मित्रों!
रविवार के लिए क्रमवार चर्चा में अपनी पसंद के कुछ लिंक आपके अवलोकनार्थ दे रहा हूँ। आशा है आपको पसंद आयेंगे!
- बहुत मुश्किल जुटाना है, "दो जून की रोटी"
- सुबह से चल निकले हैं, शाम तक पहुँच ही जायेंगे ये चाँद सितारे अपने मक़ाम तक पहुँच ही जायेंगे ...मेरे ज़ज़्बात!
- *मनोज कुमार* पुस्तक परिचय-31 : सुहाग के नूपुर!
- कमल कुमार सिंह (नारद ) द्वारा ब्रहमेश्वर सिंह मुखिया : आधुनिक परशुराम!
- कितना है नादान मनुज,यह चक्र समझ नही पाया। "पुरानी डायरी से"
- कम ही जानें कम पहचानें बस्ती के इंसानों को, वक़्त मिले तो आओ जानें जंगल के हैवानों को!
- समझदार की भीड़ सामने एक सुमन नादान है क्या, मन्दिर मस्जिद गिरिजाघर में, पूछो तो भगवान है क्या?
- डॉ टी एस दराल द्वारा- वो खिड़की जो कभी बंद , कभी खुली रहती थी...!
- आशार... कागज मेरा मीत है, कलम मेरी सहेली.!
- फ़ुरसत से मीठी यादें बांटते हुए...मनोज कुमार!
- स्मार्ट इंडियन द्वारा... शिव तांडव स्तोत्र...!
- रविकर फैजाबादी द्वारा... यह मोहन कौन, नचाये जिसको सुतली...!
- यशवन्त माथुर द्वारा... आपका साथ और ये 2 वर्ष ...!
- अपर्णा खरे द्वारा.... अब करोगे गुस्सा क्या?
- दोहों के आगे दोहा... मानवीय सरोकार !
- शाम को अकेले बैठे हुए लिख गया यह... है बात ये ज़रा सी!
- 1988 की कवितायें - नींद न आने की स्थिति में लिखी कविता...!
- "बाबा ! वो क्या है... वो शायर नहीं रहा...!
- वो खुद मिल गया है मुझे...मंजिल बन कर...!
- आईने का भरोसा क्यों....लम्हों का सफ़र !
- यही दो दिन तो होते हैं, कि मैं नौकर नहीं होता....!
- रोटियों को बीनने को, आ गये फकीर हैं... दिल तो है लँगूर का!
- राम-रामं भाई... साधन भी प्रस्तुत कर रहा है बाज़ार जीरो साइज़... !
- लीवर डेमेज की वजह बन रही है पैरासीटामोल !
- गीत....तेरी मन-मोहन अखियों में अपने सपने देखा करता हूँ...!
- चैतन्य तुम्हारा आना जीवन में नई चेतना ले आया है...!
- आँख खुली हो, फिर भी पथ पर, समुचित चलना न आया... क्यों दूँ दोष विधाता को?
- प्रतियोगिता... अगर आपके पास फेसबुक खाता है तो कृपया नीचे दिए लिंक पर लाइक करें!
- किसी का देवता किसी के लिये दानव...!
- लोग अपनी ही सुनाने में...लगे हैं एक हम हैं ग़म भुलाने में लगे हैं...!
महानगरो में बढ़ते तलाक
- संतुष्टि और सम्पूर्णता पाने की व्याकुलता...!
- चलते -चलते.... दुआ का एक लफ्ज , और वर्षों की इबादत!
कार्टून:- खिलौनों का सच
आज के लिए केवल इतना ही!






















