सुधि पाठकों!
सोमवार की चर्चा में
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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शमा रातभर जलती रही
शमा रातभर जलती रही,
पिघलती रही।
खोती रही अपना अस्तित्व,
मिटाने को तमस।
उसकी सदेच्छा,
न भटके कोई अँधेरे में।
न होये अधीर,
घबड़ा कर निबिड़ अन्धकार से...
मन के वातायन पर
Jayanti Prasad Sharma
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बेबस दिखते राम अभी
राजनीति के रखवालों ने किया है ऐसा काम अभी।
निर्बल के बल राम सुना पर बेबस दिखते राम अभी...
मनोरमा पर
श्यामल सुमन
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