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चर्चाकारः राधा तिवारी (राधे गोपाल) लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
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बुधवार, दिसंबर 05, 2018

"बीता कौन, वर्ष या तुम" (चर्चा अंक-3176)

सुधि पाठकों!
बुधवार की चर्चा में 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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यात्रा (JOURNEY) 2018 

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा 
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साहिल 

Akanksha पर 
Asha Saxena 
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बीता कौन, वर्ष या तुम 

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा  
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सोमवार, दिसंबर 03, 2018

"द्वार पर किसानों की गुहार" (चर्चा अंक-3174)

सुधि पाठकों!
सोमवार की चर्चा में 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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पुर्नस्थापितं भव 

सुशील कुमार जोशी  
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पिता 

deepti sharma 
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क्षणिकाएं 

Kailash Sharma  
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हाईकू 

स्वर बेसुर  
कानों में खटके करें  
बेचैन व्यर्थ... 
Akanksha पर 
Asha Saxena  
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बडा आदमी 

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डॉ. अपर्णा त्रिपाठी  
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सूखती नदी 

पुरुषोत्तम कुमार सिन्हा  
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शमा रातभर जलती रही 

शमा रातभर जलती रही,  
पिघलती रही।  
खोती रही अपना अस्तित्व,  
मिटाने को तमस।  
उसकी सदेच्छा,  
न भटके कोई अँधेरे में।  
न होये अधीर,  
घबड़ा कर निबिड़ अन्धकार से... 
Jayanti Prasad Sharma 
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बेबस दिखते राम अभी 

राजनीति के रखवालों ने किया है ऐसा काम अभी।  
निर्बल के बल राम सुना पर बेबस दिखते राम अभी... 
श्यामल सुमन  
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बुधवार, नवंबर 07, 2018

"दीप खुशियों के जलाओ" (चर्चा अंक-3148)

सुधि पाठकों!
बुधवार की चर्चा में 
देखिए मेरी पसन्द के कुछ लिंक।
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दोहे  

"नरकासुर का नाश"  

( राधा तिवारी "राधेगोपाल " )  

राधे का संसार 

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गांधीगीरी 

अपनी नेतागीरी चमकाने को,  
दबंग को गांधीगीरी दिखाने को।  
वे पहुँच गये लेकर गुलाब के फूल,  
पर वह नहीं हुआ अनुकूल... 
Jayanti Prasad Sharma 
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कछुआ 

प्यार पर 
Rewa tibrewal  
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उजाला 

Akanksha पर 
Asha Saxena