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रविवार, फ़रवरी 02, 2014

अब छोड़ो भी.....रविवारीय चर्चा मंच....चर्चा अंक:1511

नमस्कार....
आज चर्चामंच की रविवारीय मंच पर मेरा
ई॰ राहुल मिश्रा का प्यार भरा नमस्कार.....!!!

गुलज़ार के एक विडियो से शुरुआत करते हैं चर्चा का

.....
अपने पसंदीदा लिंक प्रस्तुत कर रहा हूँ.....

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मिर्जा़ गा़लिब ने यह कहते हुये ना जाने कितने जन्‍मों का सफर तय किया होगा,
ना जाने कितनी बदहालियों को अपनी इन लाइनों में समेटा होगा कि..
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श्यामपट्ट....(डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
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विभा की कहानी ..... (विभा रानी श्रीवास्तव)
इस बार मुजफ्फरपुर गई तो मेरी देवरानी बोली :- 
दीदी ,विभा लौट आई हैं और अपने घर में ही रह रही हैं .....

मुजफ्फरपुर के आम गोला में पड़ाव पोखर के पास 
श्री रामचंद्र सिंह के मकान में हमारा परिवार 
1982 से 1995 तक किरायेदार के रूप में रहा 
1982 से 1988 तक मैं अपने ससुर जी के साथ रक्सौल रही 
लेकिन मेरे पति , मेरे दोनों देवर ,ननद और एक देवरानी वहाँ रहते थे
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अपने माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस 2013....रविशंकर श्रीवास्तव
अब आप अपने माइक्रोसॉफ़्ट ऑफ़िस 2013 (एमएस वर्ड 2013) में माइक्रोसॉफ़्ट द्वारा जारी अधिकारिक हिंदी वर्तनी जांच की सुविधा निःशुल्क जोड़ सकते हैं.
इससे पहले आपको इसका हिंदी पैक कोई डेढ़ हजार रुपए में खरीदना होता था. हिंदी पैक तो पहले की तरह ही विक्रय हेतु उपलब्ध है, परंतु अब हिंदी वर्तनी जांच की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध करवा दी गई है.
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फ़र्ज़ का अधिकार....अलोकिता(Alokita)
इस पुरुष प्रधान समाज में
सदा सर्वोपरि रही
बेटों की चाह
उपेक्षा, ज़िल्लत, अपमान से
भरी रही
बेटियों की राह
सदियों से संघर्षरत रहीं
हम बेटियाँ
कई अधिकार सहर्ष तुम दे गए
कई कानून ने दिलवाए
कल इसी देश के एक बच्चे को पीट पीट कर राजधानी में मार दिया गया जबकि वह अपना प्रान्त और भाषा छोड़ कर सबसे विकसित शहर दिल्ली में शिक्षा लेने आया था ! सुदूर उत्तर पूर्व क्षेत्र के, हमारे यह सीधे साधे देशवासी, भारत वासी होने का क्या अभिमान करें ?
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चल यार मनाएंगे.....इमरान अंसारी
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जुस्तजू.....रंजना भाटिया
क्या फिर से मौसम बहारों का आयेगा,
जिसकी जुस्तजू है वो फिर कभी ना आयेगा।

तन्हा तन्हा सी है क्यों ये जिंदगी की शाम
क्या कोई फिर से जीवन में बसंत लायेगा।
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दरवाजे रोज खोलती हूँ
फिर भी जंग लगे हैं
शायद - इसलिए कि -
मन के दरवाजे नहीं खुलते !!!
तभी, अक्सर
ताज़ी हवाओं का कृत्रिम एहसास होता है
दम घुटता है
कुछ खोने की प्रक्रिया में !
कुछ खोना नहीं चाहता मन
पर इकतरफा पकड़ भी तो नहीं सकता
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विरेचन....अपर्णा भागवत
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धड़कने हो गयी है तेज, 
दिन प्यार के चलने लगे है... 
फिर से बरसो पुराने ख़त, 
सूखे गुलाब....
डायरी में कही मिलने लगे है...!

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इंसान होना पड़ता है....मंजु मिश्रा
प्रेम को
महसूस करने के लिए
आँखों को पढ़ना पड़ता है
रूह को समझना पड़ता है
ये वो नहीं जानते
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शादी रंगा–रंग.... शशि पाधा
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increase-your-internet-speed-internet....भारत योगी 
दोस्तों आज में आपको कुछ ऐसा जुगाड़ बताऊंगा जिससे आप अपने इन्टरनेट की स्पीड बढ़ा सकते हें में किसी बात को ज्यादा लम्बा नही खींचता इसलिए अब मुद्दे पर आजाते हें
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किसी मुझ जैसे की डायरी का एक पन्ना ..............

"नाम उसका मुहब्बत था शायद ,जिंदगी के हर मोड पे मुझसे टकराई थी वो ,
मैं चलता रहा और इश्क भी ,जाने खुद को और मुझको कहां ले आई थी वो "
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....धन्यवाद.....
"अद्यतन लिंक"
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कालीपद प्रसाद

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मनोज पर मनोज कुमार 

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आया बसंत लाया समस्त

उर में अनंत सपने जीवंत

है दिग- दिगंत पुष्पित सुगंध

स्पर्श वंत  मद मस्त  गंध...

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Virendra Kumar Sharma

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! कौशल ! पर Shalini Kaushik 

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My Photo

Wings of Fancy पर Vandana Tiwari 

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अब नही मैं दासता का भार ढोना चाहता हूँ। 
मैं जगत के बन्धनों से, मुक्त होना चाहता हूँ.... 


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शनिवार, फ़रवरी 01, 2014

"मधुमास" : चर्चा मंच : चर्चा अंक : 1510

 आजकल
सुबह की चाय की तरह
दिन की शुरुआत से ही
होने लगती है तुम्हारी तलब
स्वर का आरोह
सात फेरों के मंत्र-सा
उचरने लगता है तुम्हारा नाम
ज़रूरी-ग़ैरज़रूरी बातों में
शिक़वे-शिक़ायतों में
ज़िन्दगी की छोटी-बड़ी कठिनाइयों में
उसी शिद्दत से तलाशती हूँ तुम्हें
तेज़ सिरदर्द में जिस तरह
यक-ब-यक खोलने लगती हैं उंगलियाँ
पर्स की पिछली जेब
और टटोलने लगती हैं
डिस्प्रिन की गोली
ठीक उसी वक़्त
बनफूल की हिदायती गंध के साथ
जब थपकने लगती हैं तुम्हारी उंगलियाँ
टनकते सिर पर
तब अनहद नाद की तरह
गूंजने लगती है ज़िन्दगी
और उम्र के इस दौर में पहुँचकर
समझने लगती हूँ मैं
मधुमास का असली अर्थ
(साभार : अलका सिन्हा)    
 नमस्कार  !
मैंराजीव कुमार झा
चर्चामंच चर्चा अंक : 1510 में
कुछ चुनिंदा लिंक्स के साथ, 
आप सबों  का स्वागत करता हूँ.  
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एक नजर डालें इन चुनिंदा लिंकों पर...
अक्सर जब किसी की मृत्यु हो जाती है तो उसे हम कहते हैं कि उसने देह त्याग दी. लेकिन यह सच नहीं हैदेह का साथ आत्मा छोड़ देती है और शरीर निर्जीव हो जाता है, उसकी सारी इन्द्रियाँ काम करना बंद कर देती हैं और ऐसी स्थिति में हम उस शरीर को निर्जीव कह देते हैंजो कि स्वाभाविक भी है. लेकिन किसी भी स्थिति में उसे देह त्याग नहीं कह सकते. गतांक से आगे .....!!! 

चमचमाती फ़्लैशलाईटें
बना देती हैं चमकदार  
प्रभात रंजन  

डीपीएस पुणे में कक्षा छह में पढ़ने वाले अमृत रंजन ने हमें अपनी कवितायें भेजी तो मैं थोड़ा विस्मित हुआ। 11 साल का लड़का सुंदर भाषा में ऐसी कवितायें लिखता है जिसमें सुंदर की संभावना दिखाई देती है। 

                                                              सरिता भाटिया   
पूस की वो रात 
ठिठुरते हुए तारे 
 शांत माहौल 
आँख मिचौली खेलता  
 चलते चलते बातें सेहत की
वीरेन्द्र कुमार शर्मा  
Red Raspberry Fruit Stock Photo

Eating high levels of flavonoids including anthocyanins and other compounds (found in berries ,tea ,and chocolate )could offer protection from type 2 diabetes .
प्रीति टेलर      
 मेरा फोटो
कुछ कहने की कोशिश का कोहरा ,
शब्द निशब्द ,ख़ामोशी का मोहरा ,
 
उन्नीस सौ उन्नीस में अमेरिका के मेनहट्टन प्रान्त में मई दिवस के दो दिन बाद के दिन पेट सीगर का जन्म हुआ था और वे इस जनवरी महीने के आखिरी दिनों में इस दुनिया के विरोध प्रदर्शनों में गाये जाने के लिए एक बेहद खूबसूरत गीत छोड़ गए हैं. हम होंगे कामयाब एक दिन.
शब्दहीन संवाद -आंसू और मुस्कान  
मदन मोहन बाहेती 'घोटू'        
काव्य संसार

मन की पीड़ा ,दिल का दर्द उमड़ आता है ,
बिना कहे  ही ,कितना कुछ कह देते आंसू 
ये पानी की बूँद छलकती जब   आँखों में ,
पलक द्वार को तोड़ ,यूं ही बह लेते  आंसू 
सुमन          
मेरा फोटो
I can't sleep mom  I can't "  एक सैड स्माईली के साथ अभी कुछ दिन पहले वॉट्सअप पर मेरे बेटे का यह मेसैज था मेरे लिए ! जिस बच्चे की नींद खो गयी हो उसकी माँ चैन से कैसे सो सकती है भला ?? 

Rajeev Kumar Jha    

He walked down from
The mountain heights
And saw dark strife
Grappling with the world
THE PEN ON PAPER..........
Aparna Bose     


The pen on paper
echoing the unconscious
or the subconscious
etches all


  अजय कुमार झा   
 
किसी के रूठने ,मनाने किसी के उतरने चढने का ये मौसम है ,
हमसे खुशबू आने लगी है कागज़ों की , पढने का ये मौसम है ....

भारतीय सिनेमा के दामन में चाँद-सितारों के साथ कुछ दाग़ भी सामानांतर रूप से सदा रहे हैं.

 Hitesh Rathi
     

डॉ. जेन्नी शबनम     
My Photo

'मैं तेज़ाब की 
एक नदी हूँ 
पल-पल में 
सौ-सौ बार 
खुद ही जली हूँ

My Photo
सुबह सुबह आज भी
सुनाई दिया जो
रोज सुनाई देता था
आप सोच रहे होंगे 
           तुषार राज रस्तोगी          
रात के आगोश में 
छा रही मदहोशियाँ 
धीमी सरसराहटें 
      राकेश श्रीवास्तव          
गुजरे हुए वक्त के साये से, डर लगता है,
तेरे बदले हुए तेवर से, डर लगता है,
तुम किसी और के हो जाओगे , ये मालुम नहीं!
मुझको अपने तकदीर से, डर लगता है। 

तुम नहीं होते तो ग़म भड़ जाता है,
ये मर्ज़ ऐसा है जो न नज़र आता है। 
Tum nahin hote to gham bhad jata hai,
Yeh marz aisa hai jo na nazar aata hai.

"आसमान में बादल छाया" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
उच्चारण
मौसम ने है बहुत रुलाया।
आसमान में बादल छाया।।

सूरज ने अवकाश लिया है,
सर्दी फिर से वापिस आयी।
पीछा नहीं छोड़ती अब भी,
कम्बल-लोई और रजायी।
ऊनी कपड़ें में भी अब तो,  
काँप रही ठिठुरन से काया।
धन्यवाद !
आगे देखिए
"अद्यतन लिंक"
(डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')
--
आया वसंत 

पीले लाल रंगबिरंगे पुष्प 
सजे वृक्षों पर रंग वासंती 
छाया धरती की चूनर पर ...
Akanksha पर Asha Saxena 
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कहीं नहीं है आईना 

एक कविता भी है और  इसे  पढ़ने की  सुविधा के लिहाज से 
अलग- अलग पाँच कवितायें भी कह सकते हैं।...
अकथ कथ : कुछ छवियाँ
०१-
बोलते हैं बतियाते हैं
अव्यक्त को
व्यक्त में छापते
छिपाते।
साथ - साथ चलते हैं
राह
नहीं  किन्तु पाते।...
कर्मनाशा पर siddheshwar singh 
--
मंदमति मैमना और मेधावती बकरी 
आज मैमना फिर गलती करके लौटा था। पहले तो इसने एक गढ़ा हुआ मुर्दा खोदा और फिर मुर्दे के हत्यारों के बारे में कहा -हो सकता है इस हत्याकांड में कुछ लम्बे "हाथ "वाले भी शामिल रहे हों। लेकिन बाकी तमाम हाथ दंगा रोकने में मशगूल थे। इसलिए मुर्दे के रिश्ते नातों से मेरे मुआफी मांगने का सवाल ही कहाँ पैदा होता है...
आपका ब्लॉग पर 

Virendra Kumar Sharma -
--
मौन का दर्पण 

निस्पंद जलनिधि , मौन पर्वत , नीरव पवन , विवर्ण गगन , क्लांत, शिथिल निस्तेज अस्ताचलगामी भुवन भास्कर सभी जैसे साँस रोके जोहते हैं राह उस एक पल की जिस पल में जड़ हो चुकी सृष्टि किसी जादू से सहसा ही प्राणवान हो जाये और अन्यमनस्क रत्नाकर के उमंगहीन ह्रदय में आल्हाद की उत्ताल तरंगें उठने लगें ...
Sudhinama पर sadhana vaid
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क्षणिकाएँ ---  
उगते सूरज की किरणे 

क्षणिकाएँ 
१ 
प्रतिभा --

नहीं रोक सके,
काले बादल
उगते सूरज की किरणें।


सपने --

तपते हुए रेगिस्तान
की बालू में चमकता हुआ
पानी का स्त्रोत, औ
जीने की प्यास. ...

सपन पर shashi purwar 
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कार्टून :- 'आप' को तो OLX पे बेच के मानूंगा ... 

काजल कुमार के कार्टून