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Tuesday, March 09, 2010

“परम्पराओं का निर्वहण कोई मूर्खता नहीं अपितु…” (चर्चा मंच)

"चर्चा मंच" अंक-83


चर्चाकारः डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री "मयंक"


आइए आज का चौथे पहर का "चर्चा मंच" सजाते हैं-

निवेदन यह है कि यदि आप पल-पल! हर पल!!

http://palpalhalchal.feedcluster.com

में अपना ब्लॉग शामिल कर लेंगे तो

मुझे चर्चा मंच में आपका लिंक उठाने में सरलता होगी।

ज्योतिष की सार्थकता

अपनी परम्पराओं का निर्वहण कोई मूर्खता नहीं

अपितु बुद्धिमता का सूचक है.................. -

यहाँ उतरी भारत के सनातन हिन्दू परिवारों में* नव संवंत *

के प्रथम दिन तिलों के तेल द्वारा मालिश करने और मिश्री,


काली मिर्च और नीम के ताजे पत्तों के सेवन की ए...

ताऊजी डॉट कॉम

खुल्ला खेल फ़र्रुखाबादी (198) : आयोजक उडनतश्तरी - बहनों और भाईयों, मैं उडनतश्तरी इस फ़र्रुखाबादी खेल में आप सबका आयोजक के बतौर हार्दिक स्वागत करता हूं. नीचे का चित्र देखिये और बताईये कि यह पेड किस चीज का ...

सरस पायस

क्या मुझसे डर जाती हो : चंदन कुमार झा का पहला शिशुगीत - क्या मुझसे डर जाती हो? चिड़िया रानी, चिड़िया रानी, मुझे सुनाओ अपनी बानी! जब मैं तुमको पास बुलाता, दूर चली क्यों जाती हो? मैं तो हूँ छोटा-सा बच्चा, क्य...

भारतीय नागरिक - Indian Citizen

उपदेशक और धर्मप्रचारक कृपया ध्यान दें - नाइजीरिया में भयंकर खूनी संघर्ष हुआ है....... मुस्लिमों और ईसाईयों के बीच..... पूरी खबर यहां देखें... http://www.latimes.com/news/nation-and-world/la-fg-n...

मयंक

“पं. नारायणदत्त तिवारी के साथ एक शाम” - * पिछले सप्ताह अमृतसर पंजाब में 6-7 मार्च को प्रजापति संघ का एक बड़ा कार्यक्रम था। उसमें मुझे भी भाग लेने के लिए जाना था। मेरे साथ स्वतन्त्रता संग्राम सेना..

इयत्ता

विश्व महिला दिवस का अवशेष ! - कल था महिला दिवस पर अखबारों में विशेष, दिवस गया आज फिर महिला रह गयी शेष ! आज से उस कल तक अखबारों में बिखरेगी - महिला, महिला और महिला । महिला का शोषण, मह...

ज़ख्म

कचोट - बरसों साथ रहकर भी तेरा मेरा अनजाना रिश्ता देह की दहलीज पर ही क्यूँ सिमट गया मन के आँगन तक की राह कोई मुश्किल तो ना थी मौन का शून्य ही अस्तित्व को बाँटता रहा ...

नन्हें सुमन

- *विद्यालय अच्छा लगता,* * पर डस्टर कष्ट बहुत देता है।* * पढ़ना तो अच्छा लगता,* * पर लिखना कष्ट बहुत देता है।।* * * *दीदी जी तो अच्छी लगतीं,* * पर वो काम...

बगीची

महिला दिवस कैसे बीत सकता है : लेडी ट्रक टायर मैकेनिक (अविनाश वाचस्‍पति) - सांध्‍य टाइम्‍स के दीप गंभीर लाए हैं यह खबर, जो करती है जन मानस पर असर पर इमेज पर क्लिक अवश्‍य कीजिएगा वरना पढ़ने में सफल नहीं होगें चाहे जितनी कोशिश कीज...

कुमाउँनी चेली

बंद करो घर के अन्दर यह ... - * साथियों, बहुत समय बाद क्षणिका का मौसम आया है .... बंद करो ....... तोड़ फोड़* *मार पीट * *गली - गलौज * *चीख पुकार * *बार बार ,* *पत्नी को * *कहना ही पड़ा ...

घुघूतीबासूती

मीठा मीठा गप्प, कड़वा कड़वा थू।................घुघूती बासूती - वाह, आरक्षण के पक्षधर अचानक उसके विरोधी हो गए! जब आरक्षण खुद को नौकरी में मिलना था तब तक उसके लिए युद्ध में डटे हुए थे। तब उसके विरोधी सामाजिक न्याय के विर...

उच्चारण

“ होली धीरे से बोली:मदन विरक्त” - *होली धीरे से बोली- मुझे जलाकर तुम्हें क्या मिलेगा? मैं तो हर साल आऊँगी चली जाऊँगी …………… यदि जलाना है तो उन्हें जलाओ जिन्हें कोई नही जलाता! -0-0-0...

गत्‍यात्‍मक ज्‍योतिष

मेरे ब्‍लॉग पर पाठकों की संख्‍या 50,000 पहुंची .. मेरे ब्‍लॉगर प्रोफाइल को भी 20,000 लोगों ने विजिट किया !! - अगस्‍त 2007 में मुझे जब हिंदी में ब्‍लागिंग करने के बारे में जानकारी मिली थी , तो मैने इस दिशा में कदम बढा ही दिया था। जीमेल में मेरा अकाउंट नहीं था , इंटरने..

Albelakhatri.com

नारी के साथ इतना उपेक्षापूर्ण व्यवहार क्यों ? - हे भगवान् ! आप ने ऐसा क्यों किया ? नारी के साथ इतना उपेक्षापूर्ण व्यवहार क्यों किया ? पुरूष के लिए तो तुमने स्वर्ग में सोमरस और नर्तकियों की टनाटन व्यवस...

तेताला

अभिषेक कश्‍यप को पहला युवा कथा सम्‍मान : विख्‍यात कवि-कथाकार उदय प्रकाश ने प्रदान किया (अविनाश वाचस्‍पति) - चित्र में दिखलाई दे रहे हैं जो उनके नाम भी बतलाइये तो क्लिक इमेज पर करिएगा, तभी देख पाइएगा और पढ़ सकिएगा सोपानस्‍टेप मासिक मार्च 2010 के अंक से साभार

नया ठौर

...मुसीबतों के सात दिन - *मुआफ करें। पिछले दिनों मैं एक संस्मरणनुमा –मौत- के नाम से लिखना शुरू किया था। तीन किस्तें लिखने के बाद कुछ ख़ास वजह से उसे जारी नहीं रख पाया। आपने पुराना ...

समाचार:- एक पहलु यह भी

मेरा ब्लॉग एक वर्ष का - मेरे ब्लॉग का जन्मदिन आया और चला भी गया. पता ही नहीं चला की कैसे यह एक वर्ष बीत गया. उससे ज्यादा दुःख मुझे इस बात का है की मैं अपने प्यारे से ब्लॉग का जन्म...

Alag sa

सिगरेट, पियो तो मुश्किल ना पियो तो मुश्किल :-) - * सिगरेट तुम्हारी बिमारी का कारण है, तुम दिन भर में कितनी सिगरेट पीते हो? डाक्टर ने मरीज से पूछा। यही कोई दस-बारह। मरीज ने जवाब दिया। यह तो बहुत ज्यादा है...

2 घंटे पहले

हिंदी ब्लॉगरों के जनमदिन

आज वाणी गीत की वैवाहिक वर्षगांठ है - आज, 9 मार्च को ज्ञानवाणी वालीं वाणी गीत की वैवाहिक वर्षगांठ है। इनका ईमेल पता Vanisharma65@gmail.com है। बधाई व शुभकामनाएँ *आने वाले **जनमदिन आदि की जान...

अविनाश वाचस्पति

शब्‍दों की गर्मी (अविनाश वाचस्‍पति) - शब्‍दों में छाई गर्मी इतनी कि पसीना पसीना हो गए शब्‍द लिखने वाले नहीं शब्‍द ही पसीना हुए हैं लिखने वाले तो जमे हैं ए.सी. की ठंडक में पर शब्‍द बेअसर हैं उस ठं...

समाजवादी जनपरिषद

साध्य नहीं साधन है महिला आरक्षण भी - इस चिट्ठे पर मेरी पिछली पोस्ट पर जो टिप्पणियां आई हैं उनके अलावा फ़ेसबुक के जरिए भी कुछ मित्रों ने उस पर चर्चा की है । इस बहस में मेरे लेख की आलोचना में जो...

उन्मुक्त

आप, क्यों नहीं, इसके बाल खींच कर देखते - इस चिट्ठी में महिला सश्क्तिकरण और परी से बातें। यह चिट्ठी ई-पाती श्रंखला की कड़ी है। यह श्रंखला, नयी पीढ़ी की जीवन शैली समझने, उनके साथ दूरी कम करने, और उ..

अनलाइन खसखस

एउटा निस्सार प्रश्न - म बग्दैछु नदी सरी निस्सार छन् गन्तव्यहरु कहाँ पुगेर मेरो अन्त्य हुन्छ केवल सफलता पाउने आशमा निस्सार मेरा पदचापहरु एकाएक दौडिरहेका छन् समयसँगको द्वन्द्व अनि स...

मोहल्ला

हमारी क़िताबों में हमारी औरतें - *"अगर कलको कोई महिला मेरी छाती पर चाकू रखकर खड़ी हो जाती है तो मेरी प्राथमिकता अपनी जान बचाने की ही होगी चाहे मुझे उसका हाथ मरोड़ना पड़े या धक्का देना पड़े। उस...

शिव ज्ञान मंडल

और रत्नाकर का ह्रदय परिवर्तन हो गया. - रत्नाकर बहुत परेशान थे. साथ ही टेंशन में भी थे. एक साल से ज्यादा बीत गए थे लेकिन सारी कोशिशों के बावजूद अभी तक उनका ह्रदय परिवर्तन नहीं हुआ था. ह्रदय परिवर..

अज़दक

बच्‍चा और बेहयायी.. - *‘भाग जाऊंगा हाथे नहीं आऊंगा, फिर?’* बच्‍चा मुंह बनाये पूछेगा, मैं मुंह बनाये सोचूंगा, ‘भाग जाओगे तुम्‍हीं पछताओगे, सुबही उठोगे, मुट्ठी में चवन्‍नी नहीं...

एक हिंदुस्तानी की डायरी

समाज को प्रभुतासंपन्न बनाने की कोशिश है अर्थकाम - अर्थकाम हिंदी समाज का प्रतिनिधित्व करता है। यह 42 करोड़ से ज्यादा की आबादी वाले उस समाज को असहाय स्थिति से निकालकर प्रभुतासंपन्न बनाने का प्रयास है जो घोड़...

बना रहे बनारस

महिला दिवस !!! अच्छा मजाक है - 9 साल की बच्ची का निर्वस्त्र शव एक पुलिस कालोनी की छत पर मिला...महिला दिवस पर ये भेंट है समाज और कानून की तरफ से महिलाओ को. 9 साल की बेबस बच्ची का बलात्का...

कस्‍बा qasba

जबसे हमारे बीच बिजली आई है...पढ़िये..बिजली की यात्रा की कहानी - "दरबारी समाज के लोग ख़ुद को बुर्ज़ुआ वर्ग से अलग करने वाले फ़ासले को उजागर करने के लिए रात और दिन, कभी भी देर तक काम करते दिखायी देते थे। अब बुर्ज़ुआ वर्ग...

क्वचिदन्यतोअपि!

फागुन के दिन चार बीत गए रे भैया -

फागुन बीत गया -

मनुष्य की चिरन्तन

श्रृंगारिकता को

उत्प्रेरित और आलोडित

करके चला गया .

अब अगले वर्ष फिर

लौटेगा! कितना उत्सव

प्रिय है मनुष्य आज भी ,

मगर यह बात ...

तीसरा खंबा

दांडिक न्याय प्रणाली में लॉर्ड हेस्टिंग्स के

सुधार :

भारत में विधि का इतिहास-58 - लॉर्ड हेस्टिंग्स ने प्रारंभ में दांडिक न्याय प्रणाली को छेड़ने के स्थान पर उस का ध्यानपूर्वक अध्ययन किया। सब से पहले उस का ध्यान इस बात पर गया कि सर्किट न्...

ताना-बाना

// काशी बाई का सूरज....

मुश्किलें चाहे जीतना आदमी को मजबूत

बना कर जीना आसान बना दे लेकिन

मुश्किल हालात में जीना

आसान काम नहीं है ...

// - काशी बाई का नाम सूरज बाई होना था दिनभर तपने के बाद दूसरों को गर्माहट और रौशनी की खुशी दे कर डूब जाने वाला ...मुश्किलें चाहे जितना आदमी को मजबूत बना कर जीना...

देशनामा

सृजन का संतुलन...खुशदीप - ऊपर वाला ब्रह्मांड को बनाने की प्रक्रिया में था...साथ ही अपने मातहतों को सृष्टि का सार बताता भी जा रहा था...*देखो, सृजन के लिए सबसे ज़रूरी है, संतुलन...* ...

किस से कहें ?

जन्मदिन अक्कू का : बेटियाँ कितनी जल्दी बड़ी हो जाती हैं ! - बेटियाँ कितनी जल्दी बड़ी (और समझदार भी) हो जाती हैं. जैसे अभी कल ही की बात हो, जब मैं ने अक्कू के लिए ये पोस्ट किया था ..........

Hindi Science Fiction

मौत की तरंगें : एपिसोड - 3 - राहुल उसे देखकर कुर्सी से उठ गया। दोनों एक दूसरे को कुछ देर इस प्रकार देखते रहे मानो पहचानने का प्रयत्न कर रहे हों। फिर आने वाले व्यक्ति जो वास्तव में राम...

कविता :प्रथ्वी

प्रथ्वीपानी की बढ़ती मात्रा ।ले डूबेगी प्रथ्वी को ॥पिघल रही बर्फ पर्वतों से ।और बढ रहा है पानी ॥कट रहें पेड़ कम बचे हैं जंगल ।बढ रहे मकान बढ रहीं हैं फैक्ट्रियां ॥काम करो ये फैक्ट्री ।कम होगा ये धुंआ ॥बंद करो ये पेड़ काटना ।बर्फ पिघलना होगी कम ॥बचेगी

BAL SAJAG

BAL SAJAG

कार्टूनिस्ट इरफान

IRFAN

कौन नहीं रोएगा इनकी हालत को देखकर?

नारी ब्लॉग के
फोल्लोवेर २०० दिख रहे हैं ।


नारी ब्लॉग के


फोल्लोवेर २०० दिख रहे हैं ।

नारी रचना





अब देते हैं

चर्चा को विराम!!

9 comments:

  1. सुन्दर चर्चा लगी ।

    ReplyDelete
  2. bahut acchi charcha Shastri ji..
    aapka aabhaar..!!

    ReplyDelete
  3. आज की चर्चा बहुत सुंदर ढंग से की गई है!

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  4. सादर अभिवादन! सदा की तरह आज का भी अंक बहुत अच्छा लगा।

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  5. सुन्दर....अति सुन्दर चर्चा!!!
    बहुत ही बढिया लगी शास्त्री जी!...
    आभार!!

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  6. बेहतरीन चर्चा.

    रामराम.

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  7. bahut badhiya chittha charcha........aabhar.

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"रंग जिंदगी के" (चर्चा अंक-2818)

मित्रों! शुक्रवार की चर्चा में आपका स्वागत है।  देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक। (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')   -- ...