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सोमवार, जुलाई 28, 2014

"फ़ास्ट फॉरवर्ड पीढ़ी और चर्चाएं" { चर्चामंच - 1688 }

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प्रिय ब्लॉगर मित्रों , चर्चामंच के इस अंक में मैं आपका हार्दिक स्वागत करता हूँ व आदरणीय श्री शास्त्री जी को उनकी मेहनत के लिए नमन करता हूँ , क्योंकि उनके सिर्फ होने से ही मंच में जान आ जाती है.... ,
 जैसे की सचिन के होने से हमारी 'इंडियन क्रिकेट टीम' में ! , तो चलिए अब चलते हैं चर्चा की ओर और देखतें हैं कि हमारे प्रिय ब्लॉगर मित्रों ने आज क्या क्या नया किया है अपनी हिंदी ब्लोगिंग टीम व पाठकों के लिए -
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फ़ास्ट फॉरवर्ड पीढ़ी - श्री शिखा जी की प्रस्तुति


व्हाट द फ … ये इंटरनेट है या ब्लडी बैलगाड़ी। 5 मिनट में एक पेज अपलोड होता है. मॉम मैंने आपको कल नया हेयर कलर मगाने को बोला था अभी तक नहीं आया. ओह शिट। इस डॉक्टर के यहाँ इतनी वेटिंग में कौन बैठेगा। यह बहुत बड़ा है

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राजनीति विज्ञान क्विज़ - श्री मोती जी की प्रस्तुति

hindi gk

नियमों का पालन कराना किसका कार्य है? >कार्यपालिका का * राज्य की लोक सेवाओं में कार्यपालिका से न्यायपालिका का प्रथक्कन किसके द्वारा निर्देशित किया गया है? >राज्य की नीति निर्देशक तन्त्र द्वारा 

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ऋग्वेद के पथ - 1 - श्री गिरिजेश राव जी की प्रस्तुति

ashvini rohini krittika

[ आज से लगभग ८५०० वर्ष पहले जब सूर्य अश्विनी नक्षत्र में उत्तरायण होते थे, तब का बहुत ही अलंकारिक वर्णन ऋग्वेद में मिलता है। अश्विनी नक्षत्र को अथर्ववेद अश्वयुज अर्थात अश्वों की जोड़ी कहता है। इसका कारण नक्षत्र के दो तारे हैं। अश्विनकुमार यही दो तारे हैं।

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एक कुमारी कन्या जैसे - श्री अनीता जी की प्रस्तुति


एक कुमारी कन्या जैसे कौन कहे जाता है भीतर चुकती नहीं ऊर्जा जिसकी, कौन गढ़े जाता है नूतन प्यास नहीं बुझती उसकी ! एक कुमारी कन्या जैसे है अभीप्सा शिव वरने की, तृप्त नहीं होता है

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My Photo

कैसे बचाये पानी से भींगने पर मोबाइल को /आज का यह पोस्ट आपको पानी से भींगे हुए मोबाइल के िलए है अक्सर हमलोग का मोबाइल पानी मे भींग जाता है या मोबाइल मे पानी चला जाता है तब मोबाइल खराब होने की संभावना होती है तो आप कुछ असान सा उपाय कर सकते है सबसे पहले मोबाइल को switch off कर ले

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बात है - आ. श्री विभा रानी श्रीवास्तव जी की प्रस्तुति


मिट्टी की काया
ढूँढें संघर्ष-वर्षा 
ओक में ओज।

मिट्टी का दीया
जग को ओज दिया
ओक  आग से।

सोच का सृजन
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फिल्म एक नजर में : किक ( फिल्म समीक्षा ) - देवेन पाण्डेय जी की प्रस्तुति
मेरा फोटो
निर्माता: साजिद नाडियाडवाला निर्देशक: साजिद नाडियाडवाला कलाकार: सलमान, जैकलीन, मिथुन, रणदीप हुड्डा, नवाजुद्दीन, आखिरकार बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘किक ‘ प्रदर्षित हो ही गई ! और प्रदर्शन के साथ ही इसने कमाई के रिकोर्ड्स भी बना लिये !

छद्मलेखक !
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एहसास - श्री अभिषेक कुमार अभी जी की प्रस्तुति


तुम्हारे होने के एहसास ने
वर्षों ज़िंदा मुझे रख्खा है 
तुम्हारे खोने के एहसास ने
जिस्म से जाँ जुदा रख्खा है

दूर जो एक पल को भी
तुम कभी न रह पाते थे
बिन हमारे साथ कहीं 
तुम कभी न जा पाते थे

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My Photo

हर   मज़हब   के  फूल   खिलेंगें   संसद  की    दीवारों में 
नहीं   चलेगी    कानाफूंसी    सत्ता   के    गलियारों  में 

नहीं   मचेंगें   वाद   झगड़े  नहीं  रहेंगी  झंझट  भाषा की
मानवता   की  भाषा    गढ़   हम   लिख देंगें  अख़बारों में

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ऑडियो टूल

नमस्कार दोस्तो! आज मैँ आपके लिए एक छोटा लेकिन बेहतरीन टूल लेकर आया हु जो कम्प्युटर मे चलने वाला टूल है। यह टूल मात्र 288 KB का है। जिसको डाउनलोड करने के लिए

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ख़राबात है, मियां...! - श्री सुरेश स्वप्निल जी की प्रस्तुति

मेरा फोटो

तोड़  कर  दिल  मियां  चले  आए
छोड़  कर       दास्तां   चले   आए

क़ीमतें    यूं    बढ़ीं    ज़मीनों   की
हम      दरे-आसमां      चले  आए

था   कहीं    एक  घर    हमारा  भी
क्या   बताएं,     कहां    चले  आए

साझा आसमान
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किसके हस्ताक्षर हैं ये - श्री अलकनंदा जी की प्रस्तुति



वो आवाजें जो गूंजती हैं रातों को बिछा देती हैं कुछ करवटें अपने अहं की वो आंखें जो देती हैं सूरतों पर निशान वो प्रेम के ही अस्‍तित्‍व की चिता बुनती हैं हिम्‍मतें भी जोर से उछलती हैं अंतर्मन में ढूढ़ती अपने ही अस्‍तित्‍व को देखती रहती हैं राह बुढ़ापे की कि शायद तब तक तो ठंडा हो जायेगा

ख़ुदा के वास्ते !
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सावन में उमंग्यों मेरो मनवा...... - श्री नवीन मणि त्रिपाठी जी की प्रस्तुति

मेरा फोटो

मेरा यह लेख हिंदुस्तान समाचार पत्र में 21.7.14 को प्रकाशित हुआ । - नवीन मणि त्रिपाठी सावन की हरियाली , मद मस्त हवाएँ ,रिमझिम फुहार , काले काले बादल , दादुर के मीठे गीत, नाचते हुए मोर ,फलों से लदे पेड़ ,झूलों से कजरी और सावन के गीतों की मिठास , भला कौन होगा जो भाव विभोर होने से अपने आप को रोक सके ?

तीखी कलम से
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दोहे - आ. श्री आशा सक्सेना जी की प्रस्तुति



माँ की ममता पुत्र पर ,बेटी देख रिसाय |
तेरा कैसा न्याय प्रभू,कुछ भी समझ न आय ||

यहाँ वहाँ क्या देखते ,जीवन छूटा जाय |
प्रभु सुमिरन करते रहो ,अंत भला हो जाय ||

Akanksha
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बरसो ना मेघा.... - श्री प्रवीन मलिक जी की प्रस्तुति



तन खड़े हैं
गुमसुम बादल
क्यूँ न बरसें

गर्मी से तप्त
भू पर जीव-जंतु
आस लगाये

दिल की आवाज़
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तेरी रज़ा - श्री सुमन कपूर जी की प्रस्तुति



ये जिंदगी मैंने लिख दी नाम तेरे
तू रहबर बने या रकीब ये तेरी रज़ा !!

अर्पित 'सुमन'
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उम्र से ज्यादा जोड़ा है ... - श्री दिगंबर नसवा जी की प्रस्तुति

मेरा फोटो

उम्र से ज़्यादा जोड़ा है
फिर भी कितना थोड़ा है

बाबस्ता यादें उस से
घर जो हमने छोड़ा है

परदेसी हो कर जाना
कौन सा नाता तोड़ा है

स्वप्न मेरे........
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"गीत-आज और कल का भेद" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


आज बहुत है नया-नवेला,
कल को होगा यही पुराना।
जीवन के इस कालचक्र में,
लगा रहेगा आना-जाना।।

गोल-गोल है दुनिया सारी,
चन्दा-सूरज गोल-गोल है।
गोल-गोल में घूम रहे सब,
गोल-गोल की यही पोल है।
घूम-घूमकर, सारे जग को,
बना रहा है काल निशाना।
जीवन के इस कालचक्र में,
लगा रहेगा आना-जाना।।


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- अन्य सूचित लिंक्स -
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हमारे प्रिय प्रधानमंत्री जी! 

हम १० साला परम्परा के 

वारिस बनने से इंकार करते हैं।


 मेरा फोटो


हे भारत की जनता के नए सेवक भाई नरेंद्र मोदी ! लोगों में शिकायत है कि दिल्ली की गद्दी पर बैठने वाला कठपुतली मात्र बन कर रह जाता है। हमने इतिहास में तुर्कों मुगलों के बहादुर शाह जफ़र टाइप से लेकर अंग्रेजों के वायसराय होते हुए डॉ मनमोहन तक के शासक देखें जिनके मुंह में जबान नहीं हुआ करती थी। आपको चुना। दिल से चुना। माना कि प्रशासन आप प्रशासन को चुस्त दुरुस्त करने में लगे हुए हैं और सोशल साइट्स के माध्यम से अपनी बात रख रहें हैं। नगरों की ३० प्रतिशत जनता उसे देख रही है किन्तु ७० प्रतिशत जनता गांवों में है जो आपके ट्विटर और फेसबुक को नहीं पढ़ सकती।...

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तलाश एक घर की 

Bhavana Lalwani
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सानिया विरोध :भाजपा की अंदरुनी शक्ल

Sania Mirza Condemns BJP Leader's Comments: 'I Am Indian, Will Always Remain One'

! कौशल !परShalini Kaushik
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अब आप सबसे आज्ञा _/\_ चाहता हूँ , ईश्वर की कृपा से अगर सही सलामत रहा तो अगले सोमवार , एक बार फिर से --- समझ गए ना ! धन्यवाद !
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रविवार, जुलाई 27, 2014

"संघर्ष का कथानक:जीवन का उद्देश्य" (चर्चा मंच-1687)

मित्रों।
आदरणीय राजीव कुमार झा जी के आदेश पर
आज का चर्चा मंच प्रस्तुत कर रहा हूँ।
अगले रविवार से वो स्वयं 
आपकी सेवा में उपस्थित हो जायेंगे।
देखिए मेरी पसंद के कुछ लिंक।
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यादें 

हैं अभी तक शेष यादें । 
सोचता सब कुछ भुला दूँ, 
अग्नि यह भीषण मिटा दूँ । 
किन्तु ये जीवित तृषायें, 
शान्त जब सारी दिशायें, 
रूप दानव सा ग्रहण कर, 
चीखतीं अनगिनत यादें...
न दैन्यं न पलायनम् पर प्रवीण पाण्डेय
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चिंता 

आँगन में जल भरा
चिड़िया आती
दाना खाती पानी पीती
पंख डुबोती नहाती
जल्दी से उन्हें सुखाती
भूख उसे नहीं है
फिर भी मन चंचल
स्थिर नहीं है
कोई जान नहीं पाता
उसकी चिंता वही जानती...
Akanksha पर Asha Saxena
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नज़्रे-आतिश 

चन्द्र भूषण मिश्र ‘ग़ाफ़िल
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दूधो नहाओ और पूतो फलो  

जब भी मेरी माँ उनसे मिलती ,वो उनके पाँव छुआ करती थी और नानी उन्हें बड़े प्यार से आशीर्वाद देती और सदा यही कहती ,''दूधो नहाओ और पूतो फलो ''|उस समय मेरे बचपन का भोला मन इस का अर्थ नहीं समझ पाया था ,लेकिन धीरे धीरे इस वाक्य से मै परिचित होती चली गई, ''पूतो फलो '' के आशीर्वाद को भली भाँती समझने लगी | क्यों देते है ,पुत्रवती भव का आशीर्वाद...
Ocean of Bliss पर Rekha Joshi
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सोच की रोटी पर फ़फ़ूँद लगने से पहले 

हाथ में कलम हो और 
सोच के ताबूत में सिर्फ़ कीलें ही कीलें गडी हों 
तो कैसे खोली जा सकती है 
ज़िन्दा लाश की आँख पर पडी पट्टी की गिरहें 
चाहे कंगन कितने ही क्यों ना खनकते हों 
सोच के गलियारों में पहनने वाले 
हाथ ही आज नहीं मिला करते और  
“ जंगल में मोर नाचा किसने देखा “ ...
vandana gupta 
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कारण कार्य व प्रभाव गीत .... 

कितने भाव मुखर हो उठते .. 

मेरे द्वारा नव-सृजित .....इस छः पंक्तियों के प्रत्येक पद या बंद के गीत में प्रथम दो पंक्तियों में मूल विषय-भाव के कार्य या कारण को दिया जाता है तत्पश्चात अन्य चार पंक्तियों में उसके प्रभाव का वर्णन किया जाता है | अंतिम पंक्ति प्रत्येक बंद में वही रहती है गीत की टेक की भांति | गीत के पदों या बन्दों की संख्या का कोई बंधन नहीं होता | प्रायः गीत के उसी मूल-भाव-कथ्य को विभिन्न बन्दों में पृथक-पृथक रस-निष्पत्ति द्वारा वर्णित किया जा सकता है | एक उदाहरण प्रस्तुत है ...

डा श्याम गुप्त...

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विहान के जन्मदिन पर 

विहान के जन्मदिन पर नाना और नानी का 
ढेरों प्यार और आशीर्वाद 
तुम करो सार्थक नाम है अपना,
नव-विहान खुशियों का लाओ।
अभ्युदय हो जीवन में खुशियाँ,
आशीष, प्यार सभी का पाओ।
Kailash Sharma -
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सावन जगाये अगन ! 

रिमझिम बरसकर सावन  
मन में जगाती अगन ,  
बैठी है मिलने की आस लिए  
पर नहीं आये बेदर्दी साजन...
कालीपद प्रसाद 
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जीवन का पर उद्देश्य होना चाहिये ऐसा मैं महसूस करता हूं.. आप भी यही सोचते होगे न.. सोचिये अगर न सोचा हो तो . इन दिनों मन अपने इर्द-गिर्द एवं समाज़ में घट रही घटनाओं से सीखने की चेष्टा में हूं.. अपने इर्द गिर्द देखता हूं लोग सारे जतन करते दिखाई देते हैं स्वयं को सही साबित करने के. घटनाएं कुछ भी हों कहानियां  कुछ भी हों पर एक एक बात तय है कि अब लोग आत्मकेंद्रित अधिक हैं. मैं मेरा, मुझे, मेरे लिए, जैसे शब्दों के बीच जीवन का प्रवाह जारी है..  
समाप्त भी  इन्हीं शब्दों के बीच होता है....
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फ़ना हो जाऊँ... 

मन चाहे बस सो जाऊँ  
तेरे सपनों में खो जाऊँ !  

सब तो छोड़ गए हैं तुमको   
पर मैं कैसे बोलो जाऊँ... 
डॉ. जेन्नी शबनम
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मुख्तारम 

उन्नयन पर udaya veer singh 
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...फिर वो सामान उठाकर 

"नंगे पांव" 

घर को चल दिये ! 

......तभी साहब ने एक थैला देते हुए जबाब दिया बाबा इनको सीं देना... बाबा ने थैला लिया और बिना दाम बताये काम करना शुरू कर दिया... सारा काम करने के बाद जब बाबा ने साहब से पैसे मांगे तो साहब ने उसमे भी बाबा पर झिर्राते हुए ४-५ रुपये कम दिए, और गुस्से से सामान लेकर चले गए....
     ये सब देखकर बार बार फिर से वही प्रश्न दिमाग में आ रहा है : वो रोज यहाँ आते क्यों है ? आजकल कौन जूता चप्पल सही कराता है ? किसके पास टाइम है ?.....
      खैर इन सब को कौन ध्यान देता है, तेज गति से सबके पैर चले जा रहे है...
Er. Ankur Mishra'yugal
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“पथ निखर ही जाएगा” 

आज अपना हम सँवारें, कल सँवर ही जायेगा
आप सुधरोगे तो सारा, जग सुधर ही जाएगा..
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“सावन की ग़जल”

गन्दुमी सी पर्त ने ढक ही दिया आकाश नीला 
देखकर घनश्याम को होने लगा आकाश पीला...
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“हिन्दी वर्णमाला-ऊष्म और संयुक्ताक्षर” 

मित्रों!
आज हिन्दी वर्णमाला की 
अन्तिम कड़ी में प्रस्तुत हैं
ऊष्म और संयुक्ताक्षर
दो या दो से अधिक अक्षरों की
सन्धि से मिलकर बने अक्षरों को
संयुक्ताक्षर कहते हैं!
हिन्दी वर्णमाला के साथ
इनको पढ़ाया जाना सर्वथा अनुपयुक्त है!
फिर भी आजकल के शिक्षाविदों ने
ये संयुक्ताक्षर 
वर्णमाला के साथ जोड़ दिये हैं !
कुछ मुक्तक देख लीजिए...

शनिवार, जुलाई 26, 2014

"क़ायम दुआ-सलाम रहे.." (चर्चा मंच-1686)

मित्रों।
शनिवार की चर्चा में आपका स्वागत है।
देखिए मेरी पसंद के कुछ लिंक।
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क़ायम दुआ-सलाम रहे...! 

गुनाहगारे-मुहब्बत  को  क्या  सज़ा  दीजे 
गुनाह  ख़ास  नहीं,   ज़ेह्न   से  मिटा  दीजे
तमाम  लोग  बैठते  हैं  आपके  घर  में
हमीं  क़ुबूल  नहीं,  ठीक  है,  उठा  दीजे....
साझा आसमान पर Suresh Swapnil
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वे तो बस चादर पर पड़ी सलवटें थी 

आँगन में तुलसी मुरझाई हुई थी 
पदचिन्हों के पीछे कही कोई 
आवाज शेष नही थी 
और दहलीज से पार 
कही कोई महफूज शाखें नही बची थी ...
हमसफ़र शब्द पर संध्या आर्य 
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ग़ज़ल - 

उसका जीवन.... 

उसका जीवन सुधर गया होता ॥ 
मरने से कुछ ठहर गया होता... 
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बरसात की रजत बूँदें 

बारिश तो तन भिगो देती है पर जो सूखा रह जाता है एक मन, कुछ एहसास, कुछ आधे अधूरे से अपुष्ट सपनें और गुनगुनी होती इच्छाएं उनका क्या ?...
ज़िन्दगीनामा पर Sandip Naik
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बारिश की बूंदे 

यही बूंदे मेरे मन को 
शीतल करने की बजाय 
अग्न क्यों पैदा कर रही है...
Love पर Rewa tibrewal 
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वो एक कप कॉफ़ी का साथ.....!!! 

वो एक कप कॉफ़ी का साथ...  
बस कुछ लम्हे होते थे हमारे पास....
'आहुति' पर sushma 'आहुति'
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बस एक बार 

निश्छलता, उल्लास, उमंग, 
बेफिक्री, बेपरवाह, हुड़दंग … 
यही तो है 'हम' 
और हमारे अल्हड़ रंग ढंग। 
परिंदे, तितली, हवा, 
बादल, बिजली, घटा … 
यही तो है 'हम' 
और हमारे पलते ख्वाब संग... 
Sunehra Ehsaas पर 
Nivedita Dinkar
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भूगोल से सम्बन्धित कुछ रोचक तथ्य :- 

*. अन्टार्टिका में पानी इतना ठंडा है 
कि उसके अन्दर की कोई भी वस्तु 
कभी भी सड़ती-गलती नहीं है। 
*. यदि अन्टार्टिका में जमी बर्फ 
की सारी पत्तरें गल जाएँ तो संसार के 
सभी सागर 60 से 65 मीटर अर्थात 200 
से 210 फुट तक और भर जाएँगे...
hindi gk पर Moti Suthar
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जब मैं प्रेम लिखूंगी अपने हाथों से, 
सुई में धागा पिरो 
कपड़े का एक एक रेशा सिऊँगी 
तुम्हारे लिये...
स्पर्श पर Deepti Sharma
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हम हक़ीक़त के हाथों यूँ मरते रहे, 

बढ़ के पेड़ों से बेलें हटाते रहे..... 

ज़िन्दगी के लिए कुछ नए रास्ते हम बनाते रहे फिर मिटाते रहे 
थी वहीँ वो खड़ी इक हंसीं ज़िन्दगी हम उससे मगर दूर जाते रहे...
काव्य मंजूषा पर स्वप्न मञ्जूषा
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पिघलती पीर 

टूट के बरसो मेघा  
बहा ले चलो  
मुझे अपने संग  
जहाँ मेरे पिया...
Sudhinama पर sadhana vaid
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लघुकथा 

महाभोज 
तूलिकासदन पर सुधाकल्प
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इश्क है, एक बार होता है, 

दोबारा तो नही,,,, 

इश्क में दूरियाँ एक पल को गवाँरा तो नही
इश्क है, एक बार होता है, दोबारा तो नही...

ehsas पर Amit Chandra

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वर्कशॉप

स्वर्ग का अमरावती, कर्नाटक का हम्प्पी, और और ज्ञान का केंद्र ब एच यू को मिला के जो स्पेसिमेन कोपी बनेगा वो है गंगा के किनारे स्थित स्थित सामने घाट पर “ज्ञान प्रवाह”. 

भारत के इतिहास, कला का का औटोनमस् रिसर्च सेंटर. बेहद खूबसूरत. ओह्ह्ह, इतना खूबसूरत मुझे बी एच यु भी कभी नहीं लगा....

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नौजवानों का चिंतात्मक शौक 

नौजवानों ने अपने दिल को लुभाने के लिए नया नया शौक अपनाया, कभी सर के बाल खड़े कर झाड़ना मानो चिड़िया चुग गयी खेत, कभी सर पर भारत का नक्शा, कभी अपनी नयी मोर्डन लंगोट का ब्रांड स्ट्रिप पेंट से ऊपर दिखाना, कभी कण छिदाना मानो “नारी पुरुष सामान है” के आन्दोलन कारी, कभी कोलेज की लड़की पटाना तो कभी कोलेज की टीचर (विपरीत लिंगी अपने हिसाब से सब कुछ विपरीत कर लें), कभी सर तोडना, और मौका मिल जाय छिनैती करना... 

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...वह    कोई    और नहीं
एक    कार     थी    सजी  
सुन्दर   वर   को   लेकर
मेरी तरफ चली आ रही 
कैसी    सजी     आ     रही 
बालीबुड से चली  आ  रही...
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“हिन्दी व्यञ्जनावली-अन्तस्थ” 

अभी कल ऊष्म पर
मुक्तक और लगाने है!
उसके बाद फिर से
अपने रंग में आ जाऊँगा!
“य” से यति वो ही कहलाते!
जो नित यज्ञ-हवन करवाते!
वातावरण शुद्ध हो जाता,
कष्ट-क्लेश इससे मिट जाते...