर हाथ रख के एक बात बताईये , हम में से कितने ब्लोग्गर हैं जो नियमित रूप से अपने बीच आ रहे नए ब्लोग्गर मित्रों को पढ के टीपते हैं , तो फ़िर सारी जिम्मेदारी चर्चाकार पर ही क्यों ??

rajivvvvvv राजीव तनेजा जी एक महत्वपुर्ण अभियान पर लगे हुए है। वे ब्लाग जगत के चिट्ठाकारों को चित्र पहेलियों के माध्यम से ब्लाग जगत से परिचित करवा रहे है। एक बानगी चेहरा छुपा दिया है हमने नकाब में उन्होने किनके चेहरे छिपाए है। लिजिए मजा और बुझिए चित्र पहेली।hrgherhger r3wtwe3r3
“विदेश-यात्रा” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)Rupchand
आज अचानक
बन गया एक संयोग
घर में आ गये
कुछ परिचित लोग
विदेश-यात्रा का
बन गया कार्यक्रम
कार में बैठ गये
उनके साथ हम
कुछ रुपये
जेब में लिए डाल
आनन-फानन में
पहुँच गये नेपाल
सामने दिखाई दिया
एक शहर
नाम था उसका
महेन्द्रनगर .....

अब चलते है चर्चा एक लाईना पर (सिर्फ़ ब्लाग लिंक)

मायावती द्वारा जनता के पैसे पर जन्म दिन मनाया गया
क्या आप $72 में कोचीन शहर खरीदना चाहेंगे ?
इमरोज़ का एक ख़त हीर के लिए.......... "

kaun kahta hai ki सार्वजनिक शौचालय हैं उनका ब्लॉग

आइये निवेदन करें गूगल वासियों से, की भई, कम से कम भारत में तो इसे बंद मत करिए।


वकील प्रशांत भूषण की आईपीएस एशोसियेशन द्वारा निंदा
जब इतिहास जीवित हो उठा

तू निश्चिन्त रह, तू मेरा हिन्दुस्तान है !

आइए जानते हैं फलित ज्योतिष आखिर क्‍या है? एक सांकेतिक विज्ञान या मात्र अंधविश्वास!

दिमागी कसरत - 49 : विजेता : श्री मुरारी पारीक
“वो, जो प्रधानमंत्री न बन सका….” (चर्चा हिन्दी चिट्ठों की)
ज़रा सोचिये ----------ऐसा आखिर कब तक ?

और ख़ाक में पड़ा है सो है वो भी आदमी

ब्लॉगर बिरादरी !!! मुझे शेरसिंह से बचाओ...खुशदीप

यदि यह सच है तो .............................
ताउजी पर कुछ चुटकुले और कुछ ठक ठक करती लखटकिया लाइने ----

आज का कार्टुन

किसके कंट्रोल में है झारखण्ड ? (कार्टून धमाका)


अब देते है चर्चा को विराम! सभी भाई बहनों को ललित शर्मा का राम-राम

गुरुवार, जनवरी 14, 2010

एक खुल्ला सांड घूम रहा है ब्लॉग नगरिया में. "चर्चा मंच" (ललित शर्मा)

चर्चा मंच-अंक-29
चर्चाकार-ललित शर्मा
आज मकर संक्रांति का पर्व है. जो प्रत्येक वर्ष १४ जनवरी को पुरे देश में मनाया जाता है. वैविध्य की रंग-बिरंगी छटा देखने को मिलती है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन से सूर्य की गति प्रति दिन तिल के समान बढ़ती है.चर्चा मंच भी समय के साथ आगे बढ़ते जा रहा है. चलिए अब हम भी क्यों रुके. चलते हैं चिटठा चर्चा पर....... आज ताऊ की चौपाल में भी लोहड़ी का त्यौहार बड़ी धूम धाम से मनाया गया. बाकायदा फोटो सेशन भी हुआ उसमे हाजिर खिलाडियों का आगी तपते हुए फोटो भी छापा गया. आप भी आनंद लीजिये और लोहड़ी तथा मकर संक्रांति मनाईये
अब अगली पोस्ट पर चलते हैं. ब्लॉग जगत के युवा लेखक मिथलेश दुबे जी अपने लेखन से सबको प्रभावित करते हैं. गंभीर से गंभीर विषयों पर बेबाक राय रखते हैं. इनकी प्रखरता और मुखरता काबिल-ऍ-तारीफ़ है. एक दिन अपने लेखन का लोहा मनवा कर ही रहेंगे.ये आधुनिक जीवनशैली से अभिशप्त हमारी भावी युवा पीढ़ी को आगे ले जाना चाहते हैं.हमने इनकी एक पोस्ट पढ़ी आप भी पढ़िए.
इन्ही युवाओं में से हैं भाई पदम् सिंग जी, जिनका ब्लॉग पद्मावलि है. ये भी पुरे समर्पण के साथ लेखन कार्य में लगे हैं.इनकी रचनाएँ भी पाठकों का अपनी ओर ध्यान खींचती हैं. आज इनके द्वारा लिखा गया कमेंटर बाबा लेख इनकी ब्लॉग जगत के प्रति एक नयी सोच को प्रदर्शित करता है. मैं इन्हें कुछ दिनों से पढ़ रहा हूँ आप भी अवलोकन करें-
नन्हा मन पर सीमा सचदेव जी बता रही हैं मकर संक्रान्ति के महत्व को-

मकर संक्रान्ति नमस्कार बच्चो ,

कल मैं आपको लेकर गई थी पंजाब जहां लोहडी का त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया जा रहा था और हम सबने कल खूब लड्डु और रेवडियां भी खाए थे । अब बताओ भला आज कौन सा दिन है ....? बिलकुल सही आज है मकर संक्रान्ति , इसे माघ पूर्णिमा भी कहा जाता है । आज के दिन भी घरों में कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं , मुख्य रूप से खिचडी । तो खिचडी हम बाद में खाएंगे पहले यह तो जान लें कि यह त्योहार मनाया क्यों जाता है । इसके साथ भी अनेक कथाएं जुडी हैं । जैसे .......

१) इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने उसके घर जाते हैं । शनि क्योंकि मकर राशि के स्वामी हैं तो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर इसे मकर संक्रान्ति कहा जाता है । इसे सूर्य वर्ष का प्रारम्भ माना जाता है ।....
ब्लॉग नगरिया में मैंने टहलते-टहलते देखा की एक खुल्ला सांड भी आजादी विचारों की लिए घूम रहा है और दुवारे-दुवारे जाकर घास चर रहा है. मैंने पूछा की भाई कौन गांव के सांड हो जो यहाँ खुल्ला घूम रहे हो. तो उनका कहना था कि मैं देश भक्त सांड हूँ और मुझे सभी पार्टियों का समर्थन प्राप्त है इसलिए आपको मेरी चिंता करने की आवश्यकता नहीं है. एक समस्या अवश्य है कई दिनों से टिप्पणियों के अभाव में सेहत ठीक नहीं रहती है. कुछ टिप्पणी विटामिन दिलवा दें तो ठीक हो जायेगा. आप भी एक बार सांड शाला हो आईये.
संगीता पूरी जी ने एक ताजा ताजा भविष्यवाणी की थी. उन्होंने कहा था की भूकंप के योग बन रहे हैं और बीती रात भूकंप आ गया उनकी भविष्यवाणी सच निकली अब वो कह रही है कि काश मेरी भविष्‍यवाणी सही नहीं हुई होती तो फिर काफी सवाल खड़े हो जाते भविष्यवाणी को लेकर. चलिए संगीता जी आपके द्वारा फलित किया हुआ ज्योतिष सच साबित हुआ. हमारे एक मित्र एम्.बी.बी.एस डाक्टर हैं जो मरीज की शारीरिक जाँच से पहले उसके ग्रहों की जाँच करते हैं और मरीज का इलाज एलोपैथिक एवं ग्रह नक्षत्र देखकर करते हैं. इससे मरीजों को इलाज में आशातीत सफलता मिल रही है. उनका एक ब्लॉग भी है.
एक बार उसने कहा था कि किसी के उकसावे में आकर परबुधिया अपना ही नुकसान करवा लेता है. वे मौज लेने के लिये अकसर ये कार्य करते रहते है, सो आ गया उनके उकसावे मे इसलिए किसी के बहकावे में आना ठीक नहीं है. जिस काम में आप लगे हो वही करो और शांति से रहो इसके लिए मुन्ना भाई ने कहा था जूस पिवानु छे ,ढोकला खम्मन खावाणु छे पछे मज्जा नी लाइफ छे. तो तमे मोटा भाई धियान राखजो.

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर रायटोक्रेट कुमारेन्द्र राजनीति के क्षरण पर चिंता व्यक्त कर रहे है.आज की राजनीति कहाँ जा रही है?पिछले कुछ वर्षों से राजनीति में जिस तरह का क्षरण देखने को मिल रहा है वह चिन्ता का विषय होना चाहिए। कहने को तो चिन्ता का विषय है किन्तु चिन्ता किसी को नहीं है। हम सभी आपस में मिल कर बैठते हैं, चर्चा करते ह.यदि राजनीतिक परिदृश्य पर गौर किया जाये तो धन बल, सत्ता बल, बाहु बल का खुल कर प्रयोग होने लगा है। इस अतिशयता के पीछे के कारणों को चर्चा का बिन्दु तो बनाया जाता है किन्तु उसके समाधान के तरीकों को खोजने का प्रयास नहीं होता है।..
अजय कुमार झा जी अपने लेखन से प्रभावित करते हैं. गंभीर से गंभीर भात अपने अंदाज में सरलता से रखकर पाठकों को मोह लाते हैं. इन्होने ब्लोग चोरों के हक में एक आंदोलनका आगाज किया है.आखिर नए साल में शास्त्री जी ने एक ब्लोग चोर को पकड के, उदघाटन कर ही दिया , वैसे भी जाने कितने दिन बीत गए थे कोई भी चोर पकडे हुए । चलिए अच्छा हुआ जो साल के पहले ही पखवाडे में हमने सफ़लता हासिल कर ली । और जब से उन्हें पकडा गया है तब से अब तक जाने कितनी पोस्टें और जाने कितनी टिप्पणियां उनको समर्पित करके लिखी जा चुकी हैं और अभी तो पिक्चर बांकी है मेरे दोस्त । ब्लोग पोस्ट चोरों की तरफ़ से एक सादर निवेदन टाईप की रिक्वेस्ट आई ,कहा गया था कि सर जी इतने सारे जने मिल के हमारा सामूहिक चीरहरण जैसी सेवा कर रहे हैं
हरिद्वार में आज से कुम्भ पर्व प्रारंभ हो गया. आज प्रथम स्नान है.कुंभ स्नान कार्यक्रम लगातार चलता rahega. करोड़ों श्रद्धालु लाभ उठाएंगे. आशा तो है हमारे ब्लोगर परिवार के कोई ना कोई सदस्य वहां जा कर ब्लागियंगे और हमें घर बैठे हरिद्वार कुम्भ के दर्शन का लाभ कराएँगे. हरिद्वार में कड़ाके की ठण्ड में सुबह उठे कर ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान का मजा ही कुछ और है. लेकिन ठण्ड में पहली डुबकी मारने में ही समस्या आती है उसके बाद तो फिर डुबकियों पे डुबकियाँ मारे जाओ.

दिनेश राय द्विवेदी जी राजस्थानी बोली हाडौती में बहुत प्रभावशाली लेखन करते हैं भाषा के प्रबाव को शब्दों में ज्यों का त्यों उकेर देते हैं,ऐसा लगाता है जैसे कोई सामने खड़ा होकर हाडौती में बात कर रहा है. मैंने उनसे एक दिन फोन करके विशेष निवेदन किया था कि एक दिन आप पुन: हाडौती में लिखें मुझे बड़ा आनंद आएगा.बिलाग जगत कै ताईँ बड़ी सँकराँत को राम राम! करते हुए कहा है कि ब्लागीरी की सुरूआत सूँ ई, एक नियम आपूँ आप बणग्यो। कै म्हूँ ईं दन अनवरत की पोस्ट म्हारी बोली हाड़ौती मैं ही मांडूँ छूँ। या बड़ी सँकरात अश्याँ छे के ईं दन सूँ सूरजनाराण उत्तरायण प्रवेश मानाँ छाँ अर सर्दी कम होबो सुरू हो जावे छे। हाड़ौती म्हाइने सँकरात कश्याँ मनाई जावे छे या जाणबा कारणे आप सब अनवरत की 14.01.2008 अर 14.01.2009 की पोस्टाँ पढ़ो तो घणी आछी।
ब्लॉग जगत बिग बी समीर लाल जी उड़न तश्तरी पर आते हैं तथा अपनी बात दार्शनिक अंदाज में कहते हैं. इनका लेखन बहुत ही प्रभावशाली है. वो कह रहे हैं दूर हुए मुझसे वो मेरे अपने थे.. क्यूँ मैं भीड़ में रुक कर नहीं देखता कि जिनके साथ मैने सफर शुरु किया था, जो मेरे साथ मेरी जिन्दगी के कारवां से जुड़े थे, वो कहाँ हैं, किस हाल में हैं, क्या सोचते हैं. मेरे लिए, मेरे साथ भीड़ कितनी है जितना ही महत्वपूर्ण भीड़ किनकी है, जानना भी होना चाहिये.आज फिर उड़न तश्तरी आई है आप भी पढ़िए.
डॉ. रूपचंद शास्त्री जी ने तो कल कमाल ही कर दिया साहित्य चोर मदन लाल पारीख को पकड़ कर और उसके घर तक जा पहुंचे. फोन पर भी चोर से बात कर ली इन्हें सैल्यूट करते हैं. शास्त्री जी का गजल कहने का अंदाज निराला है. जिसमे बीते वर्षों की साधना स्पस्ट झलकती है.“गजल के उदगार ढो रहे हैं। लिखा है.हमने पढ़ लिया है आप भी पढ़िए.बन कर सजग सिपाही, हम दे रहे हैं पहरे, हम मेट देंगे अपने, पर्वत के दाग गहरे, उनको जगा रहे हैं, जो हार सो रहे हैं। हम गीत और गजल के उदगार ढो रहे हैं।।

चलते चलते
अजय कुमार झा जी केआपकी टिप्पी पर हमारा टिप्पा (टिप्पणी तडका ) का आनंद लीजिये बिलकुल झकास अंदाज में और राज भाटिया जी ब्लांगिंग के संग संग आप रेडियो सुने, या टी वी देखे कह रहे हैं.मुफ्त में ब्लोगिंग के साथ आनद लीजिये.


रात को सर्वर डाउन होने की वजह से चर्चा में विलम्ब हो गया. अभी तक अपनी पोस्ट भी नहीं लगा पाया हूँ. अब मैं ललित शर्मा आपसे विदा लेता हूं और चर्चा को देता हूँ विराम-सभी को संक्रांति और कुम्भ पर्व की राम-राम