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मंगलवार, मार्च 16, 2010

“नव संवत्‍सर की मंगलकामनाएँ!” (चर्चा मंच)

"चर्चा मंच" अंक-90

चर्चाकारः डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
आइए आज का "चर्चा मंच" सजाते हैं-
सुबीर संवाद सेवा
 नव संवत्‍सर की मंगलकामनाएँ और चैत्र नवरात्रि के अवसर पर सुनिये लता जी के स्‍वर में पंडित नरेंद्र शर्मा जी के आठ गीत जिन्‍हें संगीतबद्ध किया है पंडित ह्रदयनाथ मंगेशकर ने । - आज से नया संवत्‍सर प्रारंभ हो रहा है । नया संवत्‍सर और साथ में चैत्र नवरात्रि भी आज से ही प्रारंभ हो रही हैं । इन दिनों काफी अपने परिचितों एवं मित्रों के...
काव्य मंजूषा

समय.......गीत....ये समा समा है ये प्यार का - याद है मुझे, जब मैं छोटी बच्ची थी, झूठी दुनिया की भीड़ में, भोली-भाली सच्ची थी, तब भी सुबह होती थी शाम होती थी, तब भी उम्र यूँ ही तमाम होती थी, लगता थ..
ताऊ डॉट इन

बैशाखनंदन सम्मान पुरस्कारों की स्थापना : ताऊ रामपुरिया - माननीय ब्लागर बंधुओं, आप सभी को *गुडी पडवा (नव वर्ष) *की हार्दिक शुभकामनाएं. नववर्ष के शुभारंभ के पावन अवसर पर हास्य व्यंग के लिये आज *ताऊ डाट इन* की तरफ...
शब्दों का सफर
क्या हैं गुड़ी पड़वा और नवसंवत्सर - * * *नववर्ष शुभ हो * स नातन भारतीय संस्कृति में *चैत्र शुक्ल प्रतिपदा* से नववर्ष माना जाता है। इसे *संवत्सर प्रतिपदा* भी कहते हैं। मान्यता है कि इसी...
Science Bloggers' Association

दो प्राकृतिक काल मानों में समायोजन का नतीजा लीप इयर, अधिक मास और क्षय मास - चौदह मार्च को पाई दिवस था। इस अवसर पर इस विषय पर हिन्दी में एक मात्र पोस्ट आई। अच्छा लगा। पाई का वास्तविक मान क्या है? कोई नहीं जानता। यह किसी भी वृत्त और उस...
कर्मनाशा

एक पक्षी के साथ सुबह - ** आज की सुबह एक पक्षी के साथ हुई। अपनी बैठक का परदा जब धीरे से सरकाया तो खिड़की के बाहर गमले का निरीक्षण करते हुए एक पाखी को पाया। रूप - रंग का क्या करूं ...
साहित्य योग
ये नहीं है मेरी बरेली........ - ये नहीं है मेरी बरेली जहाँ हाथ में धर्मं का है छूरा मन में अंधविश्वास की छाया आदमी-आदमी को मार रहा ना कोई मोह ना कोई माया मानवता के हो गए टुकड़े टुकड़े हर टुक...
SPANDAN


अहसास - > गीली सीली सी रेत में > छापते पांवों के छापों में > अक्सर यूँ गुमां होता है > तू मेरे साथ साथ चलता है > .. > सुबह की पीली धूप जब > मेरे गालों पर पड़ती ...

भारतीय नागरिक - Indian Citizen
हरियाणा में एसटीएफ भंग - पिछली कई पोस्ट में मैंने पुलिस कर्मियों के भ्रष्टाचार के ऊपर और अपराधीकरण के बारे में लिखा था. भारतीय पुलिस के लिये जस्टिस श्रीमन ए०एन०मुल्ला ’संगठित अपराध...
शब्दों का दंगल
“मेरी पौत्री का जन्म-दिन” - *कल 14 मार्च को मेरी पौत्री प्राची का 7वाँ जन्म-दिन था! ”अमर भारती” ब्लॉग पर पोस्ट लगाई थी! लेकिन न जाने वो कैसे उड़ गई! उसी के आग्रह पर यह पोस्ट यह...
Gyan Darpan ज्ञान दर्पण

ऑटो स्क्रिप्ट इंस्टालर - ज्ञान दर्पण के पाठकों में से कई लोगों के अक्सर फ़ोन आते रहते है कि उन्होंने कहीं से वेब होस्टिंग पैकेज लिया और अब वर्डप्रेस स्क्रिप्ट या अन्य स्क्रिप्ट सर्...
डॉ.कविता'किरण'(कवयित्री)

मेरी आँखों में अगर झांकोगे जल जाओगे - * * * ज़ख्म** **ऐसा** **जिसे** **खाने** **को** **मचल** **जाओगे* * इश्क** **की** **राहगुज़र पे न संभल पाओगे ** * * ** ** * *मैं** **अँधेरा** **सही*...
समाचार:- एक पहलु यह भी

क्योंकि भूख तो सभी को लगती है - भूख सभी को लगती है. यह बात सही है लेकिन हम सारे दिन में जो कुछ भी खाते है वो सब भूख मिटाने के लिए नहीं खाते. हम बहुत सा ऐसा खाते है जो टेस्ट बदलने के लिए य...
स्वप्न(dream)
बस यही मुश्किल है - प्रस्तुत है एक और पुरानी लिखी रचना. बस यही मुश्किल है तोड़ दूं कसमें तमाम, और वादे भूल जाऊंबस यही मुश्किल है मेरी , कैसे मैं उसको भुलाऊं मुझसे ज्यादा कीम..
नन्हें सुमन

"कम्प्यूटर" - *मन को करता है मतवाला।* *कम्प्यूटर है बहुत निराला।।** * *यह तो एक अनिवार्य भाग है।* *कम्प्यूटर का यह दिमाग है।।* *चलते इससे हैं प्रोग्राम।* *सी.पी.यू.है इस...
शब्द-शिखर

नव संवत्सर से जुडी हैं कई महत्वपूर्ण घटनाएँ - भारत के विभिन्न हिस्सों में नव वर्ष अलग-अलग तिथियों को मनाया जाता है। भारत में नव वर्ष का शुभारम्भ वर्षा का संदेशा देते मेघ, सूर्य और चंद्र की चाल, पौराणिक...
वीर बहुटी
सुखदा ----कहानी---भाग --3 - सुखदा कहानी-- भाग ------ 3 पिछले भाग मे आपने पढा कि कैसे सुखदा के पिता के बीमार होने पर उसे एक ओझा के पास ले गये उस ओझा ने सुखदा को घर के लिये मनहूस बताय..
तेताला

महंगाई क्‍यों बढ़ रही है अगर जानना चाहते हैं तो रुकिए ? (अविनाश वाचस्‍पति) - दैनिक नवभारत टाइम्‍स ने 16 मार्च 2010 के अंक में सचित्र समाचार के जरिए खोली है पोल, आप भी देखिए महंगाई क्‍यों बढ़ रही है खौल खौल स से सरकार स से साईकिल...
उच्चारण
   “लैपटॉप” - IMG_1100 - Copy** सबके मन को जो भाता है। लैपटॉप वह कहलाता है।। सभी जगह इसको ले जाओ। बड़े मजे से नेट चलाओ।। मनचाहे गानों को भर लो। दूर द...
मयंक

“पं. नारायणदत्त तिवारी के साथ एक शाम” - ** ** **** ** ** * पिछले सप्ताह अमृतसर पंजाब में 6-7 मार्च को प्रजापति संघ का एक बड़ा कार्यक्रम था। उसमें मुझे भी भाग लेने के लिए जाना था। मे...
अंधड़ !

दूसरे का तो ये बुर्के पर बनाया कार्टून भी नहीं बर्दाश्त कर पाते और ... - किसी और के धर्म पर कीचड उछालने, अश्लील बाते लिखने, छद्म नामो से लिखने और टिपण्णी करने में इन्हें ज़रा भी परहेज नहीं । यहाँ देखे , यही नहीं कि इनका एक तथाकथ...
ANALYSE YOUR FUTURE 
भूत प्रेत बाधा एवं निवारण - भूत-प्रेतों की गति एवं शक्ति अपार होती है। इनकी विभिन्न जातियां होती हैं और उन्हें भूत, प्रेत, राक्षस, पिशाच, यम, शाकिनी, डाकिनी, चुड़ैल, गंधर्व आदि विभिन्न...
सोचा ना था....

गुडी पडवा - गुडी पडवा...चैत्र मास का पहला दिन...जो की हिंदी कैलेंडर के नए साल का पहला दिन है....इसे महाराष्ट्र में नए साल के रूप में मनाया जाता है....इस दिन को शादी,न...
संवेदना संसार
आ'रक्षण - रक्षण किसका ?? - नेताजी बहुतै खिसियाये हुए हैं.आजकल जहाँ देखिये वहां चैनल सब पर चमक रहे हैं और सबको चमका रहे हैं...एलान किये हैं कि उनका लाश पर महिला आरक्षण बिल पास होगा...
Fulbagiya

goree koyal - *कोयल ने जब शीशा देखा* *हो गई वह तो बहुत उदास* *गोरी मैं कैसे बन जाऊं* *सोच के पहुंची वैद के पास।* * * *भालू वैद ने कूट पीस कर* *दे दी ढेरों क्रीम दवायें* ...
today's CARTOON
केरीकेचर- राजीव तनेजा जी.......

Posted by आरडीएक्स

निवेदन यह है कि

यदि आप

पल-पल! हर पल!!

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सरलता होगी।            



आज की चर्चा को 


यहीं पर विराम देते हैं!

सोमवार, मार्च 15, 2010

“नवरात्रि के पावन पर्व की आप सबको हार्दिक शुभकामनाऎँ” (चर्चा मंच)

"चर्चा मंच" अंक-89


चर्चाकारः डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
आइए अब चलते हैं कुछ ब्लॉगों की ओर
और करते हैं रुख कुछ ताजा-तरीन पोस्टों की ओरृ-
उड़न तश्तरी ....

समीर लाल Udan Tashtari

एजेक्स (Ajax), ओंटारियो (ontario), Canada
Sameer Lal
सो कॉल्ड एलीट ग्रुप

सो कॉल्ड एलीट ग्रुप- तथाकथित अभिजात्य वर्ग. आम लोगों की पहुँच से बाहर. आम जन के मानस पर हर वक्त यह छाया रहता है कि जाने कैसी दुनिया होगी उनकी.

एलीट वर्ग में कोई यूँ ही तो नहीं आ जाता-जरुर व्यस्त रहते होंगे. आम जन के बीच बैठ समय बिताने लगें तो फिर काहे के एलीट. बात समझ में आती है. लेकिन उनकी बात समझने में दिक्कत होती है जो आमजन से दूरी मात्र इस कारण कर बैठे हैं ताकि आमजन उन्हें एलीट समझे…

………………

मौसम में घटा जब, सुहानी आ जाए
ठहरी हुई लहरों में, रवानी आ जाए

इस कदर भी न पत्थर, हुआ जाए के
ख़ुद में खु़दा की गुमानी आ जाए

….

ज्योतिष की सार्थकता

नवसंवत्सर आगमन तथा नवरात्रि के पावन पर्व की आप सबको हार्दिक शुभकामनाऎँ!!!!!!!!!!!!! - कल 16 मार्च चैत्र प्रतिपदा को नवीन संवत्सर और हमारे विक्रमी वर्ष का आरम्भ हो रहा है। साथ ही नवरात्रि का पावन पर्व भी। सूक्ष्म जगत को अपना कार्यक्षेत्र बनान...

GULDASTE - E - SHAYARI

- ख़ुशी से दिल को आबाद करना, गम को दिल से आज़ाद करना, मुस्कुराते हुए हमेशा जीना, हमें सिर्फ़ एक पल याद करना !

Rhythm of words...

ख़त! - कल देर तक ख़ामोशी से जदोजेहद में था आखिर जिंदगी का एक ख़त हाथ लग गया था। और ख़ामोशी भी आ गयी थी कशमकश में कि क्यों में लफ़्ज़ों के साथ लग गया था॥ कुछ लफ्ज़ अधम..

ताऊ डॉट इन

ताऊ पहेली - 65 : विजेता सुश्री रेखा प्रहलाद - प्रिय भाईयो और बहणों, भतीजों और भतीजियों आप सबको घणी रामराम ! हम आपकी सेवा में हाजिर हैं ताऊ पहेली - 65 का जवाब लेकर. कल की ताऊ पहेली का सही उत्तर है श्री ...

काव्य मंजूषा

मुर्दों का शहर.... - मुर्दों का शहर है ये जहाँ हर कोई अपना जनाज़ा खुद उठाये चला जा रहा है बस फर्क सिर्फ इतना है कफ़न अब रंग-बिरंगे हो गए हैं मातम ने खुशियों के मुखौटे पहन लिए...

मसि-कागद

उसका खुदा-मेरा खुदा---->>>दीपक 'मशाल' - बेतरतीब सा मैं मुड़े-तुड़े किसी बीड़ी के बण्डल की तरह के सिकुड़नों वाले उस कुरते को हलकी सी सीयन उधड़ी जींस के ऊपर डाल चल दिया था उसके घर की तरफ अनायास ही....

Gyanvani

 केवल तुम हो ...तुम - तुम अपरिचित थे बुरे नहीं भले लगे थे किन्तु ह्रदय में एक भी बुलबुला नहीं फूटा कि दृष्टि उठा कर तुम्हे देख लूं तब ना जाने कौन सी किरण की इंगित तुम्हे मेरे करीब..

मुसाफिर हूँ यारों

गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब - यह गुरुद्वारा उत्तराखण्ड राज्य के ऊधमसिंहनगर जिले में स्थित है। जिले के बिल्कुल बीच में है जिला मुख्यालय और प्रमुख नगर रुद्रपुर। यहां से एक सडक किच्छा, स..

हिंदी का शृंगार 

शब्दकोषों का वैशवीकरण - निम्नांकित वाक्य एक में अनेक दिखाने के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण है - "भारत की राजधानी नई दिल्ली पर "शब्दकोषों का वैशवीकरण" बिषय पर आयोज्य पहले अंतर्राष्ट्री..

भारतीय नागरिक - Indian Citizen

 त्यागी जी के ब्लाग परशुराम२७ में कुछ गड़बड़ है - त्यागी जी के ब्लाग परशुराम२७ में कुछ गड़बड़ है. जब भी टिप्पणी पोस्ट करने जाओ तो कहीं और रीडायरेक्ट हो जाता है. कई बार एक ही लेख चार-चार पांच-पाच जगह अलग-अलग ...

नन्हें सुमन

‘‘गुब्बारे’’ ** *बच्चों को लगते जो प्यारे। * *वो कहलाते हैं गुब्बारे।।* गलियों, बाजारों, ठेलों में। गुब्बारे बिकते मेलों में।। काले, लाल, बैंगनी, पीले। कुछ हैं ..

गीत सुनहरे

शहीद - ए - आजम भगत सिंह - 3 - शहीद - ए - आजम भगत सिंह - 3 हृदय विदारक दारुण क्रंदन, परम पिता ने कर आलिंगन, परम वंद्य आत्मा आवाहन, भारत भेजा अपना नंदन . बंगा लायलपुर जनपद में, किसन, विद..

Dr. Smt. ajit gupta 

कभी कुटिल व्‍यक्ति भी आपको सफलता दिला देते हैं - कभी आप किसी महत्‍वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं और आप अपने कार्य द्वारा मंजिल प्राप्‍त करना चाहते हैं। लेकिन देखते हैं कि कोई एक व्‍यक्ति आपके पीछे पड़ जाता है। स..

नीरज

लगा के ठुमके तेरी गली में - *"फागुन"* *याने हंसी ख़ुशी और उल्ल्हास का महीना**...**फाग धमाल का महीना**... **आज फागुन एक बरस के लिए हमसे विदा ले रहा है और ऐसे महीने की विदाई हमें हँसते...

उच्चारण

“बीमार आ गए हैं” shivarana *सुख-चैन छीनने को, गद्दार आ गये हैं। टुकड़ों को बीनने को, मक्कार आ गये हैं।। पाये नहीं जिन्होंने, घर में नरम-निवाले, खुद को किया उन..

simte lamhen 

अए अजनबी... - अए अजनबी !जब हम मिले, तुम जाने पहचाने -से थे, बरसों हमने साथ गुज़ारे, क्यों बन गए पराये? क्या हुआ, किस बातपे, हम तुम नाराज़ हुए? आओ एक बार फिर मिलें, अजनबिय..

गीत-ग़ज़ल

 बहुत दिन हुए जिन्दगी से मिले - ** *एक ही तर्ज़ पर दो गीत १.* * बहुत **दिन हुए जिन्दगी से मिले अरमाँ मचल कर पहलू में हिले बदला है मौसम , दिल भी है सहमा ले चल किसी अमराई तले पत्ता न हिलता..

नन्हा मन

बंदर बाबु - बंदर बाबु पैंट पहनकर पहुंच गए ससुराल खाकर मीठा पान उन्होंनें होंठ कर लिए लाल बंदरिया भी स्मार्ट बन गई पहन के लहंगा चोली खाऊंगी मैं रस-मलाई बंदर से व...

नुक्कड़ 

चैनलों को ज्योतिष का बुखार भाग - एक प्राचीन कथा पर विश्वास करें तो ज्योतिष एक श्रापित विद्या है। एक बार नारद जी कैलाश पर्वत पर पहुंचे भगवान शिव ने कहा नारद जी आप तो बहुत बड़े ज्योतिषी हैं,..

कुमाउँनी चेली 

संस्मरण : किस्सा पहली बोर्ड ड्यूटी का - संस्मरण २५ अप्रैल सन् २००० को लिखा गया था , जब मैं नई - नई शिक्षा विभाग में आई थी. मेरी बरसों से एक इच्छा थी कि मैं टीचर बनूँ, किसी और व्यवसाय में जा...

अंकित सफ़र की कलम से 

मेरे कुछ आवारा साथी - कुछ ज्यादा ही ख़ामोशी हो गयी इन दिनों इस ब्लॉग से मगर आज ये ख़ामोशी मेरे कानों में जोर से चीख के गयी है. चलिए इस चुप्पी को तोडा जाये. बिना पोस्ट के दोस्तों क...

हमें तुम भूल भी जाओ ..काव्य तरंग..


हमें तुम भूल भी जाओ
तुम्हे हम प्यार करेंगे
गवारा जो न हो तुमको
नहीं इज़हार करेंगे…….रानीविशाल….

Kajal Kumar's Cartoons
काजल कुमार के कार्टून

कार्टून:- जहाज़ों को अदृश्य बनाने का सिंपल तरीक़ा...

अपनी बात...

वो छुप-छुप के लिखना.......... - आज अपने बुक-शेल्फ की सफाई कर रही थी, तो एक पुरानी डायरी हाथ आ गई. सन १९८० की डायरी. यानि तीस साल पुरानी डायरी................. पन्ने पलटने लगी तो मेरा बच..                

 

 

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अब देते हैं

चर्चा को विराम!!

रविवार, मार्च 14, 2010

“अँधा हूँ मगर आँख वालों को आईना बेचता हूँ…” (चर्चा मंच)

"चर्चा मंच" अंक-88


चर्चाकारः डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"
आइए अब चलते हैं कुछ ब्लॉगों की ओर-

ज़ख्म

कोई तो जगे - अँधा हूँ मगर आँख वालों को आईना बेचता हूँ शायद अपना अक्स नज़र आ जाये किसी को गूंगा हूँ मगर जुबान वालों को शब्द बेचता हूँ शायद कोई जुबाँ के ताले खोले कोई तो सत...

युवा दखल

युवा संवाद का राज्य सम्मेलन - *युवा संवाद का तीसरा राज्य स्तरीय शिविर आगामी २०-२१ मार्च को ग्वालियर में होगा।* *राज्य सम्मेलन की कार्यसूची* *20/03/2010* *पहला सत्र (10 बजे से) *यु्...

आदित्य (Aaditya)

नन्हा हीरो.. - पिछले मंगलवार को द्वारका में डिजिटल एलिमेंट स्टूडियो से कुछ फोटो खिचवाये... देखिए कैसा लग रहा है नन्हा हीरो... वैसे फोटो खिचने वाली दीदी को बहुत मेहन...

मसि-कागद

एक अज़ब-गज़ब लोकगीत---->>>दीपक 'मशाल' - आज मस्तिष्क के समंदर में विचारों की लहरें उठने का नाम ही नहीं ले रही थीं, साथ ही तन और मन के देव और दानवों ने थके होने का बहाना बना के मंथन से भी इंकार कर ...

ताऊजी डॉट कॉम

फ़र्रुखाबादी विजेता (199) : श्री चंदन कुमार झा - नमस्कार बहनों और भाईयो. रामप्यारी पहेली कमेटी की तरफ़ से मैं समीरलाल "समीर" यानि कि "उडनतश्तरी" फ़र्रुखाबादी सवाल का जवाब देने के लिये आचार्यश्री यानि कि

साहित्य योग

खंजर....समुन्दर....आग - दिल में उतर कर कहते हो दर्द तो नहीं है, खंजर मार कर कहते हो जख्म तो नहीं है, सिकायत करूँ भी तो किससे करूँ *जज, मुजरिम और महबूब भी तुम्ही निकले * सांसों ...

नन्हें सुमन

‘‘जंगल और जीव’’ - ** *रहता वन में और हमारे, संग-साथ भी रहता है। यह गजराज तस्करों के, जालिम-जुल्मों को सहता है।।* *समझदार है, सीधा भी है, काम हमारे आता है।* *सरकस के कोड़...

मुक्ताकाश....

इसी शहर में... - दीवारो-दर पे लिख दीं कहानियाँ तुमने, हैं कहाँ-कहाँ छोड़ीं नहीं निशानियाँ तुमने ! मेरा जुनून रहा हाशिये पे आज तलक, पशेमाँ हसरतों की बढ़ा दीं परेशानियां तुमने ...

गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष

आप सबों को नए विक्रमी संवत् की ढेर सारी शुभकामनाएं !! - पिछले कई दिनो से मैं इस ब्‍लॉग को अपडेट नहीं कर पायी , गत्‍यात्‍मक चिंतन पर मेरा चिंतन जरूर चल रहा था। उसमें लिखे पहली पोस्‍ट पर , हमारे विवाह की वर्षगांठ पर..

समाचार:- एक पहलु यह भी

नशा है की उतरता ही नहीं - नशा भी नशा होता है. जब चढ़ता है तो ऐसा चढ़ता है की उतरने का नाम ही नहीं लेता. यह कभी नशे के आदि लोगो पर चढ़ता है तो कभी पहली बार नशा करने वालो पर. तो कभी-कभी ...

Gyanvani

दोस्त बनकर गले लगाता है वही ......पीठ पर खंजर भी लगाता है वही - दोस्त बनकर गले लगाता है वही पीठ पर खंजर भी लगाता है वही वफ़ा की रोज नयी कसमे उठाता है करवट बदलते ही बदल जाता है वही .... बंद पलकों में सजे है ख्वाब जिसके लि...

वीर बहुटी

सुखदा --- कहानी -भाग -2 - *पिछले भाग मे आपने पढा कि सुखद के पिता को इलाज के लिये एक ओझा के पास ले जाया गया। कहा जाता था कि वि ओझा बिना चीर फाड किये कैंसर के मरीज का आप्रेशन करता था...

chavanni chap (चवन्नी चैप)

‘आमिर’ होने में कोई बुराई नहीं ...................................... - *आमिर के जन्मदिन के मौके पर कनिष्क क यह लेख चवन्नी के पाठकों के लिए है.आप भ चाहें तो यहाँ लिख सकते हैं.अपने लेख chavannichap@gmail.com पर पोस्ट करें.साथ ...

अंधड़ !

तू हिन्द है ! - निभा सकता है तू जहां तक और जबतक, बस निभाता रह, सहिष्णुता तेरा मूल मंत्र है, दिखा सके जबतक, दिखाता रह । असुर तो हमेशा की तरह ही, पथ मे तेरे कंटक बोता रहेंगा,...

उच्चारण

“ अमृतसर, पंजाब यात्रा के कुछ चित्र” - *स्वर्ण मन्दिर, अमृतसर (पंजाब) के कुछ दृश्य* *[image: IMG_0968]**[image: IMG_0956]** **[image: IMG_0958]** **[image: IMG_0960]** **[image: IMG_0965 - C...

Alag sa

"ग्लोबलाइजेशन" की ई-मेलीय परिभाषा - Question:What is the truest definition of Globalization? Answer:PrincessDiana'sdeath। Question:How come? Answer :AnEnglish princess with anEgyptian boyfrie...

ह्रदय पुष्प

होती यदि माचिस - होती यदि माचिस जानकी जी के पास अशोक वाटिका में वो अनेक दुःख पाती क्यों होता यदि फायर ब्रिगेड पास रावण के कपि के जलाने से लंक जल जाती क्यों होता यदि टेलीफोन म...

मनोरमा

बस माँगे अधिकार - कैसे कैसे लोग से भरा हुआ संसार। बोध नहीं कर्त्तव्य का बस माँगे अधिकार।। कहने को आतुर सभी पर सुनता है कौन। जो कहने के योग्य है हो जाते क्यों मौन।। आँखों से ...

गीत सुनहरे

शहीद - ए - आजम भगत सिंह -2 - शहीद - ए - आजम भगत सिंह -2 धरती माँ धिक्कार रही थी, रो रो कर चीत्कार रही थी . वीर पुत्र कब पैदा होंगे ? जंजीरों को कब तोड़ेंगे ? ’जन्मा राजा भरत यहीं क्या ...

भारतीय नागरिक - Indian Citizen

कानपुर के रेल बाजार थाना प्रभारी ने व्यवसायी मुकेश सिंह का अपहरण कर हत्या की. - कानपुर के रेल बाजार थाना प्रभारी ने एक व्यवसायी मुकेश सिंह का अपहरण किया और फिर उसके तीन दिन बाद उसकी लाश एक नहर से बरामद हुई. पुलिस निरंकुश हो चुकी है. का...

नवगीत की पाठशाला

२७- अब बसन्त आया है : डॉ. रूपचंद्र शास्त्री "मयंक" - > > > उपवन मुस्काया है! > अब बसन्त आया है! > > कुहासे की चादर, > धरा से छँट गई। > फैली हुई धवल रुई, > गगन से हट गई। > उपवन मुस्काया है! > अब बसन्त आया है...

Science Bloggers' Association

विज्ञान पत्रकारिता के कदाचार -साहित्यिक चोरी - हम विज्ञान पत्रकारिता के कदाचार की चर्चा कर रहे थे -यहाँ यह बता देना जरूरी है कि यहाँ वर्णित कदाचार केवल विज्ञान पत्रकारिता के ही संदर्भ में सीमित अर्थ के ...

शब्द-शिखर

सम्पूर्ण आहार के रूप में केला

- नवरात्र का त्यौहार मंगलवार से आरंभ हो रहा है. विशेषकर नारियों के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण समय होता है. घर-आफिस की जिम्मेदारियों के साथ व्रत-पालन वाकई एक दुष्...

bhartimayank

“प्राची का जन्म-दिन” - “आज हमारी पौत्री का 7वाँ जन्मदिन है!” [image: PRACHEE] [image: IMG_1065] [image: IMG_1076] [image: IMG_1074] [image: IMG_1069] [image: IMG_1060] [image...

अपनी बात...

वो छुप-छुप के लिखना.......... - आज अपने बुक-शेल्फ की सफाई कर रही थी, तो एक पुरानी डायरी हाथ आ गई. सन १९८० की डायरी. यानि तीस साल पुरानी डायरी................. पन्ने पलटने लगी तो मेरा बच...

बगीची

इतना खून खराबा हो रहा है : कौन चिकित्‍सा करेगा : ब्रॉडबैंड बजा रहा है बाजा (अविनाश वाचस्‍पति) - बहुत मुश्किल से पढ़ी जा रही हैं पोस्‍टें नहीं खुल रहे हैं ब्‍लॉग खुल जाते हैं तो नहीं खुलती पोस्‍टें पोस्‍टें गर खुल जाती हैं तो टिप्‍पणी बॉक्‍स नहीं आता है...

नुक्कड़

नरेन्द्र मोदी और बरेली ! - [image: www.blogvani.com]

today's CARTOON
तीन ताजे कार्टून...

Posted by आरडीएक्स

'अदा'........जब से तेरे नैना मेरे नैनों से लागे रे
Author: 'अदा' Source:
काव्य मंजूषा
जब से तेरे नैना मेरे फिल्म : सांवरिया गायक : शान गीतकार : समीरसंगीतकार : मोंटी शर्मायहाँ आवाज़ है 'अदा' की ...

यह तिलिस्म कब टूटेगा ????
Author: M VERMA Source:
यूरेका
कहीं जाते-आते हम यह दृश्य अक्सर देखते हैं। कभी-कभी हम इसका हिस्सा बनते हैं और इन बहुरूपियों के गिरफ्त में आ जाते है. यह तिलिस्म ही तो है जो सब कुछ जानते-समझते हम इनके शिकार बन जाते है. आखिर यह तिलिस्म कब टूटेगा ????

मय्यादास की माड़ी-शाबा शाबा वे फिरंगिया
अजित वडनेरकर Source:
शब्दों का सफर
इस हफ्ते भीष्म साहनी की कृति मय्यादास की माड़ी जो सवा सौ साल पहले आम जन-जीवन पर सामंती छाया का दस्तावेज है। इस उपन्यास में लेखक के प्रसिद्ध उपन्यास तमस से पहले का दौर है। यादगार किरदारों के इर्दगिर्द घूमता कथानक एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दौर की पड़ताल है। पुस्तक राजकमल से प्रकाशित हुई है और मूल्य है-150 रु (पेपरबैक) पृष्ठ-333

कृष्ण कुमार यादव को अक्षर शिल्पी सम्मान-2010

Mar 14, 2010 Author: Ram Shiv Murti Yadav Source: यदुकुल

म0प्र0 के प्रतिष्ठित राजेश्वरी प्रकाशन, गुना ने युवा साहित्यकार एवं भारतीय डाक सेवा के अधिकारी श्री कृष्ण कुमार यादव को उनके विशिष्ट कृतित्व, रचनाधर्मिता और प्रशासन के साथ-साथ सतत् साहित्य सृजनशीलता हेतु ’’अक्षर शिल्पी सम्मान-2010’’ से विभूषित किया है। अंडमान व निकोबार द्वीप समूह के निदेशक डाक सेवाएं पद पर पदस्थ श्री यादव की रचनायें देश की विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं और इसके साथ ही आपकी अब तक कुल 5 पुस्तकें- अभिलाषा (काव्य संग्रह), अभिव्यक्तियों के बहाने (निब ...



‍भड़ौवाकार बेनीभट्ट ‘बंदीजन’

Mar 14, 2010 Author: डॉ० डंडा लखनवी Source: मानवीय सरोकार

‍भड़ौवाकार बेनीभट्ट ‘बंदीजन’ (सन् 1788-सन् 1836) - डॉ० गिरीश कुमार वर्मा हिन्दी साहित्य के रीतिकालीन युग में अवध के शासकों के संरक्षण में उनकी कला-विलासिता तथा सौन्दर्य-प्रियता की भावना को तुष्ट करने के लिए अनेक विशेषज्ञ कलाकार लखनऊ में आ जुटे थे। उनकी कलाओं में आलंकारिता,



धर्म के नाम पर अधर्म के मार्ग पर समाज

Mar 14, 2010 Author: Suman Source: लो क सं घ र्ष !

धर्म के नाम पर आज परस्पर इंसानों में बढ़ती नफरत की दीवारों ने इंसानियत को दर किनार कर इंसान को हैवान बना डाला है। आज इंसान इंसान के खून का प्यासा है। धर्म के नाम पर अधर्मी काम किये जा रहे हैं। मासूम बच्चों की बलि चढ़ाई जाती है। धार्मिक द्वेष के आवेश में आकर मस्जिद व मंदिर तोड़े जाते हैं तथा धमाके कर के जनहानि पहुंचाई जाती है। धर्म के अनुयाइयों की यह हालत देखकर धर्म के ना मानने वाले सीना फुलाने का अवसर पाकर धार्मिक व्यक्तियों से अपने को बेहतर बताते हैं और अपने पंथ का प्रचार करते नहीं थकते। पहले ...



युवा संवाद का राज्य सम्मेलन

Mar 14, 2010 Author: अशोक कुमार पाण्डेय Source: युवा दखल

युवा संवाद का तीसरा राज्य स्तरीय शिविर आगामी २०-२१ मार्च को ग्वालियर में होगा।



मेरी प्यारी दादीमा

Mar 14, 2010 Author: Babli Source: KAVITAYEN

मेरी प्यारी दादीमा



अखबार और ब्लॉग एक दूसरे के अनुपूरक है:चित्रांजलि

Mar 14, 2010 Author: गिरीश बिल्लोरे ''पॉडकास्टर'' Source: मिसफिट:सीधीबात



काव्यशास्त्र - ६

Mar 14, 2010 Author: मनोज कुमार Source: मनोज

भारतीय काव्यशास्त्र पर चर्चा – 2




हमारा गांव ........

Mar 14, 2010 Author: देवेश प्रताप Source: विचारों का दर्पण

देवेश प्रताप





आज के लिए बस इतना ही-…!

मंगलवार, मार्च 09, 2010

“परम्पराओं का निर्वहण कोई मूर्खता नहीं अपितु…” (चर्चा मंच)

"चर्चा मंच" अंक-83


चर्चाकारः डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"


आइए आज का चौथे पहर का "चर्चा मंच" सजाते हैं-

निवेदन यह है कि यदि आप पल-पल! हर पल!!

http://palpalhalchal.feedcluster.com

में अपना ब्लॉग शामिल कर लेंगे तो

मुझे चर्चा मंच में आपका लिंक उठाने में सरलता होगी।

ज्योतिष की सार्थकता

अपनी परम्पराओं का निर्वहण कोई मूर्खता नहीं

अपितु बुद्धिमता का सूचक है.................. -

यहाँ उतरी भारत के सनातन हिन्दू परिवारों में* नव संवंत *

के प्रथम दिन तिलों के तेल द्वारा मालिश करने और मिश्री,


काली मिर्च और नीम के ताजे पत्तों के सेवन की ए...

ताऊजी डॉट कॉम

खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी (198) : आयोजक उडनतश्तरी - बहनों और भाईयों, मैं उडनतश्तरी इस फ़र्रुखाबादी खेल में आप सबका आयोजक के बतौर हार्दिक स्वागत करता हूं. नीचे का चित्र देखिये और बताईये कि यह पेड किस चीज का ...

सरस पायस

क्या मुझसे डर जाती हो : चंदन कुमार झा का पहला शिशुगीत - क्या मुझसे डर जाती हो? चिड़िया रानी, चिड़िया रानी, मुझे सुनाओ अपनी बानी! जब मैं तुमको पास बुलाता, दूर चली क्यों जाती हो? मैं तो हूँ छोटा-सा बच्चा, क्य...

भारतीय नागरिक - Indian Citizen

उपदेशक और धर्मप्रचारक कृपया ध्यान दें - नाइजीरिया में भयंकर खूनी संघर्ष हुआ है....... मुस्लिमों और ईसाईयों के बीच..... पूरी खबर यहां देखें... http://www.latimes.com/news/nation-and-world/la-fg-n...

मयंक

“पं. नारायणदत्त तिवारी के साथ एक शाम” - * पिछले सप्ताह अमृतसर पंजाब में 6-7 मार्च को प्रजापति संघ का एक बड़ा कार्यक्रम था। उसमें मुझे भी भाग लेने के लिए जाना था। मेरे साथ स्वतन्त्रता संग्राम सेना..

इयत्ता

विश्व महिला दिवस का अवशेष ! - कल था महिला दिवस पर अखबारों में विशेष, दिवस गया आज फिर महिला रह गयी शेष ! आज से उस कल तक अखबारों में बिखरेगी - महिला, महिला और महिला । महिला का शोषण, मह...

ज़ख्म

कचोट - बरसों साथ रहकर भी तेरा मेरा अनजाना रिश्ता देह की दहलीज पर ही क्यूँ सिमट गया मन के आँगन तक की राह कोई मुश्किल तो ना थी मौन का शून्य ही अस्तित्व को बाँटता रहा ...

नन्हें सुमन

- *विद्यालय अच्छा लगता,* * पर डस्टर कष्ट बहुत देता है।* * पढ़ना तो अच्छा लगता,* * पर लिखना कष्ट बहुत देता है।।* * * *दीदी जी तो अच्छी लगतीं,* * पर वो काम...

बगीची

महिला दिवस कैसे बीत सकता है : लेडी ट्रक टायर मैकेनिक (अविनाश वाचस्‍पति) - सांध्‍य टाइम्‍स के दीप गंभीर लाए हैं यह खबर, जो करती है जन मानस पर असर पर इमेज पर क्लिक अवश्‍य कीजिएगा वरना पढ़ने में सफल नहीं होगें चाहे जितनी कोशिश कीज...

कुमाउँनी चेली

बंद करो घर के अन्दर यह ... - * साथियों, बहुत समय बाद क्षणिका का मौसम आया है .... बंद करो ....... तोड़ फोड़* *मार पीट * *गली - गलौज * *चीख पुकार * *बार बार ,* *पत्नी को * *कहना ही पड़ा ...

घुघूतीबासूती

मीठा मीठा गप्प, कड़वा कड़वा थू।................घुघूती बासूती - वाह, आरक्षण के पक्षधर अचानक उसके विरोधी हो गए! जब आरक्षण खुद को नौकरी में मिलना था तब तक उसके लिए युद्ध में डटे हुए थे। तब उसके विरोधी सामाजिक न्याय के विर...

उच्चारण

“ होली धीरे से बोली:मदन विरक्त” - *होली धीरे से बोली- मुझे जलाकर तुम्हें क्या मिलेगा? मैं तो हर साल आऊँगी चली जाऊँगी …………… यदि जलाना है तो उन्हें जलाओ जिन्हें कोई नही जलाता! -0-0-0...

गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष

मेरे ब्‍लॉग पर पाठकों की संख्‍या 50,000 पहुंची .. मेरे ब्‍लॉगर प्रोफाइल को भी 20,000 लोगों ने विजिट किया !! - अगस्‍त 2007 में मुझे जब हिंदी में ब्‍लागिंग करने के बारे में जानकारी मिली थी , तो मैने इस दिशा में कदम बढा ही दिया था। जीमेल में मेरा अकाउंट नहीं था , इंटरने..

Albelakhatri.com

नारी के साथ इतना उपेक्षापूर्ण व्यवहार क्यों ? - हे भगवान् ! आप ने ऐसा क्यों किया ? नारी के साथ इतना उपेक्षापूर्ण व्यवहार क्यों किया ? पुरूष के लिए तो तुमने स्वर्ग में सोमरस और नर्तकियों की टनाटन व्यवस...

तेताला

अभिषेक कश्‍यप को पहला युवा कथा सम्‍मान : विख्‍यात कवि-कथाकार उदय प्रकाश ने प्रदान किया (अविनाश वाचस्‍पति) - चित्र में दिखलाई दे रहे हैं जो उनके नाम भी बतलाइये तो क्लिक इमेज पर करिएगा, तभी देख पाइएगा और पढ़ सकिएगा सोपानस्‍टेप मासिक मार्च 2010 के अंक से साभार

नया ठौर

...मुसीबतों के सात दिन - *मुआफ करें। पिछले दिनों मैं एक संस्मरणनुमा –मौत- के नाम से लिखना शुरू किया था। तीन किस्तें लिखने के बाद कुछ ख़ास वजह से उसे जारी नहीं रख पाया। आपने पुराना ...

समाचार:- एक पहलु यह भी

मेरा ब्लॉग एक वर्ष का - मेरे ब्लॉग का जन्मदिन आया और चला भी गया. पता ही नहीं चला की कैसे यह एक वर्ष बीत गया. उससे ज्यादा दुःख मुझे इस बात का है की मैं अपने प्यारे से ब्लॉग का जन्म...

Alag sa

सिगरेट, पियो तो मुश्किल ना पियो तो मुश्किल :-) - * सिगरेट तुम्हारी बिमारी का कारण है, तुम दिन भर में कितनी सिगरेट पीते हो? डाक्टर ने मरीज से पूछा। यही कोई दस-बारह। मरीज ने जवाब दिया। यह तो बहुत ज्यादा है...

2 घंटे पहले

हिंदी ब्लॉगरों के जनमदिन

आज वाणी गीत की वैवाहिक वर्षगांठ है - आज, 9 मार्च को ज्ञानवाणी वालीं वाणी गीत की वैवाहिक वर्षगांठ है। इनका ईमेल पता Vanisharma65@gmail.com है। बधाई व शुभकामनाएँ *आने वाले **जनमदिन आदि की जान...

अविनाश वाचस्पति

शब्‍दों की गर्मी (अविनाश वाचस्‍पति) - शब्‍दों में छाई गर्मी इतनी कि पसीना पसीना हो गए शब्‍द लिखने वाले नहीं शब्‍द ही पसीना हुए हैं लिखने वाले तो जमे हैं ए.सी. की ठंडक में पर शब्‍द बेअसर हैं उस ठं...

समाजवादी जनपरिषद

साध्य नहीं साधन है महिला आरक्षण भी - इस चिट्ठे पर मेरी पिछली पोस्ट पर जो टिप्पणियां आई हैं उनके अलावा फ़ेसबुक के जरिए भी कुछ मित्रों ने उस पर चर्चा की है । इस बहस में मेरे लेख की आलोचना में जो...

उन्मुक्त

आप, क्यों नहीं, इसके बाल खींच कर देखते - इस चिट्ठी में महिला सश्क्तिकरण और परी से बातें। यह चिट्ठी ई-पाती श्रंखला की कड़ी है। यह श्रंखला, नयी पीढ़ी की जीवन शैली समझने, उनके साथ दूरी कम करने, और उ..

अनलाइन खसखस

एउटा निस्सार प्रश्न - म बग्दैछु नदी सरी निस्सार छन् गन्तव्यहरु कहाँ पुगेर मेरो अन्त्य हुन्छ केवल सफलता पाउने आशमा निस्सार मेरा पदचापहरु एकाएक दौडिरहेका छन् समयसँगको द्वन्द्व अनि स...

मोहल्ला

हमारी क़िताबों में हमारी औरतें - *"अगर कलको कोई महिला मेरी छाती पर चाकू रखकर खड़ी हो जाती है तो मेरी प्राथमिकता अपनी जान बचाने की ही होगी चाहे मुझे उसका हाथ मरोड़ना पड़े या धक्का देना पड़े। उस...

शिव ज्ञान मंडल

और रत्नाकर का ह्रदय परिवर्तन हो गया. - रत्नाकर बहुत परेशान थे. साथ ही टेंशन में भी थे. एक साल से ज्यादा बीत गए थे लेकिन सारी कोशिशों के बावजूद अभी तक उनका ह्रदय परिवर्तन नहीं हुआ था. ह्रदय परिवर..

अज़दक

बच्‍चा और बेहयायी.. - *‘भाग जाऊंगा हाथे नहीं आऊंगा, फिर?’* बच्‍चा मुंह बनाये पूछेगा, मैं मुंह बनाये सोचूंगा, ‘भाग जाओगे तुम्‍हीं पछताओगे, सुबही उठोगे, मुट्ठी में चवन्‍नी नहीं...

एक हिंदुस्तानी की डायरी

समाज को प्रभुतासंपन्न बनाने की कोशिश है अर्थकाम - अर्थकाम हिंदी समाज का प्रतिनिधित्व करता है। यह 42 करोड़ से ज्यादा की आबादी वाले उस समाज को असहाय स्थिति से निकालकर प्रभुतासंपन्न बनाने का प्रयास है जो घोड़...

बना रहे बनारस

महिला दिवस !!! अच्छा मजाक है - 9 साल की बच्ची का निर्वस्त्र शव एक पुलिस कालोनी की छत पर मिला...महिला दिवस पर ये भेंट है समाज और कानून की तरफ से महिलाओ को. 9 साल की बेबस बच्ची का बलात्का...

कस्‍बा qasba

जबसे हमारे बीच बिजली आई है...पढ़िये..बिजली की यात्रा की कहानी - "दरबारी समाज के लोग ख़ुद को बुर्ज़ुआ वर्ग से अलग करने वाले फ़ासले को उजागर करने के लिए रात और दिन, कभी भी देर तक काम करते दिखायी देते थे। अब बुर्ज़ुआ वर्ग...

क्वचिदन्यतोअपि!

फागुन के दिन चार बीत गए रे भैया -

फागुन बीत गया -

मनुष्य की चिरन्तन

श्रृंगारिकता को

उत्प्रेरित और आलोडित

करके चला गया .

अब अगले वर्ष फिर

लौटेगा! कितना उत्सव

प्रिय है मनुष्य आज भी ,

मगर यह बात ...

तीसरा खंबा

दांडिक न्याय प्रणाली में लॉर्ड हेस्टिंग्स के

सुधार :

भारत में विधि का इतिहास-58 - लॉर्ड हेस्टिंग्स ने प्रारंभ में दांडिक न्याय प्रणाली को छेड़ने के स्थान पर उस का ध्यानपूर्वक अध्ययन किया। सब से पहले उस का ध्यान इस बात पर गया कि सर्किट न्...

ताना-बाना

// काशी बाई का सूरज....

मुश्किलें चाहे जीतना आदमी को मजबूत

बना कर जीना आसान बना दे लेकिन

मुश्किल हालात में जीना

आसान काम नहीं है ...

// - काशी बाई का नाम सूरज बाई होना था दिनभर तपने के बाद दूसरों को गर्माहट और रौशनी की खुशी दे कर डूब जाने वाला ...मुश्किलें चाहे जितना आदमी को मजबूत बना कर जीना...

देशनामा

सृजन का संतुलन...खुशदीप - ऊपर वाला ब्रह्मांड को बनाने की प्रक्रिया में था...साथ ही अपने मातहतों को सृष्टि का सार बताता भी जा रहा था...*देखो, सृजन के लिए सबसे ज़रूरी है, संतुलन...* ...

किस से कहें ?

जन्मदिन अक्कू का : बेटियाँ कितनी जल्दी बड़ी हो जाती हैं ! - बेटियाँ कितनी जल्दी बड़ी (और समझदार भी) हो जाती हैं. जैसे अभी कल ही की बात हो, जब मैं ने अक्कू के लिए ये पोस्ट किया था ..........

Hindi Science Fiction

मौत की तरंगें : एपिसोड - 3 - राहुल उसे देखकर कुर्सी से उठ गया। दोनों एक दूसरे को कुछ देर इस प्रकार देखते रहे मानो पहचानने का प्रयत्न कर रहे हों। फिर आने वाले व्यक्ति जो वास्तव में राम...

कविता :प्रथ्वी

प्रथ्वीपानी की बढ़ती मात्रा ।ले डूबेगी प्रथ्वी को ॥पिघल रही बर्फ पर्वतों से ।और बढ रहा है पानी ॥कट रहें पेड़ कम बचे हैं जंगल ।बढ रहे मकान बढ रहीं हैं फैक्ट्रियां ॥काम करो ये फैक्ट्री ।कम होगा ये धुंआ ॥बंद करो ये पेड़ काटना ।बर्फ पिघलना होगी कम ॥बचेगी

BAL SAJAG

BAL SAJAG

कार्टूनिस्ट इरफान

IRFAN

कौन नहीं रोएगा इनकी हालत को देखकर?

नारी ब्लॉग के
फोल्लोवेर २०० दिख रहे हैं ।


नारी ब्लॉग के


फोल्लोवेर २०० दिख रहे हैं ।

नारी रचना





अब देते हैं

चर्चा को विराम!!