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Thursday, January 14, 2010

एक खुल्ला सांड घूम रहा है ब्लॉग नगरिया में. "चर्चा मंच" (ललित शर्मा)

चर्चा मंच-अंक-29
चर्चाकार-ललित शर्मा
आज मकर संक्रांति का पर्व है. जो प्रत्येक वर्ष १४ जनवरी को पुरे देश में मनाया जाता है. वैविध्य की रंग-बिरंगी छटा देखने को मिलती है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन से सूर्य की गति प्रति दिन तिल के समान बढ़ती है.चर्चा मंच भी समय के साथ आगे बढ़ते जा रहा है. चलिए अब हम भी क्यों रुके. चलते हैं चिटठा चर्चा पर....... आज ताऊ की चौपाल में भी लोहड़ी का त्यौहार बड़ी धूम धाम से मनाया गया. बाकायदा फोटो सेशन भी हुआ उसमे हाजिर खिलाडियों का आगी तपते हुए फोटो भी छापा गया. आप भी आनंद लीजिये और लोहड़ी तथा मकर संक्रांति मनाईये
अब अगली पोस्ट पर चलते हैं. ब्लॉग जगत के युवा लेखक मिथलेश दुबे जी अपने लेखन से सबको प्रभावित करते हैं. गंभीर से गंभीर विषयों पर बेबाक राय रखते हैं. इनकी प्रखरता और मुखरता काबिल-ऍ-तारीफ़ है. एक दिन अपने लेखन का लोहा मनवा कर ही रहेंगे.ये आधुनिक जीवनशैली से अभिशप्त हमारी भावी युवा पीढ़ी को आगे ले जाना चाहते हैं.हमने इनकी एक पोस्ट पढ़ी आप भी पढ़िए.
इन्ही युवाओं में से हैं भाई पदम् सिंग जी, जिनका ब्लॉग पद्मावलि है. ये भी पुरे समर्पण के साथ लेखन कार्य में लगे हैं.इनकी रचनाएँ भी पाठकों का अपनी ओर ध्यान खींचती हैं. आज इनके द्वारा लिखा गया कमेंटर बाबा लेख इनकी ब्लॉग जगत के प्रति एक नयी सोच को प्रदर्शित करता है. मैं इन्हें कुछ दिनों से पढ़ रहा हूँ आप भी अवलोकन करें-
नन्हा मन पर सीमा सचदेव जी बता रही हैं मकर संक्रान्ति के महत्व को-

मकर संक्रान्ति नमस्कार बच्चो ,

कल मैं आपको लेकर गई थी पंजाब जहां लोहडी का त्योहार बहुत धूमधाम से मनाया जा रहा था और हम सबने कल खूब लड्डु और रेवडियां भी खाए थे । अब बताओ भला आज कौन सा दिन है ....? बिलकुल सही आज है मकर संक्रान्ति , इसे माघ पूर्णिमा भी कहा जाता है । आज के दिन भी घरों में कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं , मुख्य रूप से खिचडी । तो खिचडी हम बाद में खाएंगे पहले यह तो जान लें कि यह त्योहार मनाया क्यों जाता है । इसके साथ भी अनेक कथाएं जुडी हैं । जैसे .......

१) इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने उसके घर जाते हैं । शनि क्योंकि मकर राशि के स्वामी हैं तो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने पर इसे मकर संक्रान्ति कहा जाता है । इसे सूर्य वर्ष का प्रारम्भ माना जाता है ।....
ब्लॉग नगरिया में मैंने टहलते-टहलते देखा की एक खुल्ला सांड भी आजादी विचारों की लिए घूम रहा है और दुवारे-दुवारे जाकर घास चर रहा है. मैंने पूछा की भाई कौन गांव के सांड हो जो यहाँ खुल्ला घूम रहे हो. तो उनका कहना था कि मैं देश भक्त सांड हूँ और मुझे सभी पार्टियों का समर्थन प्राप्त है इसलिए आपको मेरी चिंता करने की आवश्यकता नहीं है. एक समस्या अवश्य है कई दिनों से टिप्पणियों के अभाव में सेहत ठीक नहीं रहती है. कुछ टिप्पणी विटामिन दिलवा दें तो ठीक हो जायेगा. आप भी एक बार सांड शाला हो आईये.
संगीता पूरी जी ने एक ताजा ताजा भविष्यवाणी की थी. उन्होंने कहा था की भूकंप के योग बन रहे हैं और बीती रात भूकंप आ गया उनकी भविष्यवाणी सच निकली अब वो कह रही है कि काश मेरी भविष्‍यवाणी सही नहीं हुई होती तो फिर काफी सवाल खड़े हो जाते भविष्यवाणी को लेकर. चलिए संगीता जी आपके द्वारा फलित किया हुआ ज्योतिष सच साबित हुआ. हमारे एक मित्र एम्.बी.बी.एस डाक्टर हैं जो मरीज की शारीरिक जाँच से पहले उसके ग्रहों की जाँच करते हैं और मरीज का इलाज एलोपैथिक एवं ग्रह नक्षत्र देखकर करते हैं. इससे मरीजों को इलाज में आशातीत सफलता मिल रही है. उनका एक ब्लॉग भी है.
एक बार उसने कहा था कि किसी के उकसावे में आकर परबुधिया अपना ही नुकसान करवा लेता है. वे मौज लेने के लिये अकसर ये कार्य करते रहते है, सो आ गया उनके उकसावे मे इसलिए किसी के बहकावे में आना ठीक नहीं है. जिस काम में आप लगे हो वही करो और शांति से रहो इसके लिए मुन्ना भाई ने कहा था जूस पिवानु छे ,ढोकला खम्मन खावाणु छे पछे मज्जा नी लाइफ छे. तो तमे मोटा भाई धियान राखजो.

डॉ० कुमारेन्द्र सिंह सेंगर रायटोक्रेट कुमारेन्द्र राजनीति के क्षरण पर चिंता व्यक्त कर रहे है.आज की राजनीति कहाँ जा रही है?पिछले कुछ वर्षों से राजनीति में जिस तरह का क्षरण देखने को मिल रहा है वह चिन्ता का विषय होना चाहिए। कहने को तो चिन्ता का विषय है किन्तु चिन्ता किसी को नहीं है। हम सभी आपस में मिल कर बैठते हैं, चर्चा करते ह.यदि राजनीतिक परिदृश्य पर गौर किया जाये तो धन बल, सत्ता बल, बाहु बल का खुल कर प्रयोग होने लगा है। इस अतिशयता के पीछे के कारणों को चर्चा का बिन्दु तो बनाया जाता है किन्तु उसके समाधान के तरीकों को खोजने का प्रयास नहीं होता है।..
अजय कुमार झा जी अपने लेखन से प्रभावित करते हैं. गंभीर से गंभीर भात अपने अंदाज में सरलता से रखकर पाठकों को मोह लाते हैं. इन्होने ब्लोग चोरों के हक में एक आंदोलनका आगाज किया है.आखिर नए साल में शास्त्री जी ने एक ब्लोग चोर को पकड के, उदघाटन कर ही दिया , वैसे भी जाने कितने दिन बीत गए थे कोई भी चोर पकडे हुए । चलिए अच्छा हुआ जो साल के पहले ही पखवाडे में हमने सफ़लता हासिल कर ली । और जब से उन्हें पकडा गया है तब से अब तक जाने कितनी पोस्टें और जाने कितनी टिप्पणियां उनको समर्पित करके लिखी जा चुकी हैं और अभी तो पिक्चर बांकी है मेरे दोस्त । ब्लोग पोस्ट चोरों की तरफ़ से एक सादर निवेदन टाईप की रिक्वेस्ट आई ,कहा गया था कि सर जी इतने सारे जने मिल के हमारा सामूहिक चीरहरण जैसी सेवा कर रहे हैं
हरिद्वार में आज से कुम्भ पर्व प्रारंभ हो गया. आज प्रथम स्नान है.कुंभ स्नान कार्यक्रम लगातार चलता rahega. करोड़ों श्रद्धालु लाभ उठाएंगे. आशा तो है हमारे ब्लोगर परिवार के कोई ना कोई सदस्य वहां जा कर ब्लागियंगे और हमें घर बैठे हरिद्वार कुम्भ के दर्शन का लाभ कराएँगे. हरिद्वार में कड़ाके की ठण्ड में सुबह उठे कर ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान का मजा ही कुछ और है. लेकिन ठण्ड में पहली डुबकी मारने में ही समस्या आती है उसके बाद तो फिर डुबकियों पे डुबकियाँ मारे जाओ.

दिनेश राय द्विवेदी जी राजस्थानी बोली हाडौती में बहुत प्रभावशाली लेखन करते हैं भाषा के प्रबाव को शब्दों में ज्यों का त्यों उकेर देते हैं,ऐसा लगाता है जैसे कोई सामने खड़ा होकर हाडौती में बात कर रहा है. मैंने उनसे एक दिन फोन करके विशेष निवेदन किया था कि एक दिन आप पुन: हाडौती में लिखें मुझे बड़ा आनंद आएगा.बिलाग जगत कै ताईँ बड़ी सँकराँत को राम राम! करते हुए कहा है कि ब्लागीरी की सुरूआत सूँ ई, एक नियम आपूँ आप बणग्यो। कै म्हूँ ईं दन अनवरत की पोस्ट म्हारी बोली हाड़ौती मैं ही मांडूँ छूँ। या बड़ी सँकरात अश्याँ छे के ईं दन सूँ सूरजनाराण उत्तरायण प्रवेश मानाँ छाँ अर सर्दी कम होबो सुरू हो जावे छे। हाड़ौती म्हाइने सँकरात कश्याँ मनाई जावे छे या जाणबा कारणे आप सब अनवरत की 14.01.2008 अर 14.01.2009 की पोस्टाँ पढ़ो तो घणी आछी।
ब्लॉग जगत बिग बी समीर लाल जी उड़न तश्तरी पर आते हैं तथा अपनी बात दार्शनिक अंदाज में कहते हैं. इनका लेखन बहुत ही प्रभावशाली है. वो कह रहे हैं दूर हुए मुझसे वो मेरे अपने थे.. क्यूँ मैं भीड़ में रुक कर नहीं देखता कि जिनके साथ मैने सफर शुरु किया था, जो मेरे साथ मेरी जिन्दगी के कारवां से जुड़े थे, वो कहाँ हैं, किस हाल में हैं, क्या सोचते हैं. मेरे लिए, मेरे साथ भीड़ कितनी है जितना ही महत्वपूर्ण भीड़ किनकी है, जानना भी होना चाहिये.आज फिर उड़न तश्तरी आई है आप भी पढ़िए.
डॉ. रूपचंद शास्त्री जी ने तो कल कमाल ही कर दिया साहित्य चोर मदन लाल पारीख को पकड़ कर और उसके घर तक जा पहुंचे. फोन पर भी चोर से बात कर ली इन्हें सैल्यूट करते हैं. शास्त्री जी का गजल कहने का अंदाज निराला है. जिसमे बीते वर्षों की साधना स्पस्ट झलकती है.“गजल के उदगार ढो रहे हैं। लिखा है.हमने पढ़ लिया है आप भी पढ़िए.बन कर सजग सिपाही, हम दे रहे हैं पहरे, हम मेट देंगे अपने, पर्वत के दाग गहरे, उनको जगा रहे हैं, जो हार सो रहे हैं। हम गीत और गजल के उदगार ढो रहे हैं।।

चलते चलते
अजय कुमार झा जी केआपकी टिप्पी पर हमारा टिप्पा (टिप्पणी तडका ) का आनंद लीजिये बिलकुल झकास अंदाज में और राज भाटिया जी ब्लांगिंग के संग संग आप रेडियो सुने, या टी वी देखे कह रहे हैं.मुफ्त में ब्लोगिंग के साथ आनद लीजिये.


रात को सर्वर डाउन होने की वजह से चर्चा में विलम्ब हो गया. अभी तक अपनी पोस्ट भी नहीं लगा पाया हूँ. अब मैं ललित शर्मा आपसे विदा लेता हूं और चर्चा को देता हूँ विराम-सभी को संक्रांति और कुम्भ पर्व की राम-राम

26 comments:

  1. जय हो ललित भाई...संक्रांत की बहुत शुभकामनाएँ...


    बहुत मस्त चर्चा एकदम लेटेस्ट तक विस्तार से,,,बधाई.

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  2. वाह लाजवाब चर्चा.

    रामराम.

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  3. जानदार चर्चा!
    शानदार चर्चा!
    उत्तरायणी पर्व की शुभकामनाएँ!

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  4. बढ़िया चिट्ठाचर्चा

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  5. बहुत बढिया चर्चा करते हैं ललित जी आप .. जहां तक मेरे बारे में या ज्‍योतिष के बारे में प्रश्‍न के खडे होने का सवाल है .. भविष्‍यवाणी सही होने के बाद भी खडे हो रहे हैं .. भूकम्‍प की तिथि और समय बतलाने से क्‍या होता है .. स्‍थान की भविष्‍यवाणी सही नहीं कर सकी मैं .. ये वैसे ही लोग हैं .. जो आधे गिलास पानी को भरा कह ही नहीं सकते .. पर मैंने यदि उनकी परवाह की होती तो आज ऐसी स्थिति में नहीं होती .. मैं तो आप जैसे प्रशंसकों की हौसला भरी बातों को मात्र दिल में जगह देती हूं .. और बाकी के विचारों को मस्तिष्‍क में .. आगे अपनी भविष्‍यवाणियों में अधिक सुधार लाने के लिए !!

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  6. ललित जी को और चर्चा के सभी पुरोधाओं को मकरसंक्रांति और लोहड़ी पर शुभकामनाएँ।
    म्हारो हाड़ौती मांडबा कै ताँईँ नवाज्यो, घणी खम्माँ। ईं ब्लाग जगत कै ताईँ परणाम कै यो आपणी बोली माँडबा को मौको तो दे छे।

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  7. जय हो ललित जी,शानदार चर्चा!

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  8. क्या कहा? "एक" खुल्ला सांड घूम रहा है? सिर्फ़ एक ही दिखा आपको… :) :)
    बहरहाल, मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएं…

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  9. बहुत खुबसूरत चिठ्कों की चूं चप्पड़ से अवगत कराया !!! काफी समाचार मिल बाये ब्लॉगजगत के !!!

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  10. क्या बात है ललित बाबू जंहा देखों वंहा ललित ही ललित,आनंद आ गया।चर्चा एक्स्पर्ट हो गये हो अब तो।

    संक्रांति की बहुत बहुत बधाई,

    तिळ-गुळ घ्या आणी गोड-गोड बोला।(तिल-गुड़ खाीये मीठा-मीठा बोलिये)

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  11. ललित जी, हर बार तारीफ करना भी अच्छा नहीं होता इसलिये आज तो हम संक्रान्ति की बधाई ही दे रहे हैं।

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  12. अवधिया जी की बात हमारी भी मानी जाये

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  13. जे बात इसे कहते हैं चर्चा , पोस्टों की इतनी सुंदर चर्चा ने न सिर्फ़ मन को मोह लिया बल्कि ये भी साबित किया है कि आने वाले समय में हमें एक से एक प्रयोग देखने पढने को मिलते रहेंगे । आपका बहुत बहुत धन्यवाद शर्मा जी , सबको मार्गदर्शन मिलेगा इससे
    अजय कुमार झा

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  14. अति सुन्दर चर्चा रही! सभी दोस्तों को मकर संक्रांति की बधाइयां !

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  15. दोस्तों और दुश्मनों को,
    काँटों और सुमनो को,
    साधु और शैतानों को,
    चोरों और बेईमानों को,
    घर और मकानों को,
    अदृश्य अनामों को,....
    उत्तरायणी पर्व की शुभकामनाएँ!

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  16. हा हा हा शास्त्री जी, जोरदार बधाई,

    सभी को मकर संक्रातिं की शुभकामनाएं।

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  17. ललित जी बहुत बढ़िया चर्चा करी |
    म्हाने तो ई ब्लॉग को पतो ठिकानो आज ही मिल्यो है |
    सकरात की शुभकामना |

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  18. क्या कोई ज्ञानी बता सकता है कि चिट्ठाचर्चा पर की इस टिप्पणी में ऐसा क्या था जो इसे रोक रखा गया है?
    http://murakhkagyan.blogspot.com/2010/01/blog-post.html

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  19. ये जो लंगोटा नंदजी
    मल्लिका पे मोहित हुए नज़र आ रहें हैं उस पर कछु बोलते सौ की उम्र पार कर लिए हैं
    हमारा हक छीनतें हैं
    अच्छी चर्चा के लिए आशीर्वाद भेज रिया हूँ

    * स्वामी भविष्यवक्तानंद

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  20. * स्वामी भविष्यवक्तानंद की टिप्पणी को लेकर मन खिन्न होके किन्न-मिन्न कर रहा है आज संक्रांति पर्व पर तो ये दौनों बाबा कंट्रोल में रहते क्यों न इनको प्रतिबंधित कर दिया जावे मठों से हटा देवें इनको इब आप ही कहो इत्ती सुन्दर चर्चा में भी आ गए मल्लिका को लेके किसी ने सच कहा है झगढ़े की जड़ तीन.........?

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  21. ललित चर्चा के चर्चे है हर ज़ुबान पर,
    सबको मालूम है और सबको ख़बर हो गई...

    जय हिंद...

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  22. आपकी चिट्ठी चर्चा हर बार की तरह इस बार भी लाजवाब रही । आपका आभार ,चिट्ठा चर्चा में शामिल करने के लिए ।

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